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काव्य के गुणों और रीति का परस्पर संबंध स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 4. काव्य के गुणों और रीति का परस्पर संबंध स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर - 

काव्य के गुण और रीति का परस्पर संबंध

आचार्यों ने काव्य की शोभा बढ़ाने वाले धर्मों को अलंकार कहा है। गुणों का संबंध शब्द से है। कुछ आचार्यों ने शब्द के दस गुण माने हैं, उनका विरोध करते हुए आचार्य मम्मट ने गुणों की संख्या तीन हीं निश्चित की है। 

गुणों की संख्या दस मानने वाले आचार्य वामन हैं। उनके अनुसार गुण-श्लेष, समाधि, उदारता, प्रसाद, माधुर्य, अर्थव्यक्ति, समता, साकुमार्य, कान्ति तथा ओज। 

संस्कृत आचार्यों ने गुणालङ्कार रीतिभः कहकर गुणों, अलंकारों और रीतियों में समन्वय, समानता और तालमेल का परिचय दिया है। आचार्य वामन ने केवल तीन रीतियों - वैदर्भी, गौड़ी और पाँचाली मानी हैं। आचार्य मम्मट के अनुसार नागरिका, परुषा और कोमला तीन रीतियां हैं। इन वृत्तियों के लक्षणों पर ध्यान दें तो नागरिका रीति और प्रसाद गुण, परुषा रीति और ओज गुण तथा कोमल रीति और माधुर्य गुण एक ही है। इस प्रकार गुणों और वृत्तियों का परस्पर संबंध समझा जा सकता है। 

आपको यह जानकारी कैसे लगी कमेंट में जरूर बताएं। धन्यवाद!

Kavya ke guno aur riti ka paraspar sambandh spashta kijiye?

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