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डॉक्टर नरेंद्र देव वर्मा - छत्तीसगढ़ के कवि का जीवन परिचय

छत्तीसगढ़ के कवि नरेंद्र देव वर्मा छत्तीसगढ़ी साहित्य के प्रख्यात कवि एवं रचनाकार हैं। जिन्होंने प्रशिद्ध गीत अरपा पैरी के धार की रचना की है। 

नरेंद्र देव वर्मा का जीवन परिचय 

डॉक्टर नरेंद्र वर्मा छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध साहित्यकार हैं, इनके पिता का नाम स्व. धनीराम वर्मा है जो की एक शिक्षक थे। इसके साथ ही इन्हें(स्व. धनीराम वर्मा) स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में भी जाना जाता है। डॉ. नरेंद्र देव वर्मा एक साहित्यकार होने के साथ साथ कुशल वक्ता एवं गायक भी थे छत्तीसगढ़ी गीतों में इनका बहुत बड़ा योगदान रहा है।


ममता चंद्राकर को भी इनके द्वारा लिखे गीतों से बहुत प्रसिद्धी मिली साथ ही इनके द्वारा लिखा गया गीत "अरपा पैरी के धार, महानदी हे आपार" बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध रहा है। डॉ. नरेंन्द्र देव वर्मा द्वारा लिखा गया "अरपा पैरी की धार" लोकगीत को अभी साल 2020 में छत्तीसगढ़ का राज्य गीत घोषित किया गया है।

जिसे छत्तीसगढ़ के विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों के आरम्भ में गाया जाएगा। यह इनके लिए बहुत ही गर्व की बात है। छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़ी साहित्य का इतिहास एवं विकास में इनका बहुत बड़ा योगदान रहा है।

डॉ. नरेंद्र देव वर्मा का जीवन विवेकानंद के जीवन से बहुत ही प्रभावित था और छत्तीसगढ़ी संस्कृति से वह ओतप्रोत लेखक थे साथ ही इन्होने हिंदी साहीत्य में भी अपना योगदान दिया।

पहले इन्होने हिन्दी में ही लेखन के बारे में सोचा था लेकिन जब इन्होने देखा की छत्तीसगढ़ी भाषा का विकास डगमगा रहा है तब जाके इन्होने ही छत्तीसगढ़ी भाषा के आधार के रूप में इस छत्तीसढ़ की बोली को संभाला।
साथ ही डॉ. नेरन्द्र देव वर्मा एक अच्छे उदघोषक भी थे जिन्होंने 'सोनहा बिहान' में अपनी उदघोषण कौशल का बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया है। जिसमें इन्होने रात रात भर भी उदघोषण का कार्य किया।

स्व. धनीराम वर्मा के पांच पुत्रों में केवल डॉ. नरेंद्र देव वर्मा ने ही विवाह और गृहस्थ जीवन को अपनाया था इसके अलावा इनके चार और भाइयों ने विवाह ही नही किये थे।

यह आपको शायद पता हो की नरेंद्र देव वर्मा की बड़ी लड़की मुक्ति का विवाह भूपेश बघेल से हुआ है अर्थात डॉ. नरेंद्र देव वर्मा भूपेश बघेल के स्वसुर हैं।

कवि नरेंद्र देव वर्मा की शिक्षा -

डॉ. नरेंद्र देव वर्मा ने पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी से छत्तीसगढ़ी भाषा व साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। इन्होने कई प्रतियोगिताओ में भाग लिया था और एक बार तो इन्होने डॉ. विष्णु प्रसाद पांडेय को भी पराजित कर दिया था।

यह एक समान्य विधार्थी थे इनकी प्रतिभा को और ज्यादा चिंगारी तब मिली जब इन्होंने बी.ए. किया इसके बाद से ही वो अच्छे से पढ़ाई में ख्याति प्राप्त करने लगे।

नरेंद्र देव वर्मा का व्यवसाय -

डॉ. नरेंद्र देव वर्मा मुख्य रूप से लेखक होने के साथ-साथ चिंतक, सम्पादक और मंच संचालक भी रहें हैं। छत्तीसगढ़ी लोकमंच को आगे बढ़ाने में विशेष योगदान इनका रहा और इन्होने संचालन के क्षेत्र में अपनी अलग ही छाप बना ली थी।

छत्तीसगढ़ी कविता में भी इनका मन खूब रमा और उपन्यास रचना का कार्य भी इन्होने किया है। सोनहा बिहान नाटक का संचालन डॉ. नरेंद्र देव वर्मा ही किया करते थे। भाषा विज्ञानी भी रहे।

कवि नरेंद्र देव वर्मा की प्रमुख रचनाये -

  • छत्तीसगढ़ी गीत संग्रह - अपूर्वा
  • हिंदी उपन्यास - सुबह की तलाश 
  • विकास वर्णन - छत्तीसढ़ी भाषा का उद्विकास, 
  • स्वछंदतावाद एवं प्रयोगवाद का वर्णन - हिन्दी स्वछंदवाद प्रयोगवादी, 
  • नयी कविता को लेकर रचना - नयी कविता सिद्धांत एवं सृजन, 
  • हिंदी में नई स्वछंदतावाद को लेकर रचना -हिंदी नव स्वछंदवाद आदि प्रकाशित ग्रंथ हैं।
और जानना है छत्तीसगढ़ के बारे में देखो और मजे करो -



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