Skip to main content

बिलासपुर के बारे में संक्षिप्त जानकारी - Bilaspur in which district

 बिलासपुर के बारे में 

All content taken from bilaspur official website 

बिलासपुर शहर लगभग 400 वर्ष पुराना है और “बिलासपुर” का नाम “बिलासा” नामक महिला के नाम पर रखा गया है।

कई प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद, बिलासपुर ने बहुत कुछ विकसित किया है। बिलासपुर जिला 21.47° से  23.8° उत्तर अक्षांश और 81.14° से 83.15° पूर्व देशान्तर के बीच स्थित है। 

बिलासपुर जिला उत्तर में गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिला, पश्चिम में मुंगेली और कबीरधाम जिला, दक्षिण में बलौदाबाजार-भाटापारा जिला और पूर्व में कोरबा और जांजगीर-चांपा जिला से घिरा हुआ है। 

बिलासपुर के बारे में संक्षिप्त जानकारी - Bilaspur in which district
Image by Khilawan


जिले का क्षेत्रफल 3508.48 वर्ग किलोमीटर है। 

जिले की कुल जनसंख्या लगभग 1625502 है। 

वर्तमान में बिलासपुर जिले में 11 तहसील, 4 ब्लॉक और 708 गांव शामिल हैं। 

रायपुर-भिलाई-दुर्ग ट्राई-सिटी मेट्रो क्षेत्र के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा शहर है। 

छत्तीसगढ़ राज्य उच्च न्यायालय, बिलासपुर के गांव बोदरी में स्थित है। 

जिला बिलासपुर को छत्तीसगढ़ राज्य की न्यायधानी के नाम से भी जाना जाता है। 

बिलासपुर उच्च न्यायालय एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय है। 

बिलासपुर जिले का प्रशासनिक मुख्यालय भी है।

Comments

Popular posts from this blog

भ्रमरगीत सार : सूरदास पद क्रमांक 88 सप्रसंग व्याख्या By Khilawan

   भ्रमरगीत सार आचार्य रामचंद्र शुक्ल  अगर आप हमारे ब्लॉग को पहली बार विजिट कर रहे हैं तो आपको बता दूँ की इससे पहले हमने  भ्रमर गीत के पद क्रमांक 87 की व्याख्या  को अपने इस ब्लॉग  questionfieldhindi.blogspot.com  में पब्लिस किया था। आज हम  भ्रमर गीत पद क्रमांक 88 की सप्रसंग व्याख्या  के बारे में जानेंगे तो चलीये शुरू करते हैं। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) के एम.ए. हिंदी साहित्य (MA Hindi) के पाठ्यक्रम में ' भ्रमरगीत सार ' (संपादक: आचार्य रामचंद्र शुक्ल) द्वितीय सेमेस्टर (Second Semester) के अंतर्गत पढ़ाया जाता है। यह पुस्तक दूसरे सेमेस्टर के मध्यकालीन काव्य प्रश्न-पत्र के पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा है। भ्रमरगीत सार की व्याख्या     पद क्रमांक 88 व्याख्या  -  सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल bhrmar-geet-sar-surdas-ke-pad - 88 श्री कृष्ण का वचन उद्धव-प्रति 88. राग गौरी ऊधो ! क्यों राखौं ये नैन ?  सुमिरि सुमिरि गुन अधिक तपत हैं सुनत तिहारो बैन।। हैं जो मन हर बदनचंद के सादर कुमुद चकोर। परम-तृषारत सजल स्यामघन ...

भारतीय साहित्य के अध्ययन की तीन समस्याओं की चर्चा कीजिये।

1. भारतीय साहित्य के अध्ययन की तीन समस्याओं की चर्चा कीजिये।  उत्तर - भारतीय साहित्य के अध्ययन की तीन समस्याएं - भाषाओँ की विविधता  अनुवाद की समस्या  साहित्यिक अभिरुचि का अभाव  1. भाषाओं की विविधता - भारत एक ऐसा देश है जिसमें अनेक भाषाएँ एवं बोलियाँ बोली जाती हैं। इन सभी भाषाओं को सीख पाना किसी एक व्यक्ति के लिए दुष्कर कार्य है। यदि कोई व्यक्ति कुछ भाषाएँ सीख भी ले तो उन भाषाओं के अंतर्गत आने वाली बोलीयों को सीख पाना और भी कठिन है।  2. अनुवाद की समस्या - भारतीय भाषाओं में रचित श्रेष्ठ साहित्य का अनुवाद यदि राष्ट्रभाषा 'हिंदी' में सुलभ कराया जाए और हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रत्येक भारतीय नागरिक पढ़े समझे तभी भारतीय साहित्य से हम परिचित हो सकते हैं।  3. साहित्य अभिरुचि का आभाव - भारत एक विशाल देश है तथा बहुसंख्यक लोगों में साहित्यिक अभिरुचि का आभाव है।  इसके अलाव और भी समस्याएं हैं... Bhartiya sahitya ke adhyayan ki teen samasyaon ki charcha kijiye.

रामचरितमानस सुंदरकांड की चौपाई - sundar kand by tulsidas

सुंदरकांड के 60 दोहे तुलसीदास जी के द्वारा लिखा गया रामचरित मानस का पंचम सोपान जिसे सुंदरकाण्ड के नाम से जाना जाता है। यहां पर गोरखपुर प्रकाशन से प्रकाशित सुंदरकाण्ड को लिखा गया है। यह  एम.ए.हिंदी साहित्य द्वितीय सेमेस्टर षष्ठ प्रश्न पत्र  के लिए भी उपयोगी हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस सुन्दरकाण्ड की जो की हमारे हिंन्दी साहित्य के द्वितीय सेमेस्टर के षष्ठ प्रश्नपत्र में है। Sunderkand path Hanuman श्री गणेशाय नमः श्री जानकीवल्ल्भो विजयते श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान सुंदरकांड की चौपाई शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रम्हाशंभुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम । रामाख्यं जगदीश्वरम सुरगुरुं मायामनुष्यम हरिं । वन्देअहं करुणाकरं रघुवरं भुपालचूडामणिम ।। 1 ।। ...