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Showing posts from June, 2020

M.A. HINDI Second Sem. PAPER SIX Solved Paper 2018

M.A. HINDI Second Sem PAPER SIX (मध्यकालीन काव्य) Solved Paper 2018 M.A. HINDI (Second Semester) EXAMINATION, MAY/JUNE, 2018 PAPER SIX  (मध्यकालीन काव्य) Time : Three Hours        M.M. 50 नोट : निर्देशानुसार सभी खण्डों के उत्तर दीजिए।  खण्ड-अ (वस्तुनिष्ट/बहुविकल्पीय प्रश्न)             प्रत्येक 1 नोट : सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।  1. केशवदास ने 'रामचंद्रिका' की रचना किस कवि की पर्तिस्पर्धा में की ? उत्तर - केशवदास ने ' रामचंद्रिका ' की रचना तुलसीदास की पर्तिस्पर्धा में की थी। 2. "कविता करके तुलसी न लसे, कविता पा लसि तुलसी की कला। " कथन किसका है ? उत्तर - यह उपर्युक्त कथन अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध का है। 3. " वातसल्य और श्रृंगार के क्षेत्र में जितना अधिक उद्घाटन सुर ने बंद आँखों से किया है , उतना किसी और कवि ने नहीं किया। सूर इस क्षेत्र का कोना-कोना झाँक आए है। " यह कथन किसका है ? उत्तर - यह उपर्युक्त कथन आचार्य रामचंद्र शुक्ल का है। 4. निम्बार्क सम्प्रदाय में किस भक्ति को श्रेष्ट माना गया है ? उत्तर - निम्बार्क...

अर्धमागधी भाषा - हिंदी साहित्य

  अर्धमागधी भाषा अर्धमागधी भाषा मागधी और शौरसेनी के बीच के क्षेत्र की भाषा थी। अर्थात यह भाषा मगध अर्थात दक्षिण बिहार के और मथुरा के बीच के जो क्षेत्र बचते हैं वहां पर बोले जाते थे। क्योकि इन क्षेत्रों में क्रमशः मगध और शौरसेनी प्राकृत बोली जाती थीं। अर्धमागधी से ही पूर्वी हिंदी अर्थात अवधी, बघेली जैसी छत्तीसगढ़ी बोलियों का विकास हुआ है। इसके बाद अर्धमागधी का अपभ्रंश रूप विकसित हुआ जिसे क्षेत्रीय अपभ्रंश अर्धमागधी अपभ्रंश के रूप में जाना जाता है। जिससे आर्य भाषा पूर्वी हिंदी का विकास हुआ। महावीर स्वामी के उपदेश इसी अर्धमागधी भाषा में देखने को मिलता है या दिया है । यह अर्धमागधी भाषा संस्कृत और आधुनिक भारतीय भाषा के बीच की कड़ी है। महावीर स्वामी के उपदेशों को उनके शिष्यों ने इसी अर्धमागधी भाषा में आगम नाम से संकलित किया है। हेमचंद्र्र आचार्य का कहना है की यह आर्ष प्राकृत भाषा है। इस भाषा को लेकर कुछ भ्रांतियां भी हैं जैसे - यह भाषा आधे मगध में बोली जाती थी इसलिए इसे अर्धमागधी के नाम से जाना जाता है। वह भाषा जिसमें मागधी भाषा के कुछ गुण पाए जातें जैसे की खंम्भे आदि के पु...

शौरसेनी प्राकृत - हिंदी साहित्य

शौरसेनी प्राकृत शौरसेनी प्राकृत वह भाषा है जो मथुरा या शूरसेन जनपद में बोली जाती थी।  यह प्राकृत भाषा के पांच प्रमुख भेद के अंतर्गत आने वाला पहला भाषा है।  शौरसेनी प्राकृत मध्यकाल काल में उत्तरी भारत में बोली जाने वाली भाषा है। जो की अब मध्य प्रदेश के अंतर्गत आता है।  हिंदी भाषा और उसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका रहा इस भाषा का फिर इसके बाद अपभ्रंश का विकास हुआ जिसमें शौरसेनी अपभ्रंश हमें देखने को मिलता है।  इस प्रकार अपभ्रंश से ही हिंदी भाषा का उद्भव हुआ था। शौरसेनी अपभ्रंश से ही पश्चिमी हिंदी, राजस्थानी, गुजराती का विकास हुआ।  इसके अंतर्गत बोलियों का भी विकास हुआ जिसमें छत्तीसगढी बोली एक है। छत्तीसगढ़ी साहित्य का इतिहास एवं विकास इससे जुड़ा हुआ है। मागधी प्राकृत  भाषा पूर्वी दिशा में और  शौरसेनी प्राकृत  के शिलालेख उत्तर-पश्चिम दिशा में मिलते हैं। इन भाषाओं के मिलने से एक और मागधी भाषा का जन्म हुआ जिसे अर्धमागधी भाषा कहा जाता है और अर्धमागधी भाषा से ही वर्तमान छत्तीसगढ़ी भाषा का विकास हुआ है। Related Post  मैथिली शरण गुप्...

मागधी प्राकृतिक - हिंदी साहित्य

मागधी प्राकृत Magadhi prakrit hindi sahitya मागधी प्राकृत मगध के आसपास प्रचलित भाषा थी। मगध अर्थात दक्षिण बिहार के अंतर्गत का क्षेत्र । मागधी प्राकृत भाषा का उल्लेख भगवान बुद्ध के संदर्भ में लिखे गए ग्रंथों में भी मिलता है जैस त्रिपिटक में। इसी मागधी प्राकृत भाषा का रूपांतर अर्ध मागधी है जिसमें भी जैन आगमो के अनुसार जो महावीर स्वामी है उनके उपदेश मागधी प्राकृत में देखने को मिलता है। अर्धमागधी भाषा से ही अनेक बोलियों का विकास हुआ जिसमें से छत्तीसढ़ी बोली भी एक है। अर्थात छत्तीसगढ़ी साहित्य का इतिहास और विकास इससे जुड़ा हुआ है। मागधी प्राकृत  भाषा पूर्वी दिशा में और  शौरसेनी प्राकृत  के शिलालेख उत्तर-पश्चिम दिशा में मिलते हैं। इन भाषाओं के मिलने से एक और मगधी भाषा का जन्म हुआ जिसे अर्धमागधी भाषा कहा जाता है और अर्धमागधी भाषा से ही वर्तमान छत्तीसगढ़ी भाषा का विकास हुआ है। मागधी प्राकृत मध्य भारतीय आर्य भाषा काल (500 ई. पू. से 1000 ई. तक) के अंतर्गत दूसरी विकसित भाषा प्राकृत के अंतर्गत आता है। यह प्राकृत भाषा (1 ई. से 500 ई. तक) के प्रमुख प...

Hindi Sahitya general knowledge - question answer

स्वागत है आपका इस ब्लॉग पर आज हम आपके लिए लिख रहें हैं, हिंदी साहित्य (Hindi Sahitya) से जुड़े सवालों और उसके जवाबों के बारे में एक पोस्ट, यहां पर हम उन महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर के बारे में जानेंगे जिसे की प्रायः नेट और सेट जैसे परीक्षाओं में भी पूछे जाते है और यह हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री करने वालों के लिए भी मह्त्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रश्न उनमें भी पूछे जाते हैं। यहां पर आपको एक एक नंबर में पूछे जाने वाले प्रश्नों के बारे में बताया गया है। question answer general knowledge  1. 'साहित्य का इतिहास जनता की चित्तवृत्ति का इतिहास है' यह कथन किसका है ? उत्तर - यह कथन आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी का है।    2. इतिहास के प्रति भारतीय दृष्टिकोण किस प्रकार का रहा है ? उत्तर - भारत का दृष्टिकोण आदर्शमूलक एवं अध्यात्मवादी रहा है इतिहास के प्रति।  3. हिंदी साहित्य के भूमिका के लेखक कौन हैं ? उत्तर - हजारीप्रसाद द्वेदी जी इसके लेखक रहें है।  4. हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन परम्परा का सूत्रपात किसने किया।  उत्तर - गार्सा-द-तासी जिन्होंने फ्रेंच भाषा मे...

रामचरितमानस सुंदरकांड की चौपाई - sundar kand by tulsidas

सुंदरकांड के 60 दोहे तुलसीदास जी के द्वारा लिखा गया रामचरित मानस का पंचम सोपान जिसे सुंदरकाण्ड के नाम से जाना जाता है। यहां पर गोरखपुर प्रकाशन से प्रकाशित सुंदरकाण्ड को लिखा गया है। यह  एम.ए.हिंदी साहित्य द्वितीय सेमेस्टर षष्ठ प्रश्न पत्र  के लिए भी उपयोगी हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस सुन्दरकाण्ड की जो की हमारे हिंन्दी साहित्य के द्वितीय सेमेस्टर के षष्ठ प्रश्नपत्र में है। Sunderkand path Hanuman श्री गणेशाय नमः श्री जानकीवल्ल्भो विजयते श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान सुंदरकांड की चौपाई शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रम्हाशंभुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम । रामाख्यं जगदीश्वरम सुरगुरुं मायामनुष्यम हरिं । वन्देअहं करुणाकरं रघुवरं भुपालचूडामणिम ।। 1 ।। ...