Skip to main content

जेंडर किसे कहते हैं - Hindi grammar

 10.  लिंग : Gender

नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग में इसका मुख्य उद्देश्य है। हिंदी माध्यम में आपतक जानकारी जितना ज्यादा हो सके पहुंचाना आज हम हिंदी व्याकरण/ग्रामर के अंतर्गत लिंग जिसे अंग्रेजी में Gender कहा जाता है चलिए शुरू करते हैं। 

जेंडर किसे कहते हैं 

जेंडर का अर्थ - संज्ञा के जिस रूप से उसके पुरुष अथवा स्त्री जाति का बोध होता है, उसे लिंग या जेंडर कहते हैं। 

नीचे लिंग के कुछ उदाहरण लिखें हैं -
  • तान्या खेल रही है। 
  • तेजस्विनी गाना गा रही है। 
  • अरुण मेला देखने गया। 
  • लड़की सुंदर है। 
  • शिक्षक हमें बुला रहें हैं। 
  • नाना जी टीवी में कुछ देख रहे हैं। 
ऊपर  मैने जितने भी उदाहरण दिए हैं, उसमें किसी न किसी प्रकार से स्त्री अथवा पुरुष जाति का बोध हो रहा है जैसे तान्या, तेजस्विनी, लड़की से स्त्री जाति का बोध हो रहा है। उसी प्रकार अरुण, शिक्षक और नाना जी से पुरुष जाती का बोध होता है। 

लिंग के भेद 

इस आधार पर लिंग के दो भेद स्पष्ट होते हैं - 
  1. पुल्लिंग 
  2. स्त्रीलिंग 
इनको इस प्रकार समझते हैं -

1. पुल्लिंग की परिभषा: जिन शब्दों से पुरुष जाति का बोध हो उन्हें पुल्लिंग कहा जाता है। या इसे इस प्रकार से भी परिभाषित कर सकते हैं। पुरुष जाति का बोध कराने वाले शब्दों को पुल्लिंग कहते हैं; जैसे - बेवड़ा, बावला, शेर, घोड़ा आदि। 

2. स्त्रीलिंग की परिभाषा: जिन शब्दों से स्त्री जाति का बोध हो उन्हें स्त्रीलिंग कहा जाता है। या दूसरे प्रकार से स्त्रीलिंग को परिभाषित करें तो स्त्री जाति का बोध कराने वाले शब्दों को स्त्रीलिंग कहते हैं; जैसे - बेवड़ी, बावली, शेरनी, घोड़ी आदि।

लिंग की पहचान 

कुछ संज्ञा श्ब्द ऐसे होते हैं जो हमेशा पुल्लिंग में या स्त्रीलिंग में होते हैं कहने का मतलब यह है की इससे वह किस जाति का है इसका बोध मतलब किस लिंग का है हमें उसे देखकर या अन्य माध्यम से होता है। तो ऐसे शब्दों को दो प्रकारों या भेद में बाँटा गया है जो की इस प्रकार है। 
  1. नित्य पुल्लिंग 
  2. नित्य स्त्रीलिंग 
1. नित्य पुल्लिंग की परिभाषा: वे शब्द जो सदैव पुल्लिंग में ही प्रयुक्त होते हैं, चाहे वह किसी भी जाति का हो उसे पुल्लिंग के रूप में ही उच्चारित किया जाता है, उन्हें नित्य पुल्लिंग कहते हैं ; जैसे- मगर, कौआ, उल्लू, मच्छर, कछुआ, खरगोश, तोता आदि। 

2. नित्य स्त्रीलिंग की परिभाषा: वे शब्द जो सदैव स्त्रीलिंग में ही प्रयुक्त होते हैं, उन्हें नित्य स्त्रीलिंग कहते हैं; जैसे- मछली, तितली, कोयल, मैना, मक्खी, गिलहरी, छिपकली आदि। 

तो इस प्रकार ये नित्य पुल्लिंग और नित्य स्त्रीलिंग शब्द होते हैं जिनका लिंग परिवर्तन करने के लिए हमें उनके आगे नर या मादा शब्द जोड़ना जोड़ना पड़ता है; जैसे- मादा खरगोश, नर छिपकली आदि। 

कुछ शब्द ऐसे होते हैं जो की न तो स्रीलिंग होते हैं और न ही पुल्लिंग होते हैं; डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, मंत्री, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री आदि।

तो इस प्रकार के शब्दों का लिंग भेद या लिंग का पता लगाने के लिए वाक्यों को समझना पड़ता है; कुछ उदाहरण 
  1. प्रतिभा पाटिल हमारे देश की राष्ट्रपति थी। 
  2. अटल बिहारी हमारे देश के प्रधानमंत्री थे। 

पुल्लिंग की पहचान 

आपने अभी तक जान लिया होगा फिर भी आइये जानते हैं की पुल्लिंग की या कहें पुल्लिंग शब्द की पहचान कैसे की जाती है। 

नीचे पर्वत, समुद्र, देश, पेड़, अनाज, वार, रत्न, द्रव, समय, धातु आदि के नाम दिए जा रहे हैं जो सदैव पुल्लिंग होते हैं। इन्हें ध्यानपूरर्वक पढ़ते हैं और समझने की और कोशिश करते हैं ताकि हमें तुरंत पता चल सके क्योकि कम्पीटिशन परीक्षाओं में ज्यादा समय नहीं होता है। आइये समझें-
  1. देश - भारत, नेपाल, श्रीलंका,बांग्लादेश, पाकिस्तान आदि। 
  2. धतु - सोना, पीतल, लोहा, ताँबा (चाँदी अपवाद) आदि। 
  3. समुद्र - हिंद महासागर, अटलांटिक महासागर, हिन्द महासागर, दक्षिण महासार आदि। 
  4. अनाज - गेहूँ, चावल, चना, बाजरा, जौ, उड़द आदि। 
  5. पेड़ - बरगद, पीपल, अशोक, आम, शीशम, नीम आदि। 
  6. द्रव - पानी, घी, तेल, दूध, शरबत (चाय, कॉफी, लस्सी अपवाद) अदि। 
  7. पर्वत - हिमालय, कैलाश पर्वत, अरावली, सतपुड़ा, विंध्याचल आदि। 
  8. वार - सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरूवार, शक्रवार, शनिवार, रविवार आदि। 
  9. रत्न - मोती, पन्ना, मूँगा, हीरा, पुखराज आदि। 
  10. समय - घंटा, दिन, सप्ताह, मिनट, मास, वर्ष आदि। 
  • जिन शब्दों के अंत में कुछ इस प्रकार के प्रत्यय यदि लगें हो तो वे प्रायः पुल्लिंग होते हैं; देखें जैसे कि 
  1. आर - सुनार, लुहार आदि। 
  2. आपा - बुढ़ापा, मोटाप, सियापा आदि। 
  3. पन - बचपन, बड़प्प, लड़कपन आदि। 
  4. एरा - चचेरा, ममेरा, फुफेरा, लुटेरा आदि। 
  5. ना - सजाना, सोना, लिखना, पढ़ना आदि। 
  6. आवा - पहनावा, दिखावा, चढ़ावा, भुलावा आदि। 
  7. त्व - कवित्त्व, अपनत्व, पुरुषत्व, महत्व आदि। 
  8. अन - भाषण, रमण, आगमन, गमन, लेखन आदि। 
  9. आव - लगाव, बहाव, खिंचाव, चुनाव, बचाव आदि। 
  10. अक - नायक, शिक्षक, लेखक, गायक, बालक आदि। 

स्त्रीलिंग की पहचान 

ऐसे संज्ञा शब्द जो की स्त्रियो के लिए प्रयुक्त होती है स्त्रीलिंग कहलाती है; जैसे- यहाँ नीचे नदी, झील, भाषा, बोली, लिपी, शरीर के कुछ अंग,  खाने की कुछ चीजों के नाम आपको यहां पर दिए जा रहें। जो सदैव स्त्रीलिंग होते हैं। इन्हें पढ़ के समझने का प्रयास करते हैं -

  1. नदी - यमुना, कोसी, गोदावरी, गंगा, नर्मदा आदि। 
  2. लिपि - देवनागरी, फारसी, रोमन, गुरुमुखी आदि। 
  3. भाषा - हिंदी, उर्दू, तमिल, बंगाली, संस्कृत आदि। 
  4. बोली - अवधी, अर्धमागधी, शौरसेनी, मागधी, राजस्थानी आदि। 
  5. झील - डल, बैकाल, चिलका, सौरभ आदि। 
  6. शरीर के अंग - छाती, कमर, आँख, नाक, पलक, जीभ, मुंह आदि। 
  7. खाने के चीज - पूड़ी, सब्जी, रोटी, खीर, खींचडी  आदि। 
  8. सस्कृत का आकारांत वाले शब्द - दया, माया, क्षमा, कृपा, प्रतिमा आदि। 
  9. संस्कृत उकारांत वाले शब्द - आयु, वस्तु, वायु, ऋतु, धातु आदि। 
  10. संस्कृत इकारांत वाले शब्द - शक्ति, अग्नि, संधि, जाति, हानि, गति आदि। 

लिंग परिवर्तन, पुल्लिंग और स्त्रीलिंग के उदाहरण

लिंग परिवर्तन की परिभाषा - कुछ शब्द ऐसे होते हैं जो मूल रूप से पुल्लिंग होते हैं किंतु इनके अंत में प्रत्यय जोड़कर स्त्रीलिंग शब्द बनाए जाते हैं; जैसे- 

'आ' प्रत्यय जोड़कर- 

1. छात्र - छात्रा 
2. अपराजित - अपराजिता। 
3. वृद्ध - वृद्धा 
4. बालक - बालिका 
5. प्रिय - प्रिया 
6. सदस्य - सदस्या 
7. बाल - बाला 
8. अध्यक्ष - अध्यक्षा 

'आइन' प्रत्यय जोड़कर- 

1. बाबू - बबुआइन 
2. बनिया - बनियाइन 
3. चौधरी - चौधराइन 
4. पंडित -पंडिताइन 
5. ठाकुर - ठाकुराइन 
6. गुरु - गुरुआइन 

' आनी ' प्रत्यय जोड़कर 

1. पंडित - पंडतानी 
2. नौकर - नौकरानी 
3. इंद्र - इंद्राणी 
4. सेठ - सेठानी 
5. देवर - देवरानी 
6. जेठ - जेठानी 

' मती / वती ' प्रत्यय जोड़कर
  1. रूपवान - रूपवती 
  2. गुणवान - गुणवती 
  3. आयुष्मान - आयुष्मति 
  4. बुद्धिमान - बुद्धिमती 
  5. श्रीमान - श्रीमती 
  6. पुत्रवान - पुत्रवती 
' इन ' प्रत्यय जोड़कर 
  1. धोबी - धोबिन 
  2. लुहार - लुहारिन 
  3. दर्जी - दर्जिन 
  4. पड़ोसी - पड़ोसिन 
  5. माली - मालिन 
  6. नाग - नागिन 
  7. सुनार - सुनारीन 
  8. ग्वाल - ग्वालिन 
' इका ' प्रत्यय जोड़कर-

  1. नायक - नायिका
  2. लेखक - लेखिका
  3. अध्यापक - अध्यापिका
  4. शिक्षक - शिक्षिका
  5. पाठक - पाठिका
  6. सेवक - सेविका
  7. बालक - बालिका
  8. गायक - गायिका

'नी' प्रत्यय जोड़कर-

  1. सरदार - सरदारनी
  2. शेर - शेरनी
  3. हंस - हंसनी
  4. ऊँट - ऊँटनी
  5. मोर - मोरनी
  6. सिंह - सिंहनी

आओ जाने अबतक हमें क्या सीखने को मिला इस अध्याय या पोस्ट में..

  1. ★संज्ञा के जिस रूप से उसके पुरुष अथवा स्त्री जाति का बोध होता है, उसे लिंग कहते हैं।
  2. ★ लिंग के दो भेद होते हैं- 1. पुल्लिंग 2. स्त्रीलिंग 
  3. ★ कुछ पुल्लिंग शब्दों के अंत में प्रत्यय जोड़कर स्त्रीलिंग शब्द बनाए जाते हैं।
  4. ★ पर्वतों, समुद्र, देश, पेड़, अनाज, वार, रत्न, द्रव, समय, धातु आदि के नाम सदैव पुल्लिंग होते हैं।
  5. ★ झील, नदी, बोली,भाषा, लिपि, खाने की कुछ चीजें तथा शरीर के कुछ अंग सदैव स्त्रीलिंग होते हैं।

Hindi grammar Question

यहां पर जो प्रश्न दिए गए हैं उनके उत्तर को आप कमेंट में लिख सकते हैं ब्लॉग पढ़ने के बाद बिना पढ़े उत्तर देने में शायद गड़बड़ी या हड़बड़ी न करें चलिए जानते हैं कौन कौन से वो प्रश्न हैं।

  1. स्त्रीलिंग और पुल्लिंग में क्या अंतर है?
  2. कोई दो शब्द बताओ जिनका लिंग निर्णय हम वाक्य प्रयोग के आधार पर करते हैं।
  3. शरीर के कौन-से अंग प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं? बताओ।

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए -

  1. लिंग किसे कहते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट करो।
  2. लिंग के कितने भेद हैं।

2. बॉक्स में दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरो।
प्रत्यय पुल्लिंग लिंग स्त्रीलिंग

  1. संज्ञा के जिस रूप से उसके पुरुष या स्त्री जाति का बोध हो, उसे---------कहते हैं। 
  2. पुरुष जाति का बोध कराने वाले शब्दों को---------कहते हैं। 
  3. मछली, तितली, कोयल, मैना, मक्खी, गिलहरी आदि शब्द सदैव--------होते हैं। 
  4. कुछ पुल्लिंग शब्दों के अंत में-------जोड़कर स्त्रीलिंग शब्द बनाए जाते हैं। 
3. सही गलत बताएं 
  1. लिंग के दो भेद होते हैं। 
  2. स्त्री जाति का बोध कराने वाले शब्दों को स्त्रीलिंग कहते हैं। 
  3. जो शब्द न पुल्लिंग होते हैं और न स्त्रीलिंग, उनका लिंग निर्धारण वाक्य में प्रयोग के आधार पर किया जाता है। 
  4. जो शब्द सदैव स्त्रिलिंग में ही प्रयुक्त होते हैं, उन्हें नित्य पुल्लिंग कहते हैं। 
4. इन शब्दों के लिंग बताइये 
  1. भारत - 
  2. फारसी -
  3. आचार्य -
  4. हिंदी -
  5. जेठ -
  6. रोटी -
  7. यमुना -
  8. पानी -
5. सही विकल्प वाले प्रश्न को हल कीजिए -

1. संज्ञा के जिस रूप से उसके पुरुष या स्त्री जाति का बोध हो, उसे क्या कहते हैं?
  1. प्रत्यय 
  2. लिंग 
  3. उपसर्ग 
2. पुरुष जाति का बोध कराने वाले शब्दों को क्या कहते है?
  1. स्त्रीलिंग 
  2. पुल्लिंग 
  3. उपर्युक्त सभी 
3. स्त्री जाति का बोध कराने वाले शब्दों को क्या कहते हैं?
  1. पुल्लिंग 
  2. स्त्रीलिंग 
  3. उपर्युक्त दोनों में से कोई नहीं
4. जो शब्द सदैव पुल्लिंग में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें क्या कहते हैं?
  1. सदैव स्त्रीलिंग 
  2. नित्य पुल्लिंग 
  3. स्त्रीलिंग 

<<Previous post: 9. संज्ञा (Noun)

Next post: 11. वचन (Number)>>

अन्य महत्वपूर्ण टॉपिक जो की आपके लिए उपयोगी हैं - 

1. भाषा-बोली, लिपि और व्याकरण Language-Dialect, Script and Grammar

2. वर्ण विचार : Phonology

3. संधि : Joining

4.  शब्द-विचार: Morphology

5. उपसर्ग : Prefix

6.  प्रत्यय : Suffix

7. समास : Compound

रचनात्मक मूल्यांकन-1

8. शब्द-भंडार : Vocabulary

9. संज्ञा : Noun 

10. लिंग : Gender 

11. वचन : Number 

12. कारक : Case 

13. सर्वनाम : Pronoun 

14. विशेषण : Adjective 

रचनात्मक मूल्यांकन-2 

योगात्मक मूल्यांकन-1 

15. क्रिया : Verb 

16. काल : Tense 

17. वाच्य : Voice 

18. वाक्य विचार : Syntax 

19. विराम-चिन्ह : Punctuation Marks 

रचनात्मक मूल्यांकन-3 

20. मुहावरे और लोकोक्तियाँ : Idioms and Proverbs 

21. अनुच्छेद लेखन : Paragraph-Writing 

22. पत्र-लेखन : Letter-Writing 

23. निबंध-लेखन : Essay-Writing 

24. अपठित गद्यांश : Unseen Passage

रचनात्मक मूल्यांकन-4 

योगात्मक मूल्यांकन-2 

Comments

Popular posts from this blog

भ्रमरगीत सार : सूरदास पद क्रमांक 88 सप्रसंग व्याख्या By Khilawan

   भ्रमरगीत सार आचार्य रामचंद्र शुक्ल  अगर आप हमारे ब्लॉग को पहली बार विजिट कर रहे हैं तो आपको बता दूँ की इससे पहले हमने  भ्रमर गीत के पद क्रमांक 87 की व्याख्या  को अपने इस ब्लॉग  questionfieldhindi.blogspot.com  में पब्लिस किया था। आज हम  भ्रमर गीत पद क्रमांक 88 की सप्रसंग व्याख्या  के बारे में जानेंगे तो चलीये शुरू करते हैं। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) के एम.ए. हिंदी साहित्य (MA Hindi) के पाठ्यक्रम में ' भ्रमरगीत सार ' (संपादक: आचार्य रामचंद्र शुक्ल) द्वितीय सेमेस्टर (Second Semester) के अंतर्गत पढ़ाया जाता है। यह पुस्तक दूसरे सेमेस्टर के मध्यकालीन काव्य प्रश्न-पत्र के पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा है। भ्रमरगीत सार की व्याख्या     पद क्रमांक 88 व्याख्या  -  सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल bhrmar-geet-sar-surdas-ke-pad - 88 श्री कृष्ण का वचन उद्धव-प्रति 88. राग गौरी ऊधो ! क्यों राखौं ये नैन ?  सुमिरि सुमिरि गुन अधिक तपत हैं सुनत तिहारो बैन।। हैं जो मन हर बदनचंद के सादर कुमुद चकोर। परम-तृषारत सजल स्यामघन ...

CG TET 2024 PRT PAPER 1 FREE MOCK TEST CDP BY KHILAWAN

PYQ CG TET 2024 PRT PAPER 1 PART-I Child Development and Pedagogy (बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र) 0% Question 1. किसने कहा था? "किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तनाव, तूफान तथा विरोध की अवस्था है।" A. क्रो एंड क्रो B. स्टेनले हॉल C. हण्ट D. सिम्पसन Explanation: "किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तनाव, तूफान तथा विरोध की अवस्था है" यह प्रसिद्ध कथन अमेरिकी मनोवैज्ञानिक जी. स्टेनली हॉल (G. Stanley Hall) का है, जिन्होंने किशोरावस्था को "तूफान और तनाव" (Storm and Stress) की अवस्था बताया था, जो इस अवस्था में होने वाले तीव्र शारीरिक, भावनात्मक और सामाजिक परिवर्तनों को दर्शाता है. जी. स्टेनली हॉल (G. Stanley Hall): इन्होंने 1904 में किशोरावस्था पर वैज्ञानिक अध्ययन किया और इसे "तनाव, संघर्ष और उथल-पुथल" का दौर कहा. अर्थ: उनके अनुसार, यह अवस्था माता-पिता से संघर्ष, मूड में बदलाव और जोखिम भरे व्यवहार से चिह्नित होती है, जो किशोरावस्था की जैविक और मनोवैज्ञानिक जटिलताओं के कारण होता है. Question 2: सं...

भ्रमरगीत सार: जब ज्ञान का अहंकार, प्रेम के सागर में डूब गया!

Bhramar geet   क्या आपने कभी सोचा है कि जब इस ब्रह्मांड का सबसे बड़ा ज्ञानी, प्रेम की साक्षात् मूरत से टकराता है, तो क्या होता है? महाकवि सूरदास की कालजयी कृति 'भ्रमरगीत सार' (संपादक: आचार्य रामचंद्र शुक्ल) केवल कविताओं का संग्रह नहीं है। यह बुद्धि और हृदय का महायुद्ध है। यह निर्गुण (निराकार ईश्वर) पर सगुण (साक्षात् कृष्ण) की, और ज्ञान पर अनन्य प्रेम की ऐसी विजय गाथा है, जिसे पढ़कर आज भी आँखें नम और मन मंत्रमुग्ध हो जाता है। आइए, ब्रज की उस पावन भूमि पर चलें जहाँ तर्क हार गया और प्रेम जीत गया। 🌟 कथा की पृष्ठभूमि: मथुरा से आया एक संदेश श्रीकृष्ण अब गोकुल के 'कान्हा' नहीं रहे, वे मथुरा के राजा बन चुके हैं। ब्रज में गोपियाँ उनके विरह (जुदाई) की आग में जल रही हैं। उधर मथुरा में, कृष्ण के सखा उद्धव को अपने ज्ञान और योग-साधना पर बड़ा अहंकार है। वे मानते हैं कि ईश्वर को केवल बुद्धि और ध्यान से पाया जा सकता है, प्रेम से नहीं। उद्धव के इसी 'ज्ञान के रोग' को ठीक करने के लिए, श्रीकृष्ण उन्हें एक दूत बनाकर ब्रज भेजते हैं। कृष्ण जानते हैं कि जो पाठ उद्धव को कोई ग्रंथ नहीं...