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Showing posts from October, 2018

न्यूटन के गति के नियम उदाहरण सहित

हैल्लो  दोस्तों  न्यूटन के गति के नियम के बारे में बताने वाला हूँ तो चलिए शुरू करता हूँ। न्यूटन की गति के नियम, शरीर पर काम करने वाली बल के बीच संबंध और शरीर की गति से है। यह नियम भौतिक विज्ञानी और गणितज्ञ सर आइजैक न्यूटन द्वारा तैयार किए गए है। न्यूटन के प्रथम गति नियम क्या है न्यूटन के पहले नियम में कहा गया है कि, यदि कोई शरीर आराम अवस्था में है या एक सीधी रेखा में स्थिर गति से आगे बढ़ रहा है, तो वह आराम पर रहेगा या जब तक किसी बल द्वारा उस पर कार्य नहीं किया जाता है। तब तक वह निरंतर गति से सीधी रेखा में चलते रहेंगे। इस अवस्था को जड़त्व का नियम के रूप में जाना जाता है।  जड़ता का नियम पहले गैलिलियो गैलीली द्वारा पृथ्वी पर क्षैतिज गति के लिए तैयार किया गया था और बाद में रेने डेकार्टेस द्वारा सामान्यीकृत किया गया था। गैलीलियो से पहले यह सोचा गया था कि सभी क्षैतिज गति को एक प्रत्यक्ष कारण की आवश्यकता होती है, लेकिन गैलीलियो ने अपने प्रयोगों से यह अनुमान लगाया कि गति में एक शरीर तब तक गति...

पौधों में जल अवशोषण एवं संवहन की क्रिया

दोस्तों सभी जानते हैं, की सभी जंतुओं में श्वसन की क्रिया होती है और श्वशन के माध्यम से ही सभी जीव जीवित रहते हैं। लेकिन श्वशन के साथ पानी भी आवश्यक होता है। तो आज हम बात करते हैं पौधों जल अवशोषण के बारे में सबसे पहले हम आपको बताते हैं। पौधों जल अवशोषक के अंग प्रायः पौधों में जल का अवशोषण मूल (जड़) के द्वारा होता है,लेकिन कुछ पौधों में जल का अवशोषण पत्तियों तथा तनों के द्वारा भी होता है। जलोद भीद (hydrophyte) पादपों (पौधों) में जल का अवशोषण प्रायः सामान्य सतह के द्वारा होता हैं। वुड wood,1925   के अनुसार कुछ पौधों जैसे कोचिका बेवोसिया kochia baosia तथा रेगोडिया rhagodia आदि जल अवशोषण वायुमण्डल से करते हैं। इसी प्रकार का जल अवशोषण अंगूर (vits),चुकन्दर (beta), मूंग (phaseolus), बैगन (solanum), तथा मिर्च (Lycopersicum) में भी पाया जाता है। इस प्रकार पत्तियों द्वारा जल का अंतर्ग्रहण निम्न बिंदुओं द्वारा प्रभावित होता है एपिडर्मिस तथा क्यूटिकिल की संरचना एवं पारगम्यता(permeability) पत्ती की सतह...

छत्तीसगढ़ी मुहावरे - Chhattisgarhi muhavare

छत्तीसगढ़ी एक बहुत ही मधुर बोली है। छत्तीसगढ़ की आम बोलचाल में ऐसे कई वाक्य होते है जिनका विशेष अर्थ होता हैं। उसे  छत्तीसगढ़ी मुहावरे   कहाँ जाता हैं। मुहावरा संक्षिप्त वाक्य होता है जो की पूर्ण अर्थ को प्रकट करता है। छत्तीसगढ़ी में मुहावरों का भी महत्व उतना ही है जितना की हिन्दी का है। तो चलिए जानते है छत्तीसगढ़ी मुहावरों का हिंदी में अर्थ क्या होता है तथा इसका प्रयोग किस प्रकार छत्तीसगढ़ी बोली में किया जाता है। मुहावरे और लोकोक्तियाँ को सामान्य जनमानस की आवाज कहा जा सकता हैं। क्योकि यह मुहावरे अनुभव से प्रगट हुए हैं।  Chhattisgarhi muhavare Chhattisgarhi Muhavare छत्तीसगढ़ी मुहावरे और उनका प्रयोग 1. कनिहा ढील होना - कमजोर होना।   वाक्य में प्रयोग- बुता करत-करत राजू के कनिहा ढील होंगे। 2. चित ले उतरना- मन से उतर जाना। 3. तिड़ी-बिड़ी होना-नष्ट होना। वाक्य- पैसा पाये के चक्कर म सब तिड़ी-बिड़ी होगे लागथे। ...