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कबीर काव्य में उपलब्ध अहिंसा का तत्व किस सम्प्रदाय की देन है?

11. कबीर काव्य में उपलब्ध अहिंसा का तत्व किस सम्प्रदाय की देन है? उत्तर - कबीर काव्य में उपलब्ध अहिंसा का तत्व वैष्णव सम्प्रदाय की देन है।  अब बातें थोड़ी विस्तार में पढ़ कर देखे अच्छा लगे तो कमेन्ट भी करें... हिंदी साहित्य के मूर्धन्य इतिहासकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ में स्पष्ट लिखा है कि कबीर ने ज्ञान और साधना के कई तत्व अलग-अलग स्रोतों से लिए हैं, जिनमें अहिंसा और प्रपत्ति-भाव (समर्पण) वैष्णव मत से आया है। कबीरदास जी की कविता की सबसे खूबसूरत बात यह है कि वे किसी बनी-बनाई लीक पर नहीं चले। उन्होंने समाज और अलग-अलग धर्मों को देखा, जो बातें तर्क और करुणा की कसौटी पर खरी उतरीं, उन्हें अपना लिया। जब हम कबीर की साखियों में अहिंसा (जीवों पर दया) की बात देखते हैं, तो अक्सर सवाल उठता है कि यह विचार उनके पास कहाँ से आया? कहाँ से आया यह तत्व? कबीर के गुरु स्वामी रामानंद थे, जो रामानंदी वैष्णव परंपरा के बड़े संत थे। वैष्णव भक्ति धारा का मूल सिद्धांत ही है— जीवों पर दया, करुणा और किसी भी प्राणी को पीड़ा न पहुँचाना। कबीर ने निर्गुण राम की उपासना तो की, ...
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