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Showing posts with the label हिंदी साहित्य

भ्रमरगीत सार: जब ज्ञान का अहंकार, प्रेम के सागर में डूब गया!

Bhramar geet   क्या आपने कभी सोचा है कि जब इस ब्रह्मांड का सबसे बड़ा ज्ञानी, प्रेम की साक्षात् मूरत से टकराता है, तो क्या होता है? महाकवि सूरदास की कालजयी कृति 'भ्रमरगीत सार' (संपादक: आचार्य रामचंद्र शुक्ल) केवल कविताओं का संग्रह नहीं है। यह बुद्धि और हृदय का महायुद्ध है। यह निर्गुण (निराकार ईश्वर) पर सगुण (साक्षात् कृष्ण) की, और ज्ञान पर अनन्य प्रेम की ऐसी विजय गाथा है, जिसे पढ़कर आज भी आँखें नम और मन मंत्रमुग्ध हो जाता है। आइए, ब्रज की उस पावन भूमि पर चलें जहाँ तर्क हार गया और प्रेम जीत गया। 🌟 कथा की पृष्ठभूमि: मथुरा से आया एक संदेश श्रीकृष्ण अब गोकुल के 'कान्हा' नहीं रहे, वे मथुरा के राजा बन चुके हैं। ब्रज में गोपियाँ उनके विरह (जुदाई) की आग में जल रही हैं। उधर मथुरा में, कृष्ण के सखा उद्धव को अपने ज्ञान और योग-साधना पर बड़ा अहंकार है। वे मानते हैं कि ईश्वर को केवल बुद्धि और ध्यान से पाया जा सकता है, प्रेम से नहीं। उद्धव के इसी 'ज्ञान के रोग' को ठीक करने के लिए, श्रीकृष्ण उन्हें एक दूत बनाकर ब्रज भेजते हैं। कृष्ण जानते हैं कि जो पाठ उद्धव को कोई ग्रंथ नहीं...

उलटबांसी किसकी रचना है?

उलटबांसी मुख्य रूप से कबीरदास की रचनाओं में मिलने वाला एक अलंकार है कह सकते हैं कि विचार प्रस्तुत करने का एक अनूठा तरीका है।   क्या होती है उलटबांसी?  उलटबांसी में कबीरदास जी सामान्य बातों को उलट-पलट कर एक नया अर्थ निकालते हैं। वे समाज में प्रचलित रूढ़ियों, धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए अपनी बात को स्पष्ट करते हैं।   उदाहरण के लिए:  "पंडित बड़ा भला, मुर्ख को डराता।" "मंदिर मस्जिद तो देखी, आदमी को ना देखा।"   इन पंक्तियों में कबीरदास जी ने धार्मिक पाखंड और दिखावे पर तंज कसा है।   क्यों प्रसिद्ध हैं उलटबांसियां? कबीरदास की उलटबांसियां इसलिए प्रसिद्ध हैं क्योंकि:  सरल भाषा: वे अपनी बात को बहुत ही सरल भाषा में कहते हैं, जिससे आम लोग भी उन्हें आसानी से समझ सकते हैं।  गहरा अर्थ: उनकी बातों में एक गहरा अर्थ छिपा होता है, जिसे सोचने पर ही समझा जा सकता है।  समाजिक चेतना: वे समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ खड़े होते हैं और लोगों को जागरूक करते हैं।  अन्य संतों का योगदान: हालांकि कबीरदास को उलटबांस...

कबीर के प्रथम पद में कौन सा रस है?

कबीर के प्रथम पद में कौन सा रस है, यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका सीधा उत्तर देना थोड़ा मुश्किल है।   क्योंकि:  ◆ कबीर दास की कविता में विभिन्न रसों का सम्मिश्रण होता है।  ◆ प्रथम पद कौन सा है, इस पर विद्वानों के अलग-अलग मत हो सकते हैं।  * रस का निर्धारण पाठक की संवेदना और व्याख्या पर भी निर्भर करता है।    हालांकि, सामान्यतः कबीर की कविता में भक्ति रस प्रमुख रूप से देखा जाता है।  उनके पदों में भगवान के प्रति प्रेम, निष्ठा और समर्पण का भाव स्पष्ट रूप से झलकता है।   यदि आप कोई विशेष पद बता सकें, तो मैं आपको उसका अधिक सटीक विश्लेषण कर सकता हूँ। कबीर दास की कविता में अन्य रसों की झलक: ● शांत रस: जीवन की निरर्थकता और मोक्ष प्राप्ति की बातें  ● वीर रस: सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ाई  ● करुण रस: मानव दुखों और सामाजिक असमानता पर सहानुभूति  ● हास्य रस: व्यंग्य और हास्य के माध्यम से सामाजिक बुराइयों पर प्रहार  आप किस विशेष पद के बारे में जानना चाहते हैं?  यदि आप कबीर दास की कविता के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं तो आप...

कबीर की उलटबांसी अर्थ सहित?

कबीर की उलटबांसी कबीर दास की उलटबांसियां उनकी कविता की सबसे अनूठी विशेषताओं में से एक हैं। ये ऐसे वाक्य होते हैं, जिनमें शब्दों का सीधा अर्थ उलटा होता हुआ प्रतीत होता है। ये वाक्य गहरे दार्शनिक अर्थों को व्यक्त करते हैं और पाठक को सोचने पर मजबूर करते हैं।  उलटबांसियों का महत्व:  ◆ रहस्यमयता : ये वाक्य एक रहस्यमय आभा पैदा करते हैं, जो पाठक को बार-बार इनके अर्थ को खोजने के लिए प्रेरित करती है।  ◆ दार्शनिक गहराई: इनमें जीवन के गूढ़ सत्यों को सरल भाषा में व्यक्त किया जाता है।  ◆ सामाजिक व्यंग्य: कई बार ये वाक्य समाज की कुरीतियों पर व्यंग्य करते हुए एक नया दृष्टिकोण पेश करते हैं।  कुछ उदाहरण और उनके अर्थ: ● आँगन सूखा, घर में पानी: इसका अर्थ है कि बाहरी दिखावा और अंदरूनी खोखलापन। व्यक्ति बाहर से धार्मिक दिखता हो, लेकिन अंदर से वह पापी हो सकता है।   ● मछली जल की प्यासी: इसका अर्थ है कि व्यक्ति को अपनी ही जरूरतों का एहसास नहीं होता। मछली पानी में रहती है, फिर भी उसे प्यास लगती है, यह मूर्खता का प्रतीक है । ● धरती उलटि अकासै जाय, चिउंटी के मुख हस्ति समाय: इसका ...

कबीर दास किस रस के कवि हैं?

कबीर दास मुख्यतः श्रृंगार रस से हटकर अन्य रसों के कवि माने जाते हैं।  कबीर दास की कविता में मुख्य रूप से शांत, वीर और भक्ति रस की झलक मिलती है।  ◆ शांत रस: कबीर दास ने अपने दोहों में जीवन की निरर्थकता और मोक्ष प्राप्ति की बात को बहुत ही शांत भाव से व्यक्त किया है।  ◆ वीर रस: उन्होंने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अपने शब्दों से युद्ध किया है।  ◆ भक्ति रस: कबीर दास की कविता में भगवान के प्रति प्रेम और भक्ति भाव भी प्रबल रूप से दिखाई देता है।  क्यों नहीं श्रृंगार रस?  कबीर दास ने भौतिक सुखों और कामुकता को त्यागकर आध्यात्मिक जीवन को अपनाया। उनकी कविता में व्यक्तिगत प्रेम की बजाय ईश्वर प्रेम अधिक महत्वपूर्ण है।   अन्य रसों का प्रभाव:   ●  करुण रस : कबीर दास ने सामाजिक असमानता और मानव दुखों को देखकर करुण रस का भी प्रयोग किया है।  ● हास्य रस : कबीर दास ने व्यंग्य और हास्य के माध्यम से सामाजिक बुराइयों पर प्रहार किया है।   ★  निष्कर्ष : कबीर दास की कविता में विभिन्न रसों का समन्वय है, लेकिन मुख्य रूप से शांत, वीर और भक्...

जय भारत किसकी रचना है || Jay Bharat kiski Rachna hai

जय भारत - मैथिलीशरण गुप्त "जय भारत" महाकवि मैथिलीशरण गुप्त की रचना है। यह 1950 में प्रकाशित हुई थी।   यह एक राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत महाकाव्य है, जिसमें भारत के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और सभ्यता का वर्णन किया गया है।   यह महाकाव्य 18वीं शताब्दी से लेकर 20वीं शताब्दी तक की भारत की घटनाओं को समेटे हुए है, जिसमें भारत के स्वतंत्रता संग्राम का भी चित्रण किया गया है।   "जय भारत" को हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण रचना माना जाता है और इसे अक्सर स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाया जाता है। नीचे लिंक पर क्लिक करें और जाने  ◆  मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय - maithili sharan gupt ◆  प्रतिमा किसकी रचना है?|| Pratima kiski Rachna hai? ◆  जय भारत किसकी रचना है || Jay Bharat kiski Rachna hai

प्रतिमा किसकी रचना है?|| Pratima kiski Rachna hai?

 प्रतिमा महाकाव्य मैथिलीशरण गुप्त उत्तर - हिंदी साहित्य में प्रतिमा मैथिलीशरण गुप्त की रचना है, साथ ही मैं आपको बता दूं कि हिंदी साहित्य में प्रतिमा के नाम से विभिन्न रचनाएं आपको देखने को मिल जाएंगी। प्रतिमा महाकाव्य मैथिलीशरण गुप्त जी की एक अद्भुत रचना है। यह महाकाव्य 1926 में प्रकाशित हुआ था और इसे हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण रचना माना जाता है। प्रतिमा में, गुप्त जी ने देवसेना नामक एक आदर्श स्त्री के चरित्र का चित्रण किया है। देवसेना एक सुंदर, बुद्धिमान और दयालु महिला है जो अपने पति शशिकांत से बहुत प्यार करती है। शशिकांत एक राजकुमार है जो अपनी प्रजा के प्रति समर्पित है। प्रतिमा महाकाव्य में देवसेना और शशिकांत के जीवन की कहानी बताई गई है। महाकाव्य में प्रेम, त्याग, वीरता और धर्म जैसे विषयों का चित्रण किया गया है।  प्रतिमा महाकाव्य की भाषा सरल और सुंदर है। गुप्त जी ने इस महाकाव्य में खड़ी बोली का प्रयोग किया है। प्रतिमा महाकाव्य हिंदी साहित्य के विद्यार्थियों और आम पाठकों के लिए समान रूप से पठनीय है।   यहाँ प्रतिमा महाकाव्य के कुछ प्रमुख पहलुओं पर एक नज़...

saket kiski rachna hai

 1. साकेत किसकी रचना है? उत्तर - साकेत मैथिलीशरण गुप्त की रचना है जिसकी रचना वैदर्भी काव्यात्म गीति शैली में की गई है। अब थोड़ा विस्तार से जानते हैं इनकी इस रचना के बारे में ◆ साकेत मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित महाकाव्य है। जिसकी रचना उन्होंने 1931 में की थी तथा ◆ मैथिलीशरण गुप्त जी को उनकी रचना साकेत के लिए सन 1932 को मंगलाप्रसाद पारितोषिक पुरस्कार भी दिया गया था। ● अभी के समय में प्रकाशित पुस्तक की बात करें तो इस पुस्तक को 25 सितंबर 2005 में प्रकाशित किया गया था जिसमें कुल 288 पेज हैं। ◆ यह मैथिलीशरण गुप्त जी की अमर कृति है, जिसकी रचना उन्होंने वैदर्भी काव्यात्मक गीति शैली में की है।  ◆ इस रचना के माध्यम से उन्होंने श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला के विरह का वर्णन किया है। ◆ मैथिलीशरण गुप्त की रचना साकेत को पढ़ने पर हमें मालूम होता है कि उन्होंने बड़े ही मार्मिक और गहरी मानवीय संवेदनाओं और भावनाओं से ओत-प्रोत होकर इसकी रचना की है। ◆ साकेत की रचना में उन्होंने हालांकि राम का वर्णन भी किया है लेकिन इसे पढ़ने पर हमें मालूम होता है कि इसके केंद्र में लक्ष्मण की पत्न...

बांग्ला के दो उपन्यासों के नाम बताइए।

बांग्ला के दो उपन्यासों के नाम यदि आपका प्रश्न बांग्ला के दो उपन्यासों के नाम को लेकर है तो मैं आपको बांग्ला के दो उपन्यासों के नाम उनके लेखकों के नाम के साथ बताना चाहूँगा। 1. दुर्गेशनंदिनी - बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का यह उपन्यास है। 2. पथेर दावी - शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय की रचना है। बांग्ला उपन्यास की शुरुआत 19वीं शताब्दी के शुरुआती दशकों में हुई थी, जब पश्चिमी साहित्य के प्रभाव में बंगाली लेखकों ने उपन्यास लिखना शुरू किया था। पहले बांग्ला उपन्यासों में से एक प्रेमचंद्र का अलपकला (1832) था, जो एक सामाजिक उपन्यास था जिसमें एक युवा महिला की कहानी बताई गई थी जो एक उच्च जाति के पुरुष से प्यार करती है। इसके अलावा आपके कोई प्रश्न हों तो कमेंट में जरूर लिखियेगा। धन्यवाद 😊 Bangla ke do upanyason ke nam likhiye? अन्य पोस्ट के लिंक नीचे दिए गए हैं - ◆  बंगला भाषा के दो प्रमुख उपन्यासकारों के नाम लिखिए। ◆  किस साहित्यकार की गद्य शैली ने बंगला को साहित्यिक स्तर प्रदान किया?

भ्रमरगीत सार के लेखक कौन हैं?

 प्रश्न 1. भ्रमरगीत सार के लेखक कौन हैं? उत्तर - वैसे तो इसके लेखक सूरदास जी हैं लेकिन इसका सम्पादन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने भ्रमरगीत सार नाम से किया है। इस प्रकार भ्रमरगीत सार के लेखक आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी हैं। ◆ सूरदास के द्वारा लगभग 400 भ्रमरगीत के पद लिखे गए हैं। ◆ भ्रमर का अर्थ भौरा होता है गीत मतलब गान इस प्रकार भौरों का गान ही भ्रमर गीत है। ◆ कहते हैं यह भागवत के दशम स्कंध से प्रेरित है।

कोहबर की शर्त किसकी रचना है?

1. कोहबर की शर्त किसकी रचना है? उत्तर - कोहबर की शर्त केशव प्रसाद मिश्र की रचना है यह एक उपन्यास है जिस पर सन 1982 में नदिया के पार फ़िल्म भी बनी थी।  जिसमें अभिनेता सचिन पिलगांवकर और अभिनेत्री  साधना सिंह ने मुख्य भूमिका निभाई थी। इसके अलावा एक और फिल्म की कहानी का मुख्य आधार बना जिसका नाम हम आपके हैं कौन है जिसमें सलमान खान और माधुरि दीक्षित मुख्य भूमिका में थे। यह 1957 में प्रकाशित हुआ था और इसे हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण उपन्यास माना जाता है। यह उपन्यास ग्रामीण भारत में जाति व्यवस्था और सामाजिक रीति-रिवाजों के मुद्दों का पता लगाता है।  यह कहानी कोहबर नामक एक युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक गरीब ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखता है।  कोहबर को एक अमीर जमींदार की बेटी शकुंतला से प्यार हो जाता है, लेकिन उनकी शादी जाति व्यवस्था के कारण असंभव है।  दोनों प्रेमी सामाजिक रीति-रिवाजों की अवहेलना करते हुए शादी करने का फैसला करते हैं, लेकिन उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।   "कोहबर की शर्त" एक मार्मिक कहानी है जो प्यार, त्याग और सामाजिक...

समाचार पत्र का अर्थ क्या है

समाचार पत्र का अर्थ  उत्तर - समाचार पत्र का अर्थ अखबार से है यह अखबार का समानार्थी शब्द है। समाचार पत्र किसी न्यूज एजेंसी के द्वारा प्रकाशित कराया जाता है। समाचार पत्र को प्रकाशित करने के लिए समाचार एकत्रित करने लिए टीम की आवश्यकता होती है। समाचार पत्र को कई बार उसके सम्पादकों के नाम से भी जाना जाता है। समाचार पत्र किसी भी मायने में पत्र नही होता है क्योंकि पत्र के माध्यम से सन्देश भेजा जाता है और वो भी बहुत ही संक्षिप्त में इसलिए यह कदापि पत्र की श्रेणी में नहीं आ सकता। उम्मीद है आपको क्लियर हो गया होगा कि समाचार पत्र का अर्थ क्या है? ऐसे ही छोटे छोटे प्रश्न के उत्तर जानने के लिए हमारे साथ बने रहें धन्यवाद! Image by khilawan Samachar patra ka arth kya hai? अन्य पोस्ट के लिंक  ◆  दैनिक समाचार पत्र क्या है What is daily news paper? ◆  समाचार पत्र लेखन क्या है ◆  किसी समाचर-पत्र के लिए सम्पादकीय का महत्व क्या है? संक्षेप में लिखिए। ◆  समाचार पत्र का अर्थ क्या है ◆  हिंदुस्तान समाचार पत्र क्या है ◆  रेडियो समाचार लेखन और वाचन ◆  समाचार-पत...

हिंदुस्तान समाचार पत्र क्या है

 1. हिंदुस्तान समाचार पत्र क्या है? नमस्कार दोस्तों यदि आपका प्रश्न है कि हिंदुस्तान समाचार पत्र क्या है? तो मैं आपको बता दूं कि इसका उद्घाटन महात्मा गाँधी ने सन 1932 में किया था। यह एक दैनिक समाचार पत्र है तथा 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की वजह से यह लगभग 6 महीने तक बंद भी रहा था। यह समाचार पत्र सेंसरशिप के विरोध में था और इसे 6 हजार रुपये तक का जुर्माना भी मांगा गया था जमानत के लिए। Image by khilawan इस समाचार पत्र का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय आंदोलन को भारत के स्वाधीन होने तक बढ़ावा देने का था। इस समाचार पत्र को कांग्रेस पार्टी और महात्मागांधी के अनुयायी पत्र के रूप में देखा जाता था। इस पत्रिका के माध्यम से लोगों तक सुभाष चंद्रबोस और महात्मागांधी के पत्रों के माध्यम से हुए बातचीत को लोगों तक पहुचाने के लिए भी प्रतिबद्ध माना जाता था। तथा यह बेहिचक उनके पत्रों के माध्यम से हुए बातचीत को छापा करता था। इस पत्रिका के पढ़ने वालों की संख्या की बात करें तो यह 94 लाख है और यह पत्रिका सबसे ज्यादा उत्तर भारत में प्रचलित है। यह दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, राँची, देहरादून, भागलपुर...

समाचार पत्र लेखन क्या है

 1. समाचार पत्र लेखन क्या है  उत्तर - नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग में आज हम बात करने वाले हैं समाचार-पत्र लेखन के बारे में जिसमें प्रश्न है : समाचार पत्र लेखन क्या है? आइए थोड़ा सा डिटेल में जानते हैं और यदि आप पहली बार हमारे में आये हैं तो आपको थोड़ा विस्तार में बता दूं बहुत ही कम शब्दों में मैं यहां विवरण उपलब्ध करा रहा हूँ डिटेल में जानने के लिए हमने एक और पोस्ट लिखा है उसे पढ़ सकते हैं, चलिए शुरू करते हैं- Image by khilawan सबसे पहले समाचार को डिटेल में जाने आखिर  ◆ समाचार क्या है? मुख्य रूप से हमारे आसपास के लोगों के द्वारा समाचार शब्द सुनते ही अखबार की याद आती है और लोग अखबार को ही समाचार समझते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि अखबार को समाचार पत्र कहें आप इसे कह भी सकते हैं लेकिन यह समाचार नहीं है अखबार है इसे अखबार ही कहें। समाचार का सन्धि विच्छेद करके देखने पर पता चलता है कि सम+अचार = समाचार अर्थात समान रूप से आचरण करने वाला समाचार है। या कहें किसी भी प्रकार की सूचना को आपतक पहुंचाने के लिए जो भी माध्यम उपयोग में लाया जाता है उसे समाचार कहते हैं। समाचा...

दैनिक समाचार पत्र क्या है What is daily news paper?

1. दैनिक समाचार पत्र क्या है - What is daily news paper? नमस्कार दोस्तों आपके प्रश्न का उत्तर यह रहा - उत्तर - समाचार पत्र संचार का एक माध्यम है समाचार पत्र को आजादी के लिए हमारे महान लेखकों ने बखूबी उपयोग किया था।  समाचार के माध्यम से आप देश, विदेश और आस-पास की खबरे पा सकते हैं, समाचार एक प्रकार के मैगजीन की तरह ही है जो की एक समान्य या कहें रद्दी पेपर का बना एक कागज है जिसमें बहुत सारी खबरें छपी हों समाचार पत्र कहलाता है।  पत्र शब्द इसमें शायद इसीलिए जुड़ गया होगा क्योंकि इसे पहले पत्र की तरह एक जगह से दूसरी जगह बांटा जाता था। हालांकि उस समय और अब भी इसके लिए डाकिये की जरूरत नहीं पड़ती लेकिन फिर भी इसके अंदर पत्र के गुण छुपे हुए हैं इसलिए इसे समाचार पत्र कहा जाता है।  समाचार का संधि विच्छेद करने पर हमें पता चलता है सम + आचार सम अर्थात समान और आचार का अर्थ आचरण अर्थात जो पत्र सभी प्रकार की खबरों पर समान रूप से व्यवहार या आचरण करता है उसे समाचार पत्र कहते हैं।  आइये अब देखें की दैनिक समाचार पत्र क्या है? तो दैनिक समाचार पत्र भी समाचार का ही एक प्रकार है समाचार पत्रों क...

रीति की अवधारणा क्या है काव्य में रीति के महत्व को स्पष्ट कीजिए?

1. रीति की अवधारणा क्या है काव्य में रीति के महत्व को स्पष्ट कीजिए? उत्तर - रीति को आम बोलचाल की भाषा में नियम जो की सालों से चली आ रही है उसके पर्याय में लिया जाता है इसका एक मतलब यह भी होता है की इसे नियम भी कहा जाता है।  अर्थात जो भी रचनाएँ भक्तिकाल के बाद नियम बद्ध तरिके से लिखी गयी रीतिकाल की श्रेणी में उसे रखा गया है।  रीतिकाल में जितनी भी कविताएं लिखी गयी वो तीन प्रकार से लिखी गयी पहली जो रीतिबध्द हुआ करती हैं और दूसरी वो जो रीतिसिद्ध हुआ करती हैं और तीसरे नंबर पर रीतिमुक्त कविताएँ लिखी गयी।  काव्य में रीति के महत्व - किसी भी प्रकार के काव्य में रीति के होने से उसमें रोचकता बढ़ जाती है।  काव्य रीतिबद्ध होने से पढ़ने में भी आसानी होती है।  काव्य में रीति एक प्रकार की शैली का काम करता है।  काव्य में रीति मुक्त सिद्धांत होने से लेखक स्वतंत्र रूप से लिख सकता है।  काव्य रीति बद्ध होने से काव्य को एक उचित मात्रा और क्रम में लिखना पड़ता है।  आजतक रीतिसिद्ध कवियों की बात करें तो कवि बिहारी ही ऐसे कवि हुए हैं जिन्होंने रीतिबद्ध कविताएँ लिखी हैं।  ...

रससूत्र के व्याख्याकरों का सही अनुक्रम क्या है?

 28. रससूत्र के व्याख्याकरों का सही अनुक्रम क्या है? (UGC NET JUN 2005) (a) भट्ट लोल्लट, शंकुक, भट्ट्नायक, अभिनवगुप्त  (b) शंकुक, भट्ट लोल्लट, भट्ट्नायक, अभिनगुप्त  (c) अभिनगुप्त, शंकुक, भट्ट लोल्लट, भट्ट्नायक (d) भट्ट लोल्लट, भट्ट्नायक, शंकुक, अभिनगुप्त उत्तर - (a) भट्ट लोल्लट, शंकुक, भट्ट्नायक, अभिनवगुप्त  Rassutra ke vyakhyakaro ka sahi anukram kya hai ?

निम्नलिखित नाटकों का रचनाकाल की दृष्टि से सही अनुक्रम कौन-सा है ?

 27. निम्नलिखित नाटकों का रचनाकाल की दृष्टि से सही अनुक्रम कौन-सा है ? (UGC NET JUN 2005) (a) लहरों के राजहंस, सिन्दूर की होली, आठवाँ सर्ग, ध्रुवस्वामिनी (b) सिन्दूर की होली, ध्रुवस्वामिनी, लहरों के राजहंस, आठवाँ सर्ग (c) ध्रुवस्वामिनी, सिन्दूर की होली, लहरों के राजहंस, आठवाँ सर्ग (d) आठवाँ सर्ग, लहरों के राजहंस, ध्रुवस्वामिनी, सिन्दूर की होली उत्तर - (c) ध्रुवस्वामिनी, सिन्दूर की होली, लहरों के राजहंस, आठवाँ सर्ग Nimnalikhit natako ka rachnakal ki drishti se sahi anukram kaun-sa hai ?

निम्नलिखित उपन्यासों का रचनाकाल की दृष्टि से सही अनुक्रम कौन-सा है ?

 26. निम्नलिखित उपन्यासों का रचनाकाल की दृष्टि से सही अनुक्रम कौन-सा है ? (UGC NET JUN 2005) (a) त्यागपत्र, सेवासदन, मैला आँचल, आधा गाँव  (b) आधा गाँव, मैला आँचल, सेवासदन, त्यागपत्र (c) सेवासदन, त्यागपत्र, आधा गाँव, मैला आँचल (d) सेवासदन, त्यागपत्र, मैला आँचल, आधा गाँव उत्तर - (d) सेवासदन, त्यागपत्र, मैला आँचल, आधा गाँव Nimnalikhit upanyaso ka rachnakal ki drishti se sahi anukram kaun-sa hai?

निम्नलिखित रचनाओं का कालक्रमानुसार सही अनुक्रम कौन-सा है ?

 25. निम्नलिखित रचनाओं का कालक्रमानुसार सही अनुक्रम कौन-सा है ? (UGC NET JUN 2005) (a) अंधेर नगरी, अंधायुग, संसद से सड़क तक, मगध  (b) संसद से सड़क तक, अंधेर नगरी, अंधायुग, मगध  (c) मगध, अंधेर नगरी, अंधायुग, संसद से सड़क तक (d) अंधायुग, अंधेर नगरी, मगध, संसद से सड़क तक उत्तर - (a) अंधेर नगरी, अंधायुग, संसद से सड़क तक, मगध Nimnalikhit rachnao ka kalkramanusar sahi anukram kau-sa hai ?