Skip to main content

भोजपुरी किस अपभ्रंश से विकसित हुई है?

1. भोजपुरी किस अपभ्रंश से विकसित हुई है?

उत्तर - भोजपुरी मागधी अपभ्रंश से विकसित हुई है। 

 Bojpuri kis apbhransh se viksit hui hai?

Magdhi apbhransh se.

Comments

Popular posts from this blog

भ्रमरगीत सार : सूरदास पद क्रमांक 88 सप्रसंग व्याख्या By Khilawan

   भ्रमरगीत सार आचार्य रामचंद्र शुक्ल  अगर आप हमारे ब्लॉग को पहली बार विजिट कर रहे हैं तो आपको बता दूँ की इससे पहले हमने  भ्रमर गीत के पद क्रमांक 87 की व्याख्या  को अपने इस ब्लॉग  questionfieldhindi.blogspot.com  में पब्लिस किया था। आज हम  भ्रमर गीत पद क्रमांक 88 की सप्रसंग व्याख्या  के बारे में जानेंगे तो चलीये शुरू करते हैं। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) के एम.ए. हिंदी साहित्य (MA Hindi) के पाठ्यक्रम में ' भ्रमरगीत सार ' (संपादक: आचार्य रामचंद्र शुक्ल) द्वितीय सेमेस्टर (Second Semester) के अंतर्गत पढ़ाया जाता है। यह पुस्तक दूसरे सेमेस्टर के मध्यकालीन काव्य प्रश्न-पत्र के पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा है। भ्रमरगीत सार की व्याख्या     पद क्रमांक 88 व्याख्या  -  सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल bhrmar-geet-sar-surdas-ke-pad - 88 श्री कृष्ण का वचन उद्धव-प्रति 88. राग गौरी ऊधो ! क्यों राखौं ये नैन ?  सुमिरि सुमिरि गुन अधिक तपत हैं सुनत तिहारो बैन।। हैं जो मन हर बदनचंद के सादर कुमुद चकोर। परम-तृषारत सजल स्यामघन ...

भ्रमर गीत सार : सूरदास पद क्रमांक 24 सप्रसंग व्याख्या By Khilawan

Bhramar Geet Saar Ki Vyakhya अगर आप हमारे ब्लॉग को पहली बार विजिट कर रहे हैं तो आपको बता दूँ की इससे पहले हमने  भ्रमर गीत के पद क्रमांक 23 की व्याख्या  को अपने इस ब्लॉग questionfieldhindi.blogspot.com में पब्लिस किया था। आज हम  भ्रमर गीत पद क्रमांक 24 की सप्रसंग व्याख्या  के बारे में जानेंगे तो चलीये शुरू करते हैं। भ्रमरगीत सार की व्याख्या पद क्रमांक 24 व्याख्या  - सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल पद क्रमांक 24 जोग ठगौरी ब्रज न बिकैहे। यह व्योपार तिहारो ऊधो ! ऐसोई फिरि जैहै।। जापै लै आए हौ मधुकर ताके उर न समैहै। दाख छाँड़ि कै कटुक निम्बौरी को अपने मुख खैहै ? मूरी के पातन के केना को मुक्ताहल दैहै। सूरदास प्रभु गुनहि छाँड़ि कै को निर्गुन निबैहै।।24।। शब्दार्थ : ठगौरी=जादू, ठगाई से भरा सौदा। फिरि जैहैं=लौटा दिया जाएगा। जापै=जिसके पास। कटुक=कड़वी। निवौरी=नीम का फल। खैहै=खाएगा। केना=सौदा, बदले में। मुक्ताहक=मोती। निखैहैं=निवाएगा, साधन करेगा। संदर्भ :  प्रस्तुत पद्यांश हमारे एम. ए. हिंदी साहित्य के पाठ्यपुस्तक के हिंदी साहित्य के द्वितीय सेमेस्टर के प्रश्न पत्र ...