Skip to main content

कोहबर की शर्त किसकी रचना है?

1. कोहबर की शर्त किसकी रचना है?

उत्तर - कोहबर की शर्त केशव प्रसाद मिश्र की रचना है यह एक उपन्यास है जिस पर सन 1982 में नदिया के पार फ़िल्म भी बनी थी। 

जिसमें अभिनेता सचिन पिलगांवकर और अभिनेत्री साधना सिंह ने मुख्य भूमिका निभाई थी।

इसके अलावा एक और फिल्म की कहानी का मुख्य आधार बना जिसका नाम हम आपके हैं कौन है जिसमें सलमान खान और माधुरि दीक्षित मुख्य भूमिका में थे।

यह 1957 में प्रकाशित हुआ था और इसे हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण उपन्यास माना जाता है।

यह उपन्यास ग्रामीण भारत में जाति व्यवस्था और सामाजिक रीति-रिवाजों के मुद्दों का पता लगाता है। 

यह कहानी कोहबर नामक एक युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक गरीब ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखता है। 

कोहबर को एक अमीर जमींदार की बेटी शकुंतला से प्यार हो जाता है, लेकिन उनकी शादी जाति व्यवस्था के कारण असंभव है। 

दोनों प्रेमी सामाजिक रीति-रिवाजों की अवहेलना करते हुए शादी करने का फैसला करते हैं, लेकिन उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। 

 "कोहबर की शर्त" एक मार्मिक कहानी है जो प्यार, त्याग और सामाजिक न्याय के मुद्दों को छूती है। 

यह उपन्यास हिंदी साहित्य में लोकप्रिय रहा है और इसका कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है।

उम्मीद करता हूं यह जानकारी आपको पसंद आई हो।

अन्य पोस्ट आप लिंक पर क्लिक करें और पढ़ें...

◆ साहित्यकार केशव प्रसाद मिश्र

◆ कोहबर की शर्त उपन्यास का मुख्य विषय क्या है?

◆ केशव प्रसाद मिश्र की अन्य कौन सी रचनाएँ प्रसिद्ध हैं?

धन्यवाद!

कोहराब की शर्त किसकी रचना है
कोहराब की शर्त किसकी रचना है?


Comments

Popular posts from this blog

भ्रमरगीत सार : सूरदास पद क्रमांक 88 सप्रसंग व्याख्या By Khilawan

   भ्रमरगीत सार आचार्य रामचंद्र शुक्ल  अगर आप हमारे ब्लॉग को पहली बार विजिट कर रहे हैं तो आपको बता दूँ की इससे पहले हमने  भ्रमर गीत के पद क्रमांक 87 की व्याख्या  को अपने इस ब्लॉग  questionfieldhindi.blogspot.com  में पब्लिस किया था। आज हम  भ्रमर गीत पद क्रमांक 88 की सप्रसंग व्याख्या  के बारे में जानेंगे तो चलीये शुरू करते हैं। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) के एम.ए. हिंदी साहित्य (MA Hindi) के पाठ्यक्रम में ' भ्रमरगीत सार ' (संपादक: आचार्य रामचंद्र शुक्ल) द्वितीय सेमेस्टर (Second Semester) के अंतर्गत पढ़ाया जाता है। यह पुस्तक दूसरे सेमेस्टर के मध्यकालीन काव्य प्रश्न-पत्र के पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा है। भ्रमरगीत सार की व्याख्या     पद क्रमांक 88 व्याख्या  -  सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल bhrmar-geet-sar-surdas-ke-pad - 88 श्री कृष्ण का वचन उद्धव-प्रति 88. राग गौरी ऊधो ! क्यों राखौं ये नैन ?  सुमिरि सुमिरि गुन अधिक तपत हैं सुनत तिहारो बैन।। हैं जो मन हर बदनचंद के सादर कुमुद चकोर। परम-तृषारत सजल स्यामघन ...

किस कवि को 'अभिनव जयदेव' कहा जाता है और क्यों?

22. किस कवि को 'अभिनव जयदेव' कहा जाता है और क्यों? उत्तर - विद्यापति जिनका जन्म उत्तरी बिहार के मिथिला क्षेत्र के वर्तमान मधुबनी जिला के विस्फी गाँव में हुआ था। यह ब्राम्हण परिवार से थे। इन्हें मैथिल कोकिल के नाम से भी जाना जाता है और इन्हें 'अभिनव जयदेव' कहा जाता है, क्योंकि उनकी पदावली पर जयदेव रचित गीतगोविन्द का प्रभाव है।  जयदेव रचित गीतगोविन्द श्री मद भागवत के बाद दूसरी सबसे बड़ी राधा कृष्ण का वणर्न करने वाली रचना है। इन्ही की रचना का प्रभाव इनके रचना पर है इस वजह से यह अभिनव अर्थात नए जयदेव के रूप में आज भी जाने जाते हैं।  Kis kavi ko 'abhinav jaydev' kaha jata hai aur kyon? प्राचीन एवं मध्यकालीन काव्य इकाई-1. चन्दबरदायी : पृथ्वीराज रासो (पद्मावती समय) अतिलघु उत्तरीय प्रश्न आदिकाल के अधिकांश युद्धों का कारण क्या था? पद्मावती समय का नामकरण किस आधार पर किया गया है? पद्मावती समय में किन भाषाओं की अभिसन्धि देखने को मिलती है? 'पद्मावती समय' 'पृथ्वीराज रासो' का कौन-सा समय रहा है? 'पद्मावती समय' का उद्देश्य क्या है? 'पद्मावती समय' क...