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भ्रमर गीत सार : सूरदास के पद 61 से 70 तक

भ्रमरगीत सार - सूरदास

- सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल

पद संख्या - 61 से 70

इस पोस्ट में हमने भ्रमर गीत  सार के पद क्रमांक 61 से 70 तक लिखा है। जो की एम. ए. हिंदी साहित्य के सिलेबस को देखकर लिखा गया है। क्योकि हम यहां पर पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी के एम्. ए. हिंदी के सिलेबस को लेकर यह पोस्ट लिख रहें हैं। bhrmar geet sar surdas ke pad

तो चलिए हमने पिछले पोस्ट में लिखा था भ्रमर गीत सार के 51 से 60 तक लिखा है। उसे भी पढ़ सकते हैं नीचे मैं सभी पद के लिंक दे रखे हैं तो वहां से  आप सीधे जा सकते हैं।


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भ्रमर गीत सार

श्री कृष्ण का वचन उद्धव-प्रति

61. राग धनाश्री 
रहु रे, मधुकर ! मधुमतवारे !
कहा करौं निर्गुन लै कै हौं जीवहु कान्ह हमारे।।
लोटत नीच परागपंग में पचत, न आपु सम्हारे। 
बारंबार सरक मदिरा की अपरस कहा उघारे।।
तुम जानत हमहूँ वैसी हैं जैसे कुसुम तिहारे। 
घरी पहर सबको बिलमावत जेते आवत कारे।।
सुन्दरस्याम को सर्बवस अप्र्यो अब कापै हम लेहिं उधारे।।

* इन्हें भी देखें - भ्रमर गीत सार - सूरदास पद क्रमांक 61 की व्याख्या 

62. राग बिलावल 
काहे को रोकत मारग सूधो ?
सुनहु मधुप ! निर्गुन-कंटक तें राजपंथ क्यों रुधो ?
कै तुम सिखै पाठए कुब्जा, कै कही स्मामधन जू धौं ?
बेद पुरान सुमृति सब ढूँढ़ौ जुवतिन जोग कहूँ घौं ?
ताको कहा परेखो कीजै जानत छाछ न दूधौ। 
सूर मूर अक्रूर गए लै ब्याज निबेररत ऊधौ।।

63. राग मलार 
बातन सब कोऊ समुझावै। 
जेद्वि बिधि मिलन मिलैं वै माधव सो बिधि कोउ न बतावै।।
जधदपि जतन अनेक रचीं पचि और अनत बिरमावै। 
तद्धपि हठी हमारे नयना और न देखे भावै।।
बासर-निसा प्रानबल्ल्भ तजि रसना और न देखे भावै।।
सूरदास प्रभू प्रेमहिं, लगि करि कहिए जो कहि आबै।।

64. राग सारंग 
निर्गुन  कौन देस को बासी ?
 मधुकर ! हँसि समुझाय, सौंह दै बूझति साँच, न हाँसी।।
को है जनक, जननि को कहियत, कौन नारि , को दासी ?
कैसो बरन, भेस है कैसो केहि रस कै अभिलासी।।
पावैगो पुनि कियो आपनो जो रे ! कहैगो गाँसी।
सुनत मौन है रह्यो ठग्यो सो सूर सबै मति नासी।।

* इन्हें भी देखें - भ्रमर गीत सार - सूरदास पद क्रमांक 64 की व्याख्या

65. राग केदारा
नाहिंन रह्यो मन में ठौर।
नंदनंदन अछत कैसे आनिए उर और ?
चलत, चितवन, दिबस, जागत,सपन सोवत राति।
हृदय ते वह स्याम मूरति छन न इत उत जाति।।
कहत कथा अनेक ऊधो लोक-लाभ दिखाय।
कहा करौं तन प्रेम-पूरन घट न सिंधु समाय।।
स्याम गात सरोज-आनन ललित अति मृदु हास।
सूर ऐसे रूप कारन मरत लोचने प्यास।।

* इन्हें भी देखें - भ्रमर गीत सार - सूरदास पद क्रमांक 65 की व्याख्या

66. राग मलार
ब्रजजन सकल स्याम-ब्रतधारी।
बिन गोपाल और नहिं जानत आन कहैं व्यभिचारी।।
जोग मोट सिर बोझ आनि कैं, कत तुम घोष उतारी ?
इतनी दूरी जाहु चलि कासी जहाँ बिकति है प्यारी।।
यह संदेश नहिं सुनै तिहारो है मंडली अनन्य हमारी।
जो रसरीति करी हरि हमसौं सो कत जात बिसारी ?
महामुक्ति कोऊ नहिं बूझै, जदपि पदारथ चारी।
सूरदास स्वामी मनमोहन मूरति की बलिहारी।।

* इन्हें भी देखें - भ्रमर गीत सार - सूरदास पद क्रमांक 66 की व्याख्या

67. राग धनाश्री
कहति कहा ऊधो सों बौरी।
जाको सुनत रहे हरि के ढिग स्यामसखा यह सो री !
हमको जोग सिखावन आयो, यह तेरे मन आवत ?
कहा कहत री ! मैं पत्यात री नहीं सुनी कहनावत ?
करनी भली भलेई जानै, कपट कुटिल की खानि।
हरि को सखा नहीं री माई ! यह मन निसचय जानि।।
कहाँ रास-रस कहाँ जोग-जप ? इतना अंतर भाखत।
सूर सबै तुम कत भईं बौरी याकी पति जो राखत।।

* इन्हें भी देखें - भ्रमर गीत सार - सूरदास पद क्रमांक 67 की व्याख्या

68. राग रामकली
ऐसेई जन दूत कहावत !
मोको एक अचंभी आवत यामें ये कह पावत ?
बचन कठोर कहत, कहि दाहत, अपनी महत्त गवावत।
ऐसी परकृति परति छांह की जुबतिन ज्ञान बुझावत।।
आनुप निजल रहत नखसिख लौं एते पर पुनि गावत।
सूर करत परसंसा अपनी, हारेहु जीति कहावत।।

* इन्हें भी देखें - भ्रमर गीत सार - सूरदास पद क्रमांक 68 की व्याख्या

69. राग धनाश्री
प्रकृति जोई जाके अंग परी।
स्थान-पूँछ कोटिक जा लागै सूधि न काहु करी।।
जैसे काग भच्छ नहिं छाड़ै जनमत जौन धरी।
धोये रंग जात कहु कैसे ज्यों कारी कमरी ?
ज्यों अहि डसत उदर नहिं तैसे हैं एउ री।

* इन्हें भी देखें - भ्रमर गीत सार - सूरदास पद क्रमांक 69 की व्याख्या

70. राग रामकली
तौ हम मानैं बात तुम्हारी।
अपनो ब्रम्ह दिखावहु ऊधो मुकुट-पितांबरधारी।।
भजि हैं तब ताको सब गोपी सहि रहि हैं बरु गारी।
भूत समान बतावत हमको जारहु स्याम बिसारो।।
जे मुख सदा सुधा अँचवत हैं ते विष क्यों अधिकारी।
सूरदास प्रभु एक अंग पर रीझि रही ब्रजनारी।

* इन्हें भी देखें - भ्रमर गीत सार - सूरदास पद क्रमांक 70 की व्याख्या

अगर आप हिंदी साहित्य में पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी से किसी भी कॉलेज में एम. ए. कर रहें हैं, सत्र 2019-20 में तो ये आपके सिलेबस में है अतः आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।


धन्यवाद !

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