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Showing posts from April, 2020

अभिनेता इरफान खान का निधन - Actor Irrfan Khan passes away

इन्होंने ने उन लोगों को Inspiration दिया जो लोग फ़िल्म में काम करना चाहते हैं और इन्होंने साबित किया कि आपके पास यदि टैलेंट है तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।  Bollywood Actor Irfan Khan जन्म : 7 जनवरी 1967 जयपुर में हुआ था इरफान खान का जन्म। 30 से ज्यादा बॉलीवुड फिल्मों में किया था काम।2011 में पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए थे इरफान खान। पान सिंह तोमर के लिए इन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का खिताब उन्हें मिला था। कुछ फिल्में द वारियर, मकबूल, हासिल, द नेम सेक, रोग जैसे फिल्मों में उन्होंने काम किया था इरफान खान लंबे समय से कैसर से जूझ रहे थे। Bollywood Actor Irfan Khan इरफान खान का असली नाम शाहबजादे इरफान अली खान है। इरफान खान बॉलीवुड, हॉलीवुड एक्टर रहें जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत टीवी से की थी। इनके पापा इन्हें एक्टिंग नहीं कराना चाहते थे लेकिन इन्हें एक्टिंग पसन्द था।  इनको जब...

मध्यकालीन काव्य एम. ए. हिंदी वस्तुनिष्ठ प्रश्न और उत्तर 2019 से 2014

M.A. HINDI 2nd Sem Objective Question Solved PAPER SIX (मध्यकालीन काव्य) 2019-2014 M.A. HINDI खण्ड-अ (वस्तुनिष्ट/बहुविकल्पीय प्रश्न)             प्रत्येक 1 नोट : सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।  1. भक्तिकाल के सगुणधारा के रामभक्ति शाखा के प्रमुख कवि हैं : (अ) कुम्भनदास (ब) सूरदास (स) तुलसीदास (द) मतिराम उत्तर - (स)  तुलसीदास । 2. तुलसीदास द्वारा रचित महाकाव्य का नाम है : (अ) रामायण (ब) रामलला नहछू (स) रामचन्द्रिका (द) रामचरितमानस  उत्तर - (द)  रामचरित मानस । 3. 'साहित्य लहरी' के कवि हैं : (अ) सूरदास (ब) पद्माकर (स) देव (द) नाभादास उत्तर- (अ)  सूरदास । 4. गोपियों को ज्ञान का उपदेश दिया था : (अ) यशोदा ने (ब) राधा ने (स) उद्धव ने (द) सत्यभामा ने उत्तर- (स)  उद्धव ने । 5. 'बिहारी-सतसई' के कवि हैं : (अ) घनानन्द (ब) चिंतामणि (स) भूषण (द) बिहारी उत्तर - (द)  बिहारी । 6. 'बिहारी' का प्रमुख काव्य छंद है : (अ) दोहा (ब) सवैया (स) सोरठा (द) छप्पय उत्तर - (अ)  दोहा । 7. 'सुजान विनोद' रचना है : (अ) केशव की (ब) घनानन...

उत्तर मध्यकाल से आधुनिक काल तक एम. ए. हिंदी वस्तुनिष्ठ प्रश्न और उत्तर 2019 से 2014

M.A. HINDI Second Sem PAPER FIFTH (उत्तर मध्यकाल से आधुनिक काल तक) Objective Question Solved Paper 2019-14 M.A. HINDI (Second Semester) EXAMINATION, MAY/JUNE, 2019 PAPER FIFTH  (उत्तर मध्यकाल से आधुनिक काल तक)  नोट : निर्देशानुसार सभी खण्डों के उत्तर दीजिए।  खण्ड-अ                        (वस्तुनिष्ट/बहुविकल्पीय प्रश्न)             प्रत्येक 1 नोट : सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1.) रामचन्द्र शुक्ल ने रीतिकाल की समय सीमा क्या मानी है? (अ) सं. 1050 से 1375 तक (ब) सं. 1700 से 1900 तक (स) सं. 1375 से 1900 तक (द) सं. 1900 से अब तक। उत्तर- (ब) सं. 1700 से 1900 तक (2) रीतिकाल को अलंकृत काल किस आलोचक ने कहा है ? (अ) डॉ. रामकुमार वर्मा (ब) रामचन्द्र शुक्ल (स) मिश्रबन्धु (द) हजारी प्रसाद द्विवेदी उत्तर- (स) मिश्रबन्धु। (3) 'कविप्रिया' किसकी रचना है? (अ) घनानन्द (ब) बिहारी (स) विद्यापति (द) केशवदास उत्तर- (द) केशवदास (4) तीसरा तारसप्तक का प्रकाशन किस वर्ष हुआ? (अ) 1951 (ब) 1943 (स) 1959 (द)...

रहीम के दोहे अर्थ सहित - rahim ke dohe in hindi class 9

सबसे पहले आपको रहीम के बारे में कुछ बता देता हूँ जब हम कोई भी किताब पढ़ते हैं तो उसके लेखक के बारे में हमें जानना उतना ही जरूरी हो जाता है।  रहीम के दोहे अर्थ सहित 1. खीरा सिर ते काटिए, मलियत लोन लगाय।     रहिमन करुए मुखन को, चहियत इहै सजाय।। भावार्थ - यहां पर रहीम कवि इन पंक्तियों के माध्यम से हमें सन्देश दे रहें हैं की हमें कटु वचन बोलने वाले के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए।  कवि कहते हैं की जैसे की हम खीरा के सिर को काटते हैं और उसमें नमक को लगाते हैं ताकि उसकी कड़वाहट दूर हो जाए करके। उसी प्रकार रहिमन दास जी कहते हैं की हमें कटू वचन बोलने वाले के मुख को भी इसी प्रकार कि सजा देनी चाहिए।  2. कदली, सीप, भुजंग मुख, स्वाति एक गुन तीन।      जैसी संगति बैठिए, तैसोई फल दीन।।  भावार्थ - यहां पर इस पंक्ति के माध्यम से रहीम ने हमें सन्देश दिया है की जिस प्रकार की संगति होती है वैसे ही हमारी रंगत होती है।  कवि इन पंक्तियों के माध्यम से स्वाति नक्षत्र के पानी का महत्व भी बता रहे हैं और कह रहे हैं की जिस प्रकार स्वाति नक्षत्र में गिरे ...

हनुमान चालीसा अर्थ सहित hanuman chalisa hindi mai

।।श्रीहनुमते नमः।। श्रीहनुमानचालीसा                   दोहा श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।  बरनऊँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि।।  बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।  बल बुद्धि बिद्धा देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।                                         चौपाई जय हुनमान ज्ञान गन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।। राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनी-पुत्र पवनसुत नामा।। महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित कैसा।। हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै।। संकर सुवन केसरीनन्दन। तेज प्रताप महा जग बन्दन।। बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करीब को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लषन सीता मन बसिया।। सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचन्द्र के काज सँवारे।। लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।। रघु...