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Showing posts from May, 2023

हिन्दी साहित्य के इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास पर प्रकाश डालिए।

एम. ए. हिंदी  (प्रथम सेमेस्टर) आदिकाल एवं पूर्व मध्यकाल  (प्रथम प्रश्न-पत्र)   इकाई-1. आदिकाल-इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास दीर्घ उत्तरीय प्रश्न  प्रश्न 5. हिन्दी साहित्य के इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास पर प्रकाश डालिए। उत्तर-  Table of Content इतिहास का अर्थ एवं स्वरूप 'इतिहास दर्शन' की रूपरेखा हिन्दी साहित्य का इतिहास दर्शन      (1) इतिहास का अर्थ एवं स्वरूप  - भारत में इतिहास लेखन का प्रायः अभाव रहा है। पार्टिजर, अलबरूनी आदि। ने भारत में इतिहास के कालक्रम की उपेक्षा का संकेत दिया है। यही बात साहित्य के इतिहास के सम्बन्ध में लागू होती है। कई विद्वानों ने साहित्येतिहास के अभाव की शिकायत की है। मैकडानल ने लिखा है - "इतिहास भारत का कमजोर पक्ष है, इतना कि वह यहाँ लगभग अनुपस्थित है। इतिहास चेतना के सर्वथा अभाव के कारण ही संस्कृत साहित्य की पूरी सरणि ही अंधेरे में घिरी हुई है।" यह सच है कि भारत की अध्यात्मवादी और शाश्वतावादी अवधारणा के कारण व्यक्ति, घटना या कालक्रम को प्रायः महत्व नहीं दिया गया। अति प्राचीन ग्रंथों में तो रचयिताओं ...

हिन्दी साहित्य के इतिहास की पुनर्लेखन की समस्या पर विचार कीजिए।

एम. ए. हिंदी  (प्रथम सेमेस्टर) आदिकाल एवं पूर्व मध्यकाल  (प्रथम प्रश्न-पत्र)   इकाई-1. आदिकाल-इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास दीर्घ उत्तरीय प्रश्न प्रश्न 4. हिन्दी साहित्य के इतिहास की पुनर्लेखन की समस्या पर विचार कीजिए। अथवा      हिन्दी साहित्य के इतिहास-लेखन की आधारभूत सामग्री एवं क्रमिक विकास का वर्णन कीजिए।  Table of Content आधारभूत सामग्री निष्कर्ष उत्तर - आधारभूत सामग्री  - हिन्दी साहित्य का इतिहास लिखने वाले विद्वानों ने जिस आधारभूत सामग्री का प्रायः उपयोग किया है, उसे दो वर्गों के अन्तर्गत परिगणित किया जा सकता है - 1. अन्तःसाक्ष्य अथवा साहित्य के परिचय ग्रन्थों से प्राप्त सामग्री, 2. बहिर्साक्ष्य अर्थात् साहित्येत्तर क्षेत्रों से उपलब्ध सामग्री डॉ. रामकुमार वर्मा ने अपने हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास शीर्षक ग्रन्थ में अन्तः साक्ष्य के अन्तर्गत निम्नलिखित ग्रन्थों का उल्लेख किया है-      1. गोकुल नाथ कृत 'चौरासी वैणव की वार्ता' तथा 'दो सौ बावन वैष्णव की वार्ता', 2. नाभादास कृत 'भक्तमाल', 3. गुरु अर्जुन देव कृत, 'श...

Ramayan ko kisne likha hai - रामायण को किसने लिखा है?

आपका प्रश्न है की  रामायण को किसने लिखा है?  इसका जवाब है रामायण को महर्षि वाल्मीकि ने लिखा है इसके रचनाकाल का समय त्रेतायुग को माना जाता है। इस हिसाब से श्री रामचंद्र जी का समय लगभग पौने दो करोड़ वर्ष पूर्व का है। रामायण से जुडी अन्य मान्यताएं - रामायण में सात काण्ड को प्रमुख माना जाता है आठवा काण्ड को बाद में जोड़ा गया बताया जाता है विकिपीडिया के अनुसार। रामायण के सभी पात्र में धर्म का पालन करते हैं।  इसको पढ़ने के बाद तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना की थी।  ramayan ko kisne likha hai

Feedback Definition

 Feedback Definition in English Feedback is a reply form another person who talking to you when you are talk or ask something like health related or any question and more... Feedback definition in Hindi Feedback जिसे हिंदी में प्रतिक्रिया कहा जाता है यह बिल्कुल वैसे है जैसे हमारे हाथों में आग को छूने से हमारे शरीर में होती है। वैसे ही हम बात करते समय जब किसी के किसी प्रश्न का जवाब देते हैं या किसी को कुछ कहते हैं तो उसे प्रतिक्रिया कहा जाता है यह हमारे शरीर के किसी भी अंग के माध्यम से हो सकती है जैसे कि मुँह से बोलकर या मुंडी हिलाकर। हाँथ हिलाकर पैर हिलाकर यह प्रतिक्रिया उस वक्त की स्थिति पर निर्भर करता है कि आप किस प्रकार से उस व्यक्ति के प्रति प्रतिक्रिया देना चाहते हैं। लोगों के प्रतिक्रिया देने में अब जनसंचार का भी बहोत बड़ा योगदान हो रहा है यदि आप जनसंचार के बारे में और भी Detail में जानना चाहते हैं। तो इस पोस्ट को पढ़े -  जनसंचार : प्रौद्योगिकी एवं चुनौतियाँ

हिन्दी साहित्य के आदिकाल के आविर्भाव काल अथवा सीमा निर्धारण के सम्बन्ध में विभिन्न मतों का उल्लेख करते हुए अपना मत स्पष्ट कीजिए।

एम. ए. हिंदी  (प्रथम सेमेस्टर) आदिकाल एवं पूर्व मध्यकाल  (प्रथम प्रश्न-पत्र)   इकाई-1. आदिकाल-इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास दीर्घ उत्तरीय प्रश्न यदि आप प्रश्न 2. के बारे में जानना चाहते हैं तो यहां लिंक पर क्लिक करें - प्रश्न 2. हिन्दी साहित्य के आरम्भिक काल के विभिन्न नामों की विवेचना करते हुए सर्वाधिक उपयुक्त नाम के सम्बन्ध में तर्क प्रस्तुत कीजिए। प्रश्न 3. हिन्दी साहित्य के आदिकाल के आविर्भाव काल अथवा सीमा निर्धारण के सम्बन्ध में विभिन्न मतों का उल्लेख करते हुए अपना मत स्पष्ट कीजिए। उत्तर- आदिकाल की सीमा का निर्धारण आदिकाल की सीमा का निर्धारण निम्न प्रकार है- Table of content प्रस्तावना आदिकाल का आरम्भ समीक्षा निष्कर्ष       1. प्रस्तावना - हिन्दी साहित्य के आदिकाल के नामकरण एवं सीमा निर्धारण के सम्बन्ध में विद्वानों में मतभेद रहा है। कुछ विद्वान् इस काल का प्रारम्भ विक्रम की सातवीं शताब्दी से, कुछ नवीं शताब्दी से, कुछ दसवीं शताब्दी से तो कुछ विद्वान् आदिकाल का प्रारम्भ 13 वीं शताब्दी से मानते हैं। 2. आदिकाल का आरम्भ - (i) हिन...

हिन्दी साहित्य के आरम्भिक काल के विभिन्न नामों की विवेचना करते हुए सर्वाधिक उपयुक्त नाम के सम्बन्ध में तर्क प्रस्तुत कीजिए।

एम. ए. हिंदी  (प्रथम सेमेस्टर) आदिकाल एवं पूर्व मध्यकाल  (प्रथम प्रश्न-पत्र)   इकाई-1. आदिकाल-इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास दीर्घ उत्तरीय प्रश्न  प्रश्न 1. के बारे में पढ़ना चाहते हो तो यहाँ क्लिक करो - हिन्दी साहित्येतिहास के काल विभाजन के प्रयासों की समीक्षा कीजिए। प्रश्न 2. हिन्दी साहित्य के आरम्भिक काल के विभिन्न नामों की विवेचना करते हुए सर्वाधिक उपयुक्त नाम के सम्बन्ध में तर्क प्रस्तुत कीजिए।  अथवा  हिन्दी साहित्य के आरम्भिक काल के लिए विभिन्न विद्वानों द्वारा प्रदत्त नामों की विवेचना करते हुए अपनी दृष्टि में उपयुक्त नाम के सम्बन्ध में तर्क दीजिए। अथवा हिन्दी साहित्य के आदिकाल के लिए अनेक नाम सुझाए गए हैं। उन नामों पर विवेचना करते हुए बताइए कि आपको कौन सा नाम उचित प्रतीत होता है ? उत्तर-  हिन्दी साहित्य के आरम्भिक काल का नामकरण हिन्दी साहित्य के आरम्भिक काल का नामकरण निम्न प्रकार है- - Table of Content प्रस्तावना प्रारम्भिक काल का नामकरण 'वीरगाथा काल' नामकरण एवं वीरगाथा साहित्य समीक्षा निष्कर्ष      1. प्...

हिन्दी साहित्येतिहास के काल विभाजन के प्रयासों की समीक्षा कीजिए।

एम. ए. हिंदी  (प्रथम सेमेस्टर) आदिकाल एवं पूर्व मध्यकाल  (प्रथम प्रश्न-पत्र)   इकाई-1. आदिकाल-इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास दीर्घ उत्तरीय प्रश्न   प्रश्न 1. हिन्दी साहित्येतिहास के काल विभाजन के प्रयासों की समीक्षा कीजिए। अथवा हिन्दी साहित्य के काल-विभाजन पर विभिन्न विद्वानों का मत देते हुए संक्षिप्त निबन्ध लिखिए।  अथवा  हिन्दी साहित्य के काल विभाजन पर अपने विचार व्यक्त कीजिए । उत्तर-  हिन्दी साहित्य का काल-विभाजन हिन्दी साहित्य का काल विभाजन हम निम्न प्रकार कर सकते हैं- Table of Content I. काल विभाजन की आवश्यकता II. काल विभाजन के विविध आधार III. काल विभाजन प्रस्तुत मत IV. आदर्श काल विभाजन  V. निष्कर्ष  I. काल विभाजन की आवश्यकता - किसी भी देश के साहित्य के इतिहास को निश्चित कालों में वर्गीकृत करना बहुत ही कठिन कार्य है। इसका प्रमुख कारण यह है कि साहित्य के इतिहास की प्रामाणिक और उपयुक्त आधारभूत सामग्री का अभाव होना। साहित्य के विभिन्न अंगों का समग्र रूप में ग्रहण करने तथा सुव्यवस्थित ढंग से अध्ययन करने हेतु काल-विभाजन आवश्य...

इकाई-1. आदिकाल-इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

एम. ए. हिंदी  (प्रथम सेमेस्टर) आदिकाल एवं पूर्व मध्यकाल  (प्रथम प्रश्न-पत्र)   इकाई-1. आदिकाल-इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास दीर्घ उत्तरीय प्रश्न   1. हिंदी साहित्येतिहास के काल-विभाजन के प्रयासों की समीक्षा कीजिए। 2. हिंदी साहित्य के आरम्भिक काल के विभिन्न नामों की विवेचना करते हुए सर्वाधिक उपयुक्त नाम के संबंध में तर्क प्रस्तुत कीजिए।   3. हिंदी साहित्य के आदिकाल के आविर्भाव काल अथवा सीमा निर्धारण के संबंध में विभिन्न मतों का उल्लेख करते हुए अपना मत स्पष्ट कीजिए। 4. हिंदी साहित्य के इतिहास की पुनर्लेखन की समस्या पर विचार कीजिए। 5. हिंदी साहित्य के इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास पर प्रकाश डालिए। 6. हिंदी साहित्य के इतिहास की काल विभाजन सम्बन्धी समस्याओं पर विचार कीजिए। 7. विभिन्न प्रतिष्ठित विद्वानों द्वारा साहित्य के इतिहास पर काल-विभाजन एवं नामकरण के औचित्य की दृष्टि से प्रकाश डालिए।  Coming soon ! 8. आदि-काल के नामकरण के औचित्य, समय, पृष्ठ-भूमि तथा प्रवृत्तियों पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए।  Coming Soon ! 9. आदि-काल के प्रमुख ग्रन्थों तथा कवियों का...

हरियाणवी भाषा की उत्पत्ति कैसे हुई?

 1. हरियाणी भाषा की उत्पत्ति कैसे हुई? उत्तर -        हरियाना शब्द की व्युत्पत्ति के संबंध में बहुत सारे विवाद हैं कई लोग कहते हैं हम हरि + यान इसका मतलब है (कृष्ण का यान इधर से ही द्वारका गया था), हरि + अरण्य अर्थात हरा वन तथा अहीर + आना (राजपूताना, तिलंगाना की तरह) आदि कई मत दिए गए हैं, किंतु कोई भी मत सभी के लिए मान्य नहीं है।  हरियाणी भाषा का विकास उत्तरी शौरसेनी अपभ्रंश के पश्चिमी रूप से हुआ है। खड़ी बोली, अहीरवाटी, मारवाड़ी, पंजाबी से घिरी इस बोली को कुछ लोग खड़ी बोली का पंजाबी से प्रभावित रूप मानते हैं। इसका क्षेत्र मोटे रूप से हरियाणा तथा दिल्ली का देहाती भाग है। हरियाणी में केवल लोकसाहित्य है, जिसका कुछ अंश मुद्रित भी है। Haryanvi bhasha ki utpatti kaise hui?

ऊहात्मकता के अतिरिक्त उक्त पंक्तियों में व्यक्त भाव की क्या विशेषता है?

 'जेहि पंखी के निअर होइ, कहै बिरह कै बात। सोई पंखी जाइ जरि, तरिवर होहिं निपात।।' ऊहात्मकता के अतिरिक्त उक्त पंक्तियों में व्यक्त भाव की क्या विशेषता है? उत्तर -          ऊहात्मकता के अतिरिक्त उक्त पंक्तियों में व्यक्त भाव की विशेषता है इसमें विरहताप के वेदनात्मक स्वरूप की अत्यंत विशद, व्यंजना की गई है। Uhatmakta ke atirikta ukta panktiyon me vyakta bhav ki visheshta kya visheshta hai

किसने कहा था कि बुद्धदेव के बाद भारत में सबसे बड़े लोकनायक तुलसीदास थे?

1. किसने कहा था कि बुद्धदेव के बाद भारत में सबसे बड़े लोकनायक तुलसीदास थे? उत्तर -         जार्ज ग्रियर्सन ने कहा था कि बुद्धदेव के बाद भारत में सबसे बड़े लोकनायक तुलसीदास थे। जार्ज ग्रियर्सन (1851-1941) अंग्रेजों के जमाने के भाषाविद अर्थात भाषा वैज्ञानिक रहें हैं जिन्होंने सबसे पहले भारतीय भाषाओं का सर्वेक्षण किया था। Kisne kaha tha ki buddh dev ke bad bharat me sabse bade lok nayak tulsidas the?

उत्तरकाण्ड के कलियुग प्रसंग में तुलसीदास ने क्या लिखा है?

1. उत्तरकाण्ड के कलियुग प्रसंग में तुलसीदास ने क्या लिखा है? उत्तर -           उत्तरकाण्ड के कलियुग प्रसंग में तुलसीदास ने लिखा है- आचारहीन और वेद विरोधी लोग ज्ञानी और सन्यासी कहलाएंगे। पत्नी के मर जाने और घर-गृहस्थी और संपत्ति के नष्ट हो जाने के बाद लुटे-पिटे लोग ही सन्यास ग्रहण करेंगे। इस प्रकार यह दो प्रमुख बातें कलियुग के सम्बंध में तुलसीदास ने लिखा है इसके अलावा भी अन्य प्रसंगों के बारे में पूछा जा सकता है। यह जो बात है कलियुग प्रसंग की मुख्य बातें हैं। अन्य जानकारियां रामचरित मानस तुलसीदास की रचना है और इस रचना के सातवे कांड का नाम तुलसीदास ने उत्तरकाण्ड रखा है रामचरित मानस के सभी कांड के नाम इस प्रकार हैं- बालकाण्ड अयोध्याकाण्ड अरण्यकाण्ड किष्किंधाकाण्ड सुंदरकांड लंकाकाण्ड उत्तरकाण्ड Uttarkand ke kaliyug prasang me tulsidas ne kya likha hai

किन्हीं दो गीती नाट्यों के नाम लिखिए?

 1. किन्हीं दो गीती नाट्यों के नाम लिखिए? उत्तर -          किन्हीं तो गीति नाट्यों के नाम इस प्रकार हैं - अग्निलीक उन्मुक्त Kinhi do giti mathon ke naam likhiye? अग्निलीक - यह भरत भूषण अग्रवाल की रचना है। उन्मुक्त - यह सियाराम शरण गुप्त की रचना है।

रामविलास शर्मा कृत 'महावीरप्रसाद द्वेदी और हिंदी नवजागरण' का प्रकाशन काल क्या है?

1. रामविलास शर्मा कृत 'महावीरप्रसाद द्वेदी और हिंदी नवजागरण' का प्रकाशन काल क्या है? उत्तर -         रामविलास शर्मा कृत 'महावीरप्रसाद द्वेदी और हिंदी नवजागरण' का प्रकाशन काल सन 1977 है।  Ramvilas sharma krit mahaveer prasad dwivedi aur hindi navjagaran ka prakashan kal kya hai?

कविकर्म और काव्यभाषा किस आलोचक की समीक्षा कृति है?

1. कविकर्म और काव्यभाषा किस आलोचक की समीक्षा कृति है? उत्तर -           कविकर्म और काव्यभाषा परमानन्द श्रीवास्तव की समीक्षा कृति है। यह प्रश्न इस प्रकार भी पूछे जा सकते हैं- 2. कविकर्म और काव्यभाषा किसकी रचना है? 3. कविकर्म और काव्यभाषा की रचना किसने की? Kavikarm aur kavya bhasha kiski rachna hai

सिद्धों से सम्बंधित रामचन्द्र शुक्ल के दो कथनों को लिखिये।

 1. सिद्धों से सम्बंधित रामचन्द्र शुक्ल के दो कथनों को लिखिये। उत्तर -        सिद्धों से सम्बंधित रामचन्द्र शुक्ल के दो कथन इस प्रकार हैं - वज्रयान में आकर 'महासुखवाद' का प्रवर्तन हुआ। नाथपन्थ सिद्धों की परंपरा से नहीं निकला है। यह प्रश्न इस प्रकार भी पूछे जा सकते हैं -  2. वज्रयान में आकर 'महासुखवाद' का प्रवर्तन हुआ यह किसने कहा या किसका कथन है? 3. नाथपन्थ सिद्धों की परंपरा से नहीं निकला है यह किसका कथन है या किसने कहा? sidho se sambandhit ramchandra shukla ke do kahani ko likhiye

फोर्ट विलियम कॉलेज के हिंदुस्तानी के प्रथम प्रोफेसर कौन थे?

 1. फोर्ट विलियम कॉलेज के हिंदुस्तानी के प्रथम प्रोफेसर कौन थे? उत्तर -         इस प्रश्न का उत्तर है कि फोर्ट विलियम कॉलेज के हिंदुस्तानी के प्रथम प्रोफेसर गिलक्राइस्ट थे। Fort william college ki hindustani ke pratham professor kaun the? फोर्ट विलियम कॉलेज में हिंदी के प्रथम प्रोफेसर कौन थे?

अंधेरे में कविता से सम्बंधित रामविलास शर्मा की टिप्पणियों को लिखिए।

1. अंधेरे में कविता से सम्बंधित रामविलास शर्मा की टिप्पणियों को लिखिए। उत्तर -          अंधेरे में कविता से सम्बंधित रामविलास शर्मा की दो टिप्पणियाँ इस प्रकार हैं - 'अंधेरे में' कविता की मूल समस्या यही है कि मध्यवर्ग का बुद्धिजीवी सर्वहारा वर्ग से तादात्म्य कैसे स्थापित करे। मुक्तिबोध की मुख्य समस्या है, अपना वर्ग छोड़कर दूसरे वर्ग के साथ तादात्म्य स्थापित करना। Andhere men kavita se sambandhit ramvilas sharma ki do tippani यह प्रश्न इस प्रकार भी पूछा जा सकता है :- अंधेरे में कविता को लेकर रामविलास शर्मा की टिप्पणी लिखिए। अंधेरे में कविता से संबंधित ramvilas sharma ki do tippani