Skip to main content

Punctuation Marks : विराम-चिन्ह Hindi Grammar By khilawan

 19.  विराम-चिन्ह : Punctuation Marks

hello readers welcome to our blog Question Field Hindi में आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे विराम चिन्ह के बारे में इसके बारे में जाने इससे पहले आपको बता दे की हमने अपने ब्लॉग पर एक सीरीज चालु की हुई है जिसमें हम आपको अभी हिंदी व्याकरण के बारे में बता रहे हैं। 

इस पोस्ट को लिखने से Just पहले मैंने एक पोस्ट शेयर किया था जिसमें मैंने आपको बताया था। वाक्य (जिसे अंग्रेजी में Syntax कहते हैं) के बारे में आप चाहें तो वो पोस्ट पढ़ सकते हैं। 


चलिए शुरु करते हैं आज का पोस्ट विराम चिन्ह के अर्थ से -

विराम चिन्ह का अर्थ

विराम का अर्थ होता है ठहराव अर्थात रुकना। हिंदी भाषा में हो या अन्य किसी अंग्रेजी में जब इसको लिखित रूप में प्रयोग किया जाता है तो विशेष स्थानों पर रुकने के लिए या यूं कहें रुकने का संकेत करने के लिए विराम चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। जैसे -

निम्न वाक्यों को पढ़कर देखें -

मनोज मुन्तशिर को रोको, मत जाने दो। 

मनोज मुन्तशिर को रोको मत, जाने दो। 

आपको अब पता चल ही गया होगा की एक अल्पविराम का कितना महत्व होता है और इसके प्रयोग करने तथा न करने पर कितना अधिक अर्थ में परिवर्तन हो जाता है। तथा अलग-अलग अर्थ प्रकट करता है। 

वैसे तो अलग-अलग प्रकार के विराम चिन्ह अलग-अलग भाषा में प्रयुक्त होते हैं यहां चुकी हम हिंदी व्याकरण पढ़ रहें हैं तो हिंदी भाषा में प्रयुक्त विराम-चिन्ह के बारे में पढ़ेंगे जो की इस प्रकार है -

  1. पूर्ण विराम (Full stop) (।)
  2. प्रश्नवाचक ( Question mark ) (?) 
  3. विषमयसूचक (exclamation mark)(!)
  4. अर्ध विराम (Semicolon) (;)
  5. अप्ल विराम (Comma) (,)
  6. विवरण चिन्ह (Colon) (: / :-)
  7. योजक चिन्ह (Adder Symbol) (-)
  8. निर्देशक चिन्ह (Das) ( _ )
  9. उद्धरण चिन्ह (Inverted Commas) ( " " / ' ' )
  10. कोष्ठक (Brackets) ( ( ) [ ] )

अब इनको उदाहरण और किस प्रकार प्रयोग किया जाता है उसके आधार पर समझने का प्रयास करें -

1. पूर्ण विराम ( । ) - यह चिन्ह वाक्यों के अंत में लगता है; जैसे -

  1. सभी लोग स्कूल जाते हैं। 
  2. मैं महासमुंद कॉलेज जाता हूँ। 

2. प्रश्नवाचक चिन्ह - ( ? ) - यह चिन्ह प्रश्न करने वाले वाक्यों के अंत में लगाया जाता है; जैसे -

  1. महात्मा गाँधी कौन था?
  2. क्या आप सराईपाली कॉलेज जा रहें हैं?

3. विस्मय सूचक ( ! ) - यह चिन्ह घृणा, विस्मय , शोक, हर्ष या आश्चर्य के भाव को प्रकट करने के लिए या किसी को संबोधित करने के लिए लगाया जाता है; जैसे -

  1. वाह! कितना सुंदर मीनार है। 
  2. अरे! तुम्हें छत्तीसगढ़ के बारे में नहीं पता?
4. अर्ध विराम ( ; ) - यह चिन्ह एक से अधिक समानाधिकरण उपवाक्यों के बीच तथा एक ही वाक्य में दो भिन्न बातों को अलग करने के लिए लगाए जाते हैं; जैसे -

  1. विद्या धन अनमोल है; खर्च करने से बढ़ता है। 
  2. माता जी आ गई हैं; पिता जी न जाने कब आएँगे। 

5. अल्प विराम ( , ) - इन चिन्हों से वाक्य के बीच में अर्ध विराम की अपेक्षा कम रुकना हो, तब इसका प्रयोग होता है तथा वाक्य में आए एक ही जाति के पदों, पदबंधों या उपवाक्यों के बीच में इसका प्रयोग किया जाता है; जैसे -

  1. आज हर्ष, मोनू और प्रीति विद्यालय नहीं आए। 
  2. नहीं, मैं खीरा नहीं खाता। 

6. विवरण चिन्ह ( : / :- ) - यह चिन्ह किसी विषय के व्यापक जानकारी के पूर्व या पहले लगाया जाता है; जैसे -

  1. लिंग के दो भेद होते हैं : स्त्रीलिंग और पुल्लिंग। 
  2. भारतीय सभ्यता का सूत्र है : सत्यम शिवम् सुंदरम। 

7. योजक चिन्ह ( - ) - यह चिन्ह दो शब्दों के बीच लगाए जाते हैं जो किसी संबंध के कारण एक साथ आते हैं; जैसे - 

  1. राम-सा पुत्र, लक्ष्मण-सा भाई, सीता-सी पत्नी। 
  2. माता-पिता, सुख-दुःख, छोटा-बड़ा। 

8. निर्देशक चिन्ह ( -- ) - यह चिन्ह किसी कथन के पूर्व (पहले), उदाहरण देने तथा कवि-लेखक का नाम लिखने के पूर्व (पहले) आदि स्थानों पर लगाए जाते हैं; जैसे - 

  1. महात्माँ गांधी ने कहा - करो या मरो। 
  2. जयशंकर प्रसाद - कामायनी। 

9. उद्धरण चिन्ह ( " ", ' ' ) - यह चिन्ह प्रत्यक्ष कथन में तथा किसी विशेष नाम या शीर्षक को उद्धृत करते समय लगाया जाता है। यह चिन्ह दो प्रकार के होते हैं - इकहरे उद्धरण चिन्ह तथा दुहरे उद्धरण चिन्ह। 

  1. माँ ने कहा, " मैं बाजार जा रही हूँ। "
  2. 'भ्रमर गीत' सूरदास की रचना है। 

10. कोष्टक ( ) , [ ] - यह चिन्ह क्रमसूचक अंकों या अक्षरों के साथ तथा वाक्य के बीच में किसी शब्द का अर्थ या भाव देने हेतु लगाया जाता है; जैसे - 

  1. सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) की पत्नी यशोधरा थी। 
  2. मेरे विद्यालय का नाम ( राजकीय माध्यमिक विद्यालय ) है। 

आइये देखें हमने क्या सीखा 

  • विराम चिन्ह का अर्थ है - रुकना अर्थात ठहराव। भाषा के लिखित रूप में विशेष स्थानों पर रूकने का संकेत करने वाले चिन्ह विराम चिन्ह कहलाते हैं। 
  • विराम-चिन्ह - पूर्ण विराम, प्रश्नवाचक चिन्ह, विस्मयसूचक चिन्ह, अर्ध विराम, अल्प विराम, विवरण चिन्ह, योजक चिन्ह, निर्देशक चिन्ह, उद्धरण चिन्ह और कोष्ठक। 

अभ्यास 

Formative अभ्यास 

सोचिए और बताइये 

(क) आप किसका घर पूछ रहें हैं वाक्य में कौन-से विराम चिन्ह का प्रयोग होगा? बताओ। 

उत्तर - इसमें प्रश्नवाचक चिन्ह का प्रयोग होगा जो की वाक्य के अंत में प्रयोग किया जाता है। 

(ख) अल्प विराम का प्रयोग कब होता है?

उत्तर - अल्प विराम का प्रयोग अर्ध विराम की अपेक्षा कम रूकने जगह पर और वाक्य में आए एक ही जाति के पदों, पदबंधों या उपवाक्यों के बीच में होता है। 

(ग) निर्देशक चिन्ह के कोई दो उदाहरण बताओ। 

उत्तर - निर्देशक चिन्ह के दो उदाहरण इस प्रकार हैं -

सभाष चंद्र बोस ने कहा तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा। 

हरिवंश राय बच्चन - अग्निपथ। 

समेटिव अभ्यास 

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए -

(क) विराम-चिन्ह से आप क्या समझते हैं?

उत्तर - विराम चिन्ह ऐसे चिन्ह होते हैं जिसका प्रयोग भाषा के लिखित रूप में विशेष स्थानों पर रुकने का संकेत करने के लिए किया जाता है।

(ख) हिंदी भाषा में कितने प्रकार के विराम चिन्हों का प्रयोग किया जाता है? प्रत्येक का एक एक उदाहरण दो। 

उत्तर - हिंदी भाषा में 10 (दस) प्रकार के विराम चिन्ह का प्रयोग किया जाता है जिसके उदाहरण इस प्रकार हैं -

  1. पूर्ण विराम - मैं दिल्ली में रहता हूँ। 
  2. प्रश्नवाचक - क्या तुमने कभी ऐसा सोचा था?
  3. विस्मय सूचक चिन्ह - अरे! आज तो मजा गया। 
  4. अर्ध विराम - कहना आसान है ;  करना मुश्किल। 
  5. अल्प विराम ( , ) - नहीं, मैं घी नहीं खाता। 
  6. विवरण चिन्ह ( : / :- ) - भारतीय सभ्यता का सूत्र है: सत्यम शिवम् सुंदरम। 
  7. योजक चिन्ह ( - ) - माता-पिता, छोटा-बड़ा, सुख-दुःख। 
  8. निर्देशक चिन्ह (--) - महादेवी वर्मा ने अपनी कविता में लिखा था -- मैं नीर भरी दुःख की गगरी। 
  9. उद्धरण चिन्ह (" ", '  ') - माँ ने कहा, "मैं बाजार जा रही हूँ। "
  10. कोष्ठक ( ), [ ] - मेरे महाविद्यालय का नाम (शांत्रीबाई विज्ञान, कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय) है। 

(ग) उद्धरण चिन्ह कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर - उद्धरण चिन्ह के प्रकार की बात करें तो यह दो प्रकार के होते हैं - इकहरे उद्धरण चिन्ह ( '   ' ) और दोहरे उद्धरण चिन्ह ( "    " )। 

2. बॉक्स में दिए गए शब्दों से खाली स्थानों को भरिये -

विस्मयसूचक चिन्ह, उद्धरण चिन्ह, पूर्ण विराम, विवरण चिन्ह, कोष्ठक चिन्ह 

(क) ( । ) यह चिन्ह ---पूर्ण विराम---का प्रतीक है। 

(ख) ( ! ) यह चिन्ह ---विस्मयसूचक चिन्ह--- का प्रतीक है। 

(ग) ( : / :- ) यह चिन्ह ---विवरण चिन्ह--- का प्रतीक है। 

(घ) (" ", ' ') यह चिन्ह ---उद्धरण चिन्ह--- का प्रतीक है। 

(ङ) ([ ] / ( ) ) यह चिन्ह ---कोष्ठक--- का प्रतीक है। 

3. सही मिलान कीजिये 
प्रश्नवाचक चिन्ह ( , )
अल्प विराम ( ? )
विवरण चिन्ह ( ! )
उद्धरण चिन्ह ( [ ] / () )
कोष्ठक चिन्ह ( '  ' / "   ")
सही मिलान इस प्रकार होगा -
प्रश्नवाचक चिन्ह ( ? )
विष्मयादिबोधक ( ! )
अल्प विराम ( , )
विवरण चिन्ह ( : / :- )
उद्धरण चिन्ह ( '  ' / "  " )
कोष्ठक चिन्ह ( [  ] / ( ) )

4. निम्नलिखित वाक्यों में सही स्थान पर उचित चिन्ह लगाइए -

(क) आपने खाना खा लिया 

उत्तर - आपने खाना खा लिया। 

(ख) सुभाष चंद्र बोस ने कहा तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा

उत्तर - सुभाषचंद्र बोस ने कहा - तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा। 

(ग) लिंग दो प्रकार के होते हैं स्त्रीलिंग और पुल्लिंग। 

उत्तर - लिंग दो प्रकार के होते हैं - स्त्रीलिंग और पुल्लिंग। 

(घ) अरे तुम सो जाओ 

उत्तर - अरे! तुम सो जाओ। 

(ङ) वह परिश्रमी तो बहुत है पर सफल नहीं होता है

उत्तर - वह परिश्रमी तो बहुत है, पर सफल नही होता है। 

(च) मोहित बोला मैं पाँच मिल से चलकर आ रहा हूँ 

उत्तर - मोहित बोला - मैं पाँच मिल से चलकर आ रहा हूँ। 

(छ) मैंने एक ही सपना देखा है भारत का महान लेखक बनूँ

उत्तर - मैंने एक ही सपना देखा है; भारत का महान लेखक बनु। 

5. निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़कर उचित विराम-चिन्ह लगाइए -

एक प्रसिद्ध कवि और नाटककार ने कहा है समय को मैंने नष्ट किया अब समय मुझे नष्ट कर रहा है मनुष्य का जीवन अनमोल है उसी तरह समय भी अमूल्य है समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता जो व्यक्ति समय के साथ नहीं चलता वह जीवन में पिछड़ जाता है इसलिए हमें समय का सदुपयोग करना चाहिए 

उत्तर - एक प्रसिद्ध कवि और नाटककार ने कहा है, समय को मैंने नष्ट किया अब समय मुझे नष्ट कर रहा है। मनुष्य का जीवन अनमोल है। उसी तरह समय भी अमूल्य है, समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता। जो व्यक्ति समय के साथ नहीं चलता, वह जीवन में पिछड़ जाता है। इसलिए हमें, समय का सदुपयोग करना चाहिए। 

आपको यह पोस्ट कैसा लगा मेरे साथ साझा जरूर करें। ताकि मुझे मोटिवेशन मिलता रहे और आपके लिए पोस्ट लिखता रहूँ। 

इस पोस्ट को इतना प्यार देने के लिए प्रेम पूर्वक मेरे साथ बने रहने के लिए दिल की गहराइयों से बहुत-बहुत धन्यवाद!

<<Previous post: 18. वाक्य विचार (Syntax)

Next post: 20. मुहावरे और लोकोक्तियाँ >>

अन्य महत्वपूर्ण टॉपिक जो की आपके लिए उपयोगी हैं - 

1. भाषा-बोली, लिपि और व्याकरण Language-Dialect, Script and Grammar

2. वर्ण विचार : Phonology

3. संधि : Joining

4.  शब्द-विचार: Morphology

5. उपसर्ग : Prefix

6.  प्रत्यय : Suffix

7. समास : Compound

रचनात्मक मूल्यांकन-1

8. शब्द-भंडार : Vocabulary

9. संज्ञा : Noun 

10. लिंग : Gender 

11. वचन : Number 

12. कारक : Case 

13. सर्वनाम : Pronoun 

14. विशेषण : Adjective 

रचनात्मक मूल्यांकन-2 

योगात्मक मूल्यांकन-1 

15. क्रिया : Verb 

16. काल : Tense 

17. वाच्य : Voice 

18. वाक्य विचार : Syntax 

19. विराम-चिन्ह : Punctuation Marks 

रचनात्मक मूल्यांकन-3 

20. मुहावरे और लोकोक्तियाँ : Idioms and Proverbs 

21. अनुच्छेद लेखन : Paragraph-Writing 

22. पत्र-लेखन : Letter-Writing 

23. निबंध-लेखन : Essay-Writing 

24. अपठित गद्यांश : Unseen Passage

रचनात्मक मूल्यांकन-4 

योगात्मक मूल्यांकन-2 

Comments

Popular posts from this blog

भ्रमरगीत सार : सूरदास पद क्रमांक 88 सप्रसंग व्याख्या By Khilawan

   भ्रमरगीत सार आचार्य रामचंद्र शुक्ल  अगर आप हमारे ब्लॉग को पहली बार विजिट कर रहे हैं तो आपको बता दूँ की इससे पहले हमने  भ्रमर गीत के पद क्रमांक 87 की व्याख्या  को अपने इस ब्लॉग  questionfieldhindi.blogspot.com  में पब्लिस किया था। आज हम  भ्रमर गीत पद क्रमांक 88 की सप्रसंग व्याख्या  के बारे में जानेंगे तो चलीये शुरू करते हैं। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) के एम.ए. हिंदी साहित्य (MA Hindi) के पाठ्यक्रम में ' भ्रमरगीत सार ' (संपादक: आचार्य रामचंद्र शुक्ल) द्वितीय सेमेस्टर (Second Semester) के अंतर्गत पढ़ाया जाता है। यह पुस्तक दूसरे सेमेस्टर के मध्यकालीन काव्य प्रश्न-पत्र के पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा है। भ्रमरगीत सार की व्याख्या     पद क्रमांक 88 व्याख्या  -  सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल bhrmar-geet-sar-surdas-ke-pad - 88 श्री कृष्ण का वचन उद्धव-प्रति 88. राग गौरी ऊधो ! क्यों राखौं ये नैन ?  सुमिरि सुमिरि गुन अधिक तपत हैं सुनत तिहारो बैन।। हैं जो मन हर बदनचंद के सादर कुमुद चकोर। परम-तृषारत सजल स्यामघन ...

CG TET 2024 PRT PAPER 1 FREE MOCK TEST CDP BY KHILAWAN

PYQ CG TET 2024 PRT PAPER 1 PART-I Child Development and Pedagogy (बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र) 0% Question 1. किसने कहा था? "किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तनाव, तूफान तथा विरोध की अवस्था है।" A. क्रो एंड क्रो B. स्टेनले हॉल C. हण्ट D. सिम्पसन Explanation: "किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तनाव, तूफान तथा विरोध की अवस्था है" यह प्रसिद्ध कथन अमेरिकी मनोवैज्ञानिक जी. स्टेनली हॉल (G. Stanley Hall) का है, जिन्होंने किशोरावस्था को "तूफान और तनाव" (Storm and Stress) की अवस्था बताया था, जो इस अवस्था में होने वाले तीव्र शारीरिक, भावनात्मक और सामाजिक परिवर्तनों को दर्शाता है. जी. स्टेनली हॉल (G. Stanley Hall): इन्होंने 1904 में किशोरावस्था पर वैज्ञानिक अध्ययन किया और इसे "तनाव, संघर्ष और उथल-पुथल" का दौर कहा. अर्थ: उनके अनुसार, यह अवस्था माता-पिता से संघर्ष, मूड में बदलाव और जोखिम भरे व्यवहार से चिह्नित होती है, जो किशोरावस्था की जैविक और मनोवैज्ञानिक जटिलताओं के कारण होता है. Question 2: सं...

भ्रमरगीत सार: जब ज्ञान का अहंकार, प्रेम के सागर में डूब गया!

Bhramar geet   क्या आपने कभी सोचा है कि जब इस ब्रह्मांड का सबसे बड़ा ज्ञानी, प्रेम की साक्षात् मूरत से टकराता है, तो क्या होता है? महाकवि सूरदास की कालजयी कृति 'भ्रमरगीत सार' (संपादक: आचार्य रामचंद्र शुक्ल) केवल कविताओं का संग्रह नहीं है। यह बुद्धि और हृदय का महायुद्ध है। यह निर्गुण (निराकार ईश्वर) पर सगुण (साक्षात् कृष्ण) की, और ज्ञान पर अनन्य प्रेम की ऐसी विजय गाथा है, जिसे पढ़कर आज भी आँखें नम और मन मंत्रमुग्ध हो जाता है। आइए, ब्रज की उस पावन भूमि पर चलें जहाँ तर्क हार गया और प्रेम जीत गया। 🌟 कथा की पृष्ठभूमि: मथुरा से आया एक संदेश श्रीकृष्ण अब गोकुल के 'कान्हा' नहीं रहे, वे मथुरा के राजा बन चुके हैं। ब्रज में गोपियाँ उनके विरह (जुदाई) की आग में जल रही हैं। उधर मथुरा में, कृष्ण के सखा उद्धव को अपने ज्ञान और योग-साधना पर बड़ा अहंकार है। वे मानते हैं कि ईश्वर को केवल बुद्धि और ध्यान से पाया जा सकता है, प्रेम से नहीं। उद्धव के इसी 'ज्ञान के रोग' को ठीक करने के लिए, श्रीकृष्ण उन्हें एक दूत बनाकर ब्रज भेजते हैं। कृष्ण जानते हैं कि जो पाठ उद्धव को कोई ग्रंथ नहीं...