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CGPSC PAPER 1 2024 PYQ BY KHILAWAN

CGPSC प्रारंभिक परीक्षा 2024 (Paper-I)

सामान्य अध्ययन - 100 प्रश्न | समय: 2 घंटे | निगेटिव मार्किंग: -0.66

प्रश्न: 1 / 100 समय: 120:00
प्रश्न क्रमांक 1
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भ्रमरगीत सार : सूरदास पद क्रमांक 88 सप्रसंग व्याख्या By Khilawan

   भ्रमरगीत सार आचार्य रामचंद्र शुक्ल  अगर आप हमारे ब्लॉग को पहली बार विजिट कर रहे हैं तो आपको बता दूँ की इससे पहले हमने  भ्रमर गीत के पद क्रमांक 87 की व्याख्या  को अपने इस ब्लॉग  questionfieldhindi.blogspot.com  में पब्लिस किया था। आज हम  भ्रमर गीत पद क्रमांक 88 की सप्रसंग व्याख्या  के बारे में जानेंगे तो चलीये शुरू करते हैं। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) के एम.ए. हिंदी साहित्य (MA Hindi) के पाठ्यक्रम में ' भ्रमरगीत सार ' (संपादक: आचार्य रामचंद्र शुक्ल) द्वितीय सेमेस्टर (Second Semester) के अंतर्गत पढ़ाया जाता है। यह पुस्तक दूसरे सेमेस्टर के मध्यकालीन काव्य प्रश्न-पत्र के पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा है। भ्रमरगीत सार की व्याख्या     पद क्रमांक 88 व्याख्या  -  सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल bhrmar-geet-sar-surdas-ke-pad - 88 श्री कृष्ण का वचन उद्धव-प्रति 88. राग गौरी ऊधो ! क्यों राखौं ये नैन ?  सुमिरि सुमिरि गुन अधिक तपत हैं सुनत तिहारो बैन।। हैं जो मन हर बदनचंद के सादर कुमुद चकोर। परम-तृषारत सजल स्यामघन ...

रंगमंच की दृष्टि से हयवदन नाटक की समीक्षा कीजिये।

1. रंगमंच की दृष्टि से हयवदन नाटक की समीक्षा कीजिये।  उत्तर - रंगमंच की दृष्टि से हयवदन नाटक की समीक्षा निम्न बिंदुओं के आधार पर किया गया है - कथावस्तु  पात्र एवं चरित्र-चित्रण  संवाद  देशकाल वातावरण  भाषा-शैली  उद्देश्य  अभिनेता  1. कथावस्तु - हयवदन नाटक की कथावस्तु रंगमंच की दृष्टि से बहुत ही सरल है लेकिन इसमें कई जगहों पर ऐसा दृश्य है जिसे रंगमंच पर दिखा पाना संभव नहीं है।  2. पात्र एवं चरित्र चित्रण - हयवदन नाटक में बहुत ही अच्छे तरिके से पात्रों को प्रस्तुत किया गया है प्रमुख पात्र हैं - हयवदन, भागवत, देवदत्त, कपिल, पद्मिनी आदि। हयवदन-अभिशप्त पात्र, देवदत्त, कपिल-नायक, पद्मिनी - नायिका है।  3. संवाद - हयवदन नाटक की संवाद योजना पात्रों के अनुकूल है बहुत ही स्पष्ट है किसी भी प्रकार की कमी नहीं है उसके वातावरण के अनुकूल है।  4. देशकाल एवं वातावरण - हयवदन नाटक में रंगमंच का चित्रण अर्थात वातावरण है जिसमें जंगल से भागता हुआ आदमी आता है और एक नगर के बारे में बताया गया है जहां पर नाटक चल रहा होता है।  5. भाषा-शैली - हयवदन नाटक रं...