Skip to main content

'साकेत' की नायिका कौन है?

10. 'साकेत' की नायिका कौन है?

उत्तर - साकेत हिंदी साहित्य के महान कवि मैथिलीशरण गुप्त की रचना है जिसका प्रथम प्रकाशन 1931 में हुआ और उन्होंने इस महाकाव्य रचना की थी। साकेत की रचना का मुख्य उद्देश्य था इसकी नायिका उर्मिला का चरित्र चित्रण करना। 

साकेत की नायिका लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला है जो कि 14 वर्ष के वनवास में अपने पति के चले जाने के बाद भी कुछ न कहती हैं और वियोग की बात एक झलक भी हमें इस महाकव्य में देखने को नहीं मिलता इसमें उन्हें एक नायिका के तौर पर दिखाया गया है। 

Saket ki nayika kaun hai?

छायावाद एवं पूर्ववर्ती काव्य 

इकाई 1. साकेत छायावाद एवं पूर्ववर्ती काव्य - मैथलीशरण गुप्त

  1. 'साकेत' में 'साकेत' का अर्थ क्या है?
  2. "निरखी सखी में खँजन आए।" किसका कथन है?
  3. "मुझे फूल मत मारो, मैं अबला बाला वियोगिनी, कुछ तो दशा विचारो", ये पंक्तियाँ 'साकेत' के किस सर्ग में है?
  4. "राम तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है, कोई कवि बन जाए सहज सम्भाव्य है।" ये पंक्तियाँ किस कवि की हैं?
  5. "सन्देश यहाँ मैं नहीं, स्वर्ग का लाया, इस भूतल को ही स्वर्ग बनाने आया।" यह किसका कथन है?
  6. "साकेत" के नवम सर्ग में कितने प्रकार के गीत मिलते हैं?
  7. 'दोनों ओर प्रेम पलता है' कविता 'साकेत' के किस सर्ग में है?
  8. 'सखि निरख नदी की धारा' कविता 'साकेत' के किस सर्ग में है?
  9. 'साकेत' का कौन-सा सर्ग पाठ्यक्रम में है?
  10. 'साकेत' की नायिका कौन है?
  11. 'साकेत' के नवम सर्ग के अनुसार उर्मिला उपवन में क्या खुलवाने को अपनी सखी से कहती है?
  12. 'साकेत' के नवम सर्ग के अनुसार चित्रकूट-पर्वत पर कितने जीवन विहार करते हैं?
  13. 'साकेत' के नवम सर्ग में किसका विरह वर्णन है?
  14. 'साकेत' के रचयिता कौन हैं?
  15. 'साकेत' नामक महाकाव्य किस काल की रचना है?
  16. 'साकेत' में सबसे बड़ा सर्ग कौन-सा है?
  17. इनमें से कौन सा गीत साकेत का है?
  18. क्या मैथिलीशरण गुप्त छायावादी कवि हैं?
  19. गुप्तजी ने कौन-सा महाकाव्य लिखा है?
  20. छायावाद के किस कवि ने छंद मुक्ति की बात की है?
  21. छायावाद में किस कवि को विद्रोही कवि कहा गया है?
  22. द्वेदी युग की प्रमुख काव्य-भाषा कौन-सी थी?
  23. द्वेदी युगीन किसी एक महाकाव्य का नाम लिखिए?
  24. भारत-भारती किसकी रचना है?
  25. महात्मागांधी ने किसे राष्ट्र कवि घोषित किया था?
  26. मैथिलीशरण गुप्त अपना काव्य गुरु किसे मानते थे?
  27. मैथिलीशरण गुप्त अपना गुरु किसे मानते थे?
  28. मैथिलीशरण गुप्त का जन्म किस सन में हुआ था?
  29. मैथिलीशरण गुप्त का जीवन काल कब से कब तक रहा?
  30. मैथिलीशरण गुप्त किस वर्ग के कवि हैं?
  31. मैथिलीशरण गुप्त की जन्म भूमि कहाँ है?
  32. मैथिलीशरण गुप्त की तीन काव्य रचनाओं के नाम लिखिए?
  33. मैथिलीशरण गुप्त को मंगला प्रसाद पारितोषिक किस ग्रंथ की रचना पर मिला?
  34. मैथिलीशरण गुप्त को मंगलाप्रसाद पारितोषिक किस ग्रंथ पर मिला?
  35. मैथिलीशरण गुप्त को स्नेह से लोग किस सम्बोधन से बुलाते थे?
  36. मैथिलीशरण गुप्त ने किस उपनाम से अपनी पहली कविता द्वेदी जी के पास भेजी?
  37. मैथिलीशरण गुप्त पहले अपनी रचना किस पत्रिका में छपवाया करते थे?
  38. मैथिलीशरण गुप्ता की कौन-सी कविता पहली बार 'सरस्वती पत्रिका' में छपी थी?
  39. यशोधरा, अनघ, पंचवटी और साकेत इनमें से कौन खंडकाव्य नही है।
  40. साकेत का कौन-सा सर्ग उर्मिला विरह वर्णन से संबंधित है?
  41. साकेत का नामकरण किस आधार पर किया गया?
  42. साकेत का प्रकाशन कब हुआ था?
  43. साकेत की रचना का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
  44. साकेत की रचना का मूल उद्देश्य क्या है?
  45. साकेत की रचना किस काल में हुई?
  46. साकेत में कितने सर्ग हैं?
  47. साकेत में किसके चरित्र को नवीन एवं मनोवैज्ञानिक आधार पर चित्रित किया गया है?
  48. 'साकेत' में किसकी विरह-वेदना को विशेष महत्व दिया गया है?
  49. 'साकेत' किस भाषा में रचित है?

इकाई-1. का हमारा अति लघु उत्तरीय प्रश्न समाप्त होता है। पिछले अध्याय के अति लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर के लिए यहां निचे दिए लिंक पर क्लिक करें और पहुँचे -

इकाई-1. मैथलीशरण गुप्त - साकेत (नवम सर्ग) अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

इकाई-2. जयशंकर प्रसाद - कामायनी (चिंता, श्रद्धा, इड़ा सर्ग) अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

इकाई-3. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला (राम की शक्ति पूजा, तुलसीदास प्रथम छंद) अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

इकाई-4. द्रुतपाठ के कवि अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

आपके कोई सुझाव हो तो निचे दिए लिंक के माध्यम से हमें बताएँ आपके सुझावों पर कुछ न कुछ प्रतिक्रियाएँ जरूर दिए जाएँगे। 

Comments

Popular posts from this blog

भ्रमरगीत सार : सूरदास पद क्रमांक 88 सप्रसंग व्याख्या By Khilawan

   भ्रमरगीत सार आचार्य रामचंद्र शुक्ल  अगर आप हमारे ब्लॉग को पहली बार विजिट कर रहे हैं तो आपको बता दूँ की इससे पहले हमने  भ्रमर गीत के पद क्रमांक 87 की व्याख्या  को अपने इस ब्लॉग  questionfieldhindi.blogspot.com  में पब्लिस किया था। आज हम  भ्रमर गीत पद क्रमांक 88 की सप्रसंग व्याख्या  के बारे में जानेंगे तो चलीये शुरू करते हैं। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) के एम.ए. हिंदी साहित्य (MA Hindi) के पाठ्यक्रम में ' भ्रमरगीत सार ' (संपादक: आचार्य रामचंद्र शुक्ल) द्वितीय सेमेस्टर (Second Semester) के अंतर्गत पढ़ाया जाता है। यह पुस्तक दूसरे सेमेस्टर के मध्यकालीन काव्य प्रश्न-पत्र के पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा है। भ्रमरगीत सार की व्याख्या     पद क्रमांक 88 व्याख्या  -  सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल bhrmar-geet-sar-surdas-ke-pad - 88 श्री कृष्ण का वचन उद्धव-प्रति 88. राग गौरी ऊधो ! क्यों राखौं ये नैन ?  सुमिरि सुमिरि गुन अधिक तपत हैं सुनत तिहारो बैन।। हैं जो मन हर बदनचंद के सादर कुमुद चकोर। परम-तृषारत सजल स्यामघन ...

भ्रमर-गीत-सार : सूरदास पद क्रमांक 1 की व्याख्या By Khilawan

Bhramar Geet Saar Ki Vyakhya अगर आप हमारे ब्लॉग को पहली बार विजिट कर रहे हैं तो आपको बता दूँ की इससे पहले हमने  भ्रमर गीत सार के पद क्रमांक 1 से लेकर पद क्रमांक 10 को प्रकाशित किया था अब हम उनकी व्याख्या  को अपने इस ब्लॉग questionfieldhindi.blogspot.com में पब्लिस कर रहे हैं। आज हम  भ्रमर गीत  पद क्रमांक 1 की सप्रसंग व्याख्या  के बारे में जानेंगे तो चलीये शुरू करते हैं... भ्रमरगीत सार की व्याख्या भ्रमरगीतसार पद क्रमांक 1 व्याख्या आज के इस पोस्ट में हम बात करने वाले हैं भ्रमरगीत सार के पद क्रमांक 1 की  सप्रसंग व्याख्या को लेकर जिसमें हम विभिन्न कठिन शब्दों के अर्थ भी जानेंगे। सबसे पहले शब्दार्थ को  जानते हैं फिर बात करेंगे भ्रमरगीत के संदर्भ और प्रसंग तथा व्याख्या की। चलिए शुरू करते हैं..   पहिले करि परनाम नंद सो समाचार सब दीजो।  औ वहां वृषभानु गोप सो जाय सकल सुधि लीजो।।  श्रीदाम आदिक सब ग्वालन मेरे हुतो भेंटियो।  सुख-सन्देस सुनाय हमारी गोपिन को दुख मेटियो।।  मंत्री एक बन बसत हमारो ताहि मिले सचु पाइयो।  सावधान है ...