PYQ CG TET 2024 PRT PAPER 1 PART-I
Child Development and Pedagogy (बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र)
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Question 1. किसने कहा था?
"किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तनाव, तूफान तथा विरोध की अवस्था है।"
A. क्रो एंड क्रो
B. स्टेनले हॉल
C. हण्ट
D. सिम्पसन
Explanation: "किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तनाव, तूफान तथा विरोध की अवस्था है" यह प्रसिद्ध कथन अमेरिकी मनोवैज्ञानिक जी. स्टेनली हॉल (G. Stanley Hall) का है, जिन्होंने किशोरावस्था को "तूफान और तनाव" (Storm and Stress) की अवस्था बताया था, जो इस अवस्था में होने वाले तीव्र शारीरिक, भावनात्मक और सामाजिक परिवर्तनों को दर्शाता है.
जी. स्टेनली हॉल (G. Stanley Hall): इन्होंने 1904 में किशोरावस्था पर वैज्ञानिक अध्ययन किया और इसे "तनाव, संघर्ष और उथल-पुथल" का दौर कहा.
अर्थ: उनके अनुसार, यह अवस्था माता-पिता से संघर्ष, मूड में बदलाव और जोखिम भरे व्यवहार से चिह्नित होती है, जो किशोरावस्था की जैविक और मनोवैज्ञानिक जटिलताओं के कारण होता है.
जी. स्टेनली हॉल (G. Stanley Hall): इन्होंने 1904 में किशोरावस्था पर वैज्ञानिक अध्ययन किया और इसे "तनाव, संघर्ष और उथल-पुथल" का दौर कहा.
अर्थ: उनके अनुसार, यह अवस्था माता-पिता से संघर्ष, मूड में बदलाव और जोखिम भरे व्यवहार से चिह्नित होती है, जो किशोरावस्था की जैविक और मनोवैज्ञानिक जटिलताओं के कारण होता है.
Question 2: संज्ञानात्मक विकास की पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था की अवधि है-
A. 11 वर्ष से अधिक
B. 7 से 11 वर्ष तक
C. 2 से 7 वर्ष तक
D. जन्म से 2 वर्ष तक
Explanation: पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage) दूसरी अवस्था है, जो लगभग 2 वर्ष की आयु से शुरू होकर 7 वर्ष की आयु तक चलती है। इस अवस्था में बच्चे भाषा का प्रयोग करना सीखते हैं और प्रतीकों के माध्यम से सोचते हैं, हालांकि उनकी सोच अभी भी तार्किक रूप से सीमित होती है।
Why other options are incorrect
A. 11 वर्ष से अधिक: यह अवधि पियाजे की चौथी अवस्था, औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage) से संबंधित है, जिसमें अमूर्त तर्क और परिकल्पनात्मक सोच विकसित होती है।
B. 7 से 11 वर्ष तक: यह अवधि पियाजे की तीसरी अवस्था, मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage) से संबंधित है, जिसमें बच्चे मूर्त (ठोस) वस्तुओं के बारे में तार्किक रूप से सोचना शुरू करते हैं。
D. जन्म से 2 वर्ष तक: यह अवधि पियाजे की पहली अवस्था, संवेदी पेशीय अवस्था (Sensorimotor Stage) से संबंधित है, जिसमें बच्चे अपनी इंद्रियों और शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से दुनिया को समझते हैं।
Why other options are incorrect
A. 11 वर्ष से अधिक: यह अवधि पियाजे की चौथी अवस्था, औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage) से संबंधित है, जिसमें अमूर्त तर्क और परिकल्पनात्मक सोच विकसित होती है।
B. 7 से 11 वर्ष तक: यह अवधि पियाजे की तीसरी अवस्था, मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage) से संबंधित है, जिसमें बच्चे मूर्त (ठोस) वस्तुओं के बारे में तार्किक रूप से सोचना शुरू करते हैं。
D. जन्म से 2 वर्ष तक: यह अवधि पियाजे की पहली अवस्था, संवेदी पेशीय अवस्था (Sensorimotor Stage) से संबंधित है, जिसमें बच्चे अपनी इंद्रियों और शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से दुनिया को समझते हैं।
Question 3: तर्क, जिज्ञासा और निरीक्षण शक्ति का विकास..........की आयु में होता है।
A. 7 वर्ष
B. 6 वर्ष
C. 9 वर्ष
D. 11 वर्ष
तर्क, जिज्ञासा और निरीक्षण शक्ति का विकास आमतौर पर 7 वर्ष की आयु के आसपास शुरू होता है, जो कि जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के ठोस संक्रियात्मक (Concrete Operational) अवस्था (7-11 वर्ष) की शुरुआत का संकेत है। इसलिए, दिए गए विकल्पों में से, सबसे उपयुक्त उत्तर A. 7 वर्ष है।
Explanation: जीन पियाजे के सिद्धांत के अनुसार, ठोस संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational stage) 7 से 11 वर्ष की आयु तक होती है। इस अवस्था के दौरान बच्चे तार्किक और संगठित सोच विकसित करना शुरू करते हैं।
इस स्तर पर बच्चे ठोस घटनाओं के बारे में तार्किक रूप से सोचने लगते हैं। उनमें संरक्षण (conservation), वर्गीकरण (classification) और तार्किक तर्क (logical reasoning) की बेहतर समझ विकसित होती है।
हालांकि जिज्ञासा और अवलोकन की शक्तियां बहुत पहले, शैशवावस्था से ही उभरने लगती हैं, लेकिन तार्किक तर्क (logical reasoning) की क्षमता 7 साल के आसपास अधिक व्यवस्थित हो जाती है।
Why other options are incorrect
B. 6 वर्ष: 6 वर्ष की आयु पूर्व-संक्रियात्मक (Pre-operational) अवस्था के अंतिम चरण में आती है, जहाँ तर्क शक्ति अव्यवस्थित होती है और बच्चे अहम-केंद्रित सोच रखते हैं।
C. 9 वर्ष: 9 वर्ष की आयु ठोस संक्रियात्मक अवस्था के मध्य में आती है, जब तक तर्क, जिज्ञासा और निरीक्षण शक्ति पहले से ही विकसित होना शुरू हो चुकी होती है, इसलिए यह विकास की शुरुआत का बिंदु नहीं है।
D. 11 वर्ष: 11 वर्ष की आयु ठोस संक्रियात्मक अवस्था के अंत और औपचारिक संक्रियात्मक (Formal operational) अवस्था की शुरुआत का प्रतीक है, जहाँ अमूर्त सोच (abstract thinking) विकसित होती है। तर्क शक्ति का विकास 7 वर्ष की उम्र में ही शुरू हो जाता है।
Explanation: जीन पियाजे के सिद्धांत के अनुसार, ठोस संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational stage) 7 से 11 वर्ष की आयु तक होती है। इस अवस्था के दौरान बच्चे तार्किक और संगठित सोच विकसित करना शुरू करते हैं।
इस स्तर पर बच्चे ठोस घटनाओं के बारे में तार्किक रूप से सोचने लगते हैं। उनमें संरक्षण (conservation), वर्गीकरण (classification) और तार्किक तर्क (logical reasoning) की बेहतर समझ विकसित होती है।
हालांकि जिज्ञासा और अवलोकन की शक्तियां बहुत पहले, शैशवावस्था से ही उभरने लगती हैं, लेकिन तार्किक तर्क (logical reasoning) की क्षमता 7 साल के आसपास अधिक व्यवस्थित हो जाती है।
Why other options are incorrect
B. 6 वर्ष: 6 वर्ष की आयु पूर्व-संक्रियात्मक (Pre-operational) अवस्था के अंतिम चरण में आती है, जहाँ तर्क शक्ति अव्यवस्थित होती है और बच्चे अहम-केंद्रित सोच रखते हैं।
C. 9 वर्ष: 9 वर्ष की आयु ठोस संक्रियात्मक अवस्था के मध्य में आती है, जब तक तर्क, जिज्ञासा और निरीक्षण शक्ति पहले से ही विकसित होना शुरू हो चुकी होती है, इसलिए यह विकास की शुरुआत का बिंदु नहीं है।
D. 11 वर्ष: 11 वर्ष की आयु ठोस संक्रियात्मक अवस्था के अंत और औपचारिक संक्रियात्मक (Formal operational) अवस्था की शुरुआत का प्रतीक है, जहाँ अमूर्त सोच (abstract thinking) विकसित होती है। तर्क शक्ति का विकास 7 वर्ष की उम्र में ही शुरू हो जाता है।
Question 4: जे. पियाजे द्वारा प्रतिपादित सिध्दांत है-
A. संज्ञानात्मक विकास
B. गामक विकास
C. सामाजिक विकास
D. शारीरिक विकास
सही विकल्प है A. संज्ञानात्मक विकास।
Explanation: जीन पियाजे (Jean Piaget) को संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत का प्रतिपादन करने के लिए जाना जाता है, जिसमें उन्होंने बताया कि बच्चे दुनिया के बारे में अपनी समझ कैसे बनाते हैं।
उनके सिद्धांत में संज्ञानात्मक विकास के चार अलग-अलग चरण शामिल हैं: संवेदी-गतिक (sensorimotor), पूर्व-संक्रियात्मक (preoperational), मूर्त संक्रियात्मक (concrete operational), और औपचारिक संक्रियात्मक (formal operational)।
Why other options are incorrect
B. गामक विकास (Motor development) मुख्य रूप से शारीरिक गतिविधियों और मोटर कौशल के विकास से संबंधित है, जो पियाजे के संज्ञानात्मक सिद्धांत का केंद्रीय फोकस नहीं था।
C. सामाजिक विकास (Social development) आमतौर पर लेव वायगोत्स्की जैसे अन्य सिद्धांतकारों से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने सामाजिक संपर्क की भूमिका पर जोर दिया, न कि पियाजे से।
D. शारीरिक विकास (Physical development) शरीर में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों को संदर्भित करता है और यह संज्ञानात्मक विकास से एक अलग क्षेत्र है।
Explanation: जीन पियाजे (Jean Piaget) को संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत का प्रतिपादन करने के लिए जाना जाता है, जिसमें उन्होंने बताया कि बच्चे दुनिया के बारे में अपनी समझ कैसे बनाते हैं।
उनके सिद्धांत में संज्ञानात्मक विकास के चार अलग-अलग चरण शामिल हैं: संवेदी-गतिक (sensorimotor), पूर्व-संक्रियात्मक (preoperational), मूर्त संक्रियात्मक (concrete operational), और औपचारिक संक्रियात्मक (formal operational)।
Why other options are incorrect
B. गामक विकास (Motor development) मुख्य रूप से शारीरिक गतिविधियों और मोटर कौशल के विकास से संबंधित है, जो पियाजे के संज्ञानात्मक सिद्धांत का केंद्रीय फोकस नहीं था।
C. सामाजिक विकास (Social development) आमतौर पर लेव वायगोत्स्की जैसे अन्य सिद्धांतकारों से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने सामाजिक संपर्क की भूमिका पर जोर दिया, न कि पियाजे से।
D. शारीरिक विकास (Physical development) शरीर में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों को संदर्भित करता है और यह संज्ञानात्मक विकास से एक अलग क्षेत्र है।
Question 5: यह कथन किसका है?
"शैशवावस्था में सीखने की सीमा और तीव्रता, विकास की और किसी अवस्था की तुलना में बहुत अधिक होती है।"
"शैशवावस्था में सीखने की सीमा और तीव्रता, विकास की और किसी अवस्था की तुलना में बहुत अधिक होती है।"
A. वाटसन
B. स्किनर
C. फ्रॉयड
D. एडलर
यह कथन A. वाटसन का है।
Explanation: वाटसन (Watson) ने कहा था कि शैशवावस्था में सीखने की गति और क्षमता जीवन की अन्य किसी भी अवस्था की तुलना में बहुत तीव्र होती है। यह इस बात पर जोर देता है कि प्रारंभिक वर्ष विकास और सीखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Why other options are incorrect
स्किनर (Skinner) अपने ऑपरेंट कंडीशनिंग (operant conditioning) के सिद्धांतों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन सीखने की अवस्थाओं के संबंध में विशिष्ट कथन के लिए नहीं।
फ्रॉयड (Freud) ने मनो-लैंगिक विकास (psychosexual development) के चरणों पर ध्यान केंद्रित किया, जिसमें मौखिक और गुदा अवस्थाएं (oral and anal stages) शामिल थीं, लेकिन सीधे तौर पर सीखने की तीव्रता के बारे में यह विशेष उद्धरण नहीं दिया।
एडलर (Adler) व्यक्तिगत मनोविज्ञान (individual psychology) के संस्थापक थे, जिन्होंने हीनता की भावना (inferiority complex) और जीवन शैली पर जोर दिया, न कि शैशवावस्था में सीखने की सीमा पर।
Why other options are incorrect
स्किनर (Skinner) अपने ऑपरेंट कंडीशनिंग (operant conditioning) के सिद्धांतों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन सीखने की अवस्थाओं के संबंध में विशिष्ट कथन के लिए नहीं।
फ्रॉयड (Freud) ने मनो-लैंगिक विकास (psychosexual development) के चरणों पर ध्यान केंद्रित किया, जिसमें मौखिक और गुदा अवस्थाएं (oral and anal stages) शामिल थीं, लेकिन सीधे तौर पर सीखने की तीव्रता के बारे में यह विशेष उद्धरण नहीं दिया।
एडलर (Adler) व्यक्तिगत मनोविज्ञान (individual psychology) के संस्थापक थे, जिन्होंने हीनता की भावना (inferiority complex) और जीवन शैली पर जोर दिया, न कि शैशवावस्था में सीखने की सीमा पर।
Question 6: किशोरावस्था में विकास प्रक्रिया में शामिल नहीं है.
A. शारीरिक विकास
B. मानसिक विकास
C. भाषा विकास
D. संवेगात्मक विकास
Explanation: भाषा विकास मुख्य रूप से प्रारंभिक बाल्यावस्था के दौरान होता है, हालांकि किशोरावस्था में इसमें परिपक्वता आती है। किशोरावस्था के दौरान मुख्य परिवर्तन अन्य क्षेत्रों में होते हैं.
Why other options are incorrect
A. शारीरिक विकास: किशोरावस्था में तीव्र शारीरिक वृद्धि, यौन अंगों का विकास और द्वितीयक यौन विशेषताओं का विकास होता है, जिसे "विकास स्पर्ट" (growth spurt) कहा जाता है.
B. मानसिक विकास: किशोरों में संज्ञानात्मक या मानसिक विकास महत्वपूर्ण रूप से होता है, जिसमें अमूर्त और तार्किक रूप से सोचने की क्षमता का विकास शामिल है.
D. संवेगात्मक विकास: यह किशोरावस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि किशोर आत्म-पहचान बनाते हैं और अपनी भावनाओं को प्रबंधित करना सीखते हैं.
Why other options are incorrect
A. शारीरिक विकास: किशोरावस्था में तीव्र शारीरिक वृद्धि, यौन अंगों का विकास और द्वितीयक यौन विशेषताओं का विकास होता है, जिसे "विकास स्पर्ट" (growth spurt) कहा जाता है.
B. मानसिक विकास: किशोरों में संज्ञानात्मक या मानसिक विकास महत्वपूर्ण रूप से होता है, जिसमें अमूर्त और तार्किक रूप से सोचने की क्षमता का विकास शामिल है.
D. संवेगात्मक विकास: यह किशोरावस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि किशोर आत्म-पहचान बनाते हैं और अपनी भावनाओं को प्रबंधित करना सीखते हैं.
Question 7: बालक का विकास प्रारंभ होता है-
A. जन्म से
B. जन्म से पूर्व
C. गर्भावस्था में
D. गर्भावस्था से पूर्व
Explanation: बालक का विकास C. गर्भावस्था में (Prenatal stage) प्रारंभ होता है।
विकास (Development) एक व्यापक और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जो गर्भाधान (conception) से शुरू होती है और जन्म से पहले की अवस्था (prenatal stage) से ही चलती रहती है।
गर्भावस्था के दौरान, भ्रूण (embryo) और फिर fetus का विकास होता है, जिसमें कोशिका विभाजन और विभिन्न अंग प्रणालियों का निर्माण शामिल है।
Why other options are incorrect
A. जन्म से और B. जन्म से पूर्व: ये विकल्प सटीक नहीं हैं क्योंकि विकास जन्म से बहुत पहले, गर्भाधान के क्षण से शुरू हो जाता है। "जन्म से पूर्व" सही अवधि की ओर संकेत करता है, लेकिन "गर्भावस्था में" अधिक सटीक रूप से उस विशिष्ट अवस्था को परिभाषित करता है जब यह प्रक्रिया शुरू होती है और होती है।
D. गर्भावस्था से पूर्व: यह विकल्प गलत है क्योंकि गर्भावस्था से पूर्व कोई शारीरिक विकास नहीं होता है; विकास गर्भाधान (conception) के साथ शुरू होता है, जो गर्भावस्था का प्रारंभिक बिंदु है।
विकास (Development) एक व्यापक और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जो गर्भाधान (conception) से शुरू होती है और जन्म से पहले की अवस्था (prenatal stage) से ही चलती रहती है।
गर्भावस्था के दौरान, भ्रूण (embryo) और फिर fetus का विकास होता है, जिसमें कोशिका विभाजन और विभिन्न अंग प्रणालियों का निर्माण शामिल है।
Why other options are incorrect
A. जन्म से और B. जन्म से पूर्व: ये विकल्प सटीक नहीं हैं क्योंकि विकास जन्म से बहुत पहले, गर्भाधान के क्षण से शुरू हो जाता है। "जन्म से पूर्व" सही अवधि की ओर संकेत करता है, लेकिन "गर्भावस्था में" अधिक सटीक रूप से उस विशिष्ट अवस्था को परिभाषित करता है जब यह प्रक्रिया शुरू होती है और होती है।
D. गर्भावस्था से पूर्व: यह विकल्प गलत है क्योंकि गर्भावस्था से पूर्व कोई शारीरिक विकास नहीं होता है; विकास गर्भाधान (conception) के साथ शुरू होता है, जो गर्भावस्था का प्रारंभिक बिंदु है।
Question 8: व्यक्तिगत मनोविज्ञान का जन्मदाता कौन है?
A. फ्रायड
B. एडलर
C. हरलॉक
D. युग
Explanation: सही विकल्प B. एडलर है।
अल्फ्रेड एडलर (Alfred Adler) को व्यक्तिगत मनोविज्ञान (Individual Psychology) का संस्थापक माना जाता है।
उन्होंने व्यक्तित्व का पहला समग्र सिद्धांत विकसित किया और इस बात पर जोर दिया कि व्यक्तियों को उनके सामाजिक संदर्भ और संपूर्णता में समझा जाना चाहिए। एडलर का सिद्धांत हीनता की भावना (feelings of inferiority), सामाजिक हित (social interest), और जीवन शैली (lifestyle) जैसी अवधारणाओं पर केंद्रित है।
Why other options are incorrect
A. फ्रायड (Freud): सिगमंड फ्रायड को मनोविश्लेषण (Psychoanalysis) का जनक माना जाता है, न कि व्यक्तिगत मनोविज्ञान का।
C. हरलॉक (Harlock): हरलॉक (Elizabeth Hurlock) मुख्य रूप से बाल विकास (Child Development) और विकासात्मक मनोविज्ञान (developmental psychology) के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए जानी जाती हैं।
D. युग (Jung): कार्ल युंग (Jung) विश्लेषणात्मक मनोविज्ञान (Analytical Psychology) के संस्थापक थे और सामूहिक अचेतन (collective unconscious) जैसी अवधारणाओं के लिए जाने जाते हैं। वह भी फ्रायड के साथ काम करते थे, लेकिन बाद में उनके विचार अलग हो गए।
अल्फ्रेड एडलर (Alfred Adler) को व्यक्तिगत मनोविज्ञान (Individual Psychology) का संस्थापक माना जाता है।
उन्होंने व्यक्तित्व का पहला समग्र सिद्धांत विकसित किया और इस बात पर जोर दिया कि व्यक्तियों को उनके सामाजिक संदर्भ और संपूर्णता में समझा जाना चाहिए। एडलर का सिद्धांत हीनता की भावना (feelings of inferiority), सामाजिक हित (social interest), और जीवन शैली (lifestyle) जैसी अवधारणाओं पर केंद्रित है।
Why other options are incorrect
A. फ्रायड (Freud): सिगमंड फ्रायड को मनोविश्लेषण (Psychoanalysis) का जनक माना जाता है, न कि व्यक्तिगत मनोविज्ञान का।
C. हरलॉक (Harlock): हरलॉक (Elizabeth Hurlock) मुख्य रूप से बाल विकास (Child Development) और विकासात्मक मनोविज्ञान (developmental psychology) के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए जानी जाती हैं।
D. युग (Jung): कार्ल युंग (Jung) विश्लेषणात्मक मनोविज्ञान (Analytical Psychology) के संस्थापक थे और सामूहिक अचेतन (collective unconscious) जैसी अवधारणाओं के लिए जाने जाते हैं। वह भी फ्रायड के साथ काम करते थे, लेकिन बाद में उनके विचार अलग हो गए।
Question 9: "विकास के परिणामस्वरूप व्यक्ति में नवीन विशेषताएँ और नवीन योग्यताएं प्रकट होती है।" यह कथन दिया गया है-
A. हरलॉक का
B. फ्रीमेन का
C. केटैल का
D. वुडवर्थ का
Explanation: यह कथन A. हरलॉक (Elizabeth Hurlock) का है।
उनके अनुसार, विकास केवल अभिवृद्धि तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह परिपक्वता के लक्ष्य की ओर परिवर्तनों का एक प्रगतिशील क्रम है जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति में नई विशेषताएँ और क्षमताएँ विकसित होती हैं।
उनके अनुसार, विकास केवल अभिवृद्धि तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह परिपक्वता के लक्ष्य की ओर परिवर्तनों का एक प्रगतिशील क्रम है जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति में नई विशेषताएँ और क्षमताएँ विकसित होती हैं।
Question 10: कौन सी प्रक्षेपित विधि नहीं है?
A. रोर्शा परीक्षण
B. प्रसंगात्मक बोध परीक्षण
C. बालक बोध परीक्षण
D. स्टेनफोर्ड-बिने परीक्षण
Explanation: स्टेनफोर्ड-बिने परीक्षण (Stanford-Binet test) एक बुद्धिमत्ता परीक्षण (intelligence test) है, न कि व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपी विधि। यह मानकीकृत (standardized) और वस्तुनिष्ठ (objective) है।
Why other options are incorrect
अन्य विकल्प (A, B, C) व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपी विधियाँ (projective methods) हैं, जिनमें अस्पष्ट उद्दीपकों (stimuli) के प्रति व्यक्ति की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण करके अचेतन विचारों और भावनाओं को प्रकट करने का प्रयास किया जाता है:
A. रोर्शा परीक्षण (Rorschach test): इसमें व्यक्ति को स्याही के धब्बे (inkblots) दिखाए जाते हैं और उनसे पूछा जाता है कि वे उनमें क्या देखते हैं।
B. प्रसंगात्मक बोध परीक्षण (Thematic Apperception Test - TAT): इसमें व्यक्ति को अस्पष्ट चित्र दिखाए जाते हैं और उनसे चित्रों के आधार पर कहानियाँ बनाने के लिए कहा जाता है।
C. बालक बोध परीक्षण (Children Apperception Test - CAT): यह TAT के समान है, लेकिन इसमें चित्रों में मनुष्यों के बजाय जानवरों का उपयोग किया जाता है और यह बच्चों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
Why other options are incorrect
अन्य विकल्प (A, B, C) व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपी विधियाँ (projective methods) हैं, जिनमें अस्पष्ट उद्दीपकों (stimuli) के प्रति व्यक्ति की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण करके अचेतन विचारों और भावनाओं को प्रकट करने का प्रयास किया जाता है:
A. रोर्शा परीक्षण (Rorschach test): इसमें व्यक्ति को स्याही के धब्बे (inkblots) दिखाए जाते हैं और उनसे पूछा जाता है कि वे उनमें क्या देखते हैं।
B. प्रसंगात्मक बोध परीक्षण (Thematic Apperception Test - TAT): इसमें व्यक्ति को अस्पष्ट चित्र दिखाए जाते हैं और उनसे चित्रों के आधार पर कहानियाँ बनाने के लिए कहा जाता है।
C. बालक बोध परीक्षण (Children Apperception Test - CAT): यह TAT के समान है, लेकिन इसमें चित्रों में मनुष्यों के बजाय जानवरों का उपयोग किया जाता है और यह बच्चों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
Question 11: सामाजिक तत्त्व में सभी शामिल है, केवल एक को छोड़कर-
A. पारिवारिक सम्बंध
B. जन्म क्रम
C. पड़ोस
D. लोगों का व्यवहार
Explanation: जन्म क्रम (Birth order) एक जैविक या जनसांख्यिकीय तथ्य है, न कि पूरी तरह से सामाजिक तत्व। यह एक व्यक्तिपरक विशेषता है जो जन्म के अनुक्रम पर आधारित है।
सामाजिक तत्व उन पहलुओं को संदर्भित करते हैं जो समाज में बातचीत, समाजीकरण, और मानदंडों के माध्यम से बनते हैं या प्रभावित होते हैं।
Why other options are incorrect
A. पारिवारिक सम्बंध (Family relationships) सामाजिक संस्थाएँ हैं जहाँ समाजीकरण होता है, मूल्य सिखाए जाते हैं, और व्यक्तियों के बीच बातचीत होती है। ये स्पष्ट रूप से सामाजिक तत्व हैं।
C. पड़ोस (Neighborhood) एक महत्वपूर्ण सामाजिक परिवेश है जहाँ लोग बातचीत करते हैं और एक-दूसरे के जीवन को प्रभावित करते हैं। यह सामाजिक संपर्क का एक स्थान है।
D. लोगों का व्यवहार (People's behavior) काफी हद तक सामाजिक मानदंडों, मूल्यों और बातचीत से प्रभावित होता है, इसलिए यह एक सामाजिक तत्व है।
सामाजिक तत्व उन पहलुओं को संदर्भित करते हैं जो समाज में बातचीत, समाजीकरण, और मानदंडों के माध्यम से बनते हैं या प्रभावित होते हैं।
Why other options are incorrect
A. पारिवारिक सम्बंध (Family relationships) सामाजिक संस्थाएँ हैं जहाँ समाजीकरण होता है, मूल्य सिखाए जाते हैं, और व्यक्तियों के बीच बातचीत होती है। ये स्पष्ट रूप से सामाजिक तत्व हैं।
C. पड़ोस (Neighborhood) एक महत्वपूर्ण सामाजिक परिवेश है जहाँ लोग बातचीत करते हैं और एक-दूसरे के जीवन को प्रभावित करते हैं। यह सामाजिक संपर्क का एक स्थान है।
D. लोगों का व्यवहार (People's behavior) काफी हद तक सामाजिक मानदंडों, मूल्यों और बातचीत से प्रभावित होता है, इसलिए यह एक सामाजिक तत्व है।
Question 12: संवेदी क्रियात्मक खेल किस अवस्था का है?
A. शैशवकाल का
B. बाल्यावस्था का
C. किशोरावस्था का
D. युवावस्था का
Explanation: संवेदी क्रियात्मक खेल (Sensory motor play) जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत की संवेदी-पेशीय अवस्था (Sensory Motor Stage) से संबंधित है, जो जन्म से लेकर लगभग दो वर्ष की आयु तक चलती है। इस अवस्था में, शिशु दुनिया को अपनी इंद्रियों (senses) और शारीरिक क्रियाओं (motor skills), जैसे चखना, महसूस करना, धक्का देना और हिलना-डुलना, के माध्यम से खोजते हैं और समझते हैं।
Why other options are incorrect
B. बाल्यावस्था का: बाल्यावस्था (Childhood) आमतौर पर 2 वर्ष से शुरू होती है, जहाँ बच्चे अधिक उन्नत संज्ञानात्मक कौशल और कल्पनाशील खेल में संलग्न होते हैं, न कि मुख्य रूप से संवेदी-क्रियात्मक खेल में.
C. किशोरावस्था का: किशोरावस्था (Adolescence) में किशोर अमूर्त सोच और पहचान के विकास जैसी जटिल प्रक्रियाओं से गुजरते हैं, जो संवेदी क्रियात्मक खेल से बहुत आगे है.
D. युवावस्था का: युवावस्था (Youth/Adulthood) एक परिपक्व अवस्था है जिसमें संज्ञानात्मक क्षमताएं पूरी तरह से विकसित होती हैं, और यह संवेदी क्रियात्मक खेल की अवस्था नहीं है.
Why other options are incorrect
B. बाल्यावस्था का: बाल्यावस्था (Childhood) आमतौर पर 2 वर्ष से शुरू होती है, जहाँ बच्चे अधिक उन्नत संज्ञानात्मक कौशल और कल्पनाशील खेल में संलग्न होते हैं, न कि मुख्य रूप से संवेदी-क्रियात्मक खेल में.
C. किशोरावस्था का: किशोरावस्था (Adolescence) में किशोर अमूर्त सोच और पहचान के विकास जैसी जटिल प्रक्रियाओं से गुजरते हैं, जो संवेदी क्रियात्मक खेल से बहुत आगे है.
D. युवावस्था का: युवावस्था (Youth/Adulthood) एक परिपक्व अवस्था है जिसमें संज्ञानात्मक क्षमताएं पूरी तरह से विकसित होती हैं, और यह संवेदी क्रियात्मक खेल की अवस्था नहीं है.
Question 13: परिमाणात्मक तथा गुणात्मक पक्ष सम्मिलित रहते हैं।
A. बुध्दि में
B. विकास में
C. परिवार में
D. समुदाय में
Explanation: सही विकल्प है B. विकास में।
विकास (Development) एक व्यापक प्रक्रिया है जिसमें परिमाणात्मक (मात्रात्मक, जैसे शारीरिक वृद्धि) और गुणात्मक (जैसे कार्यक्षमता, कौशल में सुधार) दोनों पक्ष सम्मिलित होते हैं। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जो जीवन भर चलती रहती है।
वृद्धि (Growth) मुख्य रूप से परिमाणात्मक होती है, जैसे कि आकार या वजन में वृद्धि।
Why other options are incorrect
A. बुध्दि में: बुद्धि एक मानसिक क्षमता है, हालांकि इसका विकास होता है, यह स्वयं में परिमाणात्मक और गुणात्मक पक्षों का समग्र रूप नहीं है जिस तरह से 'विकास' है।
C. परिवार में: परिवार एक सामाजिक इकाई है, न कि कोई प्रक्रिया जिसमें ये दोनों पक्ष सम्मिलित हों।
D. समुदाय में: समुदाय लोगों का एक समूह है, न कि कोई प्रक्रिया जिसमें ये दोनों पक्ष सम्मिलित हों।
विकास (Development) एक व्यापक प्रक्रिया है जिसमें परिमाणात्मक (मात्रात्मक, जैसे शारीरिक वृद्धि) और गुणात्मक (जैसे कार्यक्षमता, कौशल में सुधार) दोनों पक्ष सम्मिलित होते हैं। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जो जीवन भर चलती रहती है।
वृद्धि (Growth) मुख्य रूप से परिमाणात्मक होती है, जैसे कि आकार या वजन में वृद्धि।
Why other options are incorrect
A. बुध्दि में: बुद्धि एक मानसिक क्षमता है, हालांकि इसका विकास होता है, यह स्वयं में परिमाणात्मक और गुणात्मक पक्षों का समग्र रूप नहीं है जिस तरह से 'विकास' है।
C. परिवार में: परिवार एक सामाजिक इकाई है, न कि कोई प्रक्रिया जिसमें ये दोनों पक्ष सम्मिलित हों।
D. समुदाय में: समुदाय लोगों का एक समूह है, न कि कोई प्रक्रिया जिसमें ये दोनों पक्ष सम्मिलित हों।
Question 14: शारीरिक वृध्दि पर प्रभाव डालने वाली ग्रंथि है-
A. एड्रीनल
B. थायमस
C. पीनियल
D. पिट्यूटरी
Explanation: सही विकल्प है D. पिट्यूटरी।
पिट्यूटरी (Pituitary) ग्रंथि को "मास्टर ग्लैंड" (Master Gland) भी कहा जाता है क्योंकि यह कई अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों के कार्यों को नियंत्रित करती है। यह ग्रोथ हार्मोन (Growth Hormone) या सोमेटोट्रोपिक हार्मोन (Somatotropic Hormone) बनाती और स्रावित करती है, जो हड्डियों, मांसपेशियों और शरीर के अन्य ऊतकों की वृद्धि को सीधे उत्तेजित करता है, इस प्रकार शारीरिक विकास पर मुख्य प्रभाव डालता है।
Why other options are incorrect
A. एड्रीनल (Adrenal) ग्रंथियां मुख्य रूप से एड्रेनालाईन (Adrenaline) और कोर्टिसोल (Cortisol) जैसे हार्मोन बनाती हैं, जो तनाव प्रतिक्रिया, चयापचय और रक्तचाप को विनियमित करने में मदद करते हैं, लेकिन सीधे तौर पर शारीरिक वृद्धि को नियंत्रित नहीं करते हैं。
B. थायमस (Thymus) ग्रंथि प्रतिरक्षा प्रणाली के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, खासकर बचपन में, टी-लिम्फोसाइट्स (T-lymphocytes) नामक सफेद रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करती है। यह यौवनारंभ के बाद सिकुड़ जाती है और वृद्धि हार्मोन से संबंधित नहीं है।
C. पीनियल (Pineal) ग्रंथि मेलाटोनिन (Melatonin) बनाती है, जो शरीर की दैनिक नींद-जागने की लय (circadian rhythm) को नियंत्रित करने में मदद करती है। इसका शारीरिक वृद्धि पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ता है।
पिट्यूटरी (Pituitary) ग्रंथि को "मास्टर ग्लैंड" (Master Gland) भी कहा जाता है क्योंकि यह कई अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों के कार्यों को नियंत्रित करती है। यह ग्रोथ हार्मोन (Growth Hormone) या सोमेटोट्रोपिक हार्मोन (Somatotropic Hormone) बनाती और स्रावित करती है, जो हड्डियों, मांसपेशियों और शरीर के अन्य ऊतकों की वृद्धि को सीधे उत्तेजित करता है, इस प्रकार शारीरिक विकास पर मुख्य प्रभाव डालता है।
Why other options are incorrect
A. एड्रीनल (Adrenal) ग्रंथियां मुख्य रूप से एड्रेनालाईन (Adrenaline) और कोर्टिसोल (Cortisol) जैसे हार्मोन बनाती हैं, जो तनाव प्रतिक्रिया, चयापचय और रक्तचाप को विनियमित करने में मदद करते हैं, लेकिन सीधे तौर पर शारीरिक वृद्धि को नियंत्रित नहीं करते हैं。
B. थायमस (Thymus) ग्रंथि प्रतिरक्षा प्रणाली के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, खासकर बचपन में, टी-लिम्फोसाइट्स (T-lymphocytes) नामक सफेद रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करती है। यह यौवनारंभ के बाद सिकुड़ जाती है और वृद्धि हार्मोन से संबंधित नहीं है।
C. पीनियल (Pineal) ग्रंथि मेलाटोनिन (Melatonin) बनाती है, जो शरीर की दैनिक नींद-जागने की लय (circadian rhythm) को नियंत्रित करने में मदद करती है। इसका शारीरिक वृद्धि पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ता है।
Question 15: जीन पियाजे के अनुसार, सीखने के लिये निम्नलिखित में से क्या आवश्यक है?
A) शिक्षार्थी द्वारा पर्यावरण की सक्रिय खोज
B) वयस्कों के व्यवहार का अवलोकन करना
C) आसन्न न्याय में विश्वास
D) शिक्षकों और अभिभावकों द्वारा सुदृढीकरण
Explanation: सही विकल्प है A. शिक्षार्थी द्वारा पर्यावरण की सक्रिय खोज।
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, बच्चे ज्ञान के निष्क्रिय प्राप्तकर्ता (passive recipients) नहीं होते हैं, बल्कि वे दुनिया के बारे में अपनी समझ का सक्रिय रूप से निर्माण करते हैं।
पियाजे का निर्माणवादी सिद्धांत (Constructivism) कहता है कि बच्चा खुद करके, खोज करके, प्रयोग करके सीखता है। ज्ञान का निर्माण पर्यावरण के साथ सक्रिय संपर्क (active interaction) से होता है।
सीखने के लिए शिक्षार्थी का शारीरिक और मानसिक रूप से वस्तुओं और विचारों में सक्रिय रूप से शामिल होना सबसे आवश्यक है।
Why other options are incorrect
B. वयस्कों के व्यवहार का अवलोकन करना: यह अल्बर्ट बांडुरा के सामाजिक शिक्षण सिद्धांत (Social Learning Theory) के करीब है, न कि पियाजे के।
C. आसन्न न्याय में विश्वास: यह नैतिक विकास से संबंधित है, न कि सीखने की एक आवश्यक प्रक्रिया से।
D. शिक्षकों और अभिभावकों द्वारा सुदृढीकरण: यह व्यवहारवादी सिद्धांतों (जैसे स्किनर के सिद्धांत) से संबंधित है, जिसमें पुरस्कार और दंड शामिल हैं, न कि पियाजे के संज्ञानात्मक सिद्धांत से।
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, बच्चे ज्ञान के निष्क्रिय प्राप्तकर्ता (passive recipients) नहीं होते हैं, बल्कि वे दुनिया के बारे में अपनी समझ का सक्रिय रूप से निर्माण करते हैं।
पियाजे का निर्माणवादी सिद्धांत (Constructivism) कहता है कि बच्चा खुद करके, खोज करके, प्रयोग करके सीखता है। ज्ञान का निर्माण पर्यावरण के साथ सक्रिय संपर्क (active interaction) से होता है।
सीखने के लिए शिक्षार्थी का शारीरिक और मानसिक रूप से वस्तुओं और विचारों में सक्रिय रूप से शामिल होना सबसे आवश्यक है।
Why other options are incorrect
B. वयस्कों के व्यवहार का अवलोकन करना: यह अल्बर्ट बांडुरा के सामाजिक शिक्षण सिद्धांत (Social Learning Theory) के करीब है, न कि पियाजे के।
C. आसन्न न्याय में विश्वास: यह नैतिक विकास से संबंधित है, न कि सीखने की एक आवश्यक प्रक्रिया से।
D. शिक्षकों और अभिभावकों द्वारा सुदृढीकरण: यह व्यवहारवादी सिद्धांतों (जैसे स्किनर के सिद्धांत) से संबंधित है, जिसमें पुरस्कार और दंड शामिल हैं, न कि पियाजे के संज्ञानात्मक सिद्धांत से।
Question 16: "बच्चे सक्रिय रूप से दुनिया के बारे में अपनी समझ का निर्माण करते हैं।" एक कथन है जिसका श्रेय दिया जाता है-
A) कोहलबर्ग
B) स्किनर
C) पियाजे
D) पावलोव
Explanation: "बच्चे सक्रिय रूप से दुनिया के बारे में अपनी समझ का निर्माण करते हैं" कथन का श्रेय C. पियाजे को दिया जाता है।
जीन पियाजे (Jean Piaget) एक स्विस मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत (theory of cognitive development) दिया।
उनके सिद्धांत का मूल दर्शन यह है कि बच्चे निष्क्रिय प्राप्तकर्ता नहीं हैं, बल्कि वे सक्रिय शिक्षार्थी हैं जो अपने पर्यावरण के साथ बातचीत करके और अनुभव प्राप्त करके दुनिया की अपनी समझ का निर्माण करते हैं, जिसे 'निर्माणवाद' (constructivism) कहा जाता है।
Why other options are incorrect
A. कोहलबर्ग (Kohlberg) नैतिक विकास के सिद्धांत (theory of moral development) के लिए जाने जाते हैं।
B. स्किनर (Skinner) व्यवहारवाद (behaviorism) और क्रिया प्रसूत अनुबंधन (operant conditioning) के सिद्धांत के लिए जाने जाते हैं, जो सीखने में सुदृढीकरण (reinforcement) की भूमिका पर जोर देता है।
D. पावलोव (Pavlov) शास्त्रीय अनुबंधन (classical conditioning) के सिद्धांत के लिए जाने जाते हैं, जो कुत्तों पर किए गए पाचन प्रयोगों के लिए प्रसिद्ध है।
जीन पियाजे (Jean Piaget) एक स्विस मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत (theory of cognitive development) दिया।
उनके सिद्धांत का मूल दर्शन यह है कि बच्चे निष्क्रिय प्राप्तकर्ता नहीं हैं, बल्कि वे सक्रिय शिक्षार्थी हैं जो अपने पर्यावरण के साथ बातचीत करके और अनुभव प्राप्त करके दुनिया की अपनी समझ का निर्माण करते हैं, जिसे 'निर्माणवाद' (constructivism) कहा जाता है।
Why other options are incorrect
A. कोहलबर्ग (Kohlberg) नैतिक विकास के सिद्धांत (theory of moral development) के लिए जाने जाते हैं।
B. स्किनर (Skinner) व्यवहारवाद (behaviorism) और क्रिया प्रसूत अनुबंधन (operant conditioning) के सिद्धांत के लिए जाने जाते हैं, जो सीखने में सुदृढीकरण (reinforcement) की भूमिका पर जोर देता है।
D. पावलोव (Pavlov) शास्त्रीय अनुबंधन (classical conditioning) के सिद्धांत के लिए जाने जाते हैं, जो कुत्तों पर किए गए पाचन प्रयोगों के लिए प्रसिद्ध है।
Question 17: निम्नलिखित में से कौन संज्ञान का घटक नहीं है?
A) भावनाएँ
B) विचार
C) ध्यान
D) धारणा
Explanation: The correct option is A. भावनाएँ (Emotions).
संज्ञान (Cognition) मानसिक प्रक्रियाओं को संदर्भित करता है जिसमें ज्ञान प्राप्त करना, संसाधित करना और समझना शामिल है।
विचार (Thoughts), ध्यान (Attention), और धारणा (Perception) सभी इस बात के अभिन्न अंग हैं कि व्यक्ति जानकारी को कैसे संसाधित और समझता है, इसलिए वे संज्ञान के घटक हैं।
भावनाएँ (Emotions) मनोदशा और भावना की व्यक्तिपरक स्थितियाँ हैं जो संज्ञान से प्रभावित हो सकती हैं, लेकिन वे स्वयं संज्ञानात्मक प्रक्रिया का प्रत्यक्ष घटक नहीं हैं।
Why other options are incorrect
B. विचार (Thoughts) तर्क, निर्णय लेने और समस्या-समाधान जैसी संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं का मूल हैं।
C. ध्यान (Attention) संज्ञानात्मक प्रसंस्करण के लिए जानकारी का चयन करने की प्रक्रिया है।
D. धारणा (Perception) इंद्रिय डेटा की व्याख्या और संगठन है, जो एक संज्ञानात्मक प्रक्रिया है।
संज्ञान (Cognition) मानसिक प्रक्रियाओं को संदर्भित करता है जिसमें ज्ञान प्राप्त करना, संसाधित करना और समझना शामिल है।
विचार (Thoughts), ध्यान (Attention), और धारणा (Perception) सभी इस बात के अभिन्न अंग हैं कि व्यक्ति जानकारी को कैसे संसाधित और समझता है, इसलिए वे संज्ञान के घटक हैं।
भावनाएँ (Emotions) मनोदशा और भावना की व्यक्तिपरक स्थितियाँ हैं जो संज्ञान से प्रभावित हो सकती हैं, लेकिन वे स्वयं संज्ञानात्मक प्रक्रिया का प्रत्यक्ष घटक नहीं हैं।
Why other options are incorrect
B. विचार (Thoughts) तर्क, निर्णय लेने और समस्या-समाधान जैसी संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं का मूल हैं।
C. ध्यान (Attention) संज्ञानात्मक प्रसंस्करण के लिए जानकारी का चयन करने की प्रक्रिया है।
D. धारणा (Perception) इंद्रिय डेटा की व्याख्या और संगठन है, जो एक संज्ञानात्मक प्रक्रिया है।
Question 18: विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा विशेष विद्यालय की अपेक्षा नियमित विद्यालय में बेहतर होती है क्योंकि, वहां है-
A) कोई लैंगिक भेदभाव नहीं
B) इक्विटी और समानता
C) सामान्य छात्रों से प्रतिस्पर्धा
D) अच्छा सहयोग
Explanation: सही विकल्प B. इक्विटी और समानता (Equity and Equality) है।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए नियमित विद्यालय को विशेष विद्यालय की तुलना में बेहतर माना जाता है क्योंकि: इक्विटी और समानता: समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का मूल सिद्धांत यह है कि प्रत्येक बच्चे को उनकी क्षमताओं या बाधाओं की परवाह किए बिना समान अवसर मिलने चाहिए। नियमित विद्यालय भेदभाव को कम करते हैं और सभी छात्रों को एक ही वातावरण में सीखने का अधिकार देते हैं।
सामाजिक एकीकरण: नियमित स्कूलों में बच्चे सामाजिक कौशल सीखते हैं और समाज की मुख्यधारा से जुड़ते हैं। यह उनमें आत्मविश्वास पैदा करता है और अलगाव की भावना को खत्म करता है।
विविधता का सम्मान: जब विभिन्न क्षमताओं वाले बच्चे एक साथ पढ़ते हैं, तो वे एक-दूसरे का सम्मान करना और विविधता को स्वीकार करना सीखते हैं, जो समाज के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
अन्य विकल्प सही क्यों नहीं हैं?
A. कोई लैंगिक भेदभाव नहीं: हालांकि यह महत्वपूर्ण है, लेकिन यह विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की विशिष्ट शैक्षिक आवश्यकताओं या नियमित स्कूलों के चयन का मुख्य कारण नहीं है।
C. सामान्य छात्रों से प्रतिस्पर्धा: विशेष शिक्षा का उद्देश्य 'प्रतिस्पर्धा' के बजाय बच्चे की अपनी गति से विकास करना है।
D. अच्छा सहयोग: यद्यपि सहयोग एक लाभ है, लेकिन 'इक्विटी और समानता' एक व्यापक शैक्षिक दर्शन है जो व्यवस्थागत सुधार पर जोर देता है।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए नियमित विद्यालय को विशेष विद्यालय की तुलना में बेहतर माना जाता है क्योंकि: इक्विटी और समानता: समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का मूल सिद्धांत यह है कि प्रत्येक बच्चे को उनकी क्षमताओं या बाधाओं की परवाह किए बिना समान अवसर मिलने चाहिए। नियमित विद्यालय भेदभाव को कम करते हैं और सभी छात्रों को एक ही वातावरण में सीखने का अधिकार देते हैं।
सामाजिक एकीकरण: नियमित स्कूलों में बच्चे सामाजिक कौशल सीखते हैं और समाज की मुख्यधारा से जुड़ते हैं। यह उनमें आत्मविश्वास पैदा करता है और अलगाव की भावना को खत्म करता है।
विविधता का सम्मान: जब विभिन्न क्षमताओं वाले बच्चे एक साथ पढ़ते हैं, तो वे एक-दूसरे का सम्मान करना और विविधता को स्वीकार करना सीखते हैं, जो समाज के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
अन्य विकल्प सही क्यों नहीं हैं?
A. कोई लैंगिक भेदभाव नहीं: हालांकि यह महत्वपूर्ण है, लेकिन यह विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की विशिष्ट शैक्षिक आवश्यकताओं या नियमित स्कूलों के चयन का मुख्य कारण नहीं है।
C. सामान्य छात्रों से प्रतिस्पर्धा: विशेष शिक्षा का उद्देश्य 'प्रतिस्पर्धा' के बजाय बच्चे की अपनी गति से विकास करना है।
D. अच्छा सहयोग: यद्यपि सहयोग एक लाभ है, लेकिन 'इक्विटी और समानता' एक व्यापक शैक्षिक दर्शन है जो व्यवस्थागत सुधार पर जोर देता है।
Question 19: किशोरावस्था वह काल हैं-
A) 5-10 वर्ष
B) 11-19 वर्ष
C) 22-28 वर्ष
D) 30-40 वर्ष
Explanation: सही विकल्प B. 11-19 वर्ष है।
किशोरावस्था (Adolescence) को आमतौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा 10 से 19 वर्ष की आयु तक परिभाषित किया जाता है, जो इसे बचपन से वयस्कता तक संक्रमणकालीन चरण बनाता है।
यह तीव्र शारीरिक, संज्ञानात्मक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों का काल है।
विकल्प B. 11-19 वर्ष इस व्यापक रूप से स्वीकृत परिभाषा के सबसे करीब है।
Why other options are incorrect
A. 5-10 वर्ष को बचपन (childhood) का हिस्सा माना जाता है, विशेष रूप से मध्य बचपन (middle childhood) का।
C. 22-28 वर्ष और D. 30-40 वर्ष वयस्कता (adulthood) के चरण हैं।
किशोरावस्था (Adolescence) को आमतौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा 10 से 19 वर्ष की आयु तक परिभाषित किया जाता है, जो इसे बचपन से वयस्कता तक संक्रमणकालीन चरण बनाता है।
यह तीव्र शारीरिक, संज्ञानात्मक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों का काल है।
विकल्प B. 11-19 वर्ष इस व्यापक रूप से स्वीकृत परिभाषा के सबसे करीब है।
Why other options are incorrect
A. 5-10 वर्ष को बचपन (childhood) का हिस्सा माना जाता है, विशेष रूप से मध्य बचपन (middle childhood) का।
C. 22-28 वर्ष और D. 30-40 वर्ष वयस्कता (adulthood) के चरण हैं।
Question 20: निम्न में से कौन सा जन्मजात प्रेरणा का उदाहरण है?
A) पुरस्कार
B) भूख
C) सजा
D) प्रोत्साहन
Explanation: सही विकल्प B. भूख (Hunger) है। NCERT की पाठ्यपुस्तकों के अनुसार, प्रेरणा को दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
1. जन्मजात या जैविक प्रेरक (Innate/Biological Motives)
ये प्रेरक जन्म से ही व्यक्ति में मौजूद होते हैं और जीवित रहने के लिए आवश्यक हैं।
उदाहरण: भूख, प्यास, नींद, और काम (sex)।
भूख (Hunger) एक शारीरिक आवश्यकता है जो शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने पर स्वतः उत्पन्न होती है।
2. अर्जित प्रेरक (Acquired/Social Motives)
ये प्रेरक व्यक्ति अपने वातावरण, समाज और अनुभवों से सीखता है।
पुरस्कार (A): यह एक बाहरी प्रलोभन है जो किसी कार्य को करने के लिए प्रेरित करता है।
सजा (C): यह एक नकारात्मक सुदृढीकरण (reinforcement) है जो किसी व्यवहार को रोकने के लिए उपयोग किया जाता है।
प्रोत्साहन (D): यह बाहरी वातावरण से प्राप्त होता है जो व्यक्ति को लक्ष्य की ओर धकेलता है।
1. जन्मजात या जैविक प्रेरक (Innate/Biological Motives)
ये प्रेरक जन्म से ही व्यक्ति में मौजूद होते हैं और जीवित रहने के लिए आवश्यक हैं।
उदाहरण: भूख, प्यास, नींद, और काम (sex)।
भूख (Hunger) एक शारीरिक आवश्यकता है जो शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने पर स्वतः उत्पन्न होती है।
2. अर्जित प्रेरक (Acquired/Social Motives)
ये प्रेरक व्यक्ति अपने वातावरण, समाज और अनुभवों से सीखता है।
पुरस्कार (A): यह एक बाहरी प्रलोभन है जो किसी कार्य को करने के लिए प्रेरित करता है।
सजा (C): यह एक नकारात्मक सुदृढीकरण (reinforcement) है जो किसी व्यवहार को रोकने के लिए उपयोग किया जाता है।
प्रोत्साहन (D): यह बाहरी वातावरण से प्राप्त होता है जो व्यक्ति को लक्ष्य की ओर धकेलता है।
Question 21: निम्नलिखित में से कौनसा कारक लोकोमोटर (गतिमान) विकलांगता बाले छात्रों के सफल समावेशन में बाधा डालता है?
A) लचीला पाठ्यक्रम
B) दुर्गम बुनियादी ढांचा
C) सहानुभूतिपूर्ण रवैया
D) उपरोक्त में से एक से अधिक
Explanation: सही विकल्प B. दुर्गम बुनियादी ढांचा (Inaccessible Infrastructure) है।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार, लोकोमोटर विकलांगता वाले छात्रों के लिए भौतिक बाधाएं सबसे बड़ी चुनौती होती हैं।
दुर्गम बुनियादी ढांचा (Inaccessible Infrastructure): लोकोमोटर विकलांगता वाले छात्रों को चलने-फिरने में कठिनाई होती है। यदि स्कूल में रैंप, लिफ्ट, चौड़े दरवाजे या अनुकूलित शौचालय नहीं हैं, तो यह उनके दैनिक आवागमन और सीखने की प्रक्रिया में गंभीर बाधा उत्पन्न करता है।
लचीला पाठ्यक्रम (A): यह बाधा नहीं, बल्कि एक सहायक कारक है जो छात्र की गति के अनुसार सीखने में मदद करता है।
सहानुभूतिपूर्ण रवैया (C): सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण सामाजिक समावेशन में मदद करता है, बाधा नहीं डालता।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार, लोकोमोटर विकलांगता वाले छात्रों के लिए भौतिक बाधाएं सबसे बड़ी चुनौती होती हैं।
दुर्गम बुनियादी ढांचा (Inaccessible Infrastructure): लोकोमोटर विकलांगता वाले छात्रों को चलने-फिरने में कठिनाई होती है। यदि स्कूल में रैंप, लिफ्ट, चौड़े दरवाजे या अनुकूलित शौचालय नहीं हैं, तो यह उनके दैनिक आवागमन और सीखने की प्रक्रिया में गंभीर बाधा उत्पन्न करता है।
लचीला पाठ्यक्रम (A): यह बाधा नहीं, बल्कि एक सहायक कारक है जो छात्र की गति के अनुसार सीखने में मदद करता है।
सहानुभूतिपूर्ण रवैया (C): सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण सामाजिक समावेशन में मदद करता है, बाधा नहीं डालता।
Question 22: एक छात्र को गिटार सीखने में आनंद आता है और लंबे समय तक अभ्यास करने के बावजूद उसे संतुष्टि मिलती हैं। छात्र है-
A) अपने शिक्षक को खुश करने की कोशिश कर रहा है।
B) प्रशंसा के लिये दुसरों से प्रतिस्पर्धा करना
C) आंतरिक रुप से प्रेरित
D) उपरोक्त से कोई नहीं
Explanation: सही विकल्प C. आंतरिक रूप से प्रेरित (Intrinsically Motivated) है।
जब कोई व्यक्ति किसी कार्य को केवल अपनी खुशी, रुचि और संतुष्टि के लिए करता है, तो उसे आंतरिक प्रेरणा कहा जाता है।
संतुष्टि और आनंद: छात्र को अभ्यास के दौरान मिलने वाला "आनंद" और "संतुष्टि" इस बात का प्रमाण है कि वह किसी बाहरी दबाव (जैसे पुरस्कार या सजा) के बिना काम कर रहा है।
प्रक्रिया पर ध्यान: यहाँ लक्ष्य बाहरी प्रशंसा पाना नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का स्वयं आनंद लेना है।
अन्य विकल्प सही क्यों नहीं हैं?
A और B: ये बाहरी प्रेरणा (Extrinsic Motivation) के उदाहरण हैं, जहाँ व्यक्ति दूसरों को प्रभावित करने या सामाजिक लाभ के लिए कार्य करता है।
जब कोई व्यक्ति किसी कार्य को केवल अपनी खुशी, रुचि और संतुष्टि के लिए करता है, तो उसे आंतरिक प्रेरणा कहा जाता है।
संतुष्टि और आनंद: छात्र को अभ्यास के दौरान मिलने वाला "आनंद" और "संतुष्टि" इस बात का प्रमाण है कि वह किसी बाहरी दबाव (जैसे पुरस्कार या सजा) के बिना काम कर रहा है।
प्रक्रिया पर ध्यान: यहाँ लक्ष्य बाहरी प्रशंसा पाना नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का स्वयं आनंद लेना है।
अन्य विकल्प सही क्यों नहीं हैं?
A और B: ये बाहरी प्रेरणा (Extrinsic Motivation) के उदाहरण हैं, जहाँ व्यक्ति दूसरों को प्रभावित करने या सामाजिक लाभ के लिए कार्य करता है।
Question 23: मनुष्य में विकास होता है-
A) किशोरावस्था के अंत तक
B) बचपन के अंत तक
C) वयस्कता की शुरुवात तक
D) जीवनभर
Explanation: सही विकल्प D. जीवनभर (Throughout life) है।
मनोविज्ञान और NCERT के विकासपरक सिद्धांतों के अनुसार, विकास एक सतत प्रक्रिया (Continuous process) है।
गर्भ से कब्र तक: विकास गर्भाधान से शुरू होता है और मृत्यु तक निरंतर चलता रहता है। इसमें शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक और भावनात्मक परिवर्तन शामिल हैं।
परिवर्तन की प्रकृति: किशोरावस्था (A) या वयस्कता (C) के बाद शारीरिक वृद्धि (Height/Growth) रुक सकती है, लेकिन मानसिक, सामाजिक और अनुभवजन्य विकास जीवन भर चलता रहता है।
मनोविज्ञान और NCERT के विकासपरक सिद्धांतों के अनुसार, विकास एक सतत प्रक्रिया (Continuous process) है।
गर्भ से कब्र तक: विकास गर्भाधान से शुरू होता है और मृत्यु तक निरंतर चलता रहता है। इसमें शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक और भावनात्मक परिवर्तन शामिल हैं।
परिवर्तन की प्रकृति: किशोरावस्था (A) या वयस्कता (C) के बाद शारीरिक वृद्धि (Height/Growth) रुक सकती है, लेकिन मानसिक, सामाजिक और अनुभवजन्य विकास जीवन भर चलता रहता है।
Question 24: वंचित पृष्ठभूमि के बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए, एक शिक्षक को चाहिए-
A) उनके बारे में और अधिक जानने की कोशिश करें और उन्हे कक्षा चर्चा में शामिल करें
B) उन्हें कक्षा में अलग से बैठाये
C) उन्हे अनदेखा करें क्योंकि वे अन्य छात्रों से बातचीत नहीं कर सकते हैं।
D) उन्हे बहुत सारे लिखित कार्य दें
Explanation: सही विकल्प A. उनके बारे में और अधिक जानने की कोशिश करें और उन्हे कक्षा चर्चा में शामिल करें है।
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF 2005) और समावेशी शिक्षा के सिद्धांतों के अनुसार, वंचित पृष्ठभूमि (Disadvantaged background) के छात्रों को मुख्यधारा में लाना शिक्षक की जिम्मेदारी है।
संवेदनशीलता: छात्र की पृष्ठभूमि को समझने से शिक्षक को उनकी विशिष्ट चुनौतियों (जैसे भाषा या आर्थिक बाधाएं) को हल करने में मदद मिलती है।
सक्रिय भागीदारी: उन्हें कक्षा की चर्चाओं में शामिल करने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और उनमें अपनेपन की भावना विकसित होती है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
B और C: ये तरीके अलगाव (Segregation) और भेदभाव को बढ़ावा देते हैं, जो बच्चे के सीखने के अधिकार का उल्लंघन है।
D: केवल लिखित कार्य देने से उनकी सामाजिक और भावनात्मक जरूरतें पूरी नहीं होतीं।
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF 2005) और समावेशी शिक्षा के सिद्धांतों के अनुसार, वंचित पृष्ठभूमि (Disadvantaged background) के छात्रों को मुख्यधारा में लाना शिक्षक की जिम्मेदारी है।
संवेदनशीलता: छात्र की पृष्ठभूमि को समझने से शिक्षक को उनकी विशिष्ट चुनौतियों (जैसे भाषा या आर्थिक बाधाएं) को हल करने में मदद मिलती है।
सक्रिय भागीदारी: उन्हें कक्षा की चर्चाओं में शामिल करने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और उनमें अपनेपन की भावना विकसित होती है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
B और C: ये तरीके अलगाव (Segregation) और भेदभाव को बढ़ावा देते हैं, जो बच्चे के सीखने के अधिकार का उल्लंघन है।
D: केवल लिखित कार्य देने से उनकी सामाजिक और भावनात्मक जरूरतें पूरी नहीं होतीं।
Question 25: पाठ्यक्रम अनुकूलन प्रक्रिया के चरणों को व्यवस्थित करें
(a) पाठ्यचर्या अनुकूलन के लिए आवश्यकता का निर्धारण।
(b) अनुकूलन की आवश्यकता वाले तत्त्वों की पहचान करना।
(c) पाठ्यचर्या अनुकूलन लागू करना।
(d) शिक्षण और व्यवहार प्रबंधन तकनीकों का चयन करना।
(a) पाठ्यचर्या अनुकूलन के लिए आवश्यकता का निर्धारण।
(b) अनुकूलन की आवश्यकता वाले तत्त्वों की पहचान करना।
(c) पाठ्यचर्या अनुकूलन लागू करना।
(d) शिक्षण और व्यवहार प्रबंधन तकनीकों का चयन करना।
A) (a)→(b)→(d)→(c)
B) (a)→(b)(c)→(d)
C) (c)→(a)→(b)→(d)
D) (d)→(b)→(c)→(a)
Explanation: सही विकल्प A. (a)→(b)→(d)→(c) है।
तर्कसंगत क्रम (Logical Sequence):
NCERT के समावेशी शिक्षा दिशा-निर्देशों के अनुसार, पाठ्यक्रम अनुकूलन (Curriculum Adaptation) एक व्यवस्थित प्रक्रिया है:
(a) आवश्यकता का निर्धारण: सबसे पहले यह समझना कि छात्र की विशिष्ट बाधाओं के कारण अनुकूलन की आवश्यकता क्यों है।
(b) तत्वों की पहचान: फिर यह तय करना कि पाठ्यक्रम के किन विशिष्ट हिस्सों (जैसे सामग्री, मूल्यांकन या वातावरण) में बदलाव की जरूरत है।
(d) तकनीकों का चयन: पहचान के बाद, उन विशिष्ट शिक्षण विधियों और प्रबंधन तकनीकों को चुनना जो छात्र के लिए प्रभावी होंगी।
(c) लागू करना: अंत में, चुनी गई योजनाओं और तकनीकों को वास्तविक कक्षा परिवेश में क्रियान्वित करना।
NCERT के समावेशी शिक्षा दिशा-निर्देशों के अनुसार, पाठ्यक्रम अनुकूलन (Curriculum Adaptation) एक व्यवस्थित प्रक्रिया है:
(a) आवश्यकता का निर्धारण: सबसे पहले यह समझना कि छात्र की विशिष्ट बाधाओं के कारण अनुकूलन की आवश्यकता क्यों है।
(b) तत्वों की पहचान: फिर यह तय करना कि पाठ्यक्रम के किन विशिष्ट हिस्सों (जैसे सामग्री, मूल्यांकन या वातावरण) में बदलाव की जरूरत है।
(d) तकनीकों का चयन: पहचान के बाद, उन विशिष्ट शिक्षण विधियों और प्रबंधन तकनीकों को चुनना जो छात्र के लिए प्रभावी होंगी।
(c) लागू करना: अंत में, चुनी गई योजनाओं और तकनीकों को वास्तविक कक्षा परिवेश में क्रियान्वित करना।
Question 26: कालम A एवं कालम B से सही विकल्प का मिलान करें-
कालम - A
(a) डिस्लेक्सिया
(b) डिसग्राफिया
(c) डिसकैलकुलिया
(d) डिसरथ्रिया
कालम B
(I) पढ़ने और भाषा की कठिनाई
(II) अंकगणितीय कौशल में कठिनाई
(III) लेखन कौशल में कठिनाई
(IV) बोलने की क्षमता में कठिनाई
कालम - A
(a) डिस्लेक्सिया
(b) डिसग्राफिया
(c) डिसकैलकुलिया
(d) डिसरथ्रिया
कालम B
(I) पढ़ने और भाषा की कठिनाई
(II) अंकगणितीय कौशल में कठिनाई
(III) लेखन कौशल में कठिनाई
(IV) बोलने की क्षमता में कठिनाई
A) a-I, b-II, c-III, d-IV
B) a-IV, b-III, c-II, d-I
C) a-1, b-III, c-II, d-IV
D) a-IV, b-II, e-III, d-I
Explanation: सही विकल्प C. a-I, b-III, c-II, d-IV है।
सही मिलान:
(a) डिस्लेक्सिया → (I) पढ़ने और भाषा की कठिनाई: यह सबसे आम सीखने की अक्षमता है जो मुख्य रूप से पढ़ने में कठिनाई से जुड़ी है।
(b) डिसग्राफिया → (III) लेखन कौशल में कठिनाई: 'ग्राफ' शब्द का अर्थ लिखने या खींचने से संबंधित है।
(c) डिसकैलकुलिया → (II) अंकगणितीय कौशल में कठिनाई: 'कैलकुलिया' शब्द गणना या गणितीय कार्यों से संबंधित है।
(d) डिसरथ्रिया → (IV) बोलने की क्षमता में कठिनाई: यह एक तंत्रिका-पेशी संबंधी विकार है जो स्पष्ट रूप से बोलने की क्षमता को प्रभावित करता है।
सही मिलान:
(a) डिस्लेक्सिया → (I) पढ़ने और भाषा की कठिनाई: यह सबसे आम सीखने की अक्षमता है जो मुख्य रूप से पढ़ने में कठिनाई से जुड़ी है।
(b) डिसग्राफिया → (III) लेखन कौशल में कठिनाई: 'ग्राफ' शब्द का अर्थ लिखने या खींचने से संबंधित है।
(c) डिसकैलकुलिया → (II) अंकगणितीय कौशल में कठिनाई: 'कैलकुलिया' शब्द गणना या गणितीय कार्यों से संबंधित है।
(d) डिसरथ्रिया → (IV) बोलने की क्षमता में कठिनाई: यह एक तंत्रिका-पेशी संबंधी विकार है जो स्पष्ट रूप से बोलने की क्षमता को प्रभावित करता है।
Question 27: रचनात्मकता आमतौर पर इसके साथ जुड़ी होती है.
A) नकल
B) मॉडलिंग
C) अभिसारी चिंतन
D) अपसारी सोच
Explanation: The correct option is D. अपसारी सोच (Divergent thinking).
रचनात्मकता (Creativity) का अर्थ है कुछ नया, मूल और उपयोगी उत्पन्न करने की क्षमता।
अपसारी सोच (Divergent thinking) एक ऐसी विचार प्रक्रिया है जिसका उपयोग किसी समस्या के कई संभावित समाधानों का पता लगाने के लिए किया जाता है। यह सोच एक बिंदु से बाहर की ओर फैलती है (जैसे विचार मंथन या 'brainstorming'), जो नए और अद्वितीय विचारों को जन्म देती है, इसलिए यह रचनात्मकता से जुड़ी है।
Why other options are incorrect
A. नकल (Imitation) और B. मॉडलिंग (Modelling) दूसरों के कार्यों या विचारों को दोहराने से संबंधित हैं, न कि नए विचारों को उत्पन्न करने से।
C. अभिसारी चिंतन (Convergent thinking) किसी समस्या के लिए एकल सर्वोत्तम या सही समाधान खोजने पर केंद्रित होता है। यह तर्क और तर्क पर आधारित है और अक्सर मानकीकृत परीक्षणों में उपयोग किया जाता है, लेकिन यह रचनात्मकता का प्राथमिक चालक नहीं है।
रचनात्मकता (Creativity) का अर्थ है कुछ नया, मूल और उपयोगी उत्पन्न करने की क्षमता।
अपसारी सोच (Divergent thinking) एक ऐसी विचार प्रक्रिया है जिसका उपयोग किसी समस्या के कई संभावित समाधानों का पता लगाने के लिए किया जाता है। यह सोच एक बिंदु से बाहर की ओर फैलती है (जैसे विचार मंथन या 'brainstorming'), जो नए और अद्वितीय विचारों को जन्म देती है, इसलिए यह रचनात्मकता से जुड़ी है।
Why other options are incorrect
A. नकल (Imitation) और B. मॉडलिंग (Modelling) दूसरों के कार्यों या विचारों को दोहराने से संबंधित हैं, न कि नए विचारों को उत्पन्न करने से।
C. अभिसारी चिंतन (Convergent thinking) किसी समस्या के लिए एकल सर्वोत्तम या सही समाधान खोजने पर केंद्रित होता है। यह तर्क और तर्क पर आधारित है और अक्सर मानकीकृत परीक्षणों में उपयोग किया जाता है, लेकिन यह रचनात्मकता का प्राथमिक चालक नहीं है।
Question 28: विकलांग बच्चों के लिए एकीकृत शिक्षा की केन्द्र प्रायोजित योजना का उद्देश्य विकलांग बच्चों के लिए शैक्षिक अवसर प्रदान करना है-
A) विशेष स्कूल
B) ओपन स्कूल
C) नियमत स्कूल
D) ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन स्कूल
Explanation: सही विकल्प C. नियमित स्कूल (Regular Schools) है।
विकलांग बच्चों के लिए एकीकृत शिक्षा (Integrated Education for Disabled Children - IEDC) की केंद्र प्रायोजित योजना को अब समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के तहत व्यापक रूप से लागू किया गया है।
उद्देश्य: इस योजना का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकलांग बच्चे सामान्य बच्चों के साथ नियमित स्कूलों National Portal of India में पढ़ सकें।
सहायता: यह योजना बुनियादी ढांचे में सुधार, विशेष शिक्षकों की नियुक्ति और सहायक उपकरणों के वितरण पर ध्यान केंद्रित करती है ताकि बच्चे सामान्य वातावरण में समायोजित हो सकें।
अन्य विकल्प सही क्यों नहीं हैं?
A. विशेष स्कूल: ये अलगाव को बढ़ावा देते हैं, जबकि योजना का उद्देश्य एकीकरण है।
B. ओपन स्कूल: यह दूरस्थ शिक्षा के लिए है, न कि प्रत्यक्ष कक्षा एकीकरण के लिए।
विकलांग बच्चों के लिए एकीकृत शिक्षा (Integrated Education for Disabled Children - IEDC) की केंद्र प्रायोजित योजना को अब समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के तहत व्यापक रूप से लागू किया गया है।
उद्देश्य: इस योजना का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकलांग बच्चे सामान्य बच्चों के साथ नियमित स्कूलों National Portal of India में पढ़ सकें।
सहायता: यह योजना बुनियादी ढांचे में सुधार, विशेष शिक्षकों की नियुक्ति और सहायक उपकरणों के वितरण पर ध्यान केंद्रित करती है ताकि बच्चे सामान्य वातावरण में समायोजित हो सकें।
अन्य विकल्प सही क्यों नहीं हैं?
A. विशेष स्कूल: ये अलगाव को बढ़ावा देते हैं, जबकि योजना का उद्देश्य एकीकरण है।
B. ओपन स्कूल: यह दूरस्थ शिक्षा के लिए है, न कि प्रत्यक्ष कक्षा एकीकरण के लिए।
Question 29: शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का उद्देश किस स्तर के बच्चों के लिए मुक्त और अनिवार्य शिक्षा को एक अधिकार बनाना है?
A) प्राथमिक स्तर
B) माध्यमिक स्तर
C) उच्चत्तर माध्यमिक स्तर
D) स्नातक स्तर
Explanation: सही विकल्प A. प्राथमिक स्तर है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 के अनुसार:
आयु वर्ग: यह अधिनियम 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता है।
स्तर: 6-14 वर्ष की आयु आमतौर पर कक्षा 1 से 8 तक की होती है, जिसे प्राथमिक स्तर (कक्षा 1-5 निम्न प्राथमिक और 6-8 उच्च प्राथमिक) कहा जाता है।
संवैधानिक प्रावधान: इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21-A के तहत एक मौलिक अधिकार बनाया गया है।
ध्यान दें: माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर वर्तमान में इस अधिनियम के 'अनिवार्य' दायरे में नहीं आते हैं, हालांकि नई शिक्षा नीति (NEP 2020) में इसे 18 वर्ष की आयु तक विस्तारित करने का सुझाव दिया गया है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 के अनुसार:
आयु वर्ग: यह अधिनियम 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता है।
स्तर: 6-14 वर्ष की आयु आमतौर पर कक्षा 1 से 8 तक की होती है, जिसे प्राथमिक स्तर (कक्षा 1-5 निम्न प्राथमिक और 6-8 उच्च प्राथमिक) कहा जाता है।
संवैधानिक प्रावधान: इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21-A के तहत एक मौलिक अधिकार बनाया गया है।
ध्यान दें: माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर वर्तमान में इस अधिनियम के 'अनिवार्य' दायरे में नहीं आते हैं, हालांकि नई शिक्षा नीति (NEP 2020) में इसे 18 वर्ष की आयु तक विस्तारित करने का सुझाव दिया गया है।
Question 30: एक विशेष शिक्षा शिक्षक की जिम्मेदारियां-
(a) प्रत्येक छात्र को ट्यूशन प्रदान करें।
(b) नियमित परीक्षण और आकलन करें।
(c) विद्यार्थी को IEP के साथ सरेखित करने के लिए पाठ योजनाओं को संशोधित करें।
(d) सभी छात्रों के साथ समान व्यवहार करें। निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
(a) प्रत्येक छात्र को ट्यूशन प्रदान करें।
(b) नियमित परीक्षण और आकलन करें।
(c) विद्यार्थी को IEP के साथ सरेखित करने के लिए पाठ योजनाओं को संशोधित करें।
(d) सभी छात्रों के साथ समान व्यवहार करें। निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
A) केवल (a) और (b)
B) केवल (a) और (c)
C) केवल (a), (b) और (c)
D) केवल (a), (b) और (d)
Explanation: इस प्रश्न के विकल्पों में एक तकनीकी विरोधाभास है, लेकिन विशेष शिक्षा के सिद्धांतों के आधार पर सबसे सटीक उत्तर का विश्लेषण इस प्रकार है:
दिए गए विकल्पों में से कोई भी पूर्णतः आदर्श नहीं है, परंतु यदि हमें सबसे सटीक चुनना हो, तो C या B की ओर झुकाव हो सकता है। हालांकि, तार्किक रूप से सही उत्तर इस प्रकार होना चाहिए:
कथनों का विश्लेषण:
(c) IEP के साथ पाठ योजनाओं को संशोधित करना: यह एक विशेष शिक्षा शिक्षक की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। IEP (Individualized Education Program) प्रत्येक बच्चे की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार बनाया जाता है। Rehabilitation Council of India (RCI) के मानकों के अनुसार, शिक्षण को छात्र की क्षमता के अनुरूप ढालना अनिवार्य है।
(b) नियमित परीक्षण और आकलन: प्रगति की निगरानी के लिए यह आवश्यक है। NCERT के समावेशी दिशा-निर्देशों में निरंतर और व्यापक मूल्यांकन (CCE) पर जोर दिया गया है।
(a) प्रत्येक छात्र को ट्यूशन प्रदान करना: यह शब्द विवादास्पद है। यदि इसका अर्थ 'व्यक्तिगत ध्यान' (Individualized Attention) है, तो यह सही है। लेकिन व्यावसायिक 'होम ट्यूशन' शिक्षक की प्राथमिक जिम्मेदारी नहीं है।
(d) सभी छात्रों के साथ समान व्यवहार: विशेष शिक्षा में 'समानता' (Equality) से ज्यादा 'इक्विटी' (Equity) महत्वपूर्ण है। यानी, हर बच्चे को उसकी जरूरत के हिसाब से अलग सहायता देना, न कि सबको एक जैसा (Symmetry) व्यवहार देना।
निष्कर्ष:
यदि प्रश्न के विकल्पों को देखें, तो (c) और (b) अनिवार्य हैं। चूँकि (a) को अक्सर 'व्यक्तिगत निर्देश' के रूप में लिया जाता है, इसलिए कई परीक्षाओं में C. केवल (a), (b) और (c) को सही माना जाता है।
नोट: विकल्प (d) 'समान व्यवहार' (Treating everyone exactly the same) विशेष शिक्षा में गलत माना जाता है क्योंकि यहाँ 'विभेदित निर्देश' (Differentiated Instruction) की आवश्यकता होती है।
दिए गए विकल्पों में से कोई भी पूर्णतः आदर्श नहीं है, परंतु यदि हमें सबसे सटीक चुनना हो, तो C या B की ओर झुकाव हो सकता है। हालांकि, तार्किक रूप से सही उत्तर इस प्रकार होना चाहिए:
कथनों का विश्लेषण:
(c) IEP के साथ पाठ योजनाओं को संशोधित करना: यह एक विशेष शिक्षा शिक्षक की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। IEP (Individualized Education Program) प्रत्येक बच्चे की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार बनाया जाता है। Rehabilitation Council of India (RCI) के मानकों के अनुसार, शिक्षण को छात्र की क्षमता के अनुरूप ढालना अनिवार्य है।
(b) नियमित परीक्षण और आकलन: प्रगति की निगरानी के लिए यह आवश्यक है। NCERT के समावेशी दिशा-निर्देशों में निरंतर और व्यापक मूल्यांकन (CCE) पर जोर दिया गया है।
(a) प्रत्येक छात्र को ट्यूशन प्रदान करना: यह शब्द विवादास्पद है। यदि इसका अर्थ 'व्यक्तिगत ध्यान' (Individualized Attention) है, तो यह सही है। लेकिन व्यावसायिक 'होम ट्यूशन' शिक्षक की प्राथमिक जिम्मेदारी नहीं है।
(d) सभी छात्रों के साथ समान व्यवहार: विशेष शिक्षा में 'समानता' (Equality) से ज्यादा 'इक्विटी' (Equity) महत्वपूर्ण है। यानी, हर बच्चे को उसकी जरूरत के हिसाब से अलग सहायता देना, न कि सबको एक जैसा (Symmetry) व्यवहार देना।
निष्कर्ष:
यदि प्रश्न के विकल्पों को देखें, तो (c) और (b) अनिवार्य हैं। चूँकि (a) को अक्सर 'व्यक्तिगत निर्देश' के रूप में लिया जाता है, इसलिए कई परीक्षाओं में C. केवल (a), (b) और (c) को सही माना जाता है।
नोट: विकल्प (d) 'समान व्यवहार' (Treating everyone exactly the same) विशेष शिक्षा में गलत माना जाता है क्योंकि यहाँ 'विभेदित निर्देश' (Differentiated Instruction) की आवश्यकता होती है।
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