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Showing posts from January, 2022

सूफी काव्यधारा के प्रमुख कवियों पर सविस्तार एक लेख लिखें।

1. सूफी काव्यधारा के प्रमुख कवियों पर सविस्तार एक लेख लिखें।  उत्तर - सूफी काव्यधारा के प्रमुख कवि मलिक मुहम्मद जायसी कुतुबन  मंझन  उसमान शेख नबी  निष्कर्ष  (1) मलिक मुहम्मद जायसी  - जायसी भक्तिकालीन प्रेमाख्यान-काव्य के प्रमुख कवि माने जाते हैं। अन्तः साक्ष्य के आधार पर जायसी का जन्म सन् 1498 ई. तथा मृत्यु 1542 ई. में मानी जाती है। इनका परिवार जायस (रायबरेली) में रहता था। जायसी के दाम्पत्य जीवन के सन्दर्भ में विद्वानों में मतभेद हैं, कुछ विद्वानों का कहना है कि जायसी का विवाह हुआ था, उनके पुत्र भी थे, लेकिन वे किसी दीवार के नीचे दबने या अन्यत्र किसी दुर्घटना में मर गये, जिसके प्रभाव से जायसी विरक्त हुए और घर छोड़कर सैयद असरफ जहाँगीर तथा मुहीउद्दीन चिश्ती से दीक्षित हो गये। कुछ विद्वानों के मत में माता-पिता की मृत्यु के पश्चात् ये बचपन से ही साधुओं को संगति में रहने लगे थे। इनका विवाह नहीं हुआ था। जायसी बहुत कुरूप थे, लेकिन उनका अंतरिक व्यक्तित्व अत्यधिक सुन्दर था। वे उदार प्रवृत्ति के व्यक्ति थे, इसीलिए लोगों में इनकी बड़ी मान्यता थी। जायसी के सम्बन्ध अमेठ...

सूफी काव्य की प्रवृतियों पर एक लेख लिखें।

1.  सूफी काव्य की प्रवृतियों पर एक लेख लिखें।  उत्तर -  सूफी काव्य की प्रवृत्तियाँ      भक्तिकाल की निर्गुण काव्य धारा को दो वर्गों में विभक्त किया गया है - संत काव्य-धारा एवं सूफी`      काव्य-धारा। इनमें से प्रथम काव्य-धारा का प्रतिनिधित्व करते हैं - कबीर, तो द्वितीय काव्य धारा के प्रतिनिधि कवि हैं जायसी। सूफी काव्य-धारा के लिए कुछ अन्य प्रचलित नाम है - प्रेमाख्यानक काव्य परम्परा, प्रेमगाथा काव्य एवं प्रेममार्गी काव्यधारा डॉ. गणपतिचन्द्र गुप्त ने इस काव्य-धारा के लिए एक नया नाम दिया है - रोमांसिक कथा काव्य परम्परा। इन सभी नामों में सर्वप्रसिद्ध नामकरण जो इस धारा के कवियों के लिए सहज स्वीकृत हुआ है वह है - सूफी काव्य-धारा। इस वर्ग के कवियों ने प्रेम-गाथाओं को अपने काव्य का विषय बनाया और प्रेम तत्व के द्वारा ईश्वर प्राप्ति को संभव बताया है।      सूफी शब्द की व्युत्पत्ति एवं सूफी मत  -  सूफी शब्द की व्युत्पत्ति के सम्बन्ध में विद्वानों में मतभेद है। कुछ विद्वानों का मत है कि मुसलमानों के पवित्र तीर्थ मदीना के सामने ' स...

अष्टछाप क्या है? इसके अंतर्गत आने वाले कवियों एवं उनकी कविता का परिचय दीजिये।

1.  अष्टछाप क्या है? इसके अंतर्गत आने वाले कवियों एवं उनकी कविता का परिचय दीजिये।   उत्तर – कृष्ण-काव्य धारा के अष्टछाप (आठ कवि) अष्टछाप के आठों कवि पुष्ट-मार्ग से सम्बन्धित हैं। इनका और इनकी कविता का परिचय प्राप्त करने से पूर्व पुष्टि मार्ग का परिचय प्राप्त करना आवश्यक है। डॉक्टर विजयेंद स्नातक ने डॉक्टर नगेन्द्र द्वारा संपादित 'हिंदी साहित्य का इतिहास' में पुष्टि मार्ग का परिचय देते हुए लिखा है – पुष्टिमार्गीय भक्ति रागानुराग भक्ति है। कृष्ण-भक्ति में किसी प्रकार के साधन या कर्मकाण्ड की अपेक्षा नही होती। पुष्टिमार्गीय भक्त के प्रारब्ध और संचित कर्मो का शमन ईश्वर कृपा से स्वयं हो जाता है। पुष्टि भक्ति का लाभ यह है कि-इसके द्वारा सघः मुक्ति प्राप्त होती है। पुष्टिमार्गीय भक्ति के तीन फल हैं – पहला, रस-रूप पुरुषोत्तम के स्वरूपानंद की शक्ति प्राप्त कर उसकी लीला में प्रविष्ट होना, दूसरा, पूर्ण पुरुषोत्तम के श्री अंग अथवा आभूषणादी अंग बनना और तीसरा, प्राकृत देह इन्द्रियादी मुक्त होकर अप्राकृत शरीर में भगवान के बैकुंठ आदि लोकों में आनन्द भोग की स्थिति प्राप्त करना. इस प्रक...

आदिकाल एवं पूर्वमध्यकाल सूफी प्रेमाख्यानक काव्य लघु एवं दीर्घ प्रश्न उत्तर

आदिकाल एवं पूर्वमध्यकाल इकाई -4. सूफी प्रेमाख्यानक काव्य - प्रवित्तियाँ, प्रेमाख्यानक परम्परा और हिंदी में उसका विकास।                 रामभक्ति काव्य, कृष्ण भक्ति काव्य, सामान्य प्रवित्तियाँ और दार्शनिक विचार धाराएँ, उपलब्धियाँ।  प्रश्न-उत्तर के लिंक शायद आपकी कुछ मदद हो सके निचे सारे  प्रश्नों के लिंक दिए गए हैं जिसे क्लिक करके आप उनके उत्तरों को देख सकते हैं- • लघु उत्तरीय प्रश्न 'सूफी' शब्द की व्युत्पत्ति पर प्रकाश डालिए। सूफी कवि कुतुबन द्वारा रचित 'मृगावती' का संक्षिप्त परिचय दीजिए।  सूफी कवि मंझन कृत 'मधुमालती' का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत कीजिए।  जायसी के 'पद्मावत' का परिचय प्रस्तुत कीजिए। 'सूफी' शब्द की व्युत्पत्ति तथा स्रोत स्पष्ट करें। सूफी मत के भारत में प्रचार-प्रसार पर टिप्पणी लिखें। सूफी मत की मान्यताएं स्पष्ट करें। सूफी काव्य की प्रमुख प्रवृतियों को लिखे।  • दीर्घ उत्तरीय प्रश्न कृष्ण काव्यधारा की प्रमुख विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।  राम काव्य की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। भक्तिकाल की सांस्कृतिक ...

सूर-काव्य की विशेषताओं का उद्घाटन करते हुए सिद्ध कीजिए कि सूर कृष्ण-भक्ति परम्परा के श्रेष्ठतम कवि है।

कृष्ण-काव्यधारा के श्रेष्ठतम कवि सूर   1. सूर-काव्य की विशेषताओं का उद्घाटन करते हुए सिद्ध कीजिए कि सूर कृष्ण-भक्ति परम्परा के श्रेष्ठतम कवि है। उत्तर - सूर-काव्य में कवि की भावमयी भक्ति की प्रेरणा ही कार्य कर रही है। उन्होंने कृष्ण-चरित्र के केवल उन भावात्मक स्थलों को ही चुना है, जिनमें उनकी अन्तरात्मा की अनुभूति गहरी उतर सकी है। अतएव उनके काव्य में भावमय स्थल ही रसात्मक हैं, इतिवृत्तात्मक स्थल नीरस हैं। वस्तुतः भक्त कवि सूर की मानसिक वृत्ति जिस लीला में रमी है, उसी का इन्होंने तन्मयता के साथ चित्रण किया है। सूर ने बाह्य विषयात्मक शैली का अनुकरण न करके आत्मविषयात्मक शैली का प्रयोग किया है। यही कारण है कि उनके काव्य में हृदय को स्पर्श करने वाली द्रावक शक्ति विद्यमान है।      भाव-चित्रण  - सूर-काव्य में भाव-चित्रों के आध्यात्मिक और लौकिक दोनों रूप अंकित हुए हैं। वे प्रचुर तथा विशद हैं और उनके द्वारा कवि को भाव के प्रभावपूर्ण चित्र खींचने में प्रशंसनीय सफलता भी मिली है।      विनय  - सूर के प्रायः सभी विनय के पदों में आत्मदीनता का भाव लिपटा हुआ...

कृष्ण काव्य-धारा का परिचय देते हुए इसकी प्रमुख प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए।

1. कृष्ण काव्य-धारा का परिचय देते हुए इसकी प्रमुख प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए। अथवा 2. कृष्ण-काव्य-धारा के उद्भव तथा विकास पर प्रकाश डालते हुए इसकी प्रमुख विशेशताएँ बताइए। उत्तर - कृष्णाख्यान की प्राचीनता      कृष्णाख्यान की परम्परा अत्यन्त प्राचीन है जो भारतीय साहित्य में विविध रूपों में उपलब्ध है। वैदिक और संस्कृत साहित्य में कृष्ण के तीन रूप है-  (1) ऋषि एवं धर्मोपदेशक,  (2) नीतिविशारद क्षत्रिय राजा, और  (3) बाल तथा किशोर रूप।       प्रथम रूप का विकास गीता में हुआ है, दूसरे रूप के दर्शन महाभारत में होते हैं और तीसरा रूप पुराणों में विकसित हुआ है।       पुराणों में सबसे पहले भागवत में ही गोपाल कृष्ण के जन्म से द्वारिका प्रवास तक सम्पूर्ण चरित्र विस्तृत रूप से वर्णित है।  मध्यकालीन भाषा-कवियों ने गोपाल कृष्ण के इसी रूप को कृष्ण भक्ति के रूप में ग्रहण करके अपने काव्य का प्रमुख विषय बनाया है। वस्तुतः भागवतकार ने गोपाल कृष्ण की लोक-प्रसि कथाओं तथा अप्रचलित वार्ताओं को ललित रूप प्रदान करने में अपनी अद्भुत कल्पना शक...

राम-काव्य-धारा के प्रमुख कवियों का संक्षिप्त परिचय दीजिये।

1. राम-काव्य-धारा के प्रमुख कवियों का संक्षिप्त परिचय दीजिये।  राम-काव्य-धारा के प्रमुख कवियों का संक्षिप्त परिचय उत्तर - राम-काव्य-धारा के प्रमुख कवियों का संक्षिप्त परिचय कुछ इस प्रकार है-      राम काव्यधारा के अग्रिम पंक्ति में गिने जाने वाले कवि तुलसीदास को कौन नहीं जानता आइये जाने उनके संक्षिप्त जीवन परिचय।       गोस्वामी तुलसीदास - गोस्वामी तुलसीदास राम-काव्य-धारा के ही नहीं वरन् समूचे हिन्दी साहित्य के सर्वश्रेष्ठ कवि कवियों में से एक हैं। इनका संक्षिप्त जीवन परिचय निम्न प्रकार हैं-      जन्म संवत्  - तुलसीदास के जन्म संवत् के सम्बन्ध में विद्वानों में मत-वैषम्य अर्थात एकमत नहीं है। विभिन्न मतों के अनुसार 1554, 1600, 1581 तथा 1589 जन्म-संवत् माने गये हैं। अधिकांश विद्वानों के अनुसार जन्म संवत् 1554 और मृत्यु संवत् 1680 माना गया है।      जन्म-स्थान - जन्म-संवत की ही भाँति गोस्वामीजी का जन्म-स्थान भी विवादग्रस्त है। तारी, चित्रकूट, राजापुर तथा सोरों आदि स्थानों में से कोई एक इनका जन्म-स्थान हो सकता है। अधिक...