Skip to main content

आचार्य रुद्रट ने किस काव्यशास्त्रीय ग्रंथ की रचना की?

 1. आचार्य रुद्रट ने किस काव्यशास्त्रीय ग्रंथ की रचना की?

उत्तर - आचार्य रुद्रट ने काव्यालंकार की काव्यशास्त्रीय ग्रंथ की रचना की।

Acharya rudrat ne kis kavya shastriya granth ki rachna ki?

Acharya rudrat ne Kavyalankar ki kavyashastriya grath ki  rachna ki.

Comments

Popular posts from this blog

भ्रमरगीत सार : सूरदास पद क्रमांक 88 सप्रसंग व्याख्या By Khilawan

   भ्रमरगीत सार आचार्य रामचंद्र शुक्ल  अगर आप हमारे ब्लॉग को पहली बार विजिट कर रहे हैं तो आपको बता दूँ की इससे पहले हमने  भ्रमर गीत के पद क्रमांक 87 की व्याख्या  को अपने इस ब्लॉग  questionfieldhindi.blogspot.com  में पब्लिस किया था। आज हम  भ्रमर गीत पद क्रमांक 88 की सप्रसंग व्याख्या  के बारे में जानेंगे तो चलीये शुरू करते हैं। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) के एम.ए. हिंदी साहित्य (MA Hindi) के पाठ्यक्रम में ' भ्रमरगीत सार ' (संपादक: आचार्य रामचंद्र शुक्ल) द्वितीय सेमेस्टर (Second Semester) के अंतर्गत पढ़ाया जाता है। यह पुस्तक दूसरे सेमेस्टर के मध्यकालीन काव्य प्रश्न-पत्र के पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा है। भ्रमरगीत सार की व्याख्या     पद क्रमांक 88 व्याख्या  -  सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल bhrmar-geet-sar-surdas-ke-pad - 88 श्री कृष्ण का वचन उद्धव-प्रति 88. राग गौरी ऊधो ! क्यों राखौं ये नैन ?  सुमिरि सुमिरि गुन अधिक तपत हैं सुनत तिहारो बैन।। हैं जो मन हर बदनचंद के सादर कुमुद चकोर। परम-तृषारत सजल स्यामघन ...

CG SET 4 OCT 2026 FREE MOCK TEST PAPER 2 HINDI PART 1

यह पुर्णतः पूछे गये प्रश्न हैं इसे गम्भीरता से दें और साथ ही साथ उत्तर और आपके स्कोर लास्ट में दिखेंगे Best of luck... Hindi Mock Test - Part 1 (Prashna 1 se 50) Progress: 0 / 50 Answered 0% 1. 'चंद्रगुप्त' में यह गीत कौन गाता है? "अरुण यह मधुमय देश हमारा..." A. कार्नेलिया B. सुवासिनी C. कल्याणी D. अलका सही उत्तर: A. कार्नेलिया याद रखें: जयशंकर प्रसाद के नाटक 'चंद्रगुप्त' के प्रथम अंक में सेलुकस की पुत्री 'कार्नेलिया' सिंधु नदी के तट पर यह प्रसिद्ध गीत गाती है। 2. निम्नांकित में से कौन सा कविता-अंश 'अकाल दर्शन' कविता का नहीं है? A. उस मुहावरे को समझ गया हूँ जो आज़ादी और गांधी के ...

पृथ्वीराज रासो की प्रामाणिकता पर प्रकाश डालिए।

एम. ए. हिंदी साहित्य ( प्रथम सेमेस्टर ) प्राचीन एवं मध्यकालीन काव्य (द्वितीय प्रश्न-पत्र) इकाई-1. चन्दबरदायी : पृथ्वीराज रासो (पद्मावती समय) लघु उत्तरीय प्रश्न -  प्रश्न 1. पृथ्वीराज रासो की प्रामाणिकता पर प्रकाश डालिए। पृथ्वीराज रासो की प्रामाणिकता पर प्रकाश उत्तर - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने पृथ्वीराज रासो को हिन्दी का प्रथम महाकाव्य माना है जिसकी रचना पृथ्वीराज चौहान के अभिन्न मित्र एवं दरबारी कवि चन्दवरदाई द्वारा की गई है। यह 2500 पृष्ठों एवं 69 सर्गों का विशालकाय ग्रन्थ है। रासो की प्रामाणिकता के विषय में पर्याप्त विवाद रहा है। विद्वानों का एक वर्ग इसे पूर्णतः अप्रमाणिक रचना स्वीकार करता है। इस वर्ग के विद्वानों में प्रमुख है - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल , मुंशी देवी प्रसाद, डॉ. बूलर तथा गौरीशंकर हीरानन्द ओझा आदि। दूसरे वर्ग में वे विद्वान् हैं जो रासो को एक प्रामाणिक रचना मानते हैं। इस वर्ग में डॉ. श्यामसुन्दरदास, मिश्र बन्धु तथा कर्नल टाड आदि के नाम लिये जाते हैं। तृतीय वर्ग के विद्वान् रासो को अर्द्ध-प्रामाणिक रचना मानते हुए इसके कुछ अंश को ही प्रामाणिक मानते हैं। आचार्य हजारीप...