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Showing posts from July, 2021

अंकसूची की द्वितीय प्रति प्राप्त करने हेतु एक आवेदन पत्र लिखिए।

  सचिव माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर छत्तीसगढ़ को दसवीं बोर्ड परीक्षा की अंकसूची की द्वितीय प्रति प्राप्त करने हेतु एक आवेदन पत्र लिखिए।  | Write an application to get a duplicate mark sheet in hindi उत्तर - सचिव माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर छत्तीसगढ़ को दसवीं बोर्ड परीक्षा की अंकसूची की द्वितीय प्रति प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र - प्रति,         सचिव,           माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर, छत्तीसगढ़।  विषय - अंकसूची की द्वितीय प्रति भेजने हेतु।  महोदय,            निवेदन है कि मेरी कक्षा 10वीं की अंकसूची खो गई है। मैंने सन 2007 में दसवीं की परीक्षा दी थी, अतः मुझे अंकसूची की द्वितीय प्रति भेजने का कष्ट करें। इस हेतु मैंने निर्धारित शुल्क 50 रूपये बैंक चालान नंबर 24633, दिनांक 31.07.2021 को आपके नाम से भेज रहा हूं।       मेरी संबंधित जानकारी निम्नलिखित है - नाम - रमेश  पिता - श्री घनश्याम  परीक्षा का नाम - हाई स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा 2010  परीक्षा केंद्...

स्थानांतरण आवेदन पत्र कैसे लिखे

 स्थानांतरण प्रमाण-पत्र प्राप्त करने हेतु अपनी शाला के प्रचार्य को आवेदन-पत्र लिखिए।  यहां पर जो भी स्कूल के नाम, स्थान, दिनांक और विद्यार्थी के नाम दिए गए हैं, वह उदाहरण के तौर पर दिए गए हैं। इसे आप अपने अनुसार परिवर्तन करके लिख सकते हैं। सेवा में,           प्राचार्य,           शासकीय उ. मा. विद्यालय,           राजनांदगाँव (छ. ग.)|  विषय - स्थानांतरण प्रमाण-पत्र हेतु आवेदन पत्र।  महोदय,         निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा ग्यारहवीं 'स' का छात्र हूं। मेरे पिताजी शासकीय कर्मचारी हैं। उनका स्थानांतरण दुर्ग हो गया है। मेरा पूरा परिवार उनके साथ जा रहा है, अतः मेरा यहां अकेले रहकर अध्ययन करना संभव नहीं है। मैं वहां की किसी शाला में अध्ययन करूँगा, अतः आप मुझे अतिशीघ्र स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (T. C.) देने का कष्ट करें। मैंने विद्यालय की सारी देय राशि चुका दी है। मेरे पास विद्यालय की पुस्तकालय, खेल और प्रयोगशाला की कोई वस्तु नहीं है। अतः मुझे शीघ्र स्थानांतरण प्रमा...

साला शुल्क से मुक्ति हेतु आवेदन पत्र

आपको यहां प्रश्न दिया जा सकता है ध्यान से पढ़ें - अपने विद्यालय के प्राचार्य को साला शुल्क से मुक्ति हेतु आवेदन पत्र लिखिए Hello and welcome friends स्वागत है आपका हमारे इस पोस्ट में आज हम बात करने वाले हैं, साला शुल्क से मुक्ति हेतु आवेदन पत्र के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं जानते हैं कैसे लिखते हैं आवेदन पत्र? क्या होता है साला शुल्क मुक्ति हेतु आवेदन पत्र? आपको पता ही होगा बहुत सारे स्टूडेंट ऐसे होते हैं जिनको आर्थिक सहायता की जरूरत होती है और जिनके पास पैसे नहीं के बतौर होते हैं।  जिनकी जिंदगी मुश्किल से गुजर रही होती है और जिनके माता-पिता अफोर्ड नहीं कर पाते पढ़ाने के लिए तो उनके लिए यह पत्र लिखा जाता है और यह पत्र एक औपचारिक पत्र की श्रेणी में आता है।  जिसमें प्रार्थना की जाती है सर के साथ बात की जाती है कि क्यों आपका शुल्क माफ करें इसका प्रॉपर रीजन बताया जाता है। तब जाके हमें शुल्क की माफी मिलती है। तो यहां पत्र क्यों लिखा जाता है इसका जवाब अभी मैंने दिया है लेकिन साला शुल्क से मुक्ति हेतु आवेदन पत्र कैसे लिखा जाता है इसके बारे में आइए जानते हैं। साला शुल्क मुक्ति हेत...

letter writing in formal guidance by khilawan

Letter writing in formal I don't know dude you know me or not but I am connected with you only just come through this blog and know about what you have searched  so let's start... Formal Letter - Letter-writing is an art, so while writing the letter, easy, simple and common spoken language should be used in the letter, so that the recipient of the letter can understand the expressions expressed in the letter well. Through letter writing we can express our feelings and thoughts. Through letters, a person can write his words and convey them to others. The things that people hesitate to say, those things can be easily explained or said through letters. Why is the letter needed? Letters are written to know the skill of their relatives or friends living far away and to inform about their skill. Nowadays, we have many modern means of communication, such as telephone, mobile phone, email etc. The question arises that why is it still necessary to learn letter-writing? Writing letters i...

Who is writer of Hindi chapter Dadi Maa?

  Who is writer of Hindi chapter Dadi Maa? Hello there your question is about Hindi story chapter Dadi Maa who is the writer of this chapter so i am answering you this chapter was written by Shivprsad Sinh दादी माँ अध्याय के लेखक कौन हैं? उत्तर - आपने पूछा है की दादी माँ किसके द्वारा लिखा गया है तो इसका जवाब है हिंदी साहित्य में दादी माँ एक कहानी का नाम है जिसे शिवप्रसाद सिंह ने लिखा है। 

घनानंद को प्रेम की पीर का कवि क्यों माना जाता है?

1.  घनानंद को प्रेम की पीर का कवि क्यों माना जाता है? उत्तर - घनान्द को प्रेम की पीर का कवि माना जाता है क्योंकि उनकी रचनाओं में वैसे तो हमें संयोग और वियोग दोनों पक्ष देखने को मिलते हैं फिर भी इनकी कविताओं में, पदों में विरह की पीड़ा की विलक्षणता हमें सुजान के प्रति प्रेम की पीड़ा ही देखने को मिलती है। जो की एक सीमा के बाद शब्दातीत मतलब शब्द नहीं बचते हैं, पीड़ा को प्रकट करने के लिए।   इसलिए उन्हें प्रेम की पीर का कवि माना जाता है। Ghananand ko prem ki pir ka kvi kyo mana jata hai?

कोदूराम दलित : छत्तीसग़ढी साहित्यकार

1. कोदूराम दलित के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर लेख लिखिए।  कोदूराम दलित : Koduram Dalit उत्तर - कोदूराम दलित के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर लेख इस प्रकार प्रस्तुत है - दुर्ग के रहने वाले कोदूराम दलित छत्तीसगढ़ साहित्य में अपना एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। उन्होंने स्वयं अपने परिचय रूप में यह पंक्तियां लिखी हैं - मोरा गवंईहा नाम, भुलाहू झन गा भइया।  जनजहिति खातिर गढ़े हवंव मैं ये कुंडलिया।  शउक मुहूँ ला घलो हवय, कविता गढ़ई के।  करथव काम दुरुग माँ मैं लड़का पढ़ई के।।   भाव पक्ष  - बाल साहित्य एवं व्यंग्य-विनोद लिखने में दलित जी की दक्षता अनुपम है। राष्ट्रीय भावों से उनका कवि-आवेश अत्यंत जागृत है। वह हर भारतवासी को एक आदर्श रूप में देखना चाहते हैं, संभवत: इसी कारण उपदेशात्मक प्रवृत्ति आपकी कविता में पग-पग पर दिखाई पड़ती है। सामयिक विषयों पर भी उनकी कलम ने चमत्कार सिद्धि प्राप्त की है। लोक प्रचलन के दृश्यों को चित्रित करने में वह सिद्धहस्त हैं। घाम-दिन गहस, आस बरखा के दिन,  सनन-सनन चलेपवन लहरिया।  छाये रथे अकास-मां, चारों खूँट, धुवां साही, बरखा के बाद...

पवन दीवान : छत्तीसगढ़ी साहित्यकार

1. पवन दीवान जी का साहित्यिक परिचय दीजिए।  पवन दीवान  उत्तर -  पवन दीवान जी का साहित्यिक जीवन परिचय इस प्रकार है -  छत्तीसगढ़ी साहित्य के अग्रणी कवि के रूप में पवन दीवान का नामोउल्लेख होता है। एक ओर वे सन्यासी बाना धारण करके कथावाचन में जन सेवा करते हैं तो दूसरी ओर उनके अंतस में कविताएं हिलौरें लेती रहती हैं। हिंदी और छत्तीसगढ़ी में इनकी अनेक रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। इनकी 'चंदा' शीर्षक कविता बहुचर्चित हुई है। भाव-पक्ष - छत्तीसगढ़ी महतारी के माटी पुत्र पवन दीवान राजिम क्षेत्र के प्रतिनिधि राजनीतिज्ञ माने जाते हैं। सांसद के रूप में वे जन सेवा कर चुके हैं तथापि उनकी रचनाओं में भावुकतापूर्ण ग्रामीण परिवेश का चित्रण मिलता है। खेत, खार, चिरई, चिरगुन आदि प्राकृतिक उपादान उनकी रचनाओं में समाहित हैं - "लइका मन धुर्रा में  सने-सने घर आगे  चिरई-चिरगुन अमलीके  डारा म सकलागे  तरिया के पार जैसे  झमके रे झांझ  खेत खार बखरी मं  गहिरागे सांझ।।" कला-पक्ष - कविता पर पवन दीवान हिंदी और छत्तीसगढ़ी भाषा पर पूर्ण अधिकार रखते हैं...

लाला जगदलपुरी : छत्तीसगढ़ी साहित्यकार

 1. लाला जगदलपुरी जी का साहित्यिक परिचय दीजिये।  लाला जगदलपुरी  उत्तर - लाला जगदलपुर जी का साहित्यिक परिचय इस प्रकार है - बस्तर निवासी लाला जगदलपुरी छत्तीसगढ़ी कविताओं के प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं। हल्बी बोली में रचित उनकी रचनाओं में श्रृंगार रस की प्रधानता है। नायिकाओं का श्रृंगारिक, मादकतापूर्ण चित्रण छत्तीसगढ़ी श्रृंगार साहित्य में अपूर्व है। भाव पक्ष  - नायिका की मादक छवि का प्रभाव नायक पर कैसा पड़ता है। निम्नांकित पंक्तियां देखिए - "जब ले तैं सपना मां आये  मोला कछु सुहावय नइये  गुइयां तैं ह अनेक सुहाये  पुन्नी के चंदा ल देखेंव  तोरे सुगंध रातरानी हर  भेजत रहथे संग पवन के  नींद भरे रइथे आँखी मां  दुख बिसराथौं जनम-जनम के।"   कला पक्ष  - आपने उपमा, रूपक, अनुप्रास आदि अलंकारों का प्रयोग कवि ने अत्यंत सार्थक रूप से किया है।  लाला जगदलपुरी जी का जन्म 1923 में बस्तर में हुआ था, बस्तर से उनका अगाध प्रेम है। लेखन के साथ-साथ जगदलपुरी जी अध्यापन तथा खेती का काम करते हैं। लाला जगदलपुरी जी की प...

लोचन प्रसाद पाण्डेय : छत्तीसगढ़ी एवं हिंदी साहित्यकार

1. लोचन प्रसाद पाण्डेय का जीवन परिचय दीजिए।  उत्तर -    लोचन प्रसाद पाण्डेय  पंडित लोचन प्रसाद पाण्डेय का जन्म संवत 1943 में बालपुर ग्राम (बिलासपुर) में हुआ था। आप एक समृद्ध मालगुजार थे। छत्तीसगढ़ के पुरातत्व और इतिहास के क्षेत्र में आपके अनुसंधानों ने अनेकशः नव सोपानों का उद्घाटन किया है।  छत्तीसगढ़ी में आपकी कविताएं स्फुट रूप में ही प्राप्त होती हैं। मूल प्रकाशित प्रतियों के अप्राप्य होने के कारण उनके रचना काल का सुनिश्चित निर्धारण नहीं किया जा सकता, तथापि इतना अवश्य कहा जा सकता है कि पाण्डेय जी ने सन 1907 - 08 से ही छत्तीसगढ़ी काव्य-लेखन आरंभ कर दिया था। प्राप्त रचनाओं में 'कृषक बाल रखा', 'भूतहा मंडल', 'रोपा धान', 'वंदना गीत' आदि उल्लेख्य हैं।  पाण्डेय जी का छत्तीसगढ़ी काव्य राष्ट्रीय विचारधारा से प्रभावित है तथा छत्तीसगढ़ के प्रति उनके गौरव भाव की ही अभिव्यक्ति उनमें अधिक हुई है - जयति जय-जय छत्तीसग़ढ देस, जनमभूमि सुंदर सुखखान  जहाँ के तिल, सन, हर्रा, लाख, गहूँ, अऊ नाना विधि के धान, बनिया बैपारी के अधार, ...

मुकुंद कौशल : छत्तीसगढ़ी एवं हिंदी साहित्यकार

1. मुकुंद कौशल पर टिप्पणी लिखिए।   मुकुंद कौशल  उत्तर - कवि मुकुंद कौशल गुजराती परिवार के छत्तीसगढ़ी एवं हिंदी दोनों के जाने-माने रचनाकार थे। वे गजल , गीत एवं कविताओं की रचना करते थे। रामधारी सिंह दिनकर, बोदूराम दलित, डॉ विमल पाठक एवं रघुवीर अग्रवाल पथिक से प्रेरणा प्राप्त कर उन्होंने साहित्य-सृजन किया था। उनका छत्तीसगढ़ी कविता संग्रह 'भिनसार' और हिंदी कविता संग्रह लालटेन जलने दो बहुत ही लोकप्रिय हैं। छत्तीसग़ढी में गजल लिखने वाले पहले व्यक्ति होने का श्रेय उनको प्राप्त है। दुर्ग जिला हिंदी साहित्य समिति के अध्यक्ष भी रह चुके थे। जब साक्षरता मिशन चलाया गया तो उसमें भी इनका बहुत बड़ा योगदान था इनके गीतों को साक्षरता अभियान में गाया जाता था।  सम्मान - श्री अलंकरण, समाज़ गौरव सम्मान, साक्षरता सम्मान, अहिन्दी भाषी हिंदी सम्मान, लोककला सम्मान, साहित्य गौरव, भारत गौरव, डॉ. नरेंद्र देव वर्मा सम्मान, कथाकार सम्मान सहित लगभग 30 से अधिक।  अन्य रचनाएं  - (गीत) ऐसी माचिस लाए कहां से, कितने घर हैं, यह नई झुग्गी, नई उमंगों की चंचलता, रंग-बिरंगे मर्तबान में। (अंज...

केयूर भूषण : छत्तीसगढ़ी साहित्य

1. केयूर भूषण पर टिप्पणी लिखें।  केयूर भूषण  उत्तर - केयूर भूषण का जन्म 1928 में दुर्ग जिले में हुआ था। उन्होंने 11 साल की उम्र से ही आजादी की लड़ाई में भाग लेना शुरू कर दिया। सिर्फ 18 साल के थे जब 1942 के आंदोलन में भाग लेकर 9 महीने के लिए जेल में रहे थे। बाद में किसान मजदूर आंदोलन में जुड़कर जेल गए थे। केयूर भूषण जी गांधीवादी चिंतक रहे हैं। हरिजन सेवक संघ के पदाधिकारी रह चुके हैं। रायपुर लोकसभा से दो बार सांसद चुने गए। बहुत दिनों तक वे लेखन कार्य में व्यस्त रहे हैं, समाज की उन्नति के लिए लगातार काम कर रहे थे। उनकी रचनाएं हैं - लहर (कविता संकलन) कुल के मरजाद (छत्तीसगढ़ी उपन्यास), कहां बिलोगे मोर धान के कटोरा (छत्तीसगढ़ी उपन्यास), कालू भगत (छत्तीसगढ़ी कथा संकलन) छत्तीसगढ़ी के स्वतंत्रता सेनानियों। केयूर भूषण जी छत्तीसगढ़ी अउ छत्तीसगढ़ी संदेश का सप्ताहिक संपादन करते थे। छत्तीसगढ़ी साहित्य के बारे में उनका कहना है - छत्तीसगढ़ी साहित्य अब पोठ होवत हे। सबै किसम के छत्तीसगढ़ी साहित्य उजागर होवत है। जतेन छत्तीसगढ़ी शब्द वोमा काम आही ओतके छत्ती...

लक्ष्मण मस्तूरिया : छत्तीसगढ़ी साहित्य

1. लक्ष्मण मस्तूरिया पर टिप्पणी लक्ष्मण मस्तूरिया छत्तीसगढ़ में लक्ष्मण मस्तूरिया छत्तीसगढ़ी गीत के लिए प्रसिद्ध है। बिलासपुर जिले के मस्तूरी गांव में लक्ष्मण जी का जन्म हुआ था। मिट्टी के प्रति उनका प्यार उनके नाम से पता चलता है मस्तूरी को साथ लेकर चले हैं लक्ष्मण मस्तूरिया।   जिंदगी में बहुत कष्ट उन्होंने झेलें हैं। इसलिए शायद उनके गीतों में इतनी ताकत है। रायपुर में राजकुमार कॉलेज के अध्यापक रहें हैं 1988 से। उन्हें छत्तीसगढ़ी लोक भाषण की उपाधि से भी सम्मानित किया गया है।  उनकी प्रकाशित कृतियां हैं - 'हमू बेटा भूमिया के गंवई-गंगा, 'धुनरी बंसुरिया' 'माटी कहे कुम्हार से' (छत्तीसगढ़ी निबंध) | मस्तुरिया के गीत गोंदा में बहुत ही सुंदर है। उनका रिकॉर्ड भी म्यूजिक इंडिया ग्रामोफोन कंपनी ने निकाला है। उनका गीत 'मोर संग चलव रे' में छत्तीसगढ़िया अंतरे बहुत ही लोकप्रिय हैं। लक्ष्मण मस्तुरिया का सफर 3/11/2018 को हार्ट टैक की वजह से थम गया।  Image by Khilawan लक्ष्मण मस्तुरिया के गीत-मोर संग चलवरे  ओ गिरे थके हपटे मन  अऊ परे डरे मनखे मन  मोर संग चल...

लखन लाल गुप्त : छत्तीसगढ़ी साहित्य

1. श्री लखन लाल गुप्त का  संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी रचनाओं पर प्रकाश डालिए।  (अथवा)  लखन लाल गुप्ता के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालिए।  (अथवा) छत्तीसगढ़ी निबंध के विकास में लखन लाल गुप्त का स्थान व्यक्त कीजिए। उत्तर - साहित्यिक परिचय  - छत्तीसगढ़ी साहित्य के विकास में लखन लाल गुप्त का अहम स्थान है। उनका जन्म 1 जुलाई 1933 को बिलासपुर में हुआ। उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा वाराणसी में रहकर पास की थी।  एम.कॉम. और एल.एल.बी. की पढ़ाई की परीक्षाएं उन्होंने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से पास की। लखन लाल गुप्त की प्रतिभा बहुआयामी है।  छत्तीसगढ़ी में उन्होंने कहानी, नाटक, कविता, निबंध आदि सभी विधाओं पर अपनी लेखनी को गति दी। उन्होंने उपन्यास भी लिखे हैं उनके 'चंदा अमृत बरसाइस' उपन्यास (1965) को छत्तीसगढ़ी की द्वितीय उपन्यास होने का गौरव प्राप्त है।  इस उपन्यास के संबंध में मुकुटधर पांडे का मत है 'चंदा अमृत बरसाइस' यथा नाम तथा गुण है। पद पद पर अमृत टपकता है। कथानक सरल और सहज है। आंचलिक जन जीवन का चित्रण स्वभाविक ...

अति सूधो सनेह को मारग है किसकी पंक्ति है?

1.  अति सूधो सनेह को मारग है किसकी पंक्ति है? उत्तर - अति सूधो सनेह को मारग है यह उपर्युक्त पंक्तियाँ घनानंद की हैं।  Ati sudho saneha ko marag hai kiski pankti hai? Ghananand ki.

घनानंद के पिता का क्या नाम था?

1. घनानंद के पिता का क्या नाम था? उत्तर - जहां तक मैंने घनान्द के बारे में पढ़ा है, हिंदी साहित्य में कहीं पर भी इनके पिता के नाम का उल्लेख नहीं मिलता है।  Ghananand ke pita ka kya naam tha? Not mention.

घनानंद का जन्म कहां और कब हुआ था?

1. घनानंद का जन्म कहां और कब हुआ था? उत्तर - घनानंद का जन्म दिल्ली के आसपास हुआ था आचार्य रामचंद्र और हजारी प्रसाद द्वेदी का मानना है और वहीं इसके जन्म वर्ष की बात करें तो सन 1673  ईश्वी को हुआ था।  Ghananand ka janma kaha aur kab huaa tha? 1673 delhi.

घनानंद का जन्म कहाँ हुआ था?

1. घनानंद का जन्म कहाँ हुआ था? उत्तर - घनानंद के जन्म को लेकर विद्वानों में मतैक्य नहीं है सभी का अलग-अलग मत है लेकिन बहुत सारे विद्वानों जैसे की आचार्य रामचंद्र शुक्ल और हजारी प्रसाद द्वेदी का मानना है की उनका जन्म दिल्ली के आसपास हुआ था।  Ghananand ka janma kaha huaa tha?

सुजान शतक के रचनाकार का क्या नाम है?

1. सुजान शतक के रचनाकार का क्या नाम है?  उत्तर - सुजान शतक के रचनाकार का नाम घनानंद है जो की बादशाह मुहम्मद शाह के दरबार में मीर मुंशी के पद पर था।  Sujan shatak ke rachnakar ka kya naam hai? Ghananand.

सुजान कौन थी किस राजा के दरबार में उसे नर्तकी का स्थान मिला था?

 1.  सुजान कौन थी किस राजा के दरबार में उसे नर्तकी का स्थान मिला था? उत्तर - सुजान एक नर्तकी थीं जिससे राजा का दरबारी कवि और मीर मुंसी  घनान्द प्रेम करता था और उसे बादशाह (राजा) मुहम्मद शाह रंगीले के दरबार में नर्तकी का स्थान मिला था।  Sujan kaun thi kis raja ke darbar me use nartaki ka sthan mila tha?

शब्द भंडार के कितने स्रोत है?

 शब्द भंडार के स्रोत दो या दो से अधिक वर्णो के सार्थक मेल को शब्द कहते हैं जिसका एक निश्चित अर्थ होता है। इस प्रकार अर्थ पूर्ण शब्दों का कोष या खजाना शब्द भंडार कहलाता है।  शब्द भंडार का तात्पर्य किसी भाषा में शब्दों का कितनी अधिक मात्रा में पाए जाने से है। हिंदी में भंडार का मतलब खजाना होता है।  शब्द भंडार के कितने स्रोत शब्द भंडार के स्त्रोत उतने ही है जितने की विश्व में भाषाऐं बोली जाती हैं। आज पुरे विश्व में एक नहीं बल्कि अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। इस प्रकार शब्द भंडार के भी अनेक स्त्रोत हैं।  अगर हम बात करें हिंदी भाषा में शब्द भंडार की तो मुख्य रूप से इसमें जो शब्द लिए गए हैं वो शब्द संस्कृत भाषा से है। साथ ही अरबी, फारसी, अंग्रेजी आदि भाषाओं के शब्द भी इसमें शामिल हैं।  शब्दों का भंडार क्या है? हिंदी का शब्द भंडार कितना है? आइये जानते हैं विस्तार से  हिंदी में शब्द भंडार के कितने स्त्रोत हैं - भाषा की उन्नति तथा बढ़ते रहे ऐसे विकास के लिए उसका शब्द-समूह विशेष स्थान रखता है। भाषा-विकास के साथ उसकी किसी भी तरह के हाल ब...

प्रशासन संबंधी कागजों का अनुवाद करते समय लोग किसको कम सोचते हैं?

1. प्रशासन संबंधी कागजों का अनुवाद करते समय लोग किसको कम सोचते हैं? उत्तर - प्रशासन संबंधी कागजों का अनुवाद करते समय लोग अनुवाद की जटिलता को कम सोचते हैं।  Prashasan sambandhi kagjo ka anuvad karte samay log kisko kam sochte hai? Anuwad ki jatilta ko.

अंग्रेजी और हिंदी की वाक्य रचना में कैसा अंतर होता है?

1. अंग्रेजी और हिंदी की वाक्य रचना में कैसा अंतर होता है? उत्तर - अंग्रेजी और हिंदी की वाक्य रचना में स्वभाविक अंतर होता है।  Angreji aur hindi ki vakya rachana me kaisa antar hota hai? Swabhavik.

प्रशासनिक कागजों का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद कैसा होता था ?

1. प्रशासनिक कागजों का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद कैसा होता था ? उत्तर - प्रशासनिक कागजों का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद क्लिष्ट और विकट होता था।  Prashasanik kagjo ka angreji se hindi me anuvad kaisa hota tha? Klishtha aur vikat.

भारत की स्वतंत्रता के बाद शासन के अधिकांश प्रारूपों का अनुवाद किस भाषा में हुआ?

1. भारत की स्वतंत्रता के बाद शासन के अधिकांश प्रारूपों का अनुवाद किस भाषा में हुआ? उत्तर - भारत की स्वतंत्रता के बाद शासन के अधिकांश प्रारूपों का अनुवाद हिंदी भाषा में हुआ।  Bharat ki sawatatrata ke bad shasan ke adhikansh prarupo ka anuvad kis bhasha me hau? Hindi me.

हिंदी भाषा का सीधा संबंध किस भाषा से है?

1. हिंदी भाषा का सीधा संबंध किस भाषा से है? उत्तर - हिंदी का भाषा का सीधा संबंध संस्कृत भाषा से है।  Hindi bhasha ka sidha sambandh kis bhasha se hai? Sanskrit se.

भारत की दासता बताता है?

1. भारत की दासता बताता है? उत्तर - हमें यह इतिहास बताता है की मुस्लिम राज्य काल में भारतीय हिन्दू ने दासता के सैकड़ों साल किसके बल पर गुजारे।  Bharat ki dasta batata hai?

किसके बिना एक भाषा के ज्ञान का संचरण दूसरी भाषा में नहीं होता?

1. किसके बिना एक भाषा के ज्ञान का संचरण दूसरी भाषा में नहीं होता? उत्तर - अनुवाद के बिना एक भाषा के ज्ञान का संचरण दूसरी भाषा में नहीं होता।  Kiske bina ek bhasha ke gyan ka sancharan dusri bhasha me nahi hota? Anuvad.

हम कभी-कभी प्रत्यक्ष रूप से कैसे काम करना चाहते हैं?

1. हम कभी-कभी प्रत्यक्ष रूप से कैसे काम करना चाहते हैं? उत्तर - हम कभी-कभी प्रत्यक्ष रूप से जिनकी व्याख्या करना कठिन है।  Ham kabhi-kabhi pratyaksha roop se kaise kam karna chate hai? jinki vyakhya karna kathin hai.

हिंदी का शब्द भंडार कितना है?

 हिंदी का शब्द भंडार हिंदी हमारे भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। जिसका अपना एक अलग अस्तित्व है। लेकिन दुःख की बात यह है की यह अभी भी हमारे संविधान में राजभाषा के रूप में ही दर्ज है।  हमारे देश की कोई भी राष्ट्र भाषा बनने योग्य भाषा नहीं है हिंदी को छोड़कर हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जो की भारत में सबसे ज्यादा लोगों द्वारा बोली जाती है।  इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है की इसका शब्द भंडार कितना ज्यादा समृद्ध है! पहले यह माना जाता था की हिंदी का शब्द भंडार अंग्रेजी की तुलना में बहुत ही कम है लेकिन अब वह स्थिति नहीं रही हिंदी का शब्द भंडार अंग्रेजी की तुलना में कई गुना अधिक हो या है चुकी इसकी लिपि देवनागरी लिपि है तथा संस्कृत की भी लिपि देवनागरी लिपि है।  अतः इसमें संस्कृत के बहुत सारे शब्दों के आगमन से इसके शब्द भंडार में अथाह वृद्धि हुई है जब साथ में इसमें अरबी फ़ारसी आदि शब्दों का समावेश हो जाने से शब्द भंडार में आमूलचूल वृद्धि देखने को मिलती है।  हिंदी का शब्द भंडार कितना है? हिंदी के शब्द भंडार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की यह विश...

शब्दों का भंडार क्या है?

 शब्दों का भंडार  हिंदी साहित्य की हम बात करे तो हिंदी साहित्य में शब्दों का अथाह भंडार है। भंडार का मतलब है खजाना जो कभी खत्म नहीं होने वाला है। भंडार उसे ही कहा जाता है जहां शब्दों की कोई कमी नहीं होती है और शब्दों का भंडार का मतलब यही है की शब्द पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।  यदि हम बात करें संस्कृत में शब्द भंडार की तो इसमें हमें सबसे ज्यादा शब्द देखने को मिलते हैं हिंदी से भी ज्यादा संस्कृत सभी भाषाओँ की जननी है जिससे अन्य भाषाओँ का विकास हुआ है।  भाषाओं का विकास शब्दों से होता है जिस भाषा में जितने ज्यादा शब्द होंगे वह भाषा उतना ही समृद्ध होगा विद्वानों का भी यही मानना है।  शब्दों का भंडार क्या है? वर्णों के मिलने से शब्द बनते हैं और शब्द के मिलने से भाषा का निर्माण होता है। इस प्रकार जो भाषा जितना ज्यादा प्रचलित होगा उस भाषा का शब्द भंडार भी उतना ही ज्यादा होगा। इसका मतलब है की वहां शब्द की अधिकता होगी शब्द की कमी नहीं होगी।  भंडार का मतलब होता है कोष या खजाना इस प्रकार शब्द का कोष ही शब्द भंडार है।  शब्दों का भंडार शब्दों का समूह है जो अप...

बेकरी का बिजनेस कैसे करे? How do I start a bakery business?

Hello and welcome आज हम बात करने वाले हैं की हम बेकरी का बिजनेस कैसे चालु कर सकते हैं? यह प्रश्न बहुत सारे लोगों का होता है कि  How do I start a bakery business? तो आज मैं इसी प्रश्न का जवाब आपके लिए लेकर आया हूँ। साथ ही मैं आपको बताना चाहूँगा की ये हमारे 17 Small Business Idea Series का दसवा नंबर का पोस्ट हैं इससे पहले हमने जाना था ड्राई फ्रूट बिजनेस ( Dry fruits store) के बारे में।  बेकरी में बने खाने के समान सजावट के साथ : 3rd party img  चलिए आज जानते हैं बेकरी बिजनेस के बारे में बेकरी का बिजनेस अभी के समय में एक बहुत अच्छा व्यपार और पैसे कमाने का माध्यम हो सकता है यदि आप कमाना चाहते हैं तब। आप इसके जरिये अपनी अलग तरिके की बिजनेस आइडिया, नया तरीका ला सकते हैं।  लेकिन हर कोई रसोइये खानदान से नहीं होता है जिसे बेकरी बनाना आता हो इस पोस्ट में हम आपको बेकरी बनाना तो नही सीखा सकते इसको आपको खुद से कहीं जाकर सीखना होगा और मुझे लगता है की आपको इसके बारे में थोड़ा बहुत पता होगा तभी आपने यह जानने की कोशिश की है की बेकरी का बिजनेस कैसे करें? अभी के समय में एक हट के बेकरी का...