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Showing posts from January, 2020

M A hindi syllabus 2nd sem madhy kalin kavya

M A Hindi Syllabus  एम. ए. हिंदी साहित्य पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित पाठ्यक्रम के अनुसार यहाँ पर लिखा गया है जो की सत्र 2019-20 के अनुसार है। इसे आप पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी से भी डाउनलोड कर सकते हैं लेकिन इसे लिखने का मेरा उद्देश्य आपको एम. ए. हिंदी साहित्य के सभी पाठ्यक्रम को उपलब्ध कराना है। यह सिर्फ सिलेबस नहीं है इसमें लिंक है उसमें क्लिक करके आप सीधे उस पाठ या इकाई पर जा सकते हैं जिसे आपके सिलेबस में दिया गया है। द्वितीय सेमेस्टर षष्ठ प्रश्न पत्र  मध्यकालीन काव्य  पाठ्य विषय : व्याख्या एवं विवेचन के लिए निम्नांकित तीन कवियों का अध्ययन किया जाएगा। इकाई 1 . सूरदास - भ्रमरगीत सार - सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल (50 पद) पद संख्या - 1 से 10 , 21 से 30 , 51 से 60 , 61 से 70 , 81 से 90 तक (50 पद) आपके सुविधा के लिए दिया गया लिंक नीचे है - पद 1 से 10 यहाँ है। पद 21 से 30 यहां है। पद 51 से 60 यहां है। पद 61 से 70 यहां है। पद 81 से 90 यहां है। इकाई 2. तुलसीदास - रा...

भ्रमर गीत सार : सूरदास के पद 1 से 10 तक

भ्रमरगीत सार - सूरदास   - सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल पद संख्या - 1 से 10 यहां इस पोस्ट में हमने लिखा है। M.A. हिंदी साहित्य के सिलेबस में दिए गए भ्रमर गीत सार के पद क्रमांक 1 से 10 तक है। और नीचे लिंक दिया गया है जिसमे उसके व्याख्या है।  bhrmar geet sar surdas ke pad फिलहाल अभी आप इन पदों को पढ़ें और समझे तथा जिसमें कोई त्रुटि हो तो हमें अवगत कराएं आइये पढ़ना शुरू करें। भ्रमर गीत सार पद 1 से 10 श्री कृष्ण का वचन उद्धव-प्रति 1. राग सारंग पहिले करि परनाम नंद सो समाचार सब दीजो।  औ वहां वृषभानु गोप सो जाय सकल सुधि लीजो।।  श्रीदाम आदिक सब ग्वालन मेरे हुतो भेंटियो।  सुख-सन्देस सुनाय हमारी गोपिन को दुख मेटियो।।  मंत्री एक बन बसत हमारो ताहि मिले सचु पाइयो।  सावधान है मेरे हुतो ताही माथ नावाइयो।।  सुंदर परम् किसोर बयक्रम च...

भ्रमर गीत सार : सूरदास के पद 21 से 30 तक

भ्रमरगीत सार - सूरदास  -सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल पद 21 से 30  आपका फिर से एक बार स्वागत है हमारे ब्लॉग में हमने इससे पहले लिखा था भ्र्मर गीत के एक से लेकर 10 तक के पदों को और आज हम इसी भ्रमर  गीत के 21 से 30 पदों को लिखने वाले हैं। हम आपको बता दें की हमारे ब्लॉग में अभी हम एम. ए. हिंदी साहित्य के पोस्ट लिख रहें हैं तो इसके सिलेबस में जितने भी पदों को पढ़ने के लिए कहा गया है हम उन्हीं पदों को यहां लिख रहें हैं।  bhrmar geet sar surdas ke pad इसके संदर्भ प्रसंग और व्याख्या से जुड़े पोस्ट के अपडेट पाने के लिए ब्लॉग को सब्स्क्राइब जरूर कर लें। चलिए शुरु करते हैं।  श्री कृष्ण का वचन उद्धव-प्रति 21. राग केदार गोकुल सबै गोपाल-उपासी। जोग-अंग साधत जे उधो ते सब बसत ईसपुर कासी।। यध्दपि हरि हम तजि अनाथ करि तदपि रहति चरननि रसरासो। अपनी सीतलताहि न छाँड़त यध्दपि है ससि राहु-गरासी।। का अपराध जोग लिखि पठवत प्रेम भजन तजि करत उदासी। सूरदास ऐसी...

भ्रमर गीत सार : सूरदास के पद 51 से 60 तक

भ्रमरगीत सार - सूरदास   - सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल पद संख्या - 51 से 60 यहाँ पर आपको एम. ए. हिंदी साहित्य के हिसाब से जो सिलेबस में पद क्रमांक दिए गए हैं उन्हीं पदों को लिखा गया है यहां पर हमने पद क्रमांक 51 से 60 तक को लिखा है जो की सूरदास के भ्र्मर गीत सार नामक काव्य से लिया गया है। चलिए जानते है की इन पदों के बारे में   bhrmar geet sar surdas ke pad bhramar-geet-sar-surdas-ke-pad-51-60 भ्रमर गीत सार  श्री कृष्ण का वचन उद्धव-प्रति 51. राग कान्हरो  अलि हो ! कैसे कहौ हरि के रूप-रसहि ? मेरे तन में भेद बहुत बिधि रसना न जानै नयन की दसहि।। जिन देखे तो आहि बचन बिनु जिन्हैं बजन दरसन न तिसहि।  बिन बानी भरि उमगि प्रेमजल सुमिरि वा सगुन जसहि।। बार-बार पछितात यहै मन कहा करै जो बिधि न बसहिं।  सूरदास अंगन की यह गति को समुझावै या छपद पंसुहि।। लिंक - भ्रमर गीत स...

भ्रमर गीत सार : सूरदास के पद 61 से 70 तक

भ्रमरगीत सार - सूरदास - सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल पद संख्या - 61 से 70 इस पोस्ट में हमने भ्रमर गीत  सार के पद क्रमांक 61 से 70 तक लिखा है। जो की एम. ए. हिंदी साहित्य के सिलेबस को देखकर लिखा गया है। क्योकि हम यहां पर पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी के एम्. ए. हिंदी के सिलेबस को लेकर यह पोस्ट लिख रहें हैं।  bhrmar geet sar surdas ke pad तो चलिए हमने पिछले पोस्ट में लिखा था भ्रमर गीत सार के 51 से 60 तक लिखा है। उसे भी पढ़ सकते हैं नीचे मैं सभी पद के लिंक दे रखे हैं तो वहां से  आप सीधे जा सकते हैं। bhramar-geet-sar-surdas-ke-pad-61-70 भ्रमर गीत सार श्री कृष्ण का वचन उद्धव-प्रति 61. राग धनाश्री  रहु रे, मधुकर ! मधुमतवारे ! कहा करौं निर्गुन लै कै हौं जीवहु कान्ह हमारे।। लोटत नीच परागपंग में पचत, न आपु सम्हारे।  बारंबार सरक मदिरा की अपरस कहा उघारे।। तुम जानत हमहूँ वैसी हैं जैसे कुसुम तिहारे।  घरी पहर सबको बिलमावत जेते आवत कारे।। सुन्दरस्याम को सर्बवस अप्र्यो अब कापै हम लेहिं उधारे।। * इन्हें भी देखें - भ्रमर गीत सार - सूरदास पद क्र...

भ्रमर गीत सार : सूरदास के पद 81 से 90 तक

भ्रमरगीत सार - सूरदास   - सम्पादक आचार्य रामचंद्र शुक्ल पद संख्या - 81 से 90 यहां इस पोस्ट में हमने लिखा है, एम.ए. हिंदी साहित्य के सिलेबस में दिए गए भ्र्मर गीत सार के पद को जो की पद क्रमांक 1 से 10 तक है और यहां पर सिर्फ इन पदों के बारे में बताया गया अगर आपको इसके व्याख्या सहित सभी पदों को पढ़ना है तो हम इसके लिए अलग से पोस्ट लिखने वाले है हमारे ब्लॉग को सब्स्क्राइब जरूर करे ताकि जब हम आपके लिए इसका सप्रसंग व्याख्या लिखें तब आपके पास जल्द ही नोटिफिकेशन पहुंच सके।  bhrmar geet sar surdas ke pad फिलहाल अभी आप इन पदों को पढ़ें और समझे तथा जिसमें कोई त्रुटि हो तो हमें अवगत कराएं आइये पढ़ना शुरू करें। भ्रमर गीत सार श्री कृष्ण का वचन उद्धव-प्रति 81. राग मलार  मधुकर रह्यो जोग लौं नातो।  कहति बकत बेकाम  काज  बिनु,  होय  न  ह्याँ  ते  हातो।। जब मिलि मिलि मधुपान कियो हो तब तू कह धौं कहाँ तो। तू आयो निर्गुन उपदेसन सो नहिं हमैं सुहातो।। काँचे गुन लै तनु ज्यों बेधौ ; लै बारिज को ताँतो।  मेरे जान गह्यो चाहत हौ फेरि कै मंगल मातो।। य...