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Showing posts from June, 2021

कबीर किस काल के कवि थे

1. कबीर किस काल के कवि थे? अथवा 2. कबीर किस काल के कवि हैं? उत्तर - कबीर भक्तिकाल ( 1375 वि0 से 1700 वि0   ) के ज्ञानाश्रयी शाखा के कवि थे।  Kabir kis kal ke kavi the? Bhaktikal gyanashrayee shakha. प्राचीन एवं मध्यकालीन काव्य इकाई 2. - कबीर ग्रंथावली अतिलघु उत्तरीय प्रश्न   कबीर किस काल के कवि हैं? कबीर किस काव्यधारा के कवि माने जाते हैं? 'बीजक' किसकी रचनाओं का संग्रह है? कबीर की रचनाओं में उपस्थित किन्हीं तीन छंदों के नाम लिखिए? कबीर के गुरु का नाम क्या था? कबीर का पालन-पोषण किसके घर हुआ था? कबीर काव्य में कौन-सी धारा पायी जाती है? क्या कबीर पुराणपंथी थे? संत मत का प्रवर्तक किसे माना जाता है? 'मसि कागद छुओ नहीं कलम गही नहिं हाथ' यह पंक्ति किस कवि की है? कबीर को वाणी का डिक्टेटर किस आलोचक ने कहा है? कबीर की साधना किस प्रकार की थी? कबीर की मृत्यु कहाँ हुई थी? वीरगाथा काल की समाप्ति पर मध्यकाल का आरम्भ किस कवि से माना जाता है? कबीर का दार्शनिक चिंतन किस प्रकार का है? कबीर की मृत्यु कहाँ हुई थी? कबीर की रचनाओं के संकलन का क्या नाम है? निर्गुण ज्ञानमार्गी शाखा के प्रतिनिधि...

(ग) आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं का सामान्य परिचय

  आधुनिक भारतीय आर्य भाषाएं (आ.भा.आ.)- 1000 ई. से वर्तमान समय तक (बंगाल, उड़िया, असमी, मराठी, गुजराती, पंजाबी, सिंधी आदि।) आधुनिक भारतीय भाषाओं का सामान्य परिचय दीजिये यह कहना बहुत कठिन है कि भारतीय आर्यभाषाओं का आरम्भ कब से होता है। इन भाषाओं को बहुत बाद में साहित्यिक भाषा के रूप में व्यवहृत होने का सौभाग्य प्राप्त होता है। बहुत समय तक अपभ्रंश में साहित्य रचना होती रही। 8 वीं, 9 वीं शताब्दी के सिद्धों की भाषा में हमें अपभ्रंश से निकलती हुई हिन्दी स्पष्टतः दिखाई देती है। आधुनिक आर्यभाषाओं में ईसा की सोलहवीं शताब्दी से साहित्यिक रचनाएँ मिलने लगती हैं। वैसे पन्द्रहवीं शताब्दी तक भारतीय आर्यभाषा आधुनिककाल में पदार्पण कर चुकी थी। आचार्य हेमचन्द्र के पश्चात् तेरहवीं शताब्दी के आरम्भ से आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं के अभ्युदय के समय पन्द्रहवीं शताब्दी के पूर्व तक का काल संक्रान्ति काल था, जिसमें भारतीय आर्यभाषा धीरे-धीरे अपभ्रंश की स्थितियों को छोड़कर आधुनिक काल की विशेषताओं से युक्त होती जा रही थी। 'कीर्तिलता', 'चर्यापद', 'ज्ञानेश्वरी', 'प्राकृत पैंगलम', 'उक्त...

(ख) मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषाएँ (500 ई. पू. से 1000 ई. तक) - 4th Semester 6th paper

मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषाएँ - पालि, प्राकृत, शौरसेनी, अर्धमागधी, मागधी, अपभ्रंश और उनकी विशेषताएँ। मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषाओं को तीन भागों में बांटा गया है- पालि (500 ई. पू. से 100 ई. तक) (इसमें अभिलेखी प्राकृत भी आती है।) प्राकृत (100 ई. या 1 ई. से 500 ई. तक) अपभ्रंश (500 ई. से 1000 ई. तक) 1. पालि (प्रथम प्राकृत) (500 ई. पूर्व से 1 ई. तक) पालि भाषा को प्रथम प्राकृतिक भी कहते हैं। प्राकृत का अर्थ विवादास्पद है। विचार करने से ज्ञात होता है कि ईसा पूर्व तक संस्कृत भाषा जनभाषा और लोक व्यवहार की भाषा थी। इसके दो रूप थे - (1) साहित्यिक और (2) जन भाषा। साहित्यिक भाषा में परिवर्तन बहुत कम होते थे, परंतु जनभाषा या बोलचाल की भाषा में ध्वनि, शब्द आदि की दृष्टि से प्रायः परिवर्तन हो जाता है। यही जनभाषा संस्कृत से विकसित होते हुए प्राकृतों के रूप में प्रसिद्ध हुई। प्राकृत भाषाओं में संस्कृत शब्दों का कहीं तो विकृति करण हो गया है और कहीं सरलीकरण। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि जन-व्यवहृत भाषा का साहित्यिक रूप 'संस्कृत' कहा गया और बोलचाल की संस्कृत का नाम प्राकृत। इसी आधार पर प्राकृत ...

हिंदी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि : (क) प्राचीन भारतीय आर्य भाषाएं

हिंदी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि : प्राचीन भारतीय आर्य भाषाएँ - वैदिक तथा लौकिक संस्कृत और उनकी विशेषताएँ। प्राचीन भारतीय आर्यभाषा भाषा विज्ञान के आचार्यों ने संसार की भाषाओं में एकता ढूंढ कर उनका परिवारिक वर्गीकरण किया है। इसके परिणाम स्वरूप परस्पर संबंध रखने वाली भाषाओं को एक परिवार के अंतर्गत रखा गया है।  इस संसार में मुख्यता कुल लगभग 12-13 भाषा परिवार हैं- द्रविड़, चीनी, सेमेटिक,हेमेटिक, आग्नेय, यूराल-अल्टाइक, बाँटु, अमरीकी (रेड इंडियन), काकेशस, सुडानी, बुशमैन, जापानी-कोरियाई तथा भारोपीय।  हिंदी का संबंध भारोपीय परिवार से है। यह परिवार मुख्यतः भारत तथा यूरोप और उसके आसपास फैला हुआ है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, ईरान, अमेरिका का कुछ भाग तथा आस्ट्रेलिया में भी भारोपीय परिवार की भाषाएं बोली जाती हैं।  भारोपीय (भारत और यूरोपीय) परिवार संसार का सबसे बड़ा भाषा परिवार है। भूमंडल की लगभग लगभग 350 करोड़ जनसंख्या में इस परिवार की भाषाएं बोलने वालों की संख्या 150 करोड़ है।  इसकी प्रमुख भाषाएं संस्कृत, ग्रीक, लैटिन, अवेस्ता, अंग्रेजी, जर्मन, रूसी, फ्रांसीसी...

हिंदी का भौगोलिक विस्तार

I हिंदी की उपभाषाएँ और बोलियाँ  हिंदी, संस्कृत, पालि, प्राकृत, अपभ्रंश आदि भाषाओं के उत्तराधिकारी हैं। इन भाषाओं की शब्दावली मुहावरे, लोकोक्तियां , साहित्य और साहित्य की अनेक विधाएं हिंदी भाषा को विरासत में मिली हैं। ये भाषाएं अपने-अपने यौवन-काल में मध्यदेश की होते हुए भी देशव्यापी रही हैं। वस्तुतः हिंदी भी सारे देश में व्याप्त है। व्यवहार में वह राष्ट्रभाषा है, राजभाषा है संपर्क भाषा है और माध्यम भाषा है। इसका भौगोलिक विस्तार काफी दूर-दूर तक है। अहिंदी भाषा क्षेत्र कर्नाटक, आंध्रप्रदेश के दक्खिनी हिंदी वाले भाग कोलकाता, शिलांग, मुंबई तथा अहमदाबाद आदि महानगरों में हिंदी की संपर्क भाषा है। भारत के बाहर मॉरीशस, फीजी, सूरी ट्रिनिडाड, नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में हिंदी भाषी हैं। इनके अतिरिक्त हांगकांग, मलेशिया, सिंगापुर आदि पूर्वी देशों एवं इंग्लैंड, अफ्रीका, अमेरिका आदि के बड़े नगरों में भी हिंदी भाषी हैं। भारत में सात प्रदेश ऐसे हैं, जो हिंदी भाषी क्षेत्र हैं - (1) हरियाणा, (2) राजस्थान, (3) मध्य प्रदेश, (4) दिल्ली, (5) हिमाचल प्रदेश...