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'तददोषौ शब्दार्थौ सगुणावनलंकृती पुनः क्वापि' काव्य की यह परिभाषा किस आचार्य की है?

1. 'तददोषौ शब्दार्थौ सगुणावनलंकृती पुनः क्वापि' काव्य की यह परिभाषा किस आचार्य की है?

अथवा 

2. 'तददोषौ शब्दार्थौ सगुणावंलंकृतिः पुनः क्वापि' किस आचार्य का कथन है?

अथवा 

3. 'तददोषौ शब्दार्थौ सगुणावंलंकृति पुनः क्वापि' उक्ति है। 

 उत्तर - 'तददोषौ शब्दार्थौ सगुणावनलंकृती पुनः क्वापि' काव्य की यह परिभाषा आचार्य मम्मट की है। 

Taddoshau shabdarthau sagunavanlankriti punah kvapi kavya ki yah paribhasha kis aacharya ki hai?

Aacharya Mammat ki.

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