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Showing posts from February, 2023

छत्तीसगढ़ी वर्णमाला स्वर और व्यंजन - chhattisgarhi vyakaran

साथियों आपका स्वागत है मेरे इस ब्लॉग पर आज हम बात करने वाले हैं। छत्तीसगढ़ी वर्णमाला के बारे में और इससे पहले हमने पढ़ा था छत्तीसगढ़ी विलोम शब्द के बारे में और आज हम बात करने वाले हैं छत्तीसगढ़ी वर्णमाला के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं।  छत्तीसगढ़ी वर्णमाला  स्वर - छत्तीसगढ़ी बोली में भी हिन्दी के ही समान स्वर वर्ण होते हैं। डॉ. नरेंद्रदेव वर्मा के अनुसार -  अ, आ, इ, ई, उ, ऊ,ए, ओ  संध्य अक्षर - ऐ, औ ।  स्वर को भी दो प्रकारों में बांटा गया है जो की इस प्रकार  है - 1. दीर्घ स्वर - इस में निम्न शब्द आते है - आ, ई, ऊ,ए, ओ 2. हस्व स्वर - अ,इ,उ।  छत्तीसगढ़ी वर्णमाला के व्यंजन  छत्तीसगढ़ी में व्यंजन शब्द की बात करें तो यहां पर इसके 29 प्रकार हैं - जो की व्यंजन के रूप में प्रयुक्त होते हैं। ये व्यंजन वर्ण डॉ. नरेंद्रदेव वर्मा के अनुसार-  क, ख, ग, घ, च, छ, ज, झ, ट, ठ, ड,ढ,ण, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, स, ह।  व्यंजनों में - कुछ और वर्ण जोड़ने से इनकी संख्या 35 हो गई वे शब्द इस प्रकार से हैं - नह् , म्ह्, रह्,ल्ह्, ङ्, ...

छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य - chhattisgarhi vyakaran

Chhattisgarhi bhasha aur sahitya छत्तीसगढ़ी व्याकरण के भाषा और साहित्य के अंतर्गत हम पढ़ेंगे छत्तीसगढ़ी साहित्य का इतिहास, छत्तीसगढ़ी नाट्य साहित्य, छत्तीसगढ़ी साहित्य एवं साहित्यकार, छत्तीसगढ़ी उपन्यास, उपन्यासकार और उपन्यास के नाम, छत्तीसगढ़ी कहानी के बारे संक्षिप्त और सारगर्भित जानकारी... छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य - Chhattisgarhi Language and Literature छत्तीसगढ़ी साहित्य का इतिहास - छत्तीसगढ़ी गद्य की तुलना में छत्तीसगढ़ी गद्य लेखन की परम्परा अधिक प्राचीन है और विकसित भी। हमें गद्य की जानकारी दन्तेवाड़ा शिलालेख ( 1703 ई. ), कलचुरी शिलालेख ( 1724 ई. ) एवं 1890 ई. में प्रकाशित हीरालाल कावयोपाध्याय के छत्तीसगढ़ी बोली व्याकरण में छत्तीसगढ़ी गद्य का उन्मेष अनेक विद्वानों ने स्वीकार किया है।  जबकि विनय कुमार पाठक सन 1724 के कलचुरियों के अंतिम नरेश राजा अमरसिंह के आरंग शिलालेख को छत्तीसगढ़ी गद्य का सर्वप्रथम स्वरूप निर्दिष्ट करते हैं। तथापि हम उपरोक्त साक्ष्यों के आधार पर कह सकते हैं की छत्तीसगढ़ी का गद्य , पद्य की तुलना में अल्प परिणाम में है। छत्तीसग...

छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग क्या है - chhattisgarh ki rajbhasha

  Chhattisgarhi rajbhasha aayog  साथियों आप सभी का सवागत है मेरे इस ब्लॉग पर आज मैं बात करने वाला हूँ छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के बारे में जिसमें मैं आपको बताने वाला हूँ इनके पदाधिकारियों के बारे में और छत्तीसगढ़ी राजभाषा के लागू होने के समय के बारे में साथ ही छत्तीसगढ़ी राजभाषा के उद्देश्य और लक्ष्य के बारे में बताने वाला हूँ छत्तीसगढ़ी राजभाषा की योजनाएँ क्या-क्या हैं। इसके अन्य कार्य तथा इसके कुछ विशेष कार्य के बारे में भी मैंने यहां पर बताने का प्रयास किया है।  इसके पहले मैंने एक पोस्ट लिखा था जिसमें मैंने छत्तीसगढ़ी वर्णमाला के बारे में बताया था अगर आप वो पोस्ट पढ़ना चाहते हैं तो पढ़ सकते हैं। तो चलिए शुरू करते हैं आज का टॉपिक ! छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग एक प्रकार का संगठन है जो की छत्तीसगढ़ी भाषा को एक विशेष दर्जा दिलाने के लिए बनाया गया है। और ये अभी भी सक्रिय है। छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग विधेयक को 28 नवम्बर 2007 को पारित किया गया तथा इसके पास होने कर ही उपलक्ष्य में हर साल 28...

बालकृष्ण भट्ट ने कितने निबंध लिखे हैं - How many essays has Balkrishna Bhatt written?

 1. बालकृष्ण भट्ट ने कितने निबंध लिखे हैं? उत्तर - पं. बालकृष्ण भट्ट ने लगभग एक हजार से अधिक निबंध लिखे हैं, इनके सभी निबंध हिंदी प्रदीप में प्रकाशित हुआ करते थे इनमें से कुछ निबन्धों का संकलन साहित्य सुमन, भट्ट निबंध माला (दो भाग) में हुआ है। भट्ट जी के निबंध सामाजिक, राजनीतिक, साहित्यिक सभी प्रकार के हैं।  Balkrishna Bhatt ne kitne nibandh likhe hai?

अनुवादक किसे कहते हैं - What is a translator?

 1. अनुवादक किसे कहते हैं उत्तर :         अनुवादक हिंदी साहित्य में ही नहीं बल्कि अन्य भाषाओं में भी होते हैं, अनुवादक जिसको अंग्रेजी में ट्रांसलेटर कहा जाता है। एक भाषा का दूसरी भाषा में रूपांतरण अनुवाद कहलाता है तथा इस प्रकार रूपांतरण का कार्य करने वाला अनुवादक कहलाता है।  अनुवादक का कार्य ही होता है एक भाषा को दूसरी भाषा में बदलकर बताना या लिखना।  वैसे हिंदी साहित्य में अनुवादक प्रायः लेखक ही ज्यादा मिलेंगे जिन्होंने अंग्रेजी में लिखे नाटकों, निबंधों का अपनी भाषा हिंदी में अनुवाद किया है।  अनुवादक के गुण की बात करें तो एक अच्छे अनुवादक में बहुत सारे गुण होते हैं। एक अनुवादक अंग्रेजी से हिंदी और हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद आसानी से कर सकता है उसे दोनों भाषाओ का ज्ञान होना उतना ही जरुरी है जितना की अपने विशिष्ट भाषा का ज्ञान उसे होता है। 

भरतमुनि कौन हैं - Bharatmuni kaun hai?

1. भरतमुनि कौन हैं? उत्तर :      भरतमुनि हिंदी साहित्य के नाट्यशास्त्र नामक ग्रन्थ के रचनाकार का नाम है। भरतमुनि के जन्म को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं और इनका जन्म 400 से 100 ई. पू. के बीच के समय को माना जाता है। इन्होने रससूत्र की परिभाषा दी थी और लिखा था -  विभावानुभाव व्यभिचारी संयोगाद रस निष्पत्तिः अर्थात विभाव, अनुभाव और व्यभिचारिभाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।  इनके इस रस की परिभाषा को नाट्यशास्त्र में लिखा गया है विभिन्न विद्वानों की माने तो भरतमुनि के द्वारा लिखा गया नाट्यशास्त्र पूरा उपलब्ध नहीं है।   Bharatmuni kaun hai?