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hello there my name is khilawan and i am a blogger since 2017 and i am writing about educational things like hindi sahitya is my favourite topic for bloging...

M.A. hindi sahitya पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी के सिलेबस पर आधारित यह वेबसाइट पूरी तरह से सर्वाधिकार सुरक्षित है और यहां पर किसी भी प्रकार के कॉपीराइट कंटेंट होने पर हमें जरूर बताएं धन्यवाद!

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एम. ए. हिंदी (प्रथम सेमेस्टर)

इकाईआदिकाल एवं पूर्वमध्यकाल
(प्रथम प्रश्न पत्र) इकाई नाम
नीचे क्लिक करें
इकाई-1.इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न In progress!
इकाई-2.हिंदी साहित्य के आदिकाल की पृष्ठभूमि अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
इकाई-3.पूर्व मध्यकाल (भक्तिकाल)अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
इकाई-4.सूफी प्रेमाख्यानक काव्यअतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

इकाईप्राचीन एवं मध्यकालीन काव्य
(द्वितीय प्रश्न पत्र) इकाई नाम
नीचे क्लिक करें
इकाई-1.चंदबरदायी : पृथ्वीराज रासो (पद्मावती समय) अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
इकाई-2.कबीर ग्रंथावली  अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
इकाई-3.मलिक मोहम्मद जायसी : पद्मावत अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
इकाई-4.द्रुतपाठ के कवि Not Available


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

इकाईछायावाद एवं पूर्ववर्ती काव्य  (तृतीय प्रश्न-पत्र)नीचे क्लिक करें
इकाई-1.मैथलीशरण गुप्त - साकेत (नवम सर्ग) अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
इकाई-2.जयशंकर प्रसाद - कामायनी (चिंता, श्रद्धा, इड़ा सर्ग) अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
इकाई-3.सूर्यकांत त्रिपाठी निराला (राम की शक्ति पूजा, तुलसीदास प्रथम छंद)अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
इकाई-4.द्रुतपाठ के कविअतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

एम. ए. हिंदी (तृतीय सेमेस्टर)


इकाई  साहित्य के सिद्धांत तथा आलोचना शास्त्र (प्रथम प्रश्न-पत्र)नीचे क्लिक करें
इकाई-1.भारतीय काव्यशास्त्र  अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न In Progress!
इकाई-2.अलंकार सिद्धांत  अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 
इकाई-3.पाश्चात्य काव्य शास्त्र अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न coming soon
इकाई-4.मैथ्यू आर्नल्ड - कला की अवधारणा अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न coming soon

एम. ए. हिंदी (चतुर्थ सेमेस्टर)


इकाई  हिंदी भाषा (षष्ट प्रश्न-पत्र)नीचे क्लिक करें
इकाई-1. हिंदी कि ऐतिहासिक पृष्ठभूमिअतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 
इकाई-2.हिंदी का भौगोलिक विस्तार   अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 
इकाई-3.हिंदी के विविध रूप अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 
इकाई-4.हिंदी में कम्प्यूटर सुविधाएँ  अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 


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भ्रमरगीत सार : सूरदास पद क्रमांक 88 सप्रसंग व्याख्या By Khilawan

   भ्रमरगीत सार आचार्य रामचंद्र शुक्ल  अगर आप हमारे ब्लॉग को पहली बार विजिट कर रहे हैं तो आपको बता दूँ की इससे पहले हमने  भ्रमर गीत के पद क्रमांक 87 की व्याख्या  को अपने इस ब्लॉग  questionfieldhindi.blogspot.com  में पब्लिस किया था। आज हम  भ्रमर गीत पद क्रमांक 88 की सप्रसंग व्याख्या  के बारे में जानेंगे तो चलीये शुरू करते हैं। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) के एम.ए. हिंदी साहित्य (MA Hindi) के पाठ्यक्रम में ' भ्रमरगीत सार ' (संपादक: आचार्य रामचंद्र शुक्ल) द्वितीय सेमेस्टर (Second Semester) के अंतर्गत पढ़ाया जाता है। यह पुस्तक दूसरे सेमेस्टर के मध्यकालीन काव्य प्रश्न-पत्र के पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा है। भ्रमरगीत सार की व्याख्या     पद क्रमांक 88 व्याख्या  -  सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल bhrmar-geet-sar-surdas-ke-pad - 88 श्री कृष्ण का वचन उद्धव-प्रति 88. राग गौरी ऊधो ! क्यों राखौं ये नैन ?  सुमिरि सुमिरि गुन अधिक तपत हैं सुनत तिहारो बैन।। हैं जो मन हर बदनचंद के सादर कुमुद चकोर। परम-तृषारत सजल स्यामघन ...

भाषा किसे कहते हैं - हिंदी व्याकरण

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भ्रमरगीत सार: जब ज्ञान का अहंकार, प्रेम के सागर में डूब गया!

Bhramar geet   क्या आपने कभी सोचा है कि जब इस ब्रह्मांड का सबसे बड़ा ज्ञानी, प्रेम की साक्षात् मूरत से टकराता है, तो क्या होता है? महाकवि सूरदास की कालजयी कृति 'भ्रमरगीत सार' (संपादक: आचार्य रामचंद्र शुक्ल) केवल कविताओं का संग्रह नहीं है। यह बुद्धि और हृदय का महायुद्ध है। यह निर्गुण (निराकार ईश्वर) पर सगुण (साक्षात् कृष्ण) की, और ज्ञान पर अनन्य प्रेम की ऐसी विजय गाथा है, जिसे पढ़कर आज भी आँखें नम और मन मंत्रमुग्ध हो जाता है। आइए, ब्रज की उस पावन भूमि पर चलें जहाँ तर्क हार गया और प्रेम जीत गया। 🌟 कथा की पृष्ठभूमि: मथुरा से आया एक संदेश श्रीकृष्ण अब गोकुल के 'कान्हा' नहीं रहे, वे मथुरा के राजा बन चुके हैं। ब्रज में गोपियाँ उनके विरह (जुदाई) की आग में जल रही हैं। उधर मथुरा में, कृष्ण के सखा उद्धव को अपने ज्ञान और योग-साधना पर बड़ा अहंकार है। वे मानते हैं कि ईश्वर को केवल बुद्धि और ध्यान से पाया जा सकता है, प्रेम से नहीं। उद्धव के इसी 'ज्ञान के रोग' को ठीक करने के लिए, श्रीकृष्ण उन्हें एक दूत बनाकर ब्रज भेजते हैं। कृष्ण जानते हैं कि जो पाठ उद्धव को कोई ग्रंथ नहीं...