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विज्ञापन लेखन रेडियो विज्ञापन

  विज्ञापन लेखन

विज्ञापन का अर्थ एवं परिभाषा - 'विज्ञापन' का शाब्दिक अर्थ है कि वि+ज्ञापन अर्थात विशेष सूचना। सामान्य रूप से विज्ञापन शब्द का अर्थ है सूचना देना। विज्ञापन शब्द अंग्रेजी के शब्द 'एडवरटाइजिंग' का हिंदी पर्याय है। ब्रिटेन के विश्वकोश के अनुसार - विज्ञापन वांछित भुगतान प्रदत वह घोषणा है जो किसी सेवा या वस्तु की बिक्री, प्रोत्साहन किसी विचार के विकास अथवा कोई अन्य प्रभाव उत्पन्न करने के उद्देश्य से की गई हो।"

 वृहत हिंदी कोश के अनुसार - समझाना, सूचना देना, इश्तहार, निवेदन, प्रार्थना।

डॉ नगेंद्र द्वारा संपादित "मानविकी परिभाषा कोश" उसके अनुसार - 'परचे, परिपत्र, पोस्टर अथवा पत्र-पत्रिकाओं का द्वारा सार्वजनिक घोषणा।"

शेल्डन के अनुसार - "विज्ञापन वह व्यवसायिक शक्ति है जिसके अंतर्गत मुद्रित शब्दों द्वारा विक्रय बढ़ाने में सहायता मिलती है, ख्याती का निर्माण होता है और साख बढ़ती है।"

लश्कर की दृष्टि में - "विज्ञापन मुद्रण के रूप में विक्रय कला है।"

उपर्युक्त पर परिभाषाओं से स्पष्ट है कि विज्ञापन में संप्रेषण की कला है। संप्रेषण का मूल्य दिया जाता है। विज्ञापन का उद्देश्य जनता को सूचित करना अथवा उसे प्रभावित करना है।

 वर्गीकरण - विज्ञापनों को अनेक वर्गों में विभाजित किया जा सकता है जैसे- उद्देश्य के आधार पर, गुण के आधार पर, मांग के आधार पर, श्रोता या पाठक के आधार पर औद्योगिक विज्ञापन, वित्तीय विज्ञापन, भौगोलिक पहुंच के आधार पर विज्ञापन और माध्यमों के आधार पर विज्ञापनों का वर्गीकरण।

माध्यम के आधार पर विज्ञापनों का वर्गीकरण - संभवतः विज्ञापनों का सबसे लोकप्रिय एवं स्वीकार्य वर्गीकरण है। हर माध्यम के अपनी विशेषताएं हैं और इन्हीं विशेषताओं और गुणों को देखकर विज्ञापनकर्ता इन माध्यमों का चुनाव करते हैं माध्यमों के आधार पर विज्ञापनों का इस प्रकार वर्गीकरण किया जा सकता है-

  1. प्रेस विज्ञापन 
  2. बाह्य विज्ञापन 
  3. टीवी विज्ञापन 
  4. रेडियो विज्ञापन 
  5. सिनेमा विज्ञापन 
  6. डाक विज्ञापन 
  7. प्वायंट ऑफ़ पर्चेस विज्ञापन 
  8. अन्य विज्ञापन

 विज्ञापन के माध्यम - विज्ञापन माध्यम से तात्पर्य उन तरीकों या साधनों से है वह होता है जिनके द्वारा विज्ञापन प्रस्तुत किया जाता है। किसी पत्रिका समाचार-पत्र में सिनेमा भवन में चित्रपट पर, दिखाया जाता है। उसे रेडियो पर भी सुना जाता है। यहां पत्रिका, सिनेमा, रेडियो एवं पोस्टर विज्ञापन के अलग-अलग माध्यम है।

 मुख्यतः विज्ञापन के माध्यम दो प्रकार के होते हैं-

  1. प्रत्यक्ष विज्ञापन 
  2. अप्रत्यक्ष विज्ञापन

 अप्रत्यक्ष विज्ञापन के भी दो प्रकार हैं-

  1. आंतरिक विज्ञापन 
  2. बाह्य विज्ञापन

अप्रत्यक्ष आंतरिक विज्ञापन निम्नांकित माध्यमों से किया जाता है-

  1.  प्रेस,
  2. रेडियो,
  3.  टीवी, 
  4. सिनेमा।

रेडियो विज्ञापन - रेडियो विज्ञापन अप्रत्यक्ष आंतरिक विज्ञापन है। जो विज्ञापन या सूचनाएं रेडियो के माध्यम से पहुंचाई जाती हैं उसे रेडियो विज्ञापन कहते हैं। रेडियो विज्ञापन का आधार ध्वनि एवं वाणी है। आजकल संसार के विभिन्न भागों में आकाशवाणी के प्रसारण केंद्र से विज्ञापनों के प्रसारण हो रहे हैं। रेडियो विज्ञापन आय का एक अच्छा स्रोत बन गया है  क्योंकि विज्ञापक इसके लिए कुछ भुगतान करते हैं।

रेडियो के माध्यम से विज्ञापन या तो तात्कालिक घोषणाओं द्वारा या परिवर्तित कार्यक्रमों द्वारा किया जाता है। तात्कालिक घोषणाएं सिर्फ विज्ञापन का संदेश पहुंचाती है जबकि कार्यक्रमों में विज्ञापन संदेश के साथ-साथ मनोरंजन या रूची की अन्य बातें भी शामिल होती हैं।

रेडियो विज्ञापन संयुक्त राज्य अमेरिका में  अधिक प्रचलित है। भारत में आकाशवाणी ने 1 नवंबर 1967 से  विज्ञापनों का संदेश पहुंचाना शुरू किया है। हमारे देश में रेडियो द्वारा विज्ञापन की प्रेरणा रेडियो सिलोन (लंका) के व्यापारिक विज्ञापन विभाग की लोकप्रियता से मिली है। रेडियो सीलोन के अनेक कार्यक्रम भारतीय युवा वर्ग के बीच काफी लोकप्रिय थे जैसे - बिनाका गीतमाला।

रेडियो विज्ञापन से लाभ - रेडियो विज्ञापन कराने से सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि संदेश सुदूर क्षेत्रों में गांव-गांव तक ग्राहकों के घरों में पहुंचाया जाता है। श्रोता अवकाश के क्षणों में रेडियो से विज्ञापन सुनते हैं और जो कुछ भी सुनते हैं उसका काफी प्रभाव होता है क्योंकि वे उस समय प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं। फिर मनोरंजन कार्यक्रम के साथ-साथ विज्ञापन सुनने में नीरसता का अनुभव नहीं होता।

 रेडियो विज्ञापन की सीमाएं - किंतु रेडियो विज्ञापन की अनेक सीमाएं भी हैं-

  1. रेडियो कार्यक्रम वही सुन सकते हैं, जिनके पास रेडियो हो और साथ ही साथ सुनने का अवकाश हो। भारत में अभी भी अधिकांश लोगों के पास रेडियो नहीं है।
  2. रेडियो विज्ञापन अदृश्य विज्ञापन है क्योंकि यह श्रव्य के है इसलिए उसमें चित्र देना संभव नहीं है। अतएव विज्ञापन का प्रभाव गहरा नहीं हो पाता।
  3. रेडियो द्वारा बार-बार ज्ञापन देना आवश्यक होता है ताकि श्रोता भूलने न पाए और जब एक विशेष विज्ञापन बार-बार दिया जाता है तब श्रोता उसे सुनते-सुनते ऊब जा सकते हैं।
  4.  रेडियो विज्ञापन मांगा होता है।
  5. किसी देश की सरकार रेडियो को व्यवसायिक वर्ग के हाथों मनमाने ढंग से उपयोग किए जाने की अनुमति नहीं देती। अतएव रेडियो विज्ञापन नियंत्रित होता है और इस प्रकार इसका योगदान पूरा ही हो सकता है।

 रेडियो से प्रसारित होने वाले कतिपय विज्ञापनों के नमूने-

  1. कहे समय का इकतारा। अक्षर अक्षर दीप जले -- फैले शिक्षा का उजियारा।
  2. शिक्षा है अनमोल रतन। पढ़ने का सब करो जतन। (राष्ट्रीय साक्षरता मिशन)

 इसी तरह का एक और संदेश है-

पूरब से सूर्य उगा फैला उजियारा।

 जागी हर दिशा दिशा,

 जागा जग सारा। 

 चलो पढ़ाई कुछ कर दिखाएं।। (राष्ट्रीय साक्षरता मिशन)

रेडियो पूर्णतः श्रव्य माध्यम है इसलिए विज्ञापन भी उसी दृष्टि से तैयार किए जाते हैं। भाषा में सरलता, संक्षिप्तता था तथा माधुर्य होता है। उच्चारण में विशेष कौशल एवं बलाघात के प्रयोग पर बल दिया जाता है ताकि वह विज्ञापन अत्यंत प्रभावशाली बनकर श्रोता या ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर सके।

आकाशवाणी के माध्यम से प्रसारित विज्ञापनों में समय का अत्यंत महत्व होता है। समान्यतः विज्ञापन की अवधि 10 सेकंड 20 सेकंड और अधिक से अधिक 30 सेकंड हो सकती है। इतने कम समय में अत्यंत प्रभावशाली विज्ञापन पूर्ण रूप से दिया जाना आवश्यक होता है। इसके लिए ऐसे विज्ञापन तैयार करना चाहिए जिसमें सुर और समयावधि का अत्यंत खूबी के साथ तालमेल हो।

आकाशवाणी पर प्रसारित विज्ञापन का एक और लोकप्रिय प्रकार है 'प्रायोजित कार्यक्रम'। सामान्यतः लोगों के मनोरंजन हेतु ऐसे कार्यक्रम कंपनियों, फर्मो या व्यापारिक संस्थाओं द्वारा 15 मिनट, 30 मिनट अथवा कभी-कभी 60 मिनट की निर्धारित अवधि के लिए प्रायोजित किए जाते हैं। कार्यक्रम के प्रारंभ मध्य और अंत में प्रायोजक के उत्पाद के बारे में आकर्षक रूप से विज्ञापन दिया जाता है और संबंधित कार्यक्रम उस विशिष्ट कंपनी द्वारा प्रायोजित किए जाने की घोषणा भी की जाती है। उदाहरण के लिए 'बिनाका गीतमाला' कोहिनूर, एचएमवी के सितारे आदि में प्रायोजित कार्यक्रम है।

vigyapan lekhan (radio vigyapan)

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