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हिन्दी आलोचना की प्रमुख प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए। - Hindi aalochana ki Pramukh pravrittiyon par Prakash daliye

 प्रश्न 2. हिन्दी आलोचना की प्रमुख प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए। अथवा हिन्दी में कितने प्रकार की आलोचनाएँ प्रचलित रही है? प्रत्येक का परिचय दीजिए। हिन्दी आलोचना की प्रमुख प्रवृत्तियाँ उत्तर - आलोचना शब्द संस्कृत की लुच् धातु से बना है, जिसका अर्थ है - देखना। लुच् धातु से पूर्व आ उपसर्ग जोड़कर तथा बाद में ल्युट् (यु) प्रत्यय आने से आलोचना शब्द बना है।  आ + लुच् + यु की स्थिति में पाणिनि के सूत्र 'युवोरनाकौ' से यु को अन आदेश हो जाता है। लुच् के लकार वाले उ को ओगुण हो ल् + ओ+च्+अन की दशा में वर्ण सम्मेलन करने पर आलोचना शब्द बनता है।  इससे स्त्रीत्व की विवक्षा में पाणिनि के सूत्र 'अजाद्यतष्टाप्' से टाप् (आ) प्रत्यय होकर आलोचन + आ की स्थिति में पाणिनि के सूत्र' अकः सवर्णेदीर्घ: से आलोचन के नकार वाले अ तथा टाप के आ को मिलाकर आ हो जाता है, इस प्रकार आलोचना शब्द बनता है। नेत्र का पर्यायवाची लोचन शब्द भी संस्कृत की लुच् धातु से ही बनता है। लोचन का कार्य है - देखना।  आलोचला शब्द है - भली-भाँति अथवा ठीक से देखना। आलोचना के पर्यायवाची शब्द समीक्षा का भी यही अर्थ है।  संस्कृ...