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Showing posts from December, 2021

सूफी काव्यधारा पर एक परिचयात्मक लेख लिखिए।

1. भारत में भक्तिकाल के अन्तर्गत सूफी मत का प्रभाव किस रूप में पड़ा? स्पष्ट कीजिए।  अथवा सूफी काव्यधारा पर एक परिचयात्मक लेख लिखिए। उत्तर - सूफी काव्यधारा परिचयात्मक लेख सूफी सम्प्रदाय      ‘सूफी' शब्द सूफ से बना है, जिसका अर्थ है 'सफेद ऊन का"। सूफी लोग वैभव शून्य, सरल जीवन व्यतीत करने के कारण मोटे ऊन के कपड़े पहनते थे, इसलिए उन्हें सूफी कहा जाता था। एक मत यह है कि सूफी शब्द का सम्बन्ध यूनानी शब्द सोफोस (Sophos) से है जिसका अर्थ है बुद्धिमान या ज्ञानी'। अंग्रेजी के फिलॉसोफी शब्द में भी यही शब्द है।       इस प्रकार सूफी का अर्थ होता है 'ज्ञानी'। सूफी मत का चलन मुहम्मद साहब के प्रायः दो सौ वर्ष बाद हुआ सूफी लोग पीरंगुरू को अधिक महत्ता देते थे। वे ईश्वर और जीव का सम्बन्ध भय का नहीं वरन् प्रेम का मानते थे। उनका झुकाव सर्वेश्वरवाद की ओर था। वे संगीत के प्रेमी थे। इन सब बातों के कारण वे कट्टर मुसलमानों की अपेक्षा हिन्दू धर्म के अधिक निकट थे। कट्टर पन्थियों ने मन्सूर को 'अनहलक' (मैं सच्चाई या ईश्वर हूँ।) कहने के कारण सूली का दण्ड दिलाय था। भारत में सूफी ...

भक्तिकाल की सांस्कृतिक चेतना पर लेख लिखिए।

1. भक्तिकाल की सांस्कृतिक चेतना पर लेख लिखिए। अथवा भक्तिकाल की चारों धाराओं के समान तत्त्वों पर प्रकाश डालिए।  भक्तिकाल की सांस्कृतिक चेतना उत्तर - हिन्दी साहित्य का भक्तिकाल स्वर्ण-युग के नाम से अभिहित किया जाता है। इस काल में ईश्वर के रूप और गुण की विशिष्टता के सहारे भक्ति का स्वरूप स्थिर किया गया है। भक्त कवियों ने राजाश्रय का मोह छोड़ दिया था। फलतः जायसी के अतिरिक्त कोई भी कवि राजाश्रय में नहीं पला है।  समस्त हिन्दू जाति अपने धर्म और शील की रक्षा के लिए प्रयत्नरत थी। इस प्रयत्न के परिणामस्वरूप सगुण और निर्गुण भक्त्ति की उपासना को बल मिला। इसके साथ ही इस काल में एक दूसरे मत का प्रभाव भी पड़ा, वह था-सूफी मत का धार्मिक भाव। सगुण भक्त कवियों के दो विभाग हो गये-राम भक्ति और कृष्ण भक्ति।  उधर निर्गुण भक्त कवियों ने भी दो रूपों में अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया-सूफी काव्य और संत काव्य धारा। इस प्रकार भक्ति-काल में चार धाराएँ प्रवाहित हुई- 1. ज्ञानाश्रयी धारा या सन्त काव्य धारा, 2. प्रेमाश्रयी धारा या सूफी काव्य धारा 3. रामभक्ति धारा और 4. कृष्णभक्ति धारा।  ये चारो...

राम काव्य की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

1. राम काव्य की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। उत्तर -   रामभक्ति काव्यधारा की प्रमुख प्रवृत्तियाँ      भक्तिकाल की सगुण काव्यधारा में राम काव्य धारा का अपूर्व महत्व है। रामभक्ति धारा में अनेक कवि हुए, किन्तु राम भक्ति धारा का साहित्यिक महत्व अकेले तुलसीदास के कारण है। इस धारा के अन्य कवियों और तुलसीदास की में अन्तर तारागण और चन्द्रमा का नहीं, बल्कि तारागण और सूर्य का है। तुलसीदास की आभा के सामने ये साहित्याकाश में रहते हुए भी चमक न सके। इसलिए इस धारा का अध्ययन मुख्यतः तुलसीदास में ही केन्द्रित करना होगा। इस काव्य धारा की प्रमुख प्रवृत्तियाँ इस प्रकार हैं -       रामचरित प्रमुख विषय  -राम काव्यधारा की प्रमुख विशेषता यह है कि इसके कवियों ने विष्णु के अवतार भगवान राम को ही अपनी कविता का विषय बनाया है। इसके राम शील, शक्ति और सौन्दर्य की साकार प्रतिभा है।      सेवक-सेव्य भाव की भक्ति -  इस धारा के कवियों ने ज्ञान की अपेक्षा भक्ति को अधिक महत्व दिया है। इसलिए कहा गया है "ज्ञान कठिन है, भक्ति सरल।" इस काव्यधारा में कवियों ...

कृष्ण काव्यधारा की प्रमुख विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।

1. कृष्ण काव्यधारा की प्रमुख विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।  उत्तर -  कृष्ण भक्तिधारा की प्रमुख प्रवृत्तियाँ ● हिन्दी साहित्य में कृष्ण काव्यधारा का अपना विशिष्ट स्थान है। इस काव्य धारा के साहित्य में आनन्द और उल्लास का अनोखा रूप देखने को मिलता है। इस काव्यधारा की भावात्मक और कलात्मक विशेषताएँ संक्षेप में निम्न प्रकार विवेचित की जा सकती है।  ● कृष्ण की लीलाओं का निरूपण - कृष्ण काव्य धाय की यह प्रधान विशेषता है कि इसमें श्री कृष्ण की विविध लीलाओं का गान किया गया है। कृष्ण भक्त कवियों ने विशेष रूप से अपने उपास्य देव की बाल क्रीडा और किशोर जीवन की लीलाओं का निरूपण किया है। इन लीलाओं में रासलीला, दान लीला, मान लीला, भावन लीला, वंशीवादन, गौएँ चराना, चीरहरण प्रमुख है। कृष्ण की विविध लीलाओं के निरूपण का उद्देश्य अखण्ड आनन्द और जीवन की आध्यात्मिक परिपूर्णता की अभिव्यक्ति करना है। ● साख्य भाव की भक्ति  - इस धारा की भी एक विशेष प्रवृत्ति है कि इसकी भक्ति में साख्य एवं कान्ताभाव की प्रधानता है। साख्य भाव की प्रधानता के कारण ही इस धारा के भक्त कवियों ने श्रीकृष्ण को अपना ...

सूफी काव्य की प्रमुख प्रवृतियों को लिखे।

1. सूफी काव्य की प्रमुख प्रवृतियों को लिखे। उत्तर -  सूफी काव्य की प्रमुख प्रवृतियाँ- अधिकांश कवि मुसलमान हैं जिन्होंने मसनवी शैली का प्रयोग किया है। ये काव्य ग्रन्थ स्वच्छन्द प्रेम का चित्रण करने वाली साहसिक प्रेम कथाओं के अन्तर्गत आते हैं।  प्रेमाख्यानकों का नामकरण प्रायः नायिका के नाम पर किया गया है। इनमें सभी कथानक रूढ़ियों का पालन किया गया है। ये रूढ़ियाँ है-स्वप्नदर्शन या चित्रदर्शन से प्रेम उत्पन्न होना, मन्दिर या उपवन में नायक-नायिका का मिलन, अलौकिक शक्तियों द्वारा सहायता, उड़ने वाली राजकुमारियाँ आदि।  लोक पक्ष एवं हिन्दू संस्कृति का चित्रण प्रायः सभी प्रेमाख्यानकों में है। श्रृंगार रस की प्रधानता है तथा वस्तु वर्णन प्रमुख हो गया है। खण्डन-मण्डन की प्रवृति का अभाव है।  अवधी भाषा का प्रयोग किया गया है तथा दोहा-चौपाई शैली है। Sufi kavya ki pramukh pravittiyon ko likhen?

सूफी मत की मान्यताएं स्पष्ट करें।

1. सूफी मत की मान्यताएं स्पष्ट करें।  उत्तर - सूफी मत की मान्यताएँ- सूफी मत में ईश्वर को निराकार एवं सर्वव्यापी मानते हैं। वे ईश्वर को जगत में व्याप्त मानकर इसके सौन्दर्य पर मुग्ध होते हैं। सूफियों के अनुसार मानव सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी है और उसमें ईश्वर की छाया है। उसमें जड़ अंश (नफस) भी है और आध्यात्मिक अंश (रूह) भी। नफस को मारना मानव का कर्त्तव्य है, तभी 'रूह' को ईश्वर के दर्शन होते हैं।  मानव में परिपूर्णता का बीज सुप्तावस्था में होता है उसे प्रस्फुटित करना मानव का कर्त्तव्य है। मुहम्मद सर्वश्रेष्ठ पूर्ण मानव है, ईश्वरीय साक्षात्कार पीर और गुरु की सहायता से ही होता है। 'फना' मानवीय गुणों का नाश है और 'बका' ईश्वरीय गुणों की प्राप्ति है। सद्गुरु या सूफीसन्त (पीर या वली) ही व्यक्ति को बका की ओर ले जाते हैं। पीर या गुरु ही साधक को शैतान के शिकंजे से मुक्त करते हैं। शैतान साधक के मार्ग में बाधक है, किन्तु यह साधक की साधना को परिपक्व बनाता है। यह शैतान वेदान्त की माया के समान है। सूफी साधना के सात सोपान है- 1. अनुताप, 2. आत्मसंयम, 3. वैराग्य, 4. दारिद्रय, 5. ...

सूफी मत के भारत में प्रचार-प्रसार पर टिप्पणी लिखें।

1. सूफी मत के भारत में प्रचार-प्रसार पर टिप्पणी लिखें। उत्तर - सूफी धर्म का भारत में प्रचार-प्रसार-भारत में सूफी मत का आगमन 9वीं 10वीं शताब्दी में ही हो गया था, किन्तु इसके प्रचार-प्रसार का श्रेय ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती को है, जिन्होंने इसे लोकप्रिय बनाया। आइने अकबरी में सूफियों के 14 सम्प्रदायों का उल्लेख है, जिनमें से पांच सम्प्रदाय प्रसिद्ध हैं - कादरी सम्प्रदाय चिश्ती सम्प्रदाय सुहरावर्दी सम्प्रदाय नक्शबन्दी सम्प्रदाय शत्तारी सम्प्रदाय इनमें से चिश्तिया (चिश्ती) सम्प्रदाय सर्वाधिक प्रसिद्ध हुआ। इसकी सातवी पीढ़ी में ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती हुए, जिन्होंने भारत में सूफी मत का प्रचार-प्रसार किया सुहरावर्दी सम्प्रदाय का भारत में प्रचार बहाउद्दीन जकारिया ने किया।  कादरी सम्प्रदाय का प्रवर्तन भारत में अब्दुल कादिर ने किया। इस सम्प्रदाय के सैयद मोहम्मद गौस इतने ख्याति प्राप्त हुए कि सिकन्दर लोदी ने अपनी पुत्री का विवाह उनके साथ करा दिया। नक्शबन्दी सम्प्रदाय का प्रचार भारत में 17वीं शती में अहमद फारुखी ने किया। Sufi mat ke bharat me prchar prasar par tippani likhiye.

'सूफी' शब्द की व्युत्पत्ति तथा स्रोत स्पष्ट करें।

1. 'सूफी' शब्द की व्युत्पत्ति तथा स्रोत स्पष्ट करें। उत्तर - सूफी शब्द की व्युत्पत्ति  मुसलमानों के पवित्र तीर्थ मदीना की मस्जिद के सामने वाले चबूतरे का नाम सुफ्फा चबूतरा है। इस पर बैठने वाले फकीरों को सूफी कहा जाता है।   कुछ विद्वान इसका सम्बन्ध सोफिया शब्द से जोड़ते हैं जिसका अर्थ है - ज्ञान। एक अन्य मत से यह शब्द सफ़ा से विकसित है जिसका अर्थ है-शुद्ध एवं पवित्र  सर्वाधिक मान्य मत यह है कि सूफी शब्द का सम्बन्ध 'सूफ' से है जिनका अर्थ है-ऊन सूफी लोग साहेद ऊन से बने हुए चोगे पहनते थे और उनका आचरण पवित्र एवं शुद्ध होता था।  सूफी मत का स्रोत- सूफी मत इस्लाम धर्म का एक अंग है। इस्लाम धर्म में शरीयत (कर्मकाण्ड) वैसा ही परिणाम सूफी मत है जैसे हिन्दू धर्म में वैदिक कर्मकाण्ड की प्रतिक्रिया का परिणाम वैष्णव मत की प्रतिक्रिया का है। सूफी धर्म में इस्लाम की कट्टरता का अभाव है। इनमें उदारता एवं कोमलता विद्यमान है।  सूफीमत के मूल में प्रेम तत्व है। उसमें इश्क हकीकी एवं इश्क मजाजी की भावना निहित है। सूफियों ने लौकिक प्रेम के माध्यम से अलौकिक प्रेम को प्राप्त करने पर बल ...

जायसी के 'पद्मावत' का परिचय प्रस्तुत कीजिए।

1. जायसी के 'पद्मावत' का परिचय प्रस्तुत कीजिए। उत्तर - जायसी को भक्ति-काल की निर्गुण धारा की प्रेममार्गीय शाखा का प्रतिनिधि कवि माना जाता है। इनके तीन ग्रन्थ माने जाते हैं- पद्मावत, अखरावट और आखिरी कलाम। 'पद्मावत' महाकाव्य है। इसमें चित्तौड़ के राजा रतनसेन और सिंहलद्वीप की राजकुमारी पद्मावती की प्रेम कहानी का वर्णन है।  'पद्मावत' में रतनसेन आत्मा का और पद्मावती परमात्मा की प्रतीक है। हीरामन तोता गुरु के स्थान पर है। पद्मावत का पर्याप्त अंश इतिहास पर आधारित है।  चित्तौड़ पर अलाउद्दीन का आक्रमण ऐतिहासिक घटना है। हीरामन तोता से पद्मावती के सौन्दर्य का वर्णन सुनकर चित्तौड़ का राजा रतनसेन जोगी बनकर घर से निकला और बड़ी तपस्या के बाद उसने पद्मावती को पाया पद्मावती से विवाह होने के बाद रतनसेन अपनी ससुराल में बहुत समय तक रहा।  उसकी पहली पत्नी नागमती की विरह-व्यथा एक पक्षी से सुनकर रतनसेन पद्मावती सहित आ गया एक युद्ध में रतनसेन मारा गया तो दोनों रानियाँ पद्मावती और नागमती उसके साथ सती हो गयी। 'पद्मावत' की रचना जन-साधारण के प्रयोग की भाषा अवधी में हुई है। दोहा-चौपा...

सूफी कवि मंझन कृत 'मधुमालती' का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत कीजिए।

1. सूफी कवि मंझन कृत 'मधुमालती' का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत कीजिए।  उत्तर - कवि मंझन के जीवन वृत्त के सम्बन्ध में विशेष जानकारी प्राप्त नहीं हो पायी है। रामपुर स्टेट लाइब्रेरी से 'मधुमालती' की अधूरी पाण्डुलिपि प्राप्त हुई है। इस कृति का रचना-काल सन् 1545 ई. माना जाता है। इस कृति में कनेसर नगर के राजकुमार मनोहर और महारस नगर की राजकुमारी मधुमालती की प्रेमकथा द्वारा निस्वार्थ प्रेम की सुन्दर अभिव्यंजना हुई है।  अप्सराओं द्वारा मधुमालती से साक्षात्कार के बाद राजकुमार मनोहर उसकी प्राप्ति के लिए समुद्रमार्ग से यात्रा करके उसके नगर तक पहुँचना चाहता है। बीच सागर में ही दुर्घटना हो जाती है, किसी तरह बचकर मनोहर जंगल में पहुँचता है, वहाँ राक्षस को मारकर मधुमालती की सखी प्रेमा का उद्धार करता है।  प्रेमा के सहारे वह मधुमालती तक पहुँचता है। लेकिन मधुमालती की माता प्रेममंजरी को मनोहर एवं मधुमालती का प्रेम भाता नहीं है, इसलिए वह मधुमालती को मनोहर के प्रेम से विमुख करना चाहती है। जब वह नहीं मानती, तब वह उसे चिड़िया बनने का शाप दे देती है। चिड़िया बनी मधुमालती को ताराचंद पकड़कर सोने के पि...

सूफी कवि कुतुबन द्वारा रचित 'मृगावती' का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

1. सूफी कवि कुतुबन द्वारा रचित 'मृगावती' का संक्षिप्त परिचय दीजिए।  उत्तर - कुतुबन शेष बुरहान के शिष्य थे। ये शेरशाह के पिता हुसैनशाह के मकालीन जाते हैं, इसीलिए इनका आविर्भाव-काल 1493 ई. माना जाता है।  सन् 1501 ई. (सं. 1558) में दौहे-चौपाइयों में कुतुबन ने 'मृगावती' प्रेमाख्यान की रचना की थी। इसमें चन्द्रनगर के राजा गणपति देव के राजकुमार और कंचनपुर के राजा रूपमुरारी की कन्या मृगावती की सरस प्रेमकथा वर्णित है। कंचनपुर की राजकुमारी मृगावती पर मोहित राजकुमार प्रेम-योगी बनकर कई कष्ट झेलने के उपरान्त उसे प्राप्त करता है। इस कार्य में रुक्मिनी नामक सुन्दरी उसकी विपदा के दिनों में सहायता करती है।  कहानी के अन्त में राजकुमार की आखेट में मृत्यु और दोनों पत्नियों का सती हो जाना वर्णित है। डॉ. रामकुमार वर्मा के अनुसार, "मृगावती की कया लौकिक प्रेम की कथान है, जिसमें अलौकिक प्रेम का सम्पूर्ण संकेत है।"  इस काव्य (मृगावती) में कवि ने प्रेम के लिए किये गये त्याग और प्रेमिका की प्राप्ति में उठाये गये कष्टों द्वारा प्रतीकात्मक धरातल पर साधन और ईश्वर के सम्बन्ध को स्पष्ट किया ह...

'सूफी' शब्द की व्युत्पत्ति पर प्रकाश डालिए।

प्रश्न 1. 'सूफी' शब्द की व्युत्पत्ति पर प्रकाश डालिए। उत्तर- विद्वानों में 'सूफी' शब्द की व्युत्पत्ति के सम्बन्ध में बहुत अधिक मतभेद हैं। कुछ विद्वानों का मत है कि मदीना में मस्जिद के सामने एक सुफ्फा (चबूतरा) पर बैठने वाले 'फकीर' सूफी कहलाये।  कुछ अन्य विद्वानों के अनुसार अपने सदाचार और पवित्रता के कारण कयामत के दिन 'सफ' (अग्रित पंक्ति) में खड़े होने के सम्मान को पाने के योग्य साधक सूफी नाम से अभिहित किये गये तीसरे प्रकार के विद्वानों के अनुसार सफा अर्थात् पवित्र जीवन व्यतीत करने वाले साधु 'सूफी' नाम से प्रसिद्ध हुए।  विद्वानों का एक वर्ग सूफी शब्द को सोफिस्त (ज्ञानी) का विकृत रूप मानता है। कुछ विद्वान् इसे सूफा (अरब की एक जाति विशेष) अथवा सुफ्फाह (भक्ति विशेष) का रूपान्तर मानते हैं।  किन्तु आज के अधिकांश विद्वानों के मतानुसार 'सूफी' साधनपूर्ण जीवन व्यतीत करने वाले अरब तथा ईराक में निवास करने वाले सूफ (सादा ऊन) के कपड़े धारण करने वाले फकीरों का सूचक है।  पं. परशुराम चतुर्वेदी के शब्दों में-"सूफी शब्द मूलतः उन अरब एवं ईराक देश के कतिप...

आधुनिक गद्य साहित्य Paper Fourth M. A. (First Semester) Dec.-Jan., 2019-20

M. A. (First Semester) EXAMINATION, Dec.-Jan., 2019-20 HINDI Paper Fourth (आधुनिक गद्य साहित्य) [नाटक, एकांकी एवं रेखाचित्र (साहित्य)] [Maximum Marks: 80 Time: Three Hours ] नोट: निर्देशानुसार सभी खण्डों के उत्तर यथास्थान दीजिए। प्रत्येक 1 खण्ड अ (वस्तुनिष्ठ / बहुविकल्पीय प्रश्न) नोट: सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए। सही उत्तर का चयन कीजिए: 1. निम्नलिखित में से कौन सा नाटक 'कल्याणी परिणय' का परिवर्द्धित रूप है ? (अ) ध्रुवस्वामिनी (ब) अजातशत्रु (स) स्कन्धगुप्त (द) चन्द्रगुप्त 2. निम्नलिखित में से कौन सा पात्र ‘हानूश' में नहीं है ? (अ) कात्या (ब) एमिल (स) गालव (द) यान्का 3. जयशंकर प्रसाद की अन्तिम नाट्य रचना है: (अ) कामना (ब) प्रायश्चित (स) ध्रुवस्वामिनी (द) राज्यश्री 4. भीष्म साहनी रचित नाटक निम्नलिखित में से कौन-सा है ? (अ) आठवाँ सर्ग (ब) रंग दे बसंती चोला (स) अंधेरे के राही (द) त्रिशंकु 5. 'स्नेह से हृदय चिकना हो जाता है, परन्तु निछलने का भी भय रहता है।' यह कथन किसका है ? (अ) एलिस (ब) सुवासिनी (स) मालविका (द) अलका 6. भीष्म साहनी द्वारा रचित 'हानूश' का सन् बताइए...

छायावाद एवं पूर्ववर्ती काव्य Paper Third M. A. (First Semester) Dec.-Jan., 2019-20

M. A. (First Semester) EXAMINATION, Dec.-Jan., 2019-20 HINDI Paper Third  (छायावाद एवं पूर्ववर्ती काव्य) Time: Three Hours ] [ Maximum Marks: 80 नोट: निर्देशानुसार सभी खण्डों के उत्तर दीजिए। खण्ड-अ प्रत्येक 1 (वस्तुनिष्ठ / बहुविकल्पीय प्रश्न ) नोट: सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए। 1. 'साकेत' का अंगीरस कौन-सा है ?  (अ) वीर (ब) श्रृंगार (स) करुण (द) वीभत्स 2. निम्नलिखित में से असत्य कथन चुनिये: (अ) मैथिलीशरण गुप्त रामभक्त कवि थे (ब) साकेत रामकथा पर आधारित महाकाव्य है  (स) साकेत के नवें सर्ग में उर्मिला विरह वर्णन है (द) यशोधरा कृष्ण पर आधारित काव्य है 3. निम्नलिखित में से कौन-सी रचना मैथिलीशरण गुप्त रचित नहीं है ? (अ) गुरुकुल (ब) पथिक (स) द्वापर (द) यशोधरा 4. 'कामायनी' में मनु-पुत्र कुमार किसका रूपक है ? (अ) मानव (ब) तर्क (स) सम्मान (द) मन 5. जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्धि का मूलाधार है : (अ) झरना (ब) प्रेमदासिक (स) कामायनी (द) चन्द्रगुप्त 6. 'नील परिधान' के मध्य श्रद्धा का शरीर कैसा लग रहा था ? (अ) कमल-पुष्प सा (ब) चन्द्रमा सा (स) बिजली के फूल-सा (द) सूर्य-सा 7. 'काम...

द्रुत पाठ के कवि महादेवी वर्मा : छायावाद एवं पूर्ववर्ती काव्य प्रश्न उत्तर

6. महादेवी वर्मा : छायावाद एवं पूर्ववर्ती काव्य प्रश्न उत्तर प्रश्न 1. महादेवी वर्मा का संक्षिप्त जीवन परिचय दीजिये। उत्तर- 'आधुनिक युग की मीरा' महादेवी वर्मा का जन्म सन 1907 में होली के दिन उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के एक शिक्षित कायस्थ परिवार में हुआ था। इनके पिता गोविन्द प्रसाद, भागलपुर विद्यालय में प्रधानाध्यापक थे तथा माता सरल हृदया धर्मपरायण महिला थी। महादेवी जी बड़ी कुशाग्र बुद्धि बालिका थी और बचपन से ही माँ से 'रामायण'-महाभारत की कथाएँ सुनते रहने के कारण इनके मन में साहित्य के प्रति आकर्षण उत्पन्न हो गया था। महादेवी जी की प्रारम्भिक शिक्षा इन्दौर में सम्पन्न हुई। इसके साथ ही आपने घर पर संगीत तथा चित्रकला की शिक्षा प्राप्त की। नौ वर्ष की अल्पायु में आपका विवाह डॉ. स्वरूप नारायण वर्मा से हो गया। ससुर के विरोध से आपकी शिक्षा में विघ्न पड़ गया। उनके शरीरांत के बाद पुनः शिक्षा प्रारम्भ कर दी और संस्कृत में एम. ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की शिक्षा समाप्ति के बाद आप प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्या तथा बाद में कुलपति नियुक्त हुई सन् 1965 में आपने वहाँ से अवकाश...

वह कौन सी रचना है जिस पर महादेवी वर्मा को मंगलाप्रसाद पारितोषिक पुरस्कार दिया गया था?

1. वह कौन सी रचना है जिस पर महादेवी वर्मा को मंगलाप्रसाद पारितोषिक पुरस्कार दिया गया था? उत्तर - महादेवी वर्मा को मंगलाप्रसाद पारितोषिक पुरस्कार जिस रचना पर दिया गया था उसका नाम यामा जो की उनके काव्य संकलन का नाम है।  Wah kaun si rachna hai jis par mahadevi varma ko mangalaprasad paritoshik puraskar diya gaya tha?

द्रुत पाठ के कवि सुमित्रानन्दन पन्त : छायावाद एवं पूर्ववर्ती काव्य प्रश्न उत्तर

 5. सुमित्रानन्दन पन्त  : छायावाद एवं पूर्ववर्ती काव्य प्रश्न उत्तर प्रश्न 1. प्रसिद्ध छायावादी कवि सुमित्रानन्दन पन्त का जीवन परिचय प्रस्तुत कीजिए। उत्तर - छायावादी कवि (प्रसाद पन्त, निराला) में स्थान पाने वाले और कोमल प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानन्दन पन्त का जन्म संवत 1957 (सन 1900) में उत्तर प्रदेश के अल्मोड़ा जिले के कौसानी नामक ग्राम में हुआ। आपके जन्म से कुछ घण्टे पहले ही आपकी माता का देहान्त हो गया। इस प्रकार आप जन्म लेते ही माता के स्नेह से वंचित हो गये। आपका जन्म-लग्न के अनुसार रखा हुआ नाम गुसाई दत्त पन्त था। इस नाम की काव्यहीनता पर विचार करके आपने अपना कोमलकान्त पदावली वाला और मधुर ध्वनियुक्त नाम सुमित्रानन्दन रखा। पन्त आपकी पैतृक उपाधि अथवा आस्था थी। अल्मोड़ा जिला प्रकृति की सुन्दरता की रमणीक स्थली है। अल्मोड़ा जिले में कौसानी का सौन्दर्य सर्वाधिक दर्शनीय है। माता के स्नेह से वंचित सुमित्रानन्दन घण्टों एकान्त में बैठकर प्रकृति की शोभा का निरीक्षण करते रहते थे। सुमित्रानन्दन जी की प्रारम्भिक शिक्षा कौसानी में ही पूरी हुई है। एण्ट्रेन्स परीक्षा आपने अल्मोड़ा से उत...

द्रुत पाठ के कवि जगन्नाथ दास रत्नाकर : छायावाद एवं पूर्ववर्ती काव्य प्रश्न उत्तर

 4. जगन्नाथ दास रत्नाकर : छायावाद एवं पूर्ववर्ती काव्य प्रश्न उत्तर प्रश्न 1. जगन्नाथ दास रत्नाकार का जीवन परिचय लिखें। उत्तर- जगन्नाथ दास रत्नाकार का जन्म सं. 1923 (सन् 1866 ई.) के भाद्रपद शुक्ल पंचमी के दिन हुआ था। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की भी यही जन्मतिथि थी और वे रत्नाकार जी से 16 वर्ष बड़े थे। उनके पिता का नाम पुरुषोत्तमदास और पितामह का नाम संगमलाल अग्रवाल था जो काशी के धनीमानी व्यक्ति थे। रत्नाकार जी की प्रारंभिक शिक्षा फारसी में हुई। उसके पश्चात इन्होंने 12 वर्ष की अवस्था में अंग्रेजी पढ़ना प्रारंभ किया और यह प्रतिभाशाली विद्यार्थी सिद्ध हुए। सन 1888 ई. में इन्होंने करना चाहा था, पर पारिवारिक परिस्थितिवश न कर पाए। ये पहले 'जकी' उपमान से फारसी में रचना करते थे। इनके हिन्दी काव्यगुरू सरदार कवि थे। ये मथुरा के प्रसिद्ध कवि नवनीत चतुर्वेदी से भी बड़े प्रभावित हुए थे।      रत्नाकार जी ने अपनी आजीविका के हेतु 30-32 वर्ष की अवस्था में जरदोजी का काम आरंभ किया था। उसके उपरांत ये अवागढ़ रियासत में कोषाध्यक्ष के पद पर नियुक्त हुए। भारतेन्दु जी के सम्पर्क और काशी की कव...

द्रुत पाठ के कवि मुकुटधर पांडेय : छायावाद एवं पूर्ववर्ती काव्य प्रश्न उत्तर

मुकुटधर पांडेय : छायावाद एवं पूर्ववर्ती काव्य प्रश्न उत्तर प्रश्न 1. मुकुटधर पांडेय ने किस साहित्यिक स्थिति में काव्य रचना आरम्भ की? उत्तर - आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने मुकुटधर पांडेय को अपने 'हिंदी साहित्य' के इतिहास में आधुनिक काल के द्वितीय उत्थान में स्थान दिया है। इस द्वितीय उत्थान की खड़ीबोली की कविताओं में दो बातों की कमी देखी जाती है - पहली कमी कल्पना के रंग का फीकापन और दूसरी कमी ह्रदय के वेग की स्पष्ट व्यंजना का अभाव। यह कमी ब्रजभाषा की कविता में मनोरंजन करने वालों को भी बहुत खटक रही थी और बंगला तथा अंग्रेजी पढ़ने वाले भी यह कमी अनुभव कर रहे थे। इस कमी को दूर करने के लिए कुछ कवि ब्रजभाषा की ललित पदावली खड़ी बोली में लाना चाहते थे। अंग्रेजी और बंगला की कविता से प्रभावित सुधीजन लाक्षणिक, वैचित्र्य-व्यंजक चित्र-विन्यास तथा रुचिकर अन्योक्तियाँ देखना चाहते थे। सरस्वती आदि पत्रिकाओं में बंगला भाषा के खड़ी बोली में किये पारसनाथ सिंह के अनुवाद सन 1910 में प्रकाशित होने लगे थे। इन कारणों से खड़ी बोली की कविता से असंतुष्ट कुछ कवियों ने कविता को नया रूप  देना आरम्भ कर दिया था। इसमें कल...

द्रुतपाठ के कवि अयोध्या सिंह उपाध्याय : छायावाद एवं पूर्ववर्ती काव्य प्रश्न उत्तर

 द्रुतपाठ के कवि अयोध्या सिंह उपाध्याय 1. अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की कृतियों का वर्णन करें।  उत्तर - हरिऔध की कृतियाँ      खड़ी बोली हिंदी काव्य में अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। पंडित श्रीधर पाठक के उपरान्त 'हरिऔध' जी को ही खड़ी बोली में सरस् एवं मधुर रचनाएँ प्रस्तुत करने का श्रेय दिया जाता है। उनकी खड़ी बोली कविता को पढ़कर ही लोगों को लगा कि खड़ी बोली काव्यभाषा के लिए पूर्णतः उपयुक्त भाषा है।  'हरिऔध' जी ने गद्दय रचना के क्षेत्र में भी पर्याप्त कार्य किया है। 'प्रधुम्न विजय' (1893 ई.) का ठाठ' (1899 ई.) तथा 'रूक्मिणी परिणय' (1894 ई.) आपके लिखे हुए नाटक हैं, जबकि 'ठेठ हिंदी' तथा 'अधखिला फूल' (1907 ई.) लिखे हुए उपन्यास हैं।      प्रारम्भ में 'हरिऔध' जी ब्रजभाषा में काव्य रचना करते थे। 'रसकलश' में उन्होंने ब्रजभाषा का प्रयोग किया है। इनकी लिखी अन्य काव्य कृतियाँ हैं - कबीर कुण्डल, श्रीकृष्ण शतक, प्रेमाम्बु प्रवाह, उपदेश कुसुम, प्रेम प्रपंच, प्रेमाम्बुवारिधि, प्रेमाम्बु प्रस...