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टी. एस. इलियट के संवेदनशीलता का असाहचर्य को स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 5. टी. एस. इलियट के संवेदनशीलता का असाहचर्य को स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर - उन्नीसवीं शताब्दी तक अंग्रेजी साहित्य में रोमानी एवं मानवतावादी भावनाओं का अधिक प्रचलन था। बीसवीं शताब्दी के आरम्भ में इन दोनों का विरोध होने लगा। तभी 'संवेदनशीलता का असाहचर्य है' शब्द प्रचलन में आया। अगर संवेदना और वस्तुनिष्ठता को जोड़ दें तो 'संवेदनशीलता का असाहचर्य बन जाता है।' यह वाक्यांश अंग्रेजी के शब्द-समूह 'डिसएशोसिएसन सेन्सेबिलिटी' का हिन्दी अनुवाद है। अंग्रेजी के इस शब्द-समूह का अनुवाद डॉ. सत्यदेव मिश्र ने 'भाव-बोध वियोजन' में किया है। संवेदनशीलता का सिद्धांत और भाव-बोध का वियोजन दोनों ही वाक्यांश अपरिचित और दुर्बोध है। इलियट का एक निबन्ध संकलन है— सेलेक्टिड एसेज। इसमें एक निबंध है - दी मैटाफिजीकल पोइंट्स। इसी में इलियट ने स्पष्ट किया है कि अंग्रेजी कविता में पहली 'यूनिफिकेशन ऑफ सेन्सेबिलिटी' अर्थात् भाव-बोध का एकीकरण था। इसके विरोध में इलियट ने 'डिसएसोसिएशन ऑफ सेन्सेबिलिटी' शब्द को प्रचलित किया। इसका तात्पर्य किसी रचना का भला या बुरा होना भाव के साहचर्य पर आधारित है।

T. S. Eliat ke sanvedanshilta ka asahcharya ko spasht kijie.

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