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Showing posts from March, 2023

UGC Hindi Syllabus | Hindi net syllabus

UGC HINDI SYLLABUS नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग में आज हम आपके साथ शेयर करने वाले हैं UGC HINDI PAPER के सिलेबस को चलिए शुरू करते हैं यह अपडेटेड सिलेबस है तो कृपया निःसंकोच होकर पढ़ाई करें। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग  नेट-ब्यूरो  विषय - हिंदी  Code No. 20 पाठ्यक्रम  इकाई - I हिंदी भाषा और उसका विकास।  हिंदी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि : प्राचीन भारतीय आर्य भाषाएँ , मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषाएँ - पालि, प्राकृत - शौरसेनी, अर्द्धमागधी, मागधी, अपभ्रंश और उनकी विशेषताएँ , अपभ्रंश अवहट्ठ, और पुरानी हिंदी का संबंध, आधुनिक भारतीय  आर्य भाषाएँ और उनका वर्गीकरण।  हिंदी का भौगोलिक विस्तार : हिंदी की उपभाषाएँ, पश्चिमी हिंदी, पूर्वी हिंदी, राजस्थानी, बिहारी तथा पहाड़ी वर्ग और उनकी बोलियां। खड़ीबोली, ब्रज और अवधी की विशेषताएँ।  हिंदी के विविध रूप : हिंदी, उर्दू, दक्खिनी, हिन्दुस्तानी।  हिंदी का भाषिक स्वरूप : हिंदी की स्वनिम व्यवस्था - खंड्य और खंडयेतर, हिंदी ध्वनियों के वर्गीकरण का आधार, हिंदी शब्द रचना - उपसर्ग, प्रत्यय, समास, हिंदी की रूप रचना - लिं...

सांकेतिक भाषा क्या है - sign language in hindi

साइन लैंग्वेज जिन्हें सांकेतिक भाषा भी कहा जाता है। ऐसी भाषाएं हैं जो अर्थ को व्यक्त करने के लिए विज़ुअल-मैनुअल मोडैलिटी का उपयोग करती हैं। अर्थात इसारे का प्रयोग किया जता है।  सांकेतिक भाषा क्या है सांकेतिक भाषा हाथ के संकेतों, हावभाव, चेहरे के भाव और शरीर की भाषा के माध्यम से संवाद करने का एक साधन है। इस भाषा को बोल न सकने वालो के लिए बनाया गया है ताकि वे भी दुसरो से कंनेक्ट हो सके और इस सीखने के लिए स्कूल भो होते है। जिसमे सांकेतिक भाषा को शिखाया जाता है। सांकेतिक भाषाएं अपने स्वयं के व्याकरण और शब्दकोश के साथ पूर्ण प्राकृतिक भाषाएं भाषा हैं।  यूनिवर्सल भाषा नहीं है दुनिया भर में एक भी सांकेतिक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया है। बोली जाने वाली भाषा की तरह, सांकेतिक भाषाएं स्वाभाविक रूप से लोगों के विभिन्न समूहों के माध्यम से विकसित होती हैं जो एक-दूसरे के साथ बातचीत करती हैं, इसलिए कई किस्में हैं। आज दुनिया भर में 138 और 300 विभिन्न प्रकार की सांकेतिक भाषा का उपयोग किया जाता है। सांकेतिक भाषा दिवस विश्व में 23 सितंबर को In...

देवनागरी लिपि क्या है - Devnagri Lipi Kya Hota Hai

1. देवनागरी लिपि क्या है? उत्तर :               देवनागरी लिपि की शुरुआत की बात करें तो यह सबसे पहले हमें संस्कृत भाषा में प्रयोग किये जाने को सुनने को मिलता है।  पर ऐसा नहीं है इसका विकास ब्राम्ही से हुआ है।  इस लिपि में कुल 52 अक्षर होते हैं जिसमें 11 स्वर वर्ण और 41 व्यंजन वर्ण शामिल हैं।  हिंदी साहित्य में भी इसका उपयोग किया जाता है। इस पर हमने डिटेल में पोस्ट लिखा हुआ है आप चाहें तो पढ़ सकते हैं। जिसे हमने नाम दिया है क्लिक करें और पढ़ें -  वर्ण विचार किसे कहते हैं - varn vichar in hindi इससे जुड़े अन्य प्रश्न उत्तर    देवनागरी लिपि का विकास किस लिपि से हुआ है? देवनागरी लिपि का जन्म किस लिपि से हुआ है? देवनागरी लिपि में स्वरों के स्थान पर 'अ' की बारहखड़ी प्रयोग करने का सुझाव किसने दिया? देवनागरी लिपि की तीन विशेषता एक एक शब्दों में लिखिए।  देवनागरी लिपि की श्रेष्टता का क्या कारण है? तिलक ने देवनागरी के कितने टाइप निर्धारित किये हैं? देवनागरी लिपि का नाम लोकनागरी किसने दिया? देवनागरी में सुधार के लिए कौन-सा प्रयत...

छत्तीसगढ़ी भाषा का विकास - Chhattisharhi Bhasha Ka Vikas

छत्तीसगढ़ी भाषा  छत्तीसगढ़ राज्य की बोली जाने वाली प्रमुख  भाषा है। यह भाषा हिंदी और मराठी भाषा से मिलता जुलता जुलता है। इसे देवनागरी लिपि में लिखा जाता है। छत्तीसगढ़ी भाषा को 2 करोड़ से अधिक लोग बोलते है। और यह छत्तीसगढ़ की मातृभाषा है।  इस पोस्ट में  छत्तीसगढ़ी भाषा का विकास कैसे हुआ इस पर चर्चा करने वाला हूँ। पहले जान लेते है भाषा किसे कहते है - हम विचारों को बोलकर, पढ़कर या लिखकर व्यक्त करते है। भाषा में एक संरचित और पारंपरिक तरीके से शब्द होते हैं। भाषा का निर्माण जिन व्यक्त ध्वनियों से होता है उसे वर्ण कहते हैं।  छत्तीसगढ़ी भाषा का विकास भी अन्य आधुनिक आर्य भाषाओं की तरह ही प्राचीन आर्य भाषा से हुआ है। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में भाषा हमेशा मनुष्यों की दोस्त रही है।  Chhattisgarhi Bhasha ka Vikas छत्तीसगढ़ी भाषा का विकास एवं इतिहास आर्यों की भाषा प्राचीन भाषा समय के साथ स...

छत्तीसगढ़ के कवि और गीतकार के नाम और लेख

साथियों आप सभी का स्वागत है मेरे इस ब्लॉग कल हमने जाना परीक्षा में पूछने लायक छत्तीसगढ़ी व्याकरण से सम्बंधित प्रश्न उत्तर के बारे में आज हम जानने वाले हैं।  छत्तीसगढ़ के कवि और गीतकार के नाम और लेख नरसिंह दास वैष्णव - शिवायन ( 1904 ) पं. सुंदरलाल शर्मा   -   दानलीला ( 1942 ) Chhattisgarhi Kavi C.G. का प्रथम प्रबन्ध काव्य या खण्ड काव्य दुलरवा छत्तीसगढ़ी पत्रिका  प्यारेलाल गुप्त   -   गांव मां फूल घलो गोठीयाथे धान लुआई, प्राचीन छ.ग. लोचन प्रसाद पाण्डेय   -  भुतहा मण्डल , कृषक बाल सखा। हरी ठाकुर -  ' छत्तीसगढ़ी गीत अउ कविता ' ( हरी नारायणसिंह ) कुंजबीहारी चौबे  -  बीयासी गीत और बियासी के नगर अंग्रेज  तें हमला बनाये कंगला। गयाराम साहू   -  जागीस छत्तीसगढ़ के माटी , रखिया द्वारिका प्रसाद तिवारी ' विप्र ' - कुछु काहीं, धमनीहाट, सुराजगीत,फागुन गीत, गांधी गीत , राम अउ केंवट संवाद शुकलाल प्रसाद पाण्डेय - छत्तीसगढ़ी ग्रामगीत , गीयों  ( बाल साहित्य ) , पुरुझरू  कपिलनाथ मिश्र - खुसरा चिरई के बिहा...

छत्तीसगढ़ी निबंध - Chhattisgarhi Essay

साथियों आप सभी का स्वागत है मेरे इस ब्लॉग पर पिछले पोस्ट में मैंने बात किया था छत्तीगसढ़ी गद्य साहित्य के बारे में और आज बात करने वाले छत्तीसगढ़ी निबन्ध के बारे में इस पोस्ट में हम तीन टॉपिक को एक साथ पढ़ेंगे क्योकि ये थोड़ा सा है इस पोस्ट में मैंने आपको छत्तीसगढ़ी निबन्ध के नाम और उसके रचनाकार के नाम बताये हैं - इसमें पत्रिका का वर्णन इसलिए किया गया है क्योकि छत्तीसगढ़ी निबन्धों के प्रकाशन का शुभारम्भ छत्तीसगढ़ी की पत्र पत्रिकाओं से हुआ है। केयुर भूषण कृत - रांड़ी ब्राम्हण के दुरदसा ( 1968 ई. ) को प्रथम निबन्ध मानी गयी है। Chhattisgarhi nibandh छत्तीसगढ़ी निबंध केयुर भूषण - रांड़ी ब्राम्हण के दुरदसा ( 1968 ई. ) - प्रथम निबन्ध। गयाराम साहू - जानो अतका बात ( 1970 ई.) डॉ. पालेश्वर शर्मा - गुंडी के गोठ  (cgpsc 2013) लखनलाल गुप्त - सोनपान ( 1968 - ग्यारह निबन्धों का सन्ग्रह ), सुरता के सोनकिरन, गोठ-बात ...

छत्तीसगढ़ी विलोम शब्द - chhattisgarhi antonyms

आपका स्वागत है मेरे ब्लॉग में आज मैं आपके लिए लेकर आया हूँ छत्तीसगढ़ी विलोम शब्द को जिसमें मैंने इन शब्दों का हिन्दी अर्थ भी बताया है तो चलिए शुरू करते हैं। जिस शब्द से किसी दूसरे शब्द के विपरीत अर्थ का धोत्तक हो , उसे विलोम शब्द कहते हैं विलोम शब्द को विपरार्थी , प्रतिलोमार्थी एवं विरूद्धार्थी शब्द कहते हैं। सुरता का विलोम शब्द - भूल।  छत्तीसगढ़ी संज्ञा शब्दों के विलोम शब्द कुकरा (मुर्गा) - कुकरी (मुर्गी) गोसई (पति,स्वामी) - गोसईन (पत्नी,स्वामिनी) ठाकुर - ठकुराइन बछरू (गाय का नर बच्चा) - बछिया ( गाय का मादा बच्चा) भइसा (भैंसा) - भइसी (भैंस) लिंग के आधार पर - मरद (पुरुष) - तिरिया (स्त्री) बइला (बैल) - गइया / गाय (गाय) बबा (दादा) - दाई (दादी) कुकुर (कुत्ता) - कुतनिन (कुतिया) बाबू (लड़का) - नोनी (लड़की) chhattisgarhi vilom shabda  छत्तीसगढ़ी स्वतंत्र शब्द  अपन (अपना) - बिरान (पराया) अम्मट (खट्टा) - मीठ (मीठा) कमी (कम) - बेसी (अधिक) जुन्ना (पुराना) - नवाँ (नया) झुक्खा (सूखा) - गिल्ला (गीला) संझा (संध्या) - बिहिनियाँ (प्रातः) मोंटठ (मोटा) - पातर (पतला) निमारना (छांटना) - मिं...

बाल बोधनी क्या है ? - What is Bal-Bodhni ?

1. बाल बोधनी क्या है? उत्तर :               बाल बोधनी एक पत्रिका का नाम है जिसे भारतेंदु हरिशचन्द्र के द्वारा सम्पादित किया जाता था इसे सन 1874 में प्रथम बार प्रकाशित किया गया था इस रचना में भारतेंदु ने स्त्री शिक्षा को महत्व दिया है।   Bal bodhani kya hai?

सास गारी देवे ,ननद समझा लेवे... किस फिल्म का गीत है?

 1. सास गारी देवे ,ननद समझा लेवे ,ससुराल गेंदा फूल किस फिल्म का गीत है? उत्तर :          उपर्युक्त गीत सन 2006 में आयी Delhi 6 फिल्म में लिया गया है, जिसके रचनाकार प्रसून जोशी हैं और इस गीत को आवाज तीन लोगों ने दिया है रेखा भारद्वाज, श्रद्धा पंडित और सुजाता मजूमदार ने साथ ही यह पहली हिंदी फिल्म है जिसमें छत्तीसगढ़ी बोली में बने गीत को लिया गया है।  दिल्ली 6 से जुड़े महत्वपूर्ण जानकारी  फिल्म दिल्ली : 6  वर्ष : 2006  गायक / गायिका : रेखा भारद्वाज, श्रद्धा पंडित और सुजाता मजूमदार  संगीतकार : ए. आर. रहमान  गीतकार : प्रसून जोशी  अभिनेता / अभिनेत्री : अभिषेक बच्चन, सोनम कपूर, वहीदा रहमान, ऋषि कपूर 

छत्तीसगढ़ी भाषा का वर्गीकरण और छत्तीसगढ़ की बोलीयाँ

 साथियों आप सभी का स्वागत है मेरे ब्लॉग पर आज हम बात करने वाले हैं छत्तीसगढ़ी भाषा के वर्गीकरण के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं... छत्तीसगढ़ की बोलियों के बारे में इससे पहले मैंने आपको बताया था। छत्तीसगढ़ी भाषा के उद्भव एवं विकास के बारे में  अगर आपने वह पोस्ट नहीं पढ़ा है तो पढ़ ले और आगे बढ़ें क्योंकि हम अभी लगातार छत्तीसगढ़ी व्याकरण के बारे में टॉपिक पोस्ट कर रहे हैं जिससे आपको कंपटीशन एग्जाम्स में पूछे जाने वाले Question के बारे में और अधिक जानकारी मिलेगी। छत्तीसगढ़ की बोली (Dialect of Chhattisgarh) छत्तीसगढ़ अपनी एक अलग पहचान रखती है, पूरे भारत में और छत्तीसगढ़ की अपनी एक बोली है जिसे हम छत्तीसगढ़ी के नाम से जानते हैं छत्तीसगढ़ी बोली बहुत ही सुंदर एवं लोकप्रिय होते जा रहा है क्योंकि एक हिंदी पिक्चर दिल्ली 6 में इसे लिया गया था। जिसके बोल कुछ इस प्रकार थे। सास गारी देवे ,ननद समझा लेवे ,ससुराल गेंदा फूल।    जो गाना बहुत ही लोकप्रिय हुआ था लेकिन आज हम जो टॉपिक पढ़ रहे हैं वह फिल्म से हटकर है आज हम जो टॉपिक पढ़ रहे हैं वह छत्तीसगढ़ी व्याकरण से जुड़ा हुआ है तो ...