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Showing posts from May, 2021

अर्थ परिवर्तन के प्रमुख कारणों की विवेचना कीजिये।

1. अर्थ परिवर्तन के प्रमुख कारणों की विवेचना कीजिये।  उत्तर - अर्थ परिवर्तन - प्रत्येक भाषा के शब्दों में सतत परिवर्तन होते रहते हैं, क्योकि शब्दों के प्रयोक्ता अपनी अभिरुचि एवं आवश्यकता के अनुसार शब्दों के मनमाने अर्थ लगाया करते हैं। मानव मन गतिशील, चंचल, भावुक, संवेदनशील एवं नवीनता का प्रेमी है। अतः विभिन्न परिस्थितियों में मानव मन की स्थिति एक-सी नही होती है। यही कारण है की राग-द्वेष, क्रोध, घृणा, आवेश आदि किस स्थिति में उच्चरित शब्दों के अर्थों में अंतर् आ जाता है। यह अर्थ परिवर्तन प्रारम्भ में व्यक्तिगत होता है, परन्तु बाद में समाज के द्वारा स्वीकृत होने पर भाषा में ग्रहण कर लिया जाता है और भाषा का अंग बन जाता है। इस प्रकार अर्थ परिवर्तन की प्रक्रिया मनोवैज्ञानिक है।  भाषा विज्ञान के विद्वान अर्थ परिवर्तन के निम्न कारण मानते हैं - पीढ़ी  परिवेश  नम्रता प्रदर्शन  भावावेश  नव-निर्माण का आग्रह  प्रमोशन के बहिष्कार की प्रवृत्ति  अश्लील तथा घृणाजनक शब्दों का बहिष्कार  लाक्षणिकता एवं प्रालंकारिता  व्यंग्य  अन्धविश्वास  सामान्य के...

वाक्य एवं इसके भेद को सोदाहरण समझाइये।

1. वाक्य एवं इसके भेद को सोदाहरण समझाइये।  उत्तर - वाक्य - भावाभिव्यक्ति की दृष्टि से स्वतः पूर्ण सार्थक शब्द-समूह का नाम 'वाक्य' है। पाणिनि ने 'वाक्यं पद-समुच्चयः' अर्थात सही रूपों- सार्थक शब्दों के समुच्चय को वाक्य कहा है। यूरोपीय विद्वान थ्रैक्स और भारतीय मनीषी पतंजलि द्वारा वाक्य की दी गयी परिभाषाओं का सार इस प्रकार है - "पूर्ण अर्थ की प्रतीति कराने वाले शब्द-समूह का नाम वाक्य है।" आज का भाषा-वैज्ञानिक इस परिभाषा को मानने को प्रस्तुत नहीं है, क्योकि आज यह सिध्द हो चूका है की भाषा की इकाई वाक्य है। अतः वाक्य को पदों का समूह मानकर पदों को वाक्य के कृत्रिम अवयव मानना ही अधिक उपयुक्त है।  पद अथवा वाक्य को भाषा की इकाई मानने का विवाद मीमांसकों में भी मिलता है। जहां अभिहितान्वयवादी मीमांसकी पदों की सत्ता को स्वीकार करते हैं और पदों को वाक्य के अवयवों के रूप में ग्रहण करते हैं। भर्तृहरि ने भी वाक्य की सत्ता को ही वास्तविक माना है और आज का भाषा-वैज्ञानिक इसी धारणा को मान्यता देता है।   वाक्य के भेद - वाक्य के भेद कई आधार पर स्वीकृत किये गये हैं और वाक्यों के कई...

स्वनिम विज्ञान के स्वरूप और उसकी अवधारणाओं को समझाइये?

1. स्वनिम विज्ञान के स्वरूप और उसकी अवधारणाओं को समझाइये? उत्तर - स्वनिम विज्ञान का स्वरूप - स्वनिम विज्ञान भाषा विज्ञान की शाखा है जिसके अंतर्गत ध्वनि परिवर्तन के कारणों का अध्ययन किया जाता है।  भाषा विशेष-संबंधों लघिष्टः सार्थको ध्वनिः।  समध्वनेः प्रतिनिधित्वः भेदकृत स्वनिमो मतः।। अर्थात स्वनिम किसी भाषा-विशेष से संबद्ध लघुत्तम सार्थक ध्वनि है। यह समान ध्वनियों की प्रतिनिधि होती है। अन्य ध्वनियों से किसी रूप में भिन्न होने के कारण इसको भेदक ध्वनि माना जाता है।  स्वनिम विज्ञान (Phonemics) भाषा विज्ञान का एक प्रमुख अंग है। इसमें प्रत्येक भाषा के स्वनिमों (Phoneme) का वैज्ञानिक विश्लेषण-विवेचन पद्धति के द्वारा संकलन किया जाता है और उनके आधार पर प्रत्येक भाषा के लिए सुव्यवस्थित वैज्ञानिक-लिपि तैयार की जाती है।  स्वनिम विज्ञान का संक्षिप्त इतिहास - स्वनिम (Phoneme) वर्णमाला के धोतित करता है। इसका इतिहास प्रायः उतना ही पुराना है, जितना वर्णमाला का। भाषा ध्वनि या वर्णमाला के अर्थ में 'फोनिम' शब्द का प्रयोग अवार्चीन है। फोनिम शब्द के जन्मदाता प्रो. हैवेट हैं। इन्होने 1876 ...

भाषा और भाषा विज्ञान पर टिप्पणी लिखिए।

1. भाषा और भाषा विज्ञान पर टिप्पणी लिखिए।  उत्तर - भाषा और भाषा विज्ञान में टिप्पणी इस प्रकार प्रस्तुत है - भाषा  भाषा का अर्थ और अभिप्राय - मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, इससे उसका एक दूसरे से सम्पर्क में आना स्वाभाविक है। सम्पर्क में आने से विचार विनिमय अनिवार्य है, अतः जिस साधन से यह विचार-विनिमय होता है, उसे ही भाषा की संज्ञा दी जाती है अथवा यह कहा जा सकता है की भावाभिव्यक्ति के साधन को सामान्य रूप से 'भाषा' कह दिया जाता है। इस प्रकार के अर्थों में पशु पक्षियों की बोली, इंगित आदि नही स्वीकार किये जाते हैं।  पारस्परिक व्यवहार में विचार-विनिमय को दो साधनों से होता देखा जाता है - 1. शब्दों एवं वाक्यों द्वारा 2. संकेतों के द्वारा। शब्दों या वाक्यों के अलावा संकेत भी अपना मंतव्य दूसरों तक पहुंचाने में समर्थ होते हैं; यथा - 1. ग्रामीण अंचलों में हल्दी, सुपारी अथवा इलायची बांटना आदि वैवाहिक निमंत्रण का सूचक है।  भाषा की उत्पत्ति पर विचार करते समय पाणिनि ने उसे 'भाष'  धातु से जोड़ा है जिसका अर्थ है - "भाष व्यक्तायां वाचि।" (व्यक्त वाणी का नाम भाषा है।) इसके बारे में ...

वाक्य के भेदों का विश्लेष्ण कीजिये।

 वाक्य के भेदों का विश्लेष्ण कीजिये।  उत्तर - वाक्य के भेदों का विश्लेषण इस प्रकार प्रस्तुत है - वाक्य के भेद कई आधार पर स्वीकार किये गए हैं और वाक्यों के कई प्रकारों का उल्लेख किया गया है। डॉ. कपिलदेव द्वेदी प्रमुख रूप से वाक्यों के पांच भेदों का उल्लेख किया है - आकृतिमूलक भेद  रचनामूलक भेद  अर्थमूलक भेद क्रियामूलक भेद शैलीमूलक भेद  1. आकृतिमूलक भेद - इसके आधार पर चार भेद किये गए - अयोगात्मक  श्लिष्ट योगात्मक  अश्लिष्ट योगात्मक  प्रशिलिष्ट योगात्मक  2. रचनामूलक भेद - इस आधार पर वाक्यों को उन्होंने निम्न छः प्रकारों में बांटा है - समान्य वाक्य - जिसमें एक विधेय और एक क्रिया हो।  उपवाक्य - दो या दो से अधिक सरल वाक्यों के मेल से बना होता है। मुख्य वाक्य के ऊपर निर्भर गौण वाक्य ही उपवाक्य है।  मिश्र वाक्य - एक या एक से अधिक उपवाक्य आश्रित हों तब मिश्र वाक्य बनता है।  संयुक्त वाक्य -  गौण वाक्य उपस्थित लेकिन मुख्य वाक्य पर आश्रित नही होता है।  पूर्ण वाक्य - वाक्य के लिए सारे आवश्यक उपकरण उपलब्ध हों।  अपूर्ण वाक्य - व...

छत्तीसगढ़ी की तीन विशेषताओं का उल्लेख कीजिये।

 1. छत्तीसगढ़ी की तीन विशेषताओं का उल्लेख कीजिये।  उत्तर - छत्तीसगढ़ी बोली छत्तीसगढ़ राज्य में बोली जाने वाली बोली है।  छतीसगढ़ी की तीन विशेषताएँ इस प्रकार हैं - छत्तीसगढ़ी बोली में 'ड़' ध्वनी का स्वतंत्र प्रयोग नही होता।  छतीसगढ़ी बोली में एक वचन से बहुवचन बनाने के लिए मन, अन, गंज आदि का प्रयोग किया जाता है। जैसे - मनुख मन (मनुष्यों), नोकरन (नौकरों) आदि।  छत्तीसगढ़ी बोली में स्त्रीलिंग शब्द बनाने के लिए निन, इया, आईन आदि प्रत्ययों का प्रयोग किया जाता है। जैसे - दुबे - दुबाइन, नाती - नतनिन आदि।  Chhattisgdhi ki teen visheshtao ka ullekh kijiye?

भाषा और बोली में क्या अंतर है?

 1. भाषा और बोली में क्या अंतर है? उत्तर -  भाषा और बोली में अंतर भाषा बोली भाषा का क्षेत्र बड़ा होता है। बोली का क्षेत्र अपेक्षाकृत छोटा होता है। एक भाषा की अनेक बोलियाँ हो सकती है और भाषा किसी बोली के अंतर्गत नहीं आती। एक बोली की अनेक उपबोलियाँ हो सकती हैं तथा बोली भाषा के अंतर्गत आती है। भाषा ही अन्य बोलियो को जन्म देती है। बोली ही अन्य उपबोलियों को जन्म देती हैं। यह बोली की माँ है। या जननी है। यह भाषा की बेटी है तथा भाषा और बोली में माँ, बेटी का संबंध है। भाषाओँ में बोधगम्यता नहीं होती है। इनमें बोधगम्यता अधिक होती है। यह शिक्षा, साहित्य तथा शासन के कार्यों में व्यवहृत होती है। यह लोकसाहित्य तथा बोलचाल में व्यवहृत होती है। इसका मानक रूप होता है। इसका नहीं। भाषा अधिक प्रतिष्ठित होती है तथा औपचारिक परिस्थिति में भाषा का ही प्रयोग करते हैं। यह भाषा की तुलना में कम प्रतिष्ठित होती है। इसका प्रयोग अपनी बोली के क्षेत्रों में किया जा सकता है। बोली का प्रयोग अपने ही क्षेत्र में किया जा सकता है। किन्तु क्षेत्र में बाहर के लोगों से भाषा का ...

अर्थ परिवर्तन की दिशाएं क्या हैं?

 अर्थ परिवर्तन की दिशाएं क्या हैं? उत्तर -  अर्थ परिवर्तन दिशाएँ  संसार परिवर्तनशील है, परिवर्तन सृष्टि का अटल नियम है। मानव प्रयोग की भाषा भी परिवर्तन से मुक्त नहीं है। अतः संसार की प्रत्येक भाषा में विविध प्रकार के परिवर्तन होते रहते हैं। इस अर्थ परिवर्तन को विकास सिध्दांत की दृष्टि से 'अर्थ विकास' भी कहा जा सकता है। इस अर्थ परिवर्तन की तीन दिशाएं मानी गई हैं - अर्थ विस्तार  अर्थ संकोच  अर्थादेश  डॉ. श्याम सुंदर दास ने - अर्थ परिवर्तन की छः दिशाओं का उल्लेख किया है -  अर्थोपकर्ष  अर्थोपदेश  अर्थोत्कर्ष  अर्थ का मूर्तिकरण तथा अमूर्तीकरण  अर्थ संकोच  अर्थ विस्तार  डॉ. द्वारिका प्रसाद सक्सैना की मान्यता है की ध्यान से देखने पर ज्ञात होता है कि अर्थोपकर्ष, अर्थोपदेश, अर्थोत्कर्ष, अर्थ का मूर्तिकरण तथा अर्थ का अमूर्तीकरण में प्रायः शब्द का मूल अर्थ पूर्णतः बदल जाता है और वह शब्द अन्य अर्थ में प्रयुक्त होने लगता है। यह बात दूसरी है की कभी वह अन्य अर्थ अपकर्ष का धोत्तक होता है , कभी उत्कर्ष का, कभी उसका मूर्तिकरण हो जाता है, और...

अल्पप्राण और महाप्राण की परिभाषा दीजिये।

 1. अल्पप्राण और महाप्राण की परिभाषा दीजिये।  उत्तर - जब हम ध्वनि विज्ञान के अंतर्गत व्यजनों के वर्गीकरण करते हैं तो श्वास के आधार पर इसे दो भागों में बांटा जाता है, अल्पप्राण और महाप्राण में इसकी परिभाषा इस प्रकार है - 1. अल्पप्राण - जिन व्यंजनों के उच्चारण में फेफड़ों से आने वाली वायु की मात्रा कम लगती है, उन्हें अल्पप्राण व्यंजन कहते हैं, इसमें प्रत्येक वर्ग का पहला, तीसरा व पाँचवा व्यंजन तथा ड़, य, र, ल, व आते हैं।  2. महाप्राण - जिन व्यंजनों के उच्चारण में फेफड़ों से निकलने वाली श्वास वायु की मात्रा अधिक होती है, उन्हें महाप्राण व्यंजन कहते हैं; जैसे - प्रत्येक वर्ग का दुसरा व चौथा व्यंजन तथा श, ष, स, ह आते हैं।  Alppran aur mahapran ki paribhasha dijiye.

अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान क्या है?

1. अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान क्या है? उत्तर - अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान एक अंतःविषय क्षेत्र है जो भाषा से संबंधित वास्तविक जीवन की समस्याओं को पहचानता है, जांच करता है और समाधान प्रदान करता है। लागू भाषा विज्ञान से संबंधित अकादमिक क्षेत्रों में से कुछ शिक्षा, मनोविज्ञान, संचार अनुसंधान, मानव विज्ञान, और समाजशास्त्र हैं । मुख्य  अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान एक अंतःविषय क्षेत्र है। लागू भाषा विज्ञान की प्रमुख शाखाओं में द्विभाषिता और बहुभाषावाद, वार्तालाप विश्लेषण, विषम भाषा विज्ञान, सांकेतिक भाषा विज्ञान, भाषा मूल्यांकन, साक्षरता, प्रवचन विश्लेषण, भाषा शिक्षाशास्त्र, दूसरी भाषा अधिग्रहण, भाषा नियोजन और नीति, अंतरभाषावादी, स्टाइलिस्ट, भाषा शिक्षक शिक्षा, व्यावहारिक, फोरेंसिक भाषा विज्ञान और अनुवाद शामिल हैं । पत्रिकाओं में  इस क्षेत्र की प्रमुख पत्रिकाओं में अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान की वार्षिक समीक्षा, अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान, द्वितीय भाषा अधिग्रहण में अध्ययन, अनुप्रयुक्त साइकॉलजिस्टिक्स, भाषा शिक्षण में अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान की अंतर्राष्ट्रीय समीक्षा, अनु...

अर्थ विस्तार और अर्थ संकोच को स्पष्ट कीजिये?

1. अर्थ विस्तार और अर्थ संकोच को स्पष्ट कीजिये? उत्तर - यह अर्थ परिवर्तन की दो दिशाएं हैं। वैसे से अर्थ परिवर्तन की तीन दिशाएं होती हैं लेकिन यहां पर इन्ही दो दिशाओं के बारे में बताया गया है क्योकि प्रश्न में इन्हीं दो दिशाओं अर्थ विस्तार और अर्थ संकोच को पूछा गया है - 1. अर्थ विस्तार - डॉ. सक्सैना के अनुसार, जब शब्दों का अर्थ सीमित एवं संकुचित क्षेत्र से निकलकर अधिक विस्तृत एवं व्यापक हो जाता है, तब उसे 'अर्थ विस्तार' कहते हैं।  डॉ. कपिल द्वेदी और डॉ. सक्सैना ने इसे इस रूप में स्पष्ट किया है - स्याही - यह शब्द पहले भाग काले रंग की मसि हेतु ही प्रयुक्त था, कालांतर में अन्य रंगों की मसि (नीली, लाल, हरी) का लेखन में प्रयोग होने से अब सभी रंगों की मसि हेतु 'स्याही' शब्द प्रयुक्त होने लगा।  कुशल - इस शब्द का अर्थ था - कुशल (कुशों को लाना या लेना), कुश का अग्रभाग तीक्षण होने के कारण उसको समेत कर लाना थोड़ा कष्टकारक है। अतः कुश लाना चतुरता सूचक था। इसी से 'तीक्ष्ण बुद्धि' को भी 'कुशाग्र बुद्धि' कहा जाता था। धीरे-धीरे यह अर्थ विस्तार को प्राप्त होकर 'निपुणता...

वागवयव और उनके कार्य को समझाइए।

1. वागवयव और उनके कार्य को समझाइए।  उत्तर -  वागवयव और उनके कार्य  वागवयव को दो भागों में बांटा जा सकता है चल और अचल 1. चल - अवयव ध्वनियों का उच्चारण करते समय जिन्हें ऊपर उठाया अथवा नीचे गिराया जाता है, वे चल अवयव हैं। जीभ के विभिन्न भाग और स्वर तंत्रियाँ चल अवयव हैं। इन्हें करण संज्ञा भी दी जाती है।  2. अचल - मुख का ऊपर का भाग अचल अवयव के अंतर्गत आता है। इसमें ऊपर के दाँत, ऊपर का ओष्ठ तथा तालु के विभिन्न भाग अचल अवयव हैं; जैसे - उपाली जिव्ह - (गलबिम्ब,कंठ, और कण्ठमार्ग) भोजन नलिका  स्वर यंत्र - (कंठपीटक) स्वर यंत्र मुख - (काकल) स्वर तंत्री - (ध्वनि तंत्री) स्वर यंत्र मुख आवरण - (अभिकाकल, स्वरयंत्रावरण) नासिका-विवर  मुख विवर  अलीजिवह - (कीवा, घंटी, शुंडिका) कंठ  कोमल तालु  मूर्द्धा  कठोर तालु  वत्र्स दंत  ओष्ठ  जिव्हामध्य  जिव्हाग्र - (जिव्हाफलक) जिव्हा नोंक - (जिव्हापृष्ठ) जिव्हा  जिव्हा पश्च - (जिव्हापृष्ठ) जिव्हामूल।  उपर्युक्त अवयवों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत है - श्वास नलिका, भोजन नलिका तथा अभिकाकल -...

स्वन विज्ञान के स्वरूप पर प्रकाश डालिये।

1. स्वन विज्ञान के स्वरूप पर प्रकाश डालिये।  उत्तर - स्वन विज्ञान के स्वरूप -  ध्वनि के अध्ययन से संबंधित शास्त्र या विज्ञान ध्वनि विज्ञान कहलाता है। अंग्रेजी में ध्वनि विज्ञान के लिए 'फोनेटिक्स' और 'फोनोलॉजी' ये दो शब्द प्रयुक्त होते हैं। इनमें फोन का अर्थ ध्वनि है। टिक्स का तथा लॉजी का अर्थ विज्ञान है। फोनेटिक्स में भाषा, ध्वनि, ध्वनियों को उत्पन्न करने वाले अंग ध्वनियों का वर्गीकरण और उसके स्वरूप का वैज्ञानिक अध्ययन रहता है। जबकि फोनोलॉजी का संबंध भाषा विशेष से होता है। इसमें किसी भाषा या बोली विशेष की ध्वनियों पर विचार करते हैं। इस प्रकार फोनेटिक्स जहां सैद्धांतिक और सार्वभौमिक है वहाँ फोनोलॉजी उसका व्यवहारिक रूप है। कुछ लोग ध्वनि अध्ययन के सैद्धांतिक तथा वर्णात्मक रूप को फोनेटिक्स कहते हैं और उसके ऐतिहासिक रूप को 'हिस्टोरिकल फोनेटिक्स' कहते हैं तथा कुछ लोग फोनोलॉजी का प्रयोग करते हैं।  अतः व्यवहारिक दृष्टि से इनमें ध्वनि विज्ञान के लिए कोई भेद नही है। भाषा विज्ञान के अंतर्गत जहाँ भाषा में प्रयुक्त ध्वनियों का अध्ययन किया जाता है। उस प्रकरण को ध्वनि विज्ञान ...

भाषिक संरचना को स्पष्ट कीजिए।

1. भाषिक संरचना को स्पष्ट कीजिए।  उत्तर - भाषा यादृक्षिक ध्वनि प्रतीकों की संरचनात्मक व्यवस्था है। और इसकी अपनी अलग संरचना होती है साथ ही इसकी संरचना में एक ही स्तर नहीं होता है। इसमें कई स्तर होते हैं जैसे - अर्थ स्तर, ध्वनि स्तर, वाक्य स्तर, रूप स्तर आदि। प्रत्येक स्तर पर भाषा की इकाइयां अलग-अलग होती हैं। जैसे - अर्थ की इसके अर्थ के स्तर पर, ध्वनि की इकाई ध्वनि के स्तर पर, रूप की रूप के स्तर पर होती है। ध्यान देने की बात यह है की प्रत्येक स्तर की अपनी अलग-अलग संरचना में होती है। जैसे - खिलावन ने राजू को मारा तथा राजू ने खिलावन को मारा।  पहले में खिलावन कर्ता है और दूसरे में कर्म है। इस प्रकार हम देखें तो खिलावन और राजू की स्थिति संरचना के स्तर पर अलग अलग है।  भाषा सिर्फ शब्द का समूह नहीं है इसमें शब्द एक सुव्यवस्थित तरिके से जमा होता है। शब्द के अनुशासित प्रयोग से वाक्य बनता है।  Bhashik sanrachna ko spasht kijiye.

किसी समाचर-पत्र के लिए सम्पादकीय का महत्व क्या है? संक्षेप में लिखिए।

 1. किसी समाचर-पत्र के लिए सम्पादकीय का महत्व क्या है? संक्षेप में लिखिए।  उत्तर - सम्पादकीय या अग्रलेख किसी भी समाचार-पत्र के समादक द्वारा लिखे गए लेख को कहा जाता है। समाचार-पत्र में यह लेख नियत पृष्ठ पर प्रकाशित किये जाने की प्रथा है। यह पृष्ठ दूसरा हो सकता है, या फिर तीसरा, चौथा, पाँचवां या मध्य पृष्ठ। समाचार-पत्र की विषय सामग्रीय का नियोजन और उसके लिए नियत किये गए पृष्ठ विभाजन का स्वरूप समाचार-पत्र की पृष्ठ संख्या के आधार पर उसके सम्पादन विभाग द्वारा निश्चित कर दिया जाता है। यह कार्य समाचार-पत्र के नियमित पाठकों की सुविधा के लिए किया जाता है, ताकि वह अपनी रूचि के अनुकूल सामग्री का अवलोकन करने के लिए निर्धारित पृष्ठ को समाचार-पत्र प्राप्त होते ही देख सकें। स्वभाववश हर पाठक सबसे पहले समाचार-पत्र में अपनी रूचि की सामग्री ही पढ़ने को उत्सुक होता है।  प्रायः सम्पादकीय सामाजिक घटनाओं, देशी व विदेशी हालातों, प्रशासनिक नीतियों-व्यवस्थाओं, राजनीतिक या सामाजिक समस्याओं आदि पर चिंतन-मनन और विमर्श करने वाला लेख होता है। सम्पादक महोदय किस सीमा में अपने वैचारिक संदेश का प्रसारण करे...

पल्ल्वन किसे कहते हैं? पल्ल्वन का क्या उद्देश्य होता है?

1. पल्ल्वन किसे कहते हैं? पल्ल्वन का क्या उद्देश्य होता है? उत्तर - पल्ल्वन से अभिप्राय किसी सुगठित तथा सुगुम्फित विचार अथवा भाव को विस्तार से प्रस्तुत करना है। कम से कम शब्दों में अथवा एक वाक्य में कहे या लिखे गए भावों विचारों में इतनी स्पष्टता नहीं रहती की लोग उन्हें आसानी से समझ सकें। ऐसी स्थिति में स्पष्टता लाने के लिए विचार या भाव के तार-तार को अलग कर तारतम्य के साथ व्याख्या करने की आवश्यकता पड़ती है।  यह एक प्रकार का लघु निबंध है जिसमें यह देखा जाता है की व्याख्या करने वाले व्यक्ति ने किसी गंभीर उक्ति या वाक्य को कितनी सूक्ष्मता और गहराई से समझा है और वह अपनी भाषा में उसे कितनी स्पष्ट कर पाया है।  पल्लवन बीज से वृक्ष और बिंदु से वृत्त बना देने की सहज प्रक्रिया है। बिलकुल छोटे से वाक्य में निहित विचारों को परत दर परत खोलते जाना फैला देना ही पल्ल्वन है। इसे विस्तारण या वृद्धिकरण भी कहा जा सकता है। यह बात स्मरण रखनी चाहिए कि पल्ल्वन जब भी किया जाएगा उसकी शैली समाज शैली होगी न की व्यास शैली। सघनता से विरलता की सी स्थिति होनी चाहिए। पल्ल्वन में इसका अर्थ यह नहीं की विस्तारण ह...

इंटरनेट को परिभाषित करते हुए इसकी उपयोगिता बताइये।

1. इंटरनेट को परिभाषित करते हुए इसकी उपयोगिता बताइये।   उत्तर - इंटरनेट - यह कम्प्यूटरों का एक नेटवर्क (जाल) है। जिसमें विभिन्न प्रकार के कम्प्यूटर आपस में तारों के माध्यम से जुड़े होते हैं।  इंटरनेट का उपयोग करने के लिए आवश्यक उपकरण कम्प्यूटर तथा मॉडेम है। कम्प्यूटर एक वर्क स्टेशन की तरह कार्य करता है जबकि मॉडेम Analog signals को Digital Signals में Change कर देता है।  इंटरनेट की उपयोगिता - इंटरनेट का उपयोग विभिन्न प्रकार के टूल्स के माध्यम से किया जाता है जो की इस प्रकार है - ब्राउजर  सर्च इंजन  वर्ल्ड वाइड वेब  ई-मेल  फ़ाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल  यूजनेट  टेलनेट  चैटिंग  वेबसाइट्स  1. ब्राउजर (Browser) - इंटरनेट पर सुचना खोजने की क्रिया को सर्फिंग या ब्राउजिंग कहते हैं। जिस प्रोग्राम द्वारा सर्फिंग की जाती है उसे ब्राउजर कहते हैं यह एक क्लाइंट सॉफ्टवेयर है जो हायपर टेक्स्ट को प्रदर्शित करने तथा इसके साथ संवाद स्थापित करने के काम आता है।  2. सर्च इंजन - इंटरनेट पर सूचना को प्राप्त करने के लिए यहां सर्च (खोजा) किया जाता है...

प्रारूपण लेखन क्या है? स्पष्ट करते हुए इसके विभिन्न प्रकारों को स्पष्ट कीजिये।

1. प्रारूपण लेखन क्या है? स्पष्ट करते हुए इसके विभिन्न प्रकारों को स्पष्ट कीजिये।  उत्तर - प्रारूपण लेखन - हिंदी में प्रारूपण लेखन को मसौदा आलेखन, प्रारूपण, प्रलेखन आदि के नाम से जाना जाता है। यह शब्द अंग्रेजी का ड्राफ्टिंग शब्द का पर्याय है। कार्यालयों में आवती पर टिप्पणी कार्य समाप्त होने के बाद कार्यालयी पत्रोत्तर का जो मसौदा तैयार किया जाता है, उसे 'प्रारूपण' कहते हैं।  प्रारूपण के मुख्य उद्देश्य - कार्य को उत्तम ढंग से सम्पन्नता के लिए व्यवस्थित और श्रेष्ठ प्रारूप तैयार करना।  सुविधा की दृष्टी से प्रारूपण या मसौदा- लेखन को दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है- प्रारम्भिक प्रारूपण  उच्चतर प्रारूपण  1. प्रारम्भिक प्रारूपण - प्रारूपण में आवेदन - पत्र, स्मरण पत्र, अंतरिम उत्तर, पृष्ठांकन, दौरा कार्यक्रम, अर्ध सरकारी पत्र कार्यालय आदेश आदि हैं।  2. उच्चतर प्रारूपण -  इस प्रारूपण में कार्यालय ज्ञापन, अधिसुचना , संकल्प प्रेस विज्ञप्ति आदि सम्मिलित हैं।  प्रारूपण के प्रमुख प्रकार - सरकारी और अर्धसरकारी कार्यालयों में अनेक प्रकार के कार्य सम्पन्...

जनसंचार में विज्ञापन के महत्व को बताइये।

1. जनसंचार में विज्ञापन के महत्व को बताइये।  उत्तर - जनसंचार में विज्ञापन के महत्व इस प्रकार हैं -  पत्रकारिता एवं जनसंचार के आधुनिक युग में विज्ञापन पत्रकारिता की रीढ़ की हड्डी बन गयी है जिस तरह एक व्यक्ति रीढ़ की हड्डी के बीना खड़ा नहीं रह पाता उसी तरह पत्रकारिता जगत में किसी भी समाचार-पत्र, पत्रिका का जनसंचार माध्यम का विज्ञापन के बिना चलना असंभव हो गया है। इसलिए कुछ विद्वानों का कहना है की विज्ञापन पत्रकारिता व् जनसंचार माध्यमों की बैकबोन है। आजकल पत्रकारिता जगत में जो क्रान्ति आयी है उसमें विज्ञापन की बहुत बड़ी भूमिका है। समाचार पत्र-पत्रिकाओं व् जनसंचार माध्यमों (टी.वी. रेडियो आदि।) के लिए विज्ञापन आय के सबसे बड़े स्त्रोत हैं। पत्रकारिता में विज्ञापन के महत्व को देखते हुए।  निष्कर्ष - आज किसी भी वस्तु सेवा या विचार को आगे बढ़ाने के लिए विज्ञापन को एक सहारा बनाया जाता है। आज का युग यो भी विज्ञापन का युग है। किताबों से लेकर पत्रिकाओं तक सड़क से लेकर घर तक और संचार के तमाम साधनों  में विज्ञापन ही विज्ञापन नजर आते हैं।  Jansanchar me vigyapan ke mahatva ko batai...

रूपक और लेख में क्या अंतर है? स्पष्ट कीजिए।

 रूपक और लेख में क्या अंतर है? स्पष्ट कीजिए।  उत्तर - रूपक और लेख में अंतर - लेख समाचार के सामान होती है लेकिन रूपक नहीं।  लेख में भावना, अनुभूतियों की कोई जगह नही होती लेकिन रूपक में होती है।  रूपक मजेदार दिलचस्प होता है लेख नहीं।  रूपक हमारा मनोरंजन करते हैं दिलचस्प होते हैं लेख नही।  हास्य व्यंग्य व कल्पना का भी सहारा लिया है रूपक लेखन में लेकिन लेख में नहीं।  रूपक हमें शिक्षा नहीं देता हमारा मनोरंजन करता है लेख हमें ज्ञान देता है।  Rupak aur lekh me kya antar hai? spasht kijiye.

समाचार-पत्र के उद्देश्य।

1. समाचार-पत्र के उद्देश्य।  उत्तर - समाचार-पत्र के उद्देश्य - वस्तुतः समाचार पत्रों का मूल उद्देश्य मानव-कल्याण है किन्तु जब हम स्वार्थवश इस उद्देश्य को भूलकर इनके द्वारा अपने संकीर्ण उद्देश्यों को पूरा करना चाहते हैं तो उनसे लाभ के स्थान पर हानि होती है।  समाचार-पत्रों का उद्देश्य होता है मानवता एवं समाज तथा राष्ट्रविरोधी किसी भी समाचार को कभी प्रकाशित न करें।  कभी ऐसे समाचार प्रकाशित न करे जिससे जनता द्विगभ्रमित हो और उसका नैतिक और चारित्रिक पतन हो।  यदि समाचार पत्र अपने उत्तरदायित्व और उद्देश्य का ईमानदारी के साथ निर्वाह करे तो निश्चय ही इनका भविष्य उज्ज्वल है।  samachar-patra ke uddeshya.

सृजनात्मक भाषा किसे कहते हैं ?

1. सृजनात्मक भाषा किसे कहते हैं ? उत्तर - दैनिक जीवन में व्यवहार में सामान्य भाषा का प्रयोग होता है। साहित्य-सृजन में परिनिष्ठित और साहित्यिक भाषा का प्रयोग होता है। जब बोलचाल की भाषा में कल्पना नवीनता और मुहावरे आदि का प्रयोग होता है तो सृजनात्मक भाषा का रूप विकसित ही जाता है।  'डॉ. भोलानाथ तिवारी' ने ऐसी भाषा के विषय में लिखा है। "साहित्यकारों ने साहित्य में सामान्य भाषा का प्रयोग करते-करते साहित्यिक भाषा के रूप में नए नूतन रूप का सृजन किया और सामन्य भाषा और साहित्यिक भाषा में आदान - प्रदान के बावजूद सामन्य भाषा से अलग साहित्यिक भाषा की सत्ता को स्वीकृत मिल गई" सृजनात्मक भाषा को मुख्यतः दो वर्गों में विभाजित किया गया है प्रथम गद्यात्मक भाषा तथा द्वितीय पद्यात्मक भाषा है गद्य के अंतर्गत कहानी, नाटक, उपन्यास, निबंध संस्मरण और समीक्षा आदि विधाएँ आती हैं। इन सभी विधाओं की भाषा में विधागत वैशिष्ट्य होना स्वभाविक है , यथा नाट्य भाषा में ध्वन्यात्मकता के साथ रिक्त वाक्य, संबोधनात्मक और प्रश्न वाचक वाक्यों में भाषा का स्वरूप अभिनेयता के लिए वरदान सिद्ध होता है। गद्य साहित्...

कम्प्यूटर की उपयोगिता।

 1. कम्प्यूटर की उपयोगिता।  उत्तर - कम्प्यूटर की उपयोगिता - कम्प्यूटर अपने उतपत्ति के कुछ वर्षों के अंदर ही अपनी स्थिति इतनी मजबूत बना ली है कि मनुष्य को इसे लगभग हर क्षेत्र में उपयोग में लाने के विषय में सोचना ही पड़ता है।  बालक से लेकर वृद्धों तक कम्प्यूटर की सेवा का विस्तार हो रहा है, कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कम्प्यूटर की उपयोगिता का अध्ययन निम्नलिखित बिंदुओं के अंतर्गत किया जा सकता है - शिक्षा के क्षेत्र में  कार्यालयीन कामकाज में  संचार के क्षेत्र में  वैज्ञानिक अध्ययन में  उद्योग जगत में  1. शिक्षा के क्षेत्र में - आज कम्प्यूटर का उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक रूप से हो रहा है इसने अपनी उपयोगिता को स्पष्ट किया है मेडिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में तो कम्प्यूटर शिक्षा का महत्वपूर्ण अंग बन चूका है।  2. कार्यालयीन कामकाज में - आज कम्प्यूटर के आ जाने कार्यालयीन कामकाज बहुत ही आसान हो गया है अब आवेदन पत्र लिखने की आवश्यकता नहीं होती। सीधे प्रिंट करके उसमें साइन करके दिया जा सकता है।  3. संचार के क्षेत्र में - कम्प्यूटर आज मुख्य र...

वेब पब्लिशिंग का परिचय दीजिये।

1. वेब पब्लिशिंग का परिचय दीजिये।  उत्तर - वेब पब्लिशिंग - इंटरनेट ऑप्टिकल फाइबर तारों से जुड़े कम्प्यूटरों का व्यापक नेटवर्क है। इसमें सूचनाओं, ध्वनियों चित्रों, आवाजों, आंकड़ों आदि को प्रकाश की गति से भेजा जाता है। इंटरनेट में सबसे ऊपर होस्ट कम्प्यूटर जुड़ते हैं। होस्ट कम्प्यूटर को नोड भी कहा जाता है। ये नोड फाइबर ऑप्टिक केबल द्वारा नेटवर्क मैनेजर कम्प्यूटर से जुड़ते हैं। होस्ट कम्प्यूटर को ऑक्सीजन तारों के जरिये निकटवर्ती हजारों कम्प्यूटरों से सेल्युलर फोन, टी.वी., रेडियो और ऑडियो प्रणाली से जोड़ा जा सकता है और इसका विभिन्न कार्यों में उपयोग किया जा सकता है।  'विश्वव्यापी वेब' अंतरसक्रिय दस्तावेजों और सॉफ्टवेयरों के नेटवर्क को तैयार करती है ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन तक पहुँचा जा सके। यह दस्तावेजों पर आधारित है जिन्हें 'पेजिज' कहा जाता है। इनमें पाठ्य-सामग्री (text) चित्र, रूप (forms), आवाज, एनिमेशन और हाइपर टैक्स्ट सम्पर्कों का समन्वय है। विश्वव्यापी वेब अपने प्रयोगकर्ताओं के लिए बहुत कुछ है। इसे बाजार, कला, संग्रहालय, पुस्तकालय, सामुदायिक केंद्र, कूल प्रकाशन गृह आदि के रू...

सफल अनुवादक के गुण।

1. सफल अनुवादक के गुण।  उत्तर - सफल अनुवादक के गुण इस प्रकार हैं - भाषा प्रभुत्व  बहुज्ञता विवेकशीलता  सतर्कता  संदेह निवारणकर्ता - प्रतिभा  1. भाषा प्रभुत्व - अनुवादक को स्त्रोत भाषा एवं लक्ष्य भाषा की प्रकृति, व्याकरणिक व्यवस्था शैली तथा अनुप्रयोगात्मकता का आधिकारिक ज्ञान होना चाहिए।  2. बहुज्ञता तथा विवेकशीलता - अनुवाद का कार्य किसी सामान्य कार्य नहीं है। जो बहुत और विवेकशील होता है वही सफल व आदर्श अनुवाद कर सकता है। अनुवादक को स्त्रोत सामग्री का पूरा-पूरा ज्ञान होना चाहिए।  3. सतर्कता - सफल अनुवादक आरम्भ से अंत तक सतर्क रहता है। मूल लेखन में लेखक जितना सतर्क रहता है उतना ही अनुवादक को भी सतर्क रहना आवश्यक है।  4. संदेह निवारणकर्ता - अनुवादक के सामने बहुत सारे समस्याएं आते हैं उन्हें निवारण करने की क्षमता होनी चाहिए।  5. प्रतिभा - प्रतिभा मनुष्य को जन्म से प्राप्त सहज देन है, यह सफल अनुवाद करने में सहायक होती है। किसी भी बात को चाहे वह सीधी हो या कठिन समझलेने तथा कुशलता से अभिव्यक्त करने के लिए प्रतिभा होना अनिवार्य है।  Safal anuva...

हिंदी की प्रयोजनीयता।

 हिंदी की प्रयोजनीयता।  उत्तर - हिंदी की प्रयोजनीयता - हिंदी राजभाषा है सम्पर्क भाषा है अंतर्राष्ट्रीय भाषा है और सबसे ऊपर वह एक विकासशील समाज में विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम है। प्रयोजन का अर्थ होता है उद्देश्य।  यदि किसी भाषा का समाज के विविध प्रकार्यों के लिए उपयोग न किया जाय तो वह भाषा सीमित होकर कुछ दिशाओं में ही विकास करती है। आम तौर पर उस भाषा में केवल साहित्य का विकास होता है और अन्य क्षेत्रों में वह कमजोर रह जाती है। लगभग इसी प्रकार की स्थिति हिंदी के सामने सन 1947 के आसपास थी।  हिंदी भाषा उस समय साहित्यिक दृष्टि से सम्पन्न होते हुए भी पत्रकार्य आदि आधुनिक प्रकार्यों के लिए तैयार नहीं थी। यहीं कारण था की हिंदी को राजभाषा बनाने के साथ-साथ उन प्रकार्यों के लिए उसे तैयार करने के लिए विकास के कदम उठाये गए।  इस प्रकार प्रयोजन मुलक कार्यों के लिए भाषा को विकसित कराना एक सामाजिक विकास प्रमुखतया व्यक्तियों पर निर्भर करता है।  Hindi ki prayojniyata.

रंगमंच की दृष्टि से हयवदन नाटक की समीक्षा कीजिये।

1. रंगमंच की दृष्टि से हयवदन नाटक की समीक्षा कीजिये।  उत्तर - रंगमंच की दृष्टि से हयवदन नाटक की समीक्षा निम्न बिंदुओं के आधार पर किया गया है - कथावस्तु  पात्र एवं चरित्र-चित्रण  संवाद  देशकाल वातावरण  भाषा-शैली  उद्देश्य  अभिनेता  1. कथावस्तु - हयवदन नाटक की कथावस्तु रंगमंच की दृष्टि से बहुत ही सरल है लेकिन इसमें कई जगहों पर ऐसा दृश्य है जिसे रंगमंच पर दिखा पाना संभव नहीं है।  2. पात्र एवं चरित्र चित्रण - हयवदन नाटक में बहुत ही अच्छे तरिके से पात्रों को प्रस्तुत किया गया है प्रमुख पात्र हैं - हयवदन, भागवत, देवदत्त, कपिल, पद्मिनी आदि। हयवदन-अभिशप्त पात्र, देवदत्त, कपिल-नायक, पद्मिनी - नायिका है।  3. संवाद - हयवदन नाटक की संवाद योजना पात्रों के अनुकूल है बहुत ही स्पष्ट है किसी भी प्रकार की कमी नहीं है उसके वातावरण के अनुकूल है।  4. देशकाल एवं वातावरण - हयवदन नाटक में रंगमंच का चित्रण अर्थात वातावरण है जिसमें जंगल से भागता हुआ आदमी आता है और एक नगर के बारे में बताया गया है जहां पर नाटक चल रहा होता है।  5. भाषा-शैली - हयवदन नाटक रं...

भारतीय साहित्य में 'आज के भारत के बिम्ब' पर प्रकाश डालिए।

1. भारतीय साहित्य में 'आज के भारत के बिम्ब' पर प्रकाश डालिए।  उत्तर - भारतीय साहित्य में आज के भारत का बिम्ब - रुपरेखा -  परिचय  भारतीय साहित्य  आज के भारत के बिम्ब  विशेषताएँ  निष्कर्ष  1. परिचय - बिम्ब का अर्थ होता है परछाई आज भारतीय साहित्य में भारत की परछाई या बिम्ब को किस प्रकार साहित्य रचना के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है आज के भारत को जिस प्रकार प्रस्तुत किया गया है उसे बिम्ब कहेंगे।  2. भारतीय साहित्य - भारत के स्वतंत्रता के पूर्व और स्वतंत्रता के बाद यहां की भाषाओं में की जाने वाली साहित्यिक रचनाओं को भारतीय साहित्य के नाम से जाना जाता है।  3. आज के भारत का बिम्ब - साहित्य समाज का दर्पण होता है इसमें समाज के विभिन्न रूपों को देखा जा सकता है। साहित्यकार उसी समाज का प्रतिनिधित्व करता है जिसमें उसका जन्म होता है। जो की जन के प्रति उन्मुख होना इन्द्रियों का परिणाम रहा है। मानव में एक विशिष्ट गुण और विवेक है।  सामजिक व्यवस्था बदलने के साथ-साथ साहित्य की रचना में भी परिवर्तन होता जाता है। मुक्त रूप से मानव नहीं रह सकता समाज स...

बंगला भाषा के आधुनिक-काल के महत्वपूर्ण नाटकों की चर्चा कीजिये।

1. बंगला भाषा के आधुनिक-काल के महत्वपूर्ण नाटकों की चर्चा कीजिये।  उत्तर - बंगला भाषा के आधुनिक-काल के महत्वपूर्ण नाटकों की चर्चा - रुपरेखा -  परिचय  आधुनिक काल के बंगला नाटक  निष्कर्ष  1. परिचय - बंगला नाट्य साहित्य का विकास वस्तुतः विगत सौ वर्षों में हुआ है। बंगला भाषा में रचित प्रथम नाट्य कृति है 'कुलीन कुल सर्वस्व' जिसकी रचना 1857 ई. में रामनारायण तर्क-रत्न ने की थी।  2. आधुनिक काल के बंगला नाटक - आधुनिक युग के बंगला नाटककारों में शचीनसेन गुप्त, मन्मथराय विधायक भट्टाचार्य, तुलसी लाहिरी और बादल सरकार के नाम उल्लेखनीय हैं। मनोज बसु, वनफूल तथा विजन भट्टाचार्य के नाटकों में नवीन शैली-शिल्प के साथ नवीन विषयों का भी समावेश है। निश्चय ही बंगला भाषा में नाट्य विधा नित नए सोपानों की ओर अग्रसर हैं।  प्रमुख नाटकों की चर्चा इस प्रकार है - काल मृगया - रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा रचित प्रमुख नाटक हैं जिसमें कालमृगया महाभारत के धृतराष्ट्र के अंधे होने के शाप से संबंधित नाटक है।  फूल शय्या - यह क्षोरोप्रसाद विद्याविनोद का पहला नाटक है जिसमें पृथ्वीराज से संबंधित...

बंगला और हिंदी के आधुनिक उपन्यासों का तुलनात्मक अध्ययन कीजिये।

1. बंगला और हिंदी के आधुनिक उपन्यासों का तुलनात्मक अध्ययन कीजिये।  उत्तर - बंगला और हिंदी के आधुनिक उपन्यासों का तुलनात्मक अध्ययन निम्न बिंदुओं के आधार पर प्रस्तुत है - रुपरेखा -  परिचय  हिंदी उपन्यास और बंगला उपन्यास  तुलनात्मक बिंदु  राजनितिक स्थिति  तत्कालीन आर्थिक स्थिति  तत्कालीन सामाजिक स्थित  1. परिचय - आधुनिक युग भारत की शासन व्यवस्था के उस युग से प्रारम्भ माना जाता है जब मुसलमानों के हाथ में चली गई। अंग्रेजों के आगमन से भारतीयों के रहन सहन, जीवन-यापन, आचार-विचार साहित्य कला में अनेक परिवर्तन होने लगे। विशेषतः साहित्य पर इसका पर्याप्त प्रभाव पड़ा। हिंदी और बांग्ला उपन्यास साहित्य में तुलनात्मक अध्ययन इस प्रकार प्रस्तुत है - 2. हिंदी उपन्यास और बांग्ला उपन्यास - साहित्य के क्षेत्र में उपन्यास एक नई विधा है। इस साहित्यिक विधा का आविर्भाव विश्व के सभी साहित्य के क्षेत्र में आधुनिक है। बांग्ला और हिंदी दोनों उपन्यास साहित्य आधुनिक युग की देन है। हिंदी के प्रथम उपन्यासकार लाला श्री निवास तथा बंगला के बंकिम चंद्र प्रथम उपन्यासकार हैं।  3. तु...

के. जी. शंकर पिल्लै की महत्वपूर्ण रचनाओं की चर्चा कीजिये।

1. के. जी. शंकर पिल्लै की महत्वपूर्ण रचनाओं की चर्चा कीजिये।  उत्तर - यहां पर के. जी. शंकर पिल्लै की कोच्चि के दरख्त में संकलित तीन कविताओं धोबी, अयोध्या और प्रतीक्षा की चर्चा की गई है - 1. धोबी - इस कविता में धोबी कौन है? कोई साधारण सामान्य धोबी नहीं है, लेकिन है धोबी ही जो कवि की लाल किनारी वाली सफेद धोती को साफ करने की चेष्टा कर रहा है, जिसकी किनारी से लाल रंग छूट-छूट कर पूरी धोती को लाल किये दे रहा है। यह चकित इस बात पर है कि धोते-धोते किनारी तो फीकी पड़ती जा रही है, लेकिन रंग छूटने से बाज नहीं आता।  2. अयोध्या - कवि की अयोध्या में एक पेड़ के नीचे खड़ी हुई उर्मिला जो करीने से सजी पत्तियों से लदे पेड़ के नीचे खड़ी है जिसकी आँखें गीली हैं और याद कर रही है कुछ या न जाने किसकी सुहावने जंगलों में आग लग गई है जहाँ हाथियों के मस्तक पर खून रिसने लगा है। शिलाएं टूटने लगी हैं और गाँवों से निकलकर काले विलाव शहरों को घेरने लगे हैं।  3. प्रतीक्षा - इस कविता में कवि प्रतीक्षा करता है इस देश को जला-जलाकर चले जाने वालों के बाद किसी समस्याओं को सुलझाने वाले की।  K. G. sankara pil...

भारतीय साहित्य के अध्ययन की तीन समस्याओं की चर्चा कीजिये।

1. भारतीय साहित्य के अध्ययन की तीन समस्याओं की चर्चा कीजिये।  उत्तर - भारतीय साहित्य के अध्ययन की तीन समस्याएं - भाषाओँ की विविधता  अनुवाद की समस्या  साहित्यिक अभिरुचि का अभाव  1. भाषाओं की विविधता - भारत एक ऐसा देश है जिसमें अनेक भाषाएँ एवं बोलियाँ बोली जाती हैं। इन सभी भाषाओं को सीख पाना किसी एक व्यक्ति के लिए दुष्कर कार्य है। यदि कोई व्यक्ति कुछ भाषाएँ सीख भी ले तो उन भाषाओं के अंतर्गत आने वाली बोलीयों को सीख पाना और भी कठिन है।  2. अनुवाद की समस्या - भारतीय भाषाओं में रचित श्रेष्ठ साहित्य का अनुवाद यदि राष्ट्रभाषा 'हिंदी' में सुलभ कराया जाए और हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रत्येक भारतीय नागरिक पढ़े समझे तभी भारतीय साहित्य से हम परिचित हो सकते हैं।  3. साहित्य अभिरुचि का आभाव - भारत एक विशाल देश है तथा बहुसंख्यक लोगों में साहित्यिक अभिरुचि का आभाव है।  इसके अलाव और भी समस्याएं हैं... Bhartiya sahitya ke adhyayan ki teen samasyaon ki charcha kijiye.

गिरीश कर्नार्ड के नाटकों की विशेषता बताइये।

1. गिरीश कर्नार्ड के नाटकों की विशेषता बताइये।  उत्तर - गिरीश कर्नार्ड के नाटकों की विशेषता इस प्रकार है - सघन और यथार्थ - जाति व्यवस्था और लिंग समस्याओं को एक साथ उठाते हुए इनके नाटक दीखते हैं जो उनके नाटक को सघन और यथार्थवादी बनाते हैं।  रोचक विचार - समग्र रूप से विचार करने से गिरिस कर्नार्ड के जीवन और उनके रचना-संसार की एक बड़ी रोचक बात जो सामने निकलकर आती है और वह यह कि कर्नार्ड को जादू या जादुई लोक जैसे विचार बहुत पसंद थे।  संतुलन - गिरीश कर्नार्ड के नाटकों में बेहद सुन्दर संतुलन  देखने को मिलता है।  समसामयिक विरोधाभास - जहां वह भारत के तथाकथित स्वर्णिम अतीत या पौराणिक मिथक को कच्चे माल की तरह उपयोग तो करते हैं, पर उसके मूल में कोई समसामयिक समस्या या वर्तमान समाज के विरोधाभास ही निहित रहते हैं।  महत्वपूर्ण मुद्दे सामने लाना - समीक्षक जूलिया लेस्ली कर्नार्ड के नाटकों के विषय में लिखती हैं, एक सूत्र जो कर्नार्ड के सभी नाटकों में सतत दिखलाई पड़ता है वो है - अपने समय के कुछ बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाना।  Girish karnad ke natko ki...

'साहित्य व समाजशास्त्र' के अंतर संबंध को स्पष्ट कीजिये।

1. 'साहित्य व समाजशास्त्र' के अंतर संबंध को स्पष्ट कीजिये। उत्तर - साहित्य और समाजशास्त्र में अंतरसंबंध -   साहित्य सामाज के विभिन्न क्रियाकलापों का चित्रण है और सामाजशास्त्र में समाज में घटित घटनाओं का अध्ययन किया जाता है। साहित्य में समाज के विभिन्न पहलुओं पर रचना होती है लेकिन समाजशास्त्र में विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जाता है।  समाजशास्त्र शास्त्रीय दृष्टिकोण से बहुत ही प्रसिध्द है वैसे ही साहित्य भी प्रसिद्ध है।  समाजिक अध्ययन समाजशास्त्र के माध्यम से किया जाता है रचना साहित्य के माध्यम से किया जाता है।  समाज के अध्ययन के लिए साहित्य जरूरी है समाजिक विज्ञान सामाज के लिए जरुरी है।  'Sahitya va samajshastra' ke antar sambandh ko spashta kijiye.

'कोच्चि के दरख्त' कविता में संकलित किसी एक कविता का सारांश लिखिए।

1. 'कोच्चि के दरख्त' कविता में संकलित किसी एक कविता का सारांश लिखिए।  उत्तर - कोच्चि के दरख्त कविता में संकलित धोबी कविता का सारांश प्रस्तुत है - धोबी - धोबी कविता केरल की संस्कृति पर आधारित है यहाँ लाल रंग कम्युनिस्ट का प्रतीक है जो की धोती के किनारे पर लगा है। जिसने किनारे में अपनी जगह बना ली है। कवि इस कविता में धोबी के माध्यम से सर्वथा साफ की करने की इच्छा व्यक्त करता है और इस सत्य से अवगत कराता है कि चाहे उसके कारण समाजिक स्वरूप जर्जरता को प्राप्त कर रहा है।  लेकिन ऊपर से सर्वथा सज्जन सरल उदार शानुभूतिमय सात्विक चरित्रधारी  लोगों की सफेदी भी साम्यवादी विचारधारा से रंगी हुई है। सम्भवतः कविता की अंतिम पंक्तियों में तो यही संकेत है कि नदी और तालाब जिसमें वह धोती को धो रहा था लाल अर्थात कम्युनिस्ट हो चुके थे और सामाजिक परम्पराओं का भी निर्वाह हो रहा था।  इस प्रकार इस कविता में कम्युनिस्ट और जनता के बीच संघर्ष को चित्रित किया गया है।  Kochchi ke darakht kavya me sankalit kisi ek kavita ka saransh likhiye?

हयवदन नाटक के कथानक की समीक्षा कीजिये।

1. हयवदन नाटक के कथानक की समीक्षा कीजिये।  उत्तर - हयवदन नाटक के कथानक की समीक्षा को दो भाग में बाँटकर प्रस्तुत किया गया है जो की इस प्रकार है - उपकथा।  मूलकथा।  1. हयवदन उपकथा से ही प्रारम्भ होता है एवं बाद में मूलकथा का प्रयोग होता है, किन्तु उसका अंत उपकथा द्वारा ही होता है। हयवदन एक लोकनाट्य है अतः प्राचीन एवं लोकनाट्य शैली से ही वह प्रारम्भ होता है। नाटक का प्रारम्भ सूत्रधार भागवत द्वारा होता है। यह गणेश वंदना से प्रारम्भ करता है यह कथा वस्तु संक्षेप में निम्न प्रकार है -  2. मूलकथा - देवदत्त और कपिल दो मित्र हैं, देवदत्त का विवाह पद्मिनी से होता है। कपिल भी उस पर आसक्त हो जाता है। देवदत्त कोमल शरीर का कवि है एवं कपिल कठोर शरीर का सशक्त पुरुष! देवदत्त, कपिल और पद्मिनी यात्रा पर जाते हैं वहाँ देवदत्त और कपिल के सिर कट जाते हैं। पद्मिनी देवी की स्तुति करती है तब देवी वरदान देती है कि दोनों के सिर धड़ों पर रख दो वे जीवित हो जाएंगे। पद्मिनी भूल से कपिल का सिर देवदत्त के धड़ पर एवं देवदत्त का सिर कपिल के धड़ पर रख देती है। इस अदलाबदली में द्वन्द होता है। बाद में देवदत्त...

बसाई टुडू का चरित्र-चित्रण कीजिये।

1. बसाई टुडू का चरित्र-चित्रण कीजिये।  बसाई टुडू का चरित्र-चित्रण उत्तर - बसाई टुडू का चरित्र-चित्रण - बंगला भाषा की प्रसिद्ध उपन्यास लेखिका महाश्वेता देवी का नक्शल आंदोलन से जुड़ा उपन्यास 'अग्निगर्भ' एक चर्चित उपन्यास है जिसका प्रमुख चरित्र बसाई टुडू (टोरू) ही नायक पद के लिए उपर्युक्त पात्र है। उसकी चारित्रिक विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं - परिचयात्मक विवरण  नक्सली आंदोलन से जुड़ाव  नेताओं के दुर्गुणों से वाकिफ  व्यावहारिक व्यक्ति  बुद्धिमान एवं कानून का जानकार  पुलिस का सिर दर्द  उद्देश्य के लिए समर्पित  1. परिचयात्मक विवरण - बसाई टुडू बिहार का रहने वाला संथाल था तथा जब एक बुद्धिमान एवं जागरूक व्यक्ति था। कम्युनिष्ट पार्टी का सक्रिय सदस्य था तथा खेतिहर मजदूरों के लिए संघर्षरत था। जब उसने देखा की नेताओं को गरीबों की कोई चिंता नहीं है तब उसने पार्टी छोड़ दी और अपने ढंग से कार्य करने लगा। वह बाकली में पैदा हुआ। माँ-बाप जल्दी मर गए अतः बुआ के पास छः बरस तक रहा। वह जागुला किसान फ्रंट का कार्यकर्ता बना और तीस बरस तक क्षेत्र में घूम-घूमकर काम करने के कारण उस...

चर्यापद क्या है?

1. चर्यापद क्या है? उत्तर - चर्यापद - 'चर्या' छोटी-छोटी कविताएँ हैं। इसमें 'सहजिया' सम्प्रदाय के नाम से विख्यात उत्तरवर्ती तांत्रिक बौद्धों के एक अवस्थापन विशेष के सिद्धांत संकलित हैं। वे आत्मसाक्षात्कार के सबसे 'सहज' (सुगम, स्वाभाविक और सीधे) मार्ग का समर्थन करते थे। अतः वे कठोर तप-साधना, अनम्य नियम-संयम को हेय समझते थे।  अनेक मत से परम सत्य का साक्षात्कार पिंड में ही हो सकता है, इस पंचतत्वमय शरीर में जो चराचर जगत का लघुरूप है, जो विराट की सूक्ष्म प्रतिकृति है इसके लिए वह विशेष रहस्य साधन करते थे तथा उपदेश भी करते थे। इस काम के लिए महायानी दार्शनिकों ने उन्हें आधार दिया।  विशेषता - इन चर्या-पदों में साहित्यिक गरिमा का अभाव नहीं था। धार्मिक भावनाओं के दार्शनिक विचारों का उच्च समाज के लिए स्तरीय साहित्य में प्रकट करना आवश्यक था।  उनके इसी ताने-बाने में हमें बंगाल के भूगोल, जन-जीवन अवस्थानों, सामाजिक बंधनों और धार्मिक क्रिया-कलापों की झाँकियों के दर्शन होते हैं।  चर्यापद की कुछ विशेष मार्मिक पंक्तियाँ आज हमारे घरों में कहावतें बन चुकी हैं।  Charyapad kya hai?

हिंदी साहित्य में वर्णित दो भारतीय मूल्यों की चर्चा कीजिये।

1. हिंदी साहित्य में वर्णित दो भारतीय मूल्यों की चर्चा कीजिये।  उत्तर - हिंदी साहित्य में वर्णित दो भारतीय मूल्यों की चर्चा -  शाश्वत मूल्य - किसी भी कारण या परिस्थितिनुरूप परिवर्तन नहीं। 1. सौंदर्य मूल्य - सत्यम शिवम सुंदरम 2. नैतिक मूल्य - त्याग, अहिंसा, सेवा, न्याय आदि।  बदलते मूल्य - जो भौतिक समृद्धि के साथ बदलते रहें। 1. आर्थिक मूल्य - सामाजिक, आध्यात्मिक आदि।  Hindi sahitya me varnit do bhartiya mulyon ki charcha kijiye.

'कोच्चि के दरख्त' शीर्षक काव्य-संग्रह में संकलित दो कविताओं के नाम लिखिए।

1. 'कोच्चि के दरख्त' शीर्षक काव्य-संग्रह में संकलित दो कविताओं के नाम लिखिए।  उत्तर - 'कोच्चि के दरख्त' शीर्षक काव्य-संग्रह में संकलित दो कविताओं के नाम इस प्रकार हैं - प्रतीक्षा।  गंजापन।  Kochchi ke darakht shirshak kavya-sangrah me sankalit do kavitao ke naam likhie.

महाश्वेता देवी को कौन-से दो महत्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त हुए?

1. महाश्वेता देवी को कौन-से दो महत्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त हुए? उत्तर - महाश्वेता देवी को निम्न दो महत्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त हुए - ज्ञानपीठ पुरस्कार (1996) साहित्य अकादमी पुरस्कार।  Mahasweta devi ko kaun-se do mahatvapurna puraskar prapt hue?

बंगला भाषा के दो प्रमुख उपन्यासकारों के नाम लिखिए।

1. बंगला भाषा के दो प्रमुख उपन्यासकारों के नाम लिखिए।  उत्तर - बंगला भाषा के दो प्रमुख उपन्यासकारों के नाम इस प्रकार हैं - महाश्वेता देवी।  रवीन्द्रनाथ टैगोर।  Bangla bhasha ke do pramukh upnyaskaron ke naam likhiye? सम्बंधित प्रश्न का लिंक ■  बांग्ला के दो उपन्यासों के नाम

कन्नड़ के दो प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए?

1. कन्नड़ के दो प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए? उत्तर - कन्नड़ के दो प्रमुख रचनाओं के नाम हैं - हयवदन (नाटक) - गिरीश कर्नार्ड।  कर्नाटक कादंबरी - नागवर्म प्रथम।  Kannad ke do pramukh rachnaon ke naam likhiye?

मलयालम साहित्य के दो रचनाकारों के नाम लिखिए?

1. मलयालम साहित्य के दो रचनाकारों के नाम लिखिए? उत्तर - मलयालम साहित्य के दो रचनाकारों के नाम - के. जी. शंकर पिल्लै।  एस. के. पोट्टेक्काट्ट।  Malayalam sahitya ke do rachnakaro ke naam likhiye?

बंगला रामायण के किन्ही दो रचियताओं के नाम लिखिए?

1. बंगला रामायण के किन्ही दो रचियताओं के नाम लिखिए? उत्तर - बंगला रामायण के किन्हीं दो रचियताओं के नाम हैं - कृत्तिबास ओझा - कृत्तिबास रामायण।  सुखमय भट्टाचार्य - रामयणेर चरितावली।  Bangla ramayan ke kinhi do rachiyata ke naam likhiye?

भारतीय साहित्य से क्या अभिप्राय है?

1. भारतीय साहित्य से क्या अभिप्राय है? उत्तर - भारतीय साहित्य से अभिप्राय है सन 1947 के पहले भारतीय उपमहाद्वीप एवं ततपश्चात भारत गणराज्य में निर्मित वाचिक और लिखित साहित्य से है।  भारत के स्वतंत्र होने के बाद हिंदी साहित्य में जो नवीन परिवर्तन और विस्तार आया है, वह हिंदी-साहित्य के इतिहास की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय घटना है।  Bhartiya sahitya se kya abhipray hai?

प्रथम प्रेस अधिनियम कब घोषित हुआ?

1. प्रथम प्रेस अधिनियम कब घोषित हुआ? उत्तर - प्रथम प्रेस अधिनियम अंग्रेज सरकार द्वारा भारत में सन 1878 में देशी प्रेस अधिनियम के नाम से पारित किया गया ताकि भारतीय भाषाओँ के पत्र-पत्रिकाओं पर और कड़ा नियंत्रण रखा जा सके।  Pratham press adhiniyam kab ghoshit hua?

वेब समाचार किस माध्यम से पढ़ा जा सकता है?

 वेब समाचार किस माध्यम से पढ़ा जा सकता है? उत्तर - वेब समाचार को कम्प्यूटर या मोबाइल के माध्यम से पढ़ा जा सकता है। इसे ब्राउजर और एप्प के माध्यम से भी पढ़ा जा सकता है। गूगल में न्यूज सर्च करने पर बहुत सारे समाचार लेख हमारे सामने उपलब्ध हो जाते हैं।  गूगल न्यूज एक समाचार प्रसारित करने वाले वेबसाइटों का समूह है जहां वेब समाचार पढ़े जा सकते हैं।  Web samachar kis madhyam se padha ja sakta hai?

टिप्पण क्या है?

1. टिप्पण क्या है? उत्तर - टिप्पण - टिप्पण का प्रयोग किसी सरकारी कार्यालयों में कार्य विशेष की ओर संकेत करके ध्यान दिलाने के लिए किया जाता है। या  टिप्पण का प्रयोग सरकारी कार्यालयों में लिपिकों सहायकों तथा कार्यालय अधीक्षकों द्वारा किसी भी विचाराधीन पत्र या आवेदन पर उसके निष्पादन को सरल बनाने के लिए किया जाता है।  इसे टिप्पण लेखन भी कहते हैं जिसे अंग्रेजी में Note शब्द से जाना जाता है।  Tippan kya hai?

सॉफ्टवेयर क्या है यह किस तरह कार्य करता है?

1. सॉफ्टवेयर क्या है यह किस तरह कार्य करता है? उत्तर - सॉफ्टवेयर निर्देशों तथा प्रोग्राम्स का वह समूह है जो किसी मशीन जैसे कम्प्यूटर को किसी कार्य विशेष को पूरा करने का निर्देश देता है। यह कोडिंग्स और कमांड भाषा का प्रयोग करके बनाया जाता है। यह दो प्रकार का होता है एक सिस्टम सॉफ्टवेयर और दुसरा प्रोग्राम्स जिसे थर्ड पार्टी द्वारा बनाया जाता है।  यह इस प्रकार काम करता है - यह यूजर को कम्प्यूटर पर काम करने की क्षमता प्रदान करता है, यह कम्युनिकेटर की तरह होता है। सॉफ्टवेयर के बिना कम्प्यूटर हार्डवेयर निर्जीव बक्सा मात्र है।  Software kya hai? yah kis tarah karya krta hai?

'संक्षेपण एक कला है' स्पष्ट कीजिये?

1. 'संक्षेपण एक कला है' स्पष्ट कीजिये? उत्तर - संक्षेपण एक कला - संक्षेपण के विषय में दी गई परिभाषाओं के आधार पर कहा जा सकता है किसी विस्तृत विवरण, व्याख्या, वक्तव्य पत्र, व्यवहार लेख के मूल तथ्यों और निर्देशों का इस प्रकार से संयोजन करना कि उसमें अप्रासंगिक, अनावश्यक अनुपयोगी तथ्यों को त्यागकर उसे प्रवाहपूर्ण और संक्षिप्त ढंग से प्रस्तुत करना संक्षेपण या संक्षिप्तीकरण है। बिना संक्षेपण की कला के यह सम्भव नही है इसके लिए अभ्यास की आवश्यकता होती है अतः यह एक कला है।  Sankshepan ek kala hai, spasht kijiye?

खोजी पत्रकारिता क्या है?

1. खोजी पत्रकारिता क्या है? उत्तर - खोजी पत्रकारिता - यह पत्रकारिता का वह रूप है जिसमें रिपोर्टर किसी एक विषय (मुद्दे) को लेकर उसकी गहन छानबीन करते हैं। इसे जासूसी पत्रकारिता भी कहा जाता है।  Khoji patrakarita kya hai?

रिपोर्टिंग किसे कहते है?

1. रिपोर्टिंग किसे कहते है? उत्तर - इसे हिंदी में पत्रकारिता कहते हैं। पत्रकारिता आधुनिक सभ्यता का एक प्रमुख व्यवसाय है जिसमें समाचारों का एकत्रीकरण, लिखना, जानकारी एकत्रित करके पहुँचाना, सम्पादित करना और सम्यक प्रस्तुतिकरण आदि सम्मिलित हैं।  रिपोर्टिंग के अनेक माध्यम हैं जैसे - अखबार, पत्रिकाएँ, रेडियो, दूरदर्शन, वेब पत्रकारिता आदि।  Reportig kise kahte hai?

पृष्ट सज्जा का क्या महत्व है?

1. पृष्ट सज्जा का क्या महत्व है? उत्तर - पृष्ट सज्जा का महत्व कुछ इस प्रकार है -  पृष्ट सज्जा के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा पाठकों को आकर्षित किया जा सकता है।  पृष्ट सज्जा के अच्छा होने से बिक्री बढ़ सकता है।  ध्यान आकर्षित करने का यह साहसी तरीका है।  Prishtha sajja ka kya mahatva hai?

'आकर्षण' और 'आयात' के लिए विलोम शब्द लिखिए?

1. 'आकर्षण' और 'आयात' के लिए विलोम शब्द लिखिए? उत्तर - आकर्षण और आयात के लिए विलोम शब्द इस प्रकार है - 'आकर्षण' का विलोम - विकर्षण।  आयात का विलोम - निर्यात।  'Aakarshan' aur 'Aayat' ke liye vilom shabd likhiye? vikarshan , niryat. 

दो संयुक्त व्यंजन का उदाहरण दीजिए?

1. दो संयुक्त व्यंजन का उदाहरण दीजिए? उत्तर - दो संयुक्त व्यंजन का उदाहरण इस प्रकार है - क्ष  त्र  ज्ञ ये सभी संयुक्त व्यंजन के उदाहरण हैं।  Do sanyukt vyanjan ke udaharan dijiye?

स्वन विज्ञान की दो शाखाओं के नाम लिखिए?

1. स्वन विज्ञान की दो शाखाओं के नाम लिखिए? उत्तर - स्वन विज्ञान की दो शाखाओ के नाम इस प्रकार हैं - औच्चारिक स्वन विज्ञान।  सांवहनिक स्वन विज्ञान।  Swan vigyan ki do shakhao ke naam likhiye?

रूप विज्ञान अथवा प्रोक्ति विज्ञान क्या है?

1. रूप विज्ञान अथवा प्रोक्ति विज्ञान क्या है? उत्तर - यह भाषा विज्ञान की एक शाखा है जिसमे अध्ययन की केंद्रीय इकाई 'रूपिम' है। इस प्रोक्ति भी कहा जाता है तथा अंग्रेजी में इसके लिए (रूप विज्ञान) 'मॉर्फोलॉजी' (Morphology) शब्द का प्रयोग किया जाता है।  नाइडा (एक विद्वान) के अनुसार - "रूप विज्ञान, रूपिम तथा शब्द निर्माण में उसकी व्यवस्था का अध्ययन करता है।" उसी प्रकार ब्लाक तथा ट्रेगर का मत है की रूप विज्ञान शब्द-गठन का विवेचन करता है।  Roop vigyan athva prokti vigyan kya hai?

अर्थापकर्ष क्या है?

1. अर्थापकर्ष क्या है? उत्तर - अर्थापकर्ष में जहां शब्द अपने पहले के अच्छे या श्रेष्ठ अर्थ का लोप कर निकृष्ट अर्थ या हिन अर्थ का वाचक हो जाए, उसे अर्थापकर्ष कहते हैं।  जैसे - गंवार शब्द का अर्थ पहले गांव में रहने वाले से होता था, लेकिन अब अर्थापकर्ष होकर इसका अर्थ 'असभ्य' हो गया है। Arthapkarsh kya hai?

अंग्रेजी भाषा की लिपि क्या है?

1. अंग्रेजी भाषा की लिपि क्या है? उत्तर - अंग्रेजी भाषा की लिपि रोमन लिपि है। या अंग्रेजी भाषा रोमन लिपि में लिखी जाती है।  Angreji bhasha ki lipi kya hai? Roman.

वाक्य की परिभाषा दीजिये?

1. वाक्य की परिभाषा दीजिये? उत्तर - वाक्य की परिभाषा इस प्रकार है - दो या दो से अधिक पदों के सार्थक समूह को जिसका पूरा पूरा अर्थ निकलता है, वाक्य कहलाता है।  उदाहरण - सभी सुखी हों! एक सार्थक वाक्य नहीं है क्योकि ये निश्चित अर्थ का बोध नहीं कराता है।  Vakya ki paribhasha dijiye?

अर्थ तत्व का परिचय दीजिये।

 अर्थ तत्व का परिचय दीजिये। उत्तर - भाषा विज्ञान में अर्थ तत्व वह शब्द होते हैं जिसमें कोई अर्थ निहित होता है। अथवा  जो किसी पदार्थ, भाव या विचार का वाचक होता है।  उदाहरण - 'समाज का स्वरूप' उपर्युक्त पद में 'समाज' और 'स्वरूप' शब्द दो अर्थ तत्व हैं क्योकि ये कुछ विचारों का उदबोध कराते हैं जबकि 'का' संबंध तत्व है।  Arth tatva ka parichay dijiye.

ऐतिहासिक भाषा विज्ञान क्या है?

1. ऐतिहासिक भाषा विज्ञान क्या है? उत्तर - सामान्य रूप से 'भाषा' का अर्थ होता है बोलचाल की भाषा या बोली और 'विज्ञान' का अर्थ विशेष ज्ञान से है। इस भाषा विज्ञान के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की भाषाओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है।  ऐतिहासिक भाषा विज्ञान इसी भाषा विज्ञान की एक शाखा है जिसके अंतर्गत समय के साथ भाषाओं में होने वाले परिवर्तन का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है।  Aitihasik bhasha vigyan kya hai?

चर्यापद तथा चर्यागीतों का संबंध किस सम्प्रदाय से माना जाता है?

1. चर्यापद तथा चर्यागीतों का संबंध किस सम्प्रदाय से माना जाता है? उत्तर -  चर्यापद तथा चर्यागीतों का संबंध बौद्ध सम्प्रदाय से माना जाता है।  Charyapad tatha charyageeto ka sambandh kis sampraday se mana jata hai? Baudha sampraday se.

अग्निगर्भ उपन्यास की रचना किसने की है?

1. अग्निगर्भ उपन्यास की रचना किसने की है? उत्तर - अग्निगर्भ उपन्यास की रचना महाश्वेता देवी ने की है।  Agnigarbh upnyas ki rachna kisne ki hai? Mahashveta devi ne.

क्या गिरीश कर्नार्ड मलयालम भाषा से संबंधित रचनाकार हैं?

1. क्या गिरीश कर्नार्ड मलयालम भाषा से संबंधित रचनाकार हैं? उत्तर - नहीं गिरीश कर्नार्ड कन्नड़ भाषा से संबंधित रचनाकार हैं।  Kya girish karnard malyalam bhasha se sambandhit rachnakar hai? Nahi.

मलयालम भाषा से संबंधित तीन रचनाकारों के नाम लिखिए?

1. मलयालम भाषा से संबंधित तीन रचनाकारों के नाम लिखिए? उत्तर - मलयालम भाषा से संबंधित तीन रचनाकारों के नाम इस प्रकार हैं - एजु तच्चन  एन. कृष्ण पिल्लै  जी. शंकर कुरूप।  Malayalam bhasha se sambandhit teen rachnakar ka naam likhiye?

अभिज्ञान शाकुंतलम के नायक कौन हैं?

1. अभिज्ञान शाकुंतलम के नायक कौन हैं? उत्तर - अभिज्ञान शाकुंतलम के नायक राजा दुष्यंत हैं यह कालिदास की रचना है।  Abhigyan shakuntalam ke nayak kaun hai? Raja dushyant.

परीक्षा गुरु को प्रथम उपन्यास माना जाता है इसका संबंध किस भाषा से है?

1. परीक्षा गुरु को प्रथम उपन्यास माना जाता है इसका संबंध किस भाषा से है? उत्तर - परीक्षा गुरु उपन्यास का संबंध हिंदी भाषा से है।  Pariksha guru ko pratham upanyas mana jata hai iska sambandh kis bhasha se hai? Hindi bhasha se.

ज्ञाता का संबंध किस भाषा से माना जाता है?

 1. ज्ञाता का संबंध किस भाषा से माना जाता है? उत्तर - इस प्रश्न का उत्तर थोड़ा संसय भरा है थोड़ा इन्तजार करें या कमेंट में लिखें।  Gyata ka sambandh kis bhasha se mana jata hai? Not available.

अन्ना साहेब किर्लोस्कर की नाट्य भाषा है?

1. अन्ना साहेब किर्लोस्कर की नाट्य भाषा है? उत्तर - अन्ना साहेब किर्लोस्कर की नाट्य भाषा मराठी है।  Anna saheb kirloskar ki natya bhasha hai? Marathi.

गिरीश कर्नार्ड का नाम किस भाषा की साहित्य रचना के लिए प्रसिद्ध है?

1. गिरीश कर्नार्ड का नाम किस भाषा की साहित्य रचना के लिए प्रसिद्ध है? उत्तर - गिरीश कर्नार्ड का नाम कन्नड़ भाषा की साहित्य रचना के लिए प्रसिद्ध है।  Girish karnad ka naam kis bhasha ki sahitya rachna ke liye prasidh hai?  Karnad.

'कोच्चि के दरख्त मूलतः किस भाषा की रचना है?

1. 'कोच्चि के दरख्त मूलतः किस भाषा की रचना है? उत्तर - 'कोच्चि के दरख्त मूलतः मलयालम भाषा की रचना है।  Kochchi ke darakhta multah kis bhasha ki rachna hai? Malyalam.

कपिल किस रचना का सूत्रधार है?

1. कपिल किस रचना का सूत्रधार है? उत्तर - एम्. ए. हिंदी साहित्य में दिये गए नाटक हयवदन में यह एक पात्र का नाम है सूत्रधार भागवत है।  Kapil kis rachna ka sutradhar hai? Yah patra hai.

कोच्चि के दरख्त में संकलित कविताओं में प्रथम कविता का नाम?

1. कोच्चि के दरख्त में संकलित कविताओं में प्रथम कविता का नाम? उत्तर - कोच्चि के दरख्त में संकलित कविताओं में प्रथम कविता का नाम धोबी है।  Kochchi ke darakhta me sankalit kavitao me pratham kavita ka naam Dhobi.

नक्सलवादी समस्या से संबंधित रचना है?

1. नक्सलवादी समस्या से संबंधित रचना है? उत्तर - नक्सलवादी समस्या से संबंधित रचना अग्निगर्भ उपन्यास है।  Naksalvadi samasya se sambandhit rachana hai? Agnigarbha.

अल्प-साहित्य भंडार क्या हिंदी साहित्य के अध्ययन की मूल समस्या है?

1. अल्प-साहित्य भंडार क्या हिंदी साहित्य के अध्ययन की मूल समस्या है? उत्तर - नहीं यह हिंदी साहित्य के अध्ययन की मूल समस्या नही है बल्कि हिंदी साहित्य में साहित्य भंडार इतना अधिक है की अध्ययन कर पाना मुश्किल है।  Alpa sahitya bhandar kya hindi sahitya ke adhyayan ki mool samsya hai? Nahi.

भारतीय साहित्य के अध्ययन की तीन मूल समस्या लिखिए?

1. भारतीय साहित्य के अध्ययन की तीन मूल समस्या लिखिए? उत्तर - भारतीय साहित्य के अध्ययन की तीन मूल समस्या इस प्रकार है - बहुभाषिता  भारत की विशालता  आर्थिक समस्या।  Bhartiya sahitya ke adhyayan ki teen mul samasya likhiye?

सबसे प्राचीन मंगल काव्य माना जाता है?

1. सबसे प्राचीन मंगल काव्य माना जाता है? उत्तर - सबसे प्राचीन मंगल काव्य मनसा मंगल काव्य को माना जाता है।  Sabse prachin mangal kavya mana jata hai? Mansa mangal.

कोलकाता में पहला छापाखाना किसने खोला?

1. कोलकाता में पहला छापाखाना किसने खोला? उत्तर - कोलकाता में पहला छापाखाना फोर्ट विलियम कॉलेज ने खोला।  Kolkata mein pahla chhapakhana kisne khola? Fort william college ne.

'पयामे' आजादी क्या है?

1. 'पयामे' आजादी क्या है? उत्तर - 'पयामे' आजादी एक समाचार पत्र है।  Payame' azadi kya hai? Samachar patra.

व्यापारिक संस्था क्या टिप्पणी का कार्यक्षेत्र है?

1. व्यापारिक संस्था क्या टिप्पणी का कार्यक्षेत्र है? उत्तर - नही यह टिप्पणी का कार्यक्षेत्र नही है।  Vyaparik sanstha kya tippani ki karyakshetra hai? Nahi.