Skip to main content

कॉलरिज के अनुसार साहित्यकार अपनी किस शक्ति के आधार पर सर्वजन मनोहारिणी रचनाएँ प्रस्तुत करता है?

1. कॉलरिज के अनुसार साहित्यकार अपनी किस शक्ति के आधार पर सर्वजन मनोहारिणी रचनाएँ प्रस्तुत करता है?

उत्तर - कॉलरिज के अनुसार साहित्यकार अपनी कल्पना शक्ति के आधार पर सर्वजन मनोहारिणी रचनाएँ प्रस्तुत करता है। 

 Colrij ke anusar sahityakar apni kis shakti ke aadhar par sarvjan manoharini rachanaen prastut karta hai?

Kalpana sakti ke aadhar par.

Comments

Popular posts from this blog

भ्रमरगीत सार : सूरदास पद क्रमांक 88 सप्रसंग व्याख्या By Khilawan

   भ्रमरगीत सार आचार्य रामचंद्र शुक्ल  अगर आप हमारे ब्लॉग को पहली बार विजिट कर रहे हैं तो आपको बता दूँ की इससे पहले हमने  भ्रमर गीत के पद क्रमांक 87 की व्याख्या  को अपने इस ब्लॉग  questionfieldhindi.blogspot.com  में पब्लिस किया था। आज हम  भ्रमर गीत पद क्रमांक 88 की सप्रसंग व्याख्या  के बारे में जानेंगे तो चलीये शुरू करते हैं। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) के एम.ए. हिंदी साहित्य (MA Hindi) के पाठ्यक्रम में ' भ्रमरगीत सार ' (संपादक: आचार्य रामचंद्र शुक्ल) द्वितीय सेमेस्टर (Second Semester) के अंतर्गत पढ़ाया जाता है। यह पुस्तक दूसरे सेमेस्टर के मध्यकालीन काव्य प्रश्न-पत्र के पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा है। भ्रमरगीत सार की व्याख्या     पद क्रमांक 88 व्याख्या  -  सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल bhrmar-geet-sar-surdas-ke-pad - 88 श्री कृष्ण का वचन उद्धव-प्रति 88. राग गौरी ऊधो ! क्यों राखौं ये नैन ?  सुमिरि सुमिरि गुन अधिक तपत हैं सुनत तिहारो बैन।। हैं जो मन हर बदनचंद के सादर कुमुद चकोर। परम-तृषारत सजल स्यामघन ...

भ्रमर-गीत-सार : सूरदास पद क्रमांक 1 की व्याख्या By Khilawan

Bhramar Geet Saar Ki Vyakhya अगर आप हमारे ब्लॉग को पहली बार विजिट कर रहे हैं तो आपको बता दूँ की इससे पहले हमने  भ्रमर गीत सार के पद क्रमांक 1 से लेकर पद क्रमांक 10 को प्रकाशित किया था अब हम उनकी व्याख्या  को अपने इस ब्लॉग questionfieldhindi.blogspot.com में पब्लिस कर रहे हैं। आज हम  भ्रमर गीत  पद क्रमांक 1 की सप्रसंग व्याख्या  के बारे में जानेंगे तो चलीये शुरू करते हैं... भ्रमरगीत सार की व्याख्या भ्रमरगीतसार पद क्रमांक 1 व्याख्या आज के इस पोस्ट में हम बात करने वाले हैं भ्रमरगीत सार के पद क्रमांक 1 की  सप्रसंग व्याख्या को लेकर जिसमें हम विभिन्न कठिन शब्दों के अर्थ भी जानेंगे। सबसे पहले शब्दार्थ को  जानते हैं फिर बात करेंगे भ्रमरगीत के संदर्भ और प्रसंग तथा व्याख्या की। चलिए शुरू करते हैं..   पहिले करि परनाम नंद सो समाचार सब दीजो।  औ वहां वृषभानु गोप सो जाय सकल सुधि लीजो।।  श्रीदाम आदिक सब ग्वालन मेरे हुतो भेंटियो।  सुख-सन्देस सुनाय हमारी गोपिन को दुख मेटियो।।  मंत्री एक बन बसत हमारो ताहि मिले सचु पाइयो।  सावधान है ...