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रंगमंच की दृष्टि से हयवदन नाटक की समीक्षा कीजिये।

1. रंगमंच की दृष्टि से हयवदन नाटक की समीक्षा कीजिये। 

उत्तर - रंगमंच की दृष्टि से हयवदन नाटक की समीक्षा निम्न बिंदुओं के आधार पर किया गया है -

  1. कथावस्तु 
  2. पात्र एवं चरित्र-चित्रण 
  3. संवाद 
  4. देशकाल वातावरण 
  5. भाषा-शैली 
  6. उद्देश्य 
  7. अभिनेता 
1. कथावस्तु - हयवदन नाटक की कथावस्तु रंगमंच की दृष्टि से बहुत ही सरल है लेकिन इसमें कई जगहों पर ऐसा दृश्य है जिसे रंगमंच पर दिखा पाना संभव नहीं है। 

2. पात्र एवं चरित्र चित्रण - हयवदन नाटक में बहुत ही अच्छे तरिके से पात्रों को प्रस्तुत किया गया है प्रमुख पात्र हैं - हयवदन, भागवत, देवदत्त, कपिल, पद्मिनी आदि। हयवदन-अभिशप्त पात्र, देवदत्त, कपिल-नायक, पद्मिनी - नायिका है। 

3. संवाद - हयवदन नाटक की संवाद योजना पात्रों के अनुकूल है बहुत ही स्पष्ट है किसी भी प्रकार की कमी नहीं है उसके वातावरण के अनुकूल है। 

4. देशकाल एवं वातावरण - हयवदन नाटक में रंगमंच का चित्रण अर्थात वातावरण है जिसमें जंगल से भागता हुआ आदमी आता है और एक नगर के बारे में बताया गया है जहां पर नाटक चल रहा होता है। 

5. भाषा-शैली - हयवदन नाटक रंगमंच पर आसानी से प्रस्तुत किया जा सकता है क्योकि इसमें जो भाषा-शैली अपनाई गई है वह सरल एवं वातावरण के अनुकूल है। 

6. उद्देश्य - हयवदन नाटक में रंगमंच में उद्देश्य की पूर्ति आसानी से किया जा सकता है क्योकि इसमें एक आसक्त नारी की मनः स्थिति का वर्णन और मनोभाव को दिखाया गया है। यही इस नाटक का उद्देश्य है। 

7. अभिनेयता - यह नाटक की प्रमुख विशेषता है और हयवदन इस नाटक का प्रमुख अभिनेय पात्र होने के साथ-साथ आकर्षण का केंद्र भी है तथा दो नायक कपिल और देवदत्त हैं जो मुख्य भूमिका में होते हैं। 

निष्कर्ष - इस संबंध में नाटककार को नाटकों का रूप आकार, दृश्यों की सजावट और उसके उचित संतुलन परिधान, व्यवस्था प्रकाश व्यवस्था आदि करने में कोई परेशानी नहीं होगी इस नाटक में समान्य मंच में मंचन किया जा सकता है। 

Rangmanch ki drishti se hayvadan natak ki samiksha kijiye?

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