Skip to main content

Posts

Showing posts from May, 2022

रस से संबंधित साधारणीकरण का परिचय दीजिये।

1. रस से संबंधित साधारणीकरण का परिचय दीजिये।  उत्तर - पिछले पोस्ट में हमने रस के अंगों का विवेचन किया था आज के इस पोस्ट में हम रस से संबंधित साधारणीकरण की चर्चा कर्नेगे -       भरतमुनि के रससूत्र की व्याख्या के प्रसंग में साधारणीकरण की मान्यता आवश्यक हुई। नायक अथवा नायिका की रसानुभूति के प्रसंग में नाटक के आधार पर शंका हुई कि वास्तविक श्रृंगार रस और उसका स्थायी भाव रति अर्थात प्रेम तो दुष्यंत और शकुंतला में रहा था वे आज हैं नहीं। जो पात्र उनका अनुभव कर रहे हैं उनमें प्रेम या रति का होना असम्भव है। यदि उन्हें चित्र तुरंग न्याय से किसी प्रकार दुष्यंत और शकुंतला मान भी लें तो उनका प्रेम देखकर दर्शकों के मन में रति के स्थान पर लज्जा का भाव उदय होना चाहिए, क्योंकि भारतीय संस्कृति के अनुसार दूसरों की रति देखना लज्जा का विषय है।       साधारणीकरण शब्द का प्रयोग सबसे पहले भट्ट्नायक ने किया और भावकत्व व्यापार को साधारणीकरण माना।इनका विरोध करके आचार्य अभिनवगुप्त ने दो स्तरों पर साधारणीकरण स्वीकार किया। पहले स्तर पर विभावादि देश और काल के बंधन से म...

रस के अंगों का विवेचन कीजिये।

1. रस के अंगों का विवेचन कीजिये।  उत्तर - सबसे पहले तो आपका स्वागत है मेरे ब्लॉग Question Field Hindi में आज के इस पोस्ट में हम रस के अंगों का विवेचन करने वाले हैं।   रस के अंगों का विवेचन करने से पहले आईये जाने रस क्या है उसके बारे में उन Viewers के लिए जो पहली बार इस पोस्ट को पढ़ रहे हैं।  # रस क्या है? काव्य या गद्य के पठन-पाठन एवं श्रवण से जिस भी प्रकार की हमें अनुभूती होती है उसे रस कहते हैं यहां इसका अर्थ स्वाद अर्थात आनंद से है।  #रस के अंगों का विवेचन आइये अब जाने रस के अंगों के बारे में जैसे की हमने बचपन से पढ़ा है रस के चार अंग होते हैं स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी भाव।  लेकिन भरतमुनि के रस सूत्र में स्थायी भाव का उल्लेख नहीं किया गया है। उन्होंने स्थायी भाव को ही प्रधान अंग माना है क्योंकि विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी भाव की सहायता से स्थायी भाव ही रस के रूप में परिवर्तित होते हैं।  (1) स्थयी भाव - रसों की संख्या के समान ही स्थायी भाव की संख्या भी ग्यारह प्रकार है। जो की इस प्रकार हैं - श्रृंगार रस का स्थायी भाव ...

रस निष्पत्ति पर प्रकाश डालिए।

 1. रस निष्पत्ति पर प्रकाश डालिए। उत्तर - रस की निष्पत्ति को लेकर विभिन्न विद्वानों ने अपने मत इस प्रकार है प्रकट किये हैं -  आइये देखें सबसे पहले भरतमुनि के रस सूत्र को भारतीय काव्यशास्त्र में भरतमूनि के रस सूत्र को रस का आधार माना गया है - विभावानुभाव व्यभिचारी संयोगाद्र्स निष्पत्ति:      इस रस सूत्र में यदि हम गौर करें तो इसमें विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी भावों पर कोई विवाद नहीं है . इसके संयोग और निष्पत्ति शब्दों को विवाद का विषय बनाया गया है.      भरतमूनि के रस सूत्र के पहले व्यख्याता की बात करें तो इसके पहले व्यख्याता भट्ट लोल्लट थे . ये मीमांसक थे . इनका मत उत्पत्तिवाद माना जाता है .      भट्ट लोल्लट के मत की समीक्षा आचार्य भट्ट शंकुक ने की . भट्ट शंकुक नैयायिक थे . उन्होंने निष्पत्ति का अर्थ अनुमिति अर्थात अनुमान माना है . इन्होने संयोग का अर्थ अनुमान और निष्पत्ति का अर्थ अनुमिति माना है .     भट्ट लोल्लट की अनुमितिवाद की आलोचना भट्टनायक ने की है . भट्टनायक शांख्यदर्शन पर विश्वास करते थे . इनका मत मुक्तिवाद कहल...

गजल क्या है?

1. गजल क्या है? उत्तर- गजल अरबी साहित्य की काव्य विधा है बाद में यह हिंदी , नेपाली, फारसी और उर्दू में भी लोकप्रिय हुआ।   संगीत के क्षेत्र में इसे गाने के भारतीय संगीत और इरानी संगीत के मिश्रण का उपयोग किया जाता है।   यह अरबी भाषा का शब्द है इसका अर्थ - औरतों से या औरतों के बारे में बात करना होता है।  हिंदी में बात करें तो विभिन्न साहित्यकारों ने इसको अपनाया जिसमें निराला, शमसेर बहादुर, भवानी शंकर, जानकी वल्लभ शास्त्री, बलवीर सिंह रंग, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना त्रिलोचन आदि प्रमुख हैं लेकिन सर्वाधिक सफलता दुष्यंत कुमार को मिली।  Gajal kya hai?

हिंदी क्या है?

1. हिंदी क्या है? उत्तर - हिंदी विश्व भर में बोली जाने वाली विभिन्न भाषाओं में से एक भाषा है तथा यह भारत की राजभाषा है।  इसकी लिपि देवनागरी लिपि है।  इसके मानकीकृत रूप को मानक हिंदी कहा जाता है।  इसमें संस्कृत के तत्सम एवं तत्भव शब्दों की प्रधानता हमें देखने को मिलती है अरबी और फारसी शब्दों का बहुत कम प्रयोग किया गया है।  एथनोलॉग के अनुसार यह विश्व में तीसरे नंबर पर सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है।   Hindi kya hai?

छतीसगढ़ी क्या है?

1. छतीसगढ़ी क्या है? उत्तर - छत्तीसगढ़ी एक बोली का नाम है जो कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में बोली जाती है। छत्तीसगढ़ी भाषा का विकास पूर्वी हिंदी से हुआ है यह हिंदी भाषा के सबसे निकट की बोली है। इसे छत्तीसगढ़ में लगभग 2 करोड़ लोगों के द्वारा बोला जाता है। 

संस्कृत काव्यशास्त्र के अनुसार रस के स्वरूप पर विचार कीजिए।

1. संस्कृत काव्यशास्त्र के अनुसार रस के स्वरूप पर विचार कीजिए।  उत्तर - रस के स्वरूप को लेकर संस्कृत काव्यशास्त्र में विभिन्न विद्वानों के मत भिन्न भिन्न प्रकार के रहे हैं जो की इस प्रकार है - संस्कृत काव्यशास्त्र में रस सिद्धांत का आरम्भ भरतमुनि से होता है। उन्होंने जो रस की परिभाषा की, उसे रस-सूत्र कहा जाता है। उनका रस-सूत्र निम्नलिखित है - विभावानुभाव व्यभिचारि संयोगाद्रस निष्पत्तिः।  (विभाव, अनुभाव, और संचारी भावों के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।)     इसमें स्थायी भाव का उल्लेख नहीं किया गया है। स्थायी भाव ही रस के रूप में परिवर्तित होता है। इस रस सूत्र को अभी तक मान्यता प्राप्त है।           भामह, दण्डी, उद्भट और रुद्रट अलंकारवादी आचार्य माने जाते हैं। इनमें भामह ने 'रसवत अलंकार' के रूप में रस को मान्यता दी है। दण्डी ने अलंकारों में इस का समावेश किया है, आचार्य उद्भट ने रस का समर्थन किया है, पर इसका समावेश अलंकारों में किया है। रुद्रट ने रस को काव्य में महत्वपूर्ण स्थान दिया है।      रीतिवादी आचार्य...

संस्कृत काव्यशास्त्र के अनुसार काव्य के भेद अथवा प्रकार बताइए।

1. संस्कृत काव्यशास्त्र के अनुसार काव्य के भेद अथवा प्रकार बताइए।  उत्तर - संस्कृत काव्यशास्त्र की बात करें तो संस्कृत के आचार्यों ने सबसे पहले काव्य के दो भेद - (1) प्रबंध काव्य और (2) मुक्तक काव्य, स्वीकार किये हैं। प्रबंध काव्य का आधार कथानक होता है।  मुक्तक काव्य का कथानक से संबंध नहीं होता है। इसके बाद  प्रबंध काव्य के दो भेद - 1. महाकाव्य और 2. खंडकाव्य किये गए हैं। महाकाव्य के भिन्न-भिन्न आचार्यों ने अनेक लक्षण किये हैं। इनमें प्रमुख हैं - सर्गबद्ध होना, महान चरित्रों से सुशोभित होना, विशाल-आकार, जटिल शब्दों का अभाव, अर्थ सौष्ठव से सम्पन्न, अलंकारों से युक्त सत्पुरुष पर आश्रित होना चाहिए।  इसके अतिरिक्त उसमें मंत्रणा, दूत प्रेषण, अभिधा, युद्ध, नायक का अभ्युदय एवं पांच संधियों का निर्वाह होना चाहिए।  महाकाव्य में नायक का वर्णन पहले और प्रतिनायक का बाद में होना चाहिए। इसमें एक रस प्रमुख तथा शेष रस अप्रधान रूप में होने चाहिए। लौकिक व्यवहार के साथ-साथ नायक को आरम्भ से अंत तक दिखाना चाहिए।      खंडकाव्य में महाकाव्य के कुछ ही लक्षणों का नि...

काव्य प्रयोजन कितने होते हैं?

1. काव्य प्रयोजन कितने होते हैं? उत्तर - यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका सटीक उत्तर दे पाना बहुत कठिन है क्योंकि काव्य का प्रयोजन कवि के अनुसार कुछ भी हो सकता है। लेखक का भी अपना एक प्रयोजन होता है और पहले जमाने में तो संस्कृत आचार्यों ने गद्य को भी काव्य माना है।  इस संबंध में संस्कृत का यह श्लोक है - ' गद्यं कवीनां निकषं वदन्ति। ' अर्थात गद्य कवियों की कसौटी है।  इस प्रकार साहित्य-सृजन में साहित्यकार के जो भी उद्देश्य रहते हैं, वे ही साहित्य अथवा काव्य के प्रयोजन कहलाते हैं।  इस संबंध में विभिन्न विद्वानों ने अनेक प्रकार से अपने मत प्रस्तुत किये और भिन्न-भिन्न प्रकार के काव्य प्रयोजन माना कुछ उदाहरण देखें - भरतमुनि - लोकमंगल या लोकहित, आनंद को भामह - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को काव्य का प्रयोजन माना है साथ ही कीर्ति और प्रीति भी इन्होने माना है। विस्तृत जानकारी के लिए सर्च करें! आपको जानकारी कैसे लगी दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें ! Kavya prayojan kitane hote hai?

संस्कृत के आचार्यों के अनुसार काव्य के प्रयोजनों पर प्रकाश डालिए।

1. संस्कृत के आचार्यों के अनुसार काव्य के प्रयोजनों पर प्रकाश डालिए।   उत्तर - काव्य के प्रयोजनों पर भरतमुनि ने विचार किया और लोकहित अथवा लोकमंगल को काव्य रचना का प्रमुख प्रयोजन स्वीकार किया।  इसके बाद आचार्य भामह ने धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति को काव्य का प्रयोजन स्वीकार किया।  आचार्य वामन ने काव्य प्रयोजनों के दृष्ट और अदृष्ट दो भाग किये। उन्होंने दृष्ट के अंतर्गत प्रीति और अदृष्ट प्रयोजन के अंतर्गत कीर्ति को स्वीकार किया।  आचार्य दण्डी ने काव्य के प्रयोजनों की चर्चा नहीं की है।  आचार्य कुंतक ने काव्य रचना के प्रयोजन के रूप में आह्लाद की उत्पत्ति और धर्म आदि की सिद्धि को माना है।  आचार्य रुद्रट ने स्थायी यश धन-प्राप्ति, विपत्ति नाश, आनंद की प्राप्ति, आप्त कामना और पुरुषार्थ चतुष्टय को काव्य का प्रयोजन बताया है।  आचार्य अभिनवगुप्त के अनुसार प्रीति काव्य के प्रयोजन हैं।  आचार्य राजशेखर ने सामाजिक दृष्टि से काव्य का प्रयोजन आनंद की प्राप्ति और कवि की दृष्टि से अक्षय कीर्ति माना है।  पंडितराज जगन्नाथ ने प्रीति अर्थात आनन्द के अतिर...

काव्य के हेतुओं का विवेचन कीजिए।

1. काव्य के हेतुओं का विवेचन कीजिए।  काव्य के हेतुओं का विवेचन उत्तर - हिंदी साहित्य में विभिन्न भारतीय आचार्यों ने अपने अपने मत के अनुसार काव्य हेतु को माना है जो की इस प्रकार है - * भामह - भारतीय आचार्यों में सबसे पहले भामह ने काव्य के तीन हेतु प्रतिभा , व्युत्पत्ति और अभ्यास को माना है। * आचार्य दण्डी - इसके बाद आचार्य दण्डी ने भी काव्य के तीन हेतु माने हैं तथा आचार्य वामन के काव्य-हेतुओं में केवल शब्द का अंतर है। उन्होंने काव्य के तीन हेतु प्रतिभा, अध्ययन तथा अभ्यास माने हैं।  * आचार्य वामन - इन्होंने लोक व्यवहार, शास्त्र, शब्दकोश आदि काव्य के अनेक हेतु माने हैं, पर सबसे अधिक महत्व प्रतिभा को दिया है।  * आचार्य रुद्रट - इन्होने भी काव्य-हेतु को  दण्डी के समान माना है।  * आचार्य आनंदवर्धन - आचार्य आनंदवर्धन ने भी काव्य हेतुओं में प्रतिभा को ही सबसे अधिक महत्व दिया है।  * आचार्य राजशेखर - इन्होने प्रतिभा और व्युत्पत्ति को समान रूप से काव्य का हेतु स्वीकार किया है।  * आचार्य मम्मट - ने स्वाभाविक प्रतिभारूपी शक्ति, लोकव्यवहार, क...

संस्कृत के आचार्यों के अनुसार काव्य के लक्षण पर प्रकाश डालिए।

1. संस्कृत के आचार्यों के अनुसार काव्य के लक्षण पर प्रकाश डालिए।  उत्तर - संस्कृत के आचार्यों के अनुसार काव्य के लक्षण इस प्रकार हैं - संस्कृत के विभिन्न आचार्य जिनके काव्य लक्षण यहां प्रस्तुत किये गए हैं -  भामह  आचार्य रुद्रट  आचार्य वामन  आचार्य आनंदवर्धन  आचार्य कुंतक  आचार्य मम्मट  सबसे पहले भामह का काव्य लक्षण देखते हैं - 1. भामह -      संस्कृत के आचार्यों में सर्वप्रथम भामह ने ही काव्य का लक्षण प्रस्तुत करते हुए लिखा है -  शब्दार्थौसहितौ काव्यम।   (शब्द और अर्थ मिलकर काव्य होते हैं।) 2. आचार्य रुद्रट -     इसी प्रकार की बात आचार्य रुद्रट ने कही है। इसके बाद आचार्य दण्डी का क्रम आता है। उन्होंने लिखा है - इष्टार्थ व्यवच्छिन्ना पदावली।   (इष्ट अर्थ को व्यक्त करने वाली पदावली काव्य है।) 3. आचार्य वामन -     इसके बाद आचार्य वामन ने रीति को काव्य की आत्मा माना है - रीतिरात्मा काव्यस्य।   4. आचार्य आनंदवर्धन -      आचार्य आनन्दवर्धन के अनुसार काव्य की आत्मा ध्वनि है - काव्यस्य ...

हिंदी साहित्य में आलोचना के सात प्रकारों के नाम लिखिए?

1. हिंदी साहित्य में आलोचना के सात प्रकारों के नाम लिखिए? उत्तर - हिंदी साहित्य में आलोचना के सात प्रकार इस प्रकार हैं - शास्त्रीय आलोचना, सैद्धांतिक आलोचना, निर्णयात्मक आलोचना, व्याख्यात्मक आलोचना, ऐतिहासिक आलोचना, मनोवैज्ञानिक आलोचना, मार्क्सवादी आलोचना Hindi sahitya me aalochna ke sat prakaron ke naam likhiye?

भ्रमरगीत सार पाठ के संदेशवाहक कौन है?

1. भ्रमरगीत सार पाठ के संदेशवाहक कौन है? उत्तर - भ्रमरगीत सार पाठ के संदेशवाहक श्री कृष्ण के मित्र उद्धव हैं जिनके माध्यम से श्री कृष्ण ने ब्रज के गोपियों के लिए संदेश भेजा था।  Bhramargeet sar path ke sandeshvahak kaun hai?

सूरदास का जन्मकाल कब माना जाता है?

 1. सूरदास का जन्मकाल कब माना जाता है? उत्तर - सूरदास का जन्मकाल संवत् 1540 विक्रमी (सन् 1483 ई.) को माना जाता है इनके जन्म को लेकर बहुत झने विद्वानों में मतभेद है कई विद्वानों का मनना है की इनका जन्म संवत 1535 विक्रमी (सन् 1478 ई.) को हुआ है।  Surdas ka janmkal kab mana jata hai?

इकाई-4. मैथ्यू आर्नल्ड - कला की अवधारणा अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 एम. ए. हिंदी (तृतीय सेमेस्टर) साहित्य के सिद्धांत तथा आलोचना शास्त्र (प्रथम प्रश्न-पत्र) इकाई-4. मैथ्यू आर्नल्ड - कला की अवधारणा अतिलघु उत्तरीय प्रश्न ललित कल्पना का प्रयोग कौन नही करता है? मैथ्यू आर्नोल्ड को क्या माना जाता है? मैथ्यू अर्नोल्ड ने अपना साहित्यिक जीवन किस रूप में प्रस्तुत किया? मैथ्यू आर्नोल्ड की दृष्टि में साहित्य क्या है? मैथ्यू आर्नोल्ड के अनुसार आलोचक में कितने गुण होने चाहिए? टी. एस. इलियट ने मैथ्यू ऑर्नॉल्ड को आलोचक की अपेक्षा क्या माना है? मैथ्यू आर्नोल्ड के अनुसार आलोचक का क्या कर्तव्य है? मैथ्यू ऑर्नाल्ड के अनुसार साहित्य में कितने प्रकार की प्रतिभा होती है? किस सन में इलियट ने अपने विषय में स्पष्ट लिखा है? इलियट ने अपने विषय में  क्या-क्या कहा है ? इलियट का सन 1928 का वक्तव्य आने से पहले लोग उन्हें क्या समझ रहे थे? एजरा पाउण्ड ने कविता को गद्य के समान लिखने के विषय में पत्र किस सन में लिखा? इलियट के अनुसार परम्परा कैसी वस्तु है? इलियट ने परम्परा को छोड़ना अपने आपको छोड़ने के सामान अपने किस निबंध में लिखा है? इलियट धर्म और संस्कृति को कैसा मानत...

पाठ्यक्रम में संकलित गुलशेर खाँ शानी की कहानी का नाम लिखिए।

 (1) पाठ्यक्रम में संकलित गुलशेर खाँ शानी की कहानी का नाम लिखिए। उत्तर - अपने सिलेबस में जो कहानी दिया गया है उस कहानी को यहां लिखें सिलेबस आप अपने महाविद्यालय की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं। Pathyakram me sankalit gulsher khan shani ki kahani ka naam likhiye?

'जुदाई की शाम का गीत' किस कथाकार की रचना है?

 (1) 'जुदाई की शाम का गीत' किस कथाकार की रचना है? उत्तर - जुदाई की शाम का गीत उपेन्द्रनाथ अश्क की रचना है। Judai ki sham ka geet kis kathakar ki rachna hai?

'तेलुगू साहित्य का इतिहास' के रचयिता का नाम लिखिए।

 (1) 'तेलुगू साहित्य का इतिहास' के रचयिता का नाम लिखिए। उत्तर - तेलुगू साहित्य का इतिहास के रचयिता ठाकुर प्रसाद सिंह हैं। जिसका पहला संस्करण 1964 को प्रकाशित हुआ था। Telugu sahitya ka itihas ke rachyita ka naam likhiye.

फणीश्वर नाथ रेणु कृत आंचलिक कहानी का नाम बताइए।

 (1) फणीश्वर नाथ रेणु कृत आंचलिक कहानी का नाम बताइए। उत्तर - मैला आँचल फणीश्वरनाथ रेणु का आंचलिक कहानी (उपन्यास) है। Fanishwar nath renu krit aanchalik kahani ka naam bataiye?

हिन्दी की पहली कहानी के लेखक कौन हैं?

 (1) हिन्दी की पहली कहानी के लेखक कौन हैं?- उत्तर - आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार इंदुमती हिंदी की पहली कहानी है। जिसके लेखक किशोरी लाल गोस्वामी हैं। Hindi ki pahali kahani ke lekhak kaun hai?

प्रेमचंद उर्दू में किस नाम से साहित्य लेखन करते थे?

 (1) प्रेमचंद उर्दू में किस नाम से साहित्य लेखन करते थे?  उत्तर - प्रेमचंद उर्दू में नवाबराय के नाम से साहित्य लेखन करते थे। Premchand urdu me kis naam se sahitya lekhan karte the?

'सरस्वती' पत्रिका का सम्पादन छत्तीसगढ़ के किस साहित्यकार ने किया है?

 (1) 'सरस्वती' पत्रिका का सम्पादन छत्तीसगढ़ के किस साहित्यकार ने किया है? उत्तर - 'सरस्वती' पत्रिका का सम्पादन छत्तीसगढ़ के साहित्यकार पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी ने किया है। Sarasvati patrika ka sampadan chhattisgarh ke kis sahityakar ne kiya hai.

घीसू और माधव को बुधिया के कफन हेतु कितने रूपये मिले थे?

 (1) घीसू और माधव को बुधिया के कफन हेतु कितने रूपये मिले थे? उत्तर - घीसू और माधव को बुधिया के कफ़न हेतु पाँच रुपये मिले थे। Gheesu aur madhav ko budhiya ke kafan hetu kitane rupaye mile the?

'लकुमा' किस विधा की रचना है?

 (1) 'लकुमा' किस विधा की रचना है? उत्तर - यह प्रश्न लगता है गलत है क्योंकि मैंने इस रचना का नाम अभी तक नहीं सुना है। आपको बता दूँ महादेवी वर्मा की लछमा एक रचना है जो कि रेखाचित्र विधा पर लिखा गया है। Lakuma kis vidha ki rachana hai?

'आकाशदीप' कहानी की नायिका का नाम बताइए।

 (1) 'आकाशदीप' कहानी की नायिका का नाम बताइए। उत्तर - 'आकाशदीप' कहानी की नायिका का नाम चंपा है यह नायिका प्रधान कहानी है। Aakashdeep kahani ki nayika ka naam bataiye.

पश्चिमी कहानी की प्रमुख विशेषता क्या मानी जाती है?

 (1) पश्चिमी कहानी की प्रमुख विशेषता क्या मानी जाती है? उत्तर - इसके उत्तर के लिए कृपया थोड़ा इन्तजार करें! Pashchimi kahani ki pramukh visheshta kya mani jati hai?

चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' की चर्चित कहानी का नाम लिखिए।

 ( 1 ) चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' की चर्चित कहानी का नाम लिखिए। उत्तर - चन्द्रधर शर्मा गुलेरी की चर्चित कहानी का नाम उसने कहा था। Chandradhar sharma guleri ki charchit kahani ka naam likhiye.

जालपा किस आभूषण से अत्यधिक प्रेम करती थी?

1. जालपा किस आभूषण से अत्यधिक प्रेम करती थी? उत्तर - जालपा चन्द्रहार नामक आभूषण से अत्यधिक प्रेम करती थी। Jalpa kis aabhushan se atyadhik prem karti thi?

B.A. PART I EX. 2022 HINDI L. SECOND PAPER हिंदी कथा साहित्य

  B.A. (PART-I) EXAMINATION, 2022 (New course) HINDI LITERATURE Paper Second (हिंदी कथा साहित्य) 5. निम्नलिखित में से किन्हीं पन्द्रह वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर दीजिए: प्रत्येक 1 (1) जालपा किस आभूषण से अत्यधिक प्रेम करती थी ? उत्तर - जालपा चन्द्रहार नामक आभूषण से अत्यधिक प्रेम करती थी। ( 2 ) चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' की चर्चित कहानी का नाम लिखिए। उत्तर - चन्द्रधर शर्मा गुलेरी की चर्चित कहानी का नाम उसने कहा था। (3) पश्चिमी कहानी की प्रमुख विशेषता क्या मानी जाती है? उत्तर -   (4) 'आकाशदीप' कहानी की नायिका का नाम बताइए। उत्तर - 'आकाशदीप' कहानी की नायिका का नाम चंपा है यह नायिका प्रधान कहानी है। (5) 'लकुमा' किस विधा की रचना है? उत्तर - यह प्रश्न लगता है गलत है क्योंकि मैंने इस रचना का नाम अभी तक नहीं सुना है। आपको बता दूँ महादेवी वर्मा की लछमा एक रचना है जो कि रेखाचित्र विधा पर लिखा गया है। (6) घीसू और माधव को बुधिया के कफन हेतु कितने रूपये मिले थे? उत्तर - घीसू और माधव को बुधिया के कफ़न हेतु पाँच रुपये मिले थे।   (7) 'सरस्वती' पत्रिका का सम्पादन छत्...

B.A. PART III EX. 2022 HINDI L. SECOND PAPER QUESTION AND ANSWER

B.A. (PART-III) EXAMINATION, 2022 (New course) HINDI LITERATURE Paper Second (हिंदी भाषा साहित्य का इतिहास तथा काव्यांग विवेचन)  6. वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर दीजिए (कोई पन्द्रह) (i) वीर रस का स्थायी भाव क्या है? उत्तर - वीर रस का स्थायी भाव उत्साह है। (ii) वीरगाथा काल को और किस नाम से जाना जाता है? उत्तर - वीरगाथा काल को आदिकाल के नाम से जाना जाता है। (iii) पूर्वी हिंदी की बोलियों के नाम लिखिए | उत्तर - पूर्वी हिंदी की बोलियों के नाम इस प्रकार हैं - अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी, (iv) पश्चिमी हिंदी की बोलियों के नाम लिखिए। उत्तर - पश्चिमी हिंदी की पांच बोलियां हैं जो कि इस प्रकार हैं - खड़ी बोली या कौरवी, हरियाणवी या बाँगरु, ब्रज, बुंदेली और  कन्नौजी। (v) अष्टछाप के संस्थापक कौन हैं? उत्तर - अष्टछाप के संस्थापक स्वामी विट्ठलनाथ हैं। (vi) संत काव्यधारा के प्रमुख कवि का नाम लिखिए। उत्तर - सन्त काव्यधार के प्रमुख कवियों के नाम इस प्रकार हैं - कबीर दास, रैदास, धर्मदास, सुन्दरदास, दादू दयाल। (vii) कृष्ण भक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि का नाम लिखिए। उत्तर - कृष्ण भक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि ...

क्या 'दानलीला' के लेखक हैं- पं. सुंदरलाल शर्मा हैं?

 1. क्या 'दानलीला' के लेखक हैं- पं. सुंदरलाल शर्मा हैं? उत्तर - हाँ दानलीला के लेखक पंडित सुंदरलाल शर्मा हैं जिन्हें छत्तीसगढ़ का गांधी कहा जाता है यहाँ खंड काव्य है।  इसका प्रथम संस्करण अप्राप्त है जो की 1906 में प्रकाशित हुआ था।  Kya danlila ke lekhak pandit sundarlal sharma?

क्या 'लोरिक चंदा' तथा 'ढोला मारु' प्रेम गाथा है?

 1. क्या 'लोरिक चंदा' तथा 'ढोला मारु' प्रेम गाथा है? उत्तर - सही।  यह दोनों प्रेम प्रधान रचनाऐं हैं। नायक नायिका के प्रेम का वर्णन हमें इन दोनों गाथाओं में देखने को मिलता है।  Kya lorik chanda tatha dhola maaroo prem gatha hai?

क्या पंडवानी की कथा कृष्ण जीवन से संबंधित होती है?

1. क्या पंडवानी की कथा कृष्ण जीवन से संबंधित होती है? उत्तर - नहीं पंडवानी की कथा महाभारत से संबंधित होती है।  kya pandwani ki katha krishna jivan se sambandhit hoti hai?

क्या संत धर्मदास के गुरु रामानंद थे?

 1. संत धर्मदास के गुरु रामानंद थे। अथवा -  2. संत धर्मदास के गुरु का नाम क्या था।  3. संत धर्मदास के गुरु कौन थे? उत्तर - नहीं।  सही जवाब होगा - संत धर्मदास के गुरु कबीर दास थे।  Sant dharmdas ke guru ramannd the?

B.A. PART III EX. 2022 HINDI L. FIRST PAPER QUESTION AND ANSWER

 B.A. (PART-III) EXAMINATION, 2022 (New course) HINDI LITERATURE Paper First जनपदीय भाषा-साहित्य (छत्तीसगढ़ी) 6. निम्नलिखित कथन सही गलत है, बतलाइये (कोई पन्द्रह ) 1. संत धर्मदास के गुरु रामानंद थे। उत्तर - गलत। सही जवाब होगा संत धर्मदास के गुरु कबीर दास थे।  2. 'सोनपान' निबंध के लेखक हैं श्री लखनलाल गुप्त । उत्तर - सही।  3. पंडवानी की कथा कृष्ण जीवन से संबंधित होती है।  उत्तर - गलत।  4. 'लोरिक चंदा' तथा 'ढोला मारु प्रेम गाथा है। उत्तर - सही।  5. 'दानलीला' के लेखक हैं- पं. सुंदरलाल शर्मा उत्तर - सही।  6. कबीर के सिद्धान्तों पर चलने वाले कवि हैं- जगन्नाथ प्रसाद भानु । उत्तर - गलत।  7. कुंज बिहारी चौबे, कोदूराम दलित की रचनाएँ राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत हैं।  उत्तर - सही।  8. नरेन्द्र देव वर्मा को छत्तीसगढ़ का गाँधी कहा जाता है। उत्तर - गलत।  9. छत्तीसगढ़ी भाषा में 'ष', 'श' ध्वनियों का प्रयोग नहीं होता। उत्तर - सही।  10. मुकुंद कौशल छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल लेखक के रूप में जाने जाते हैं। उत्तर - सही।  11. छत्तीसगढ़ी भाषा में 'गंज अकन ...