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Showing posts from July, 2023

दंडी किस संप्रदाय के आचार्य हैं | Dandi kis sampraday ke aacharya hai?

  दंडी रीति-सम्प्रदाय के आचार्य हैं रीति सम्प्रदाय के प्रवर्तक के रूप में वामन को भी जाना जाता है। रीति सम्प्रदाय में रीति से बंधी हुई रचनाओं का जन्म हुआ और इस समय में लिखी गई रचनाओं की यही विशेषता है की एक नियम बद्ध तरिके से रचना होने लगी थी।  रीती सम्प्रदाय के आचार्य दण्डी कब हुए और इनकी रचनाओं में अभी भी विवाद है। इनके जीवन में घटित घटनाओं के संबंध में भी कोई अच्छी सामग्री या जानकारी उपलब्ध नहीं है। 

डॉ. मधुकर गंगाधर | Dr. Madhukar Gangadhar

डॉ. मधुकर गंगाधर हिंदी साहित्य के जानेमाने कथाकार एवं कवि थे। जिन्होंने आकाशवाणी पर भी अपने कला का प्रदर्शन किया है।  इन्होने आकशवाणी पटना में काम किया था जहां वे फणीश्वरनाथ रेणु के सहयोगी के रूप में कार्यरत थे।  इसके आलावा वे दिल्ली आकाशवाणी में उप महानिदेशक एवं ऑल इंडिया रेडियो में निदेशक के पद पर भी कार्य कर चुके थे।  इन्हें 'नई कहानी' आंदोलन के प्रमुख कहानीकारों में से एक माना जाता है। हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले फणीश्वरनाथ रेणु और कमलेश्वर इनके मित्र थे।  जीवन परिचय  मधुकर गंगाधर के जन्म की बात करें तो इनका जन्म पूर्णिया जिले जो की वर्तमान बिहार राज्य में है वहां के रुपौली (वर्तमान थाना) स्थित झलारी नामक गाँव में 7 जनवरी सन 1932 को हुआ था। तथा इनके कार्यकाल की बात करें तो इन्होनें ऑल इंडिया रेडियो में उनतीस वर्ष तक काम किया था।  इनकी मृत्यु 7 दिसंबर 2020 को दिल्ली के एक अस्पताल में हुई थी।  डॉ. मधुकर गंगाधर की साहित्य रचना  डॉ. मधुकर के लेखन की बात करें तो इन्होने बहुत से विधाओं में अपने कला का प्रदर्शन या कहें लेखन का काम...

अंतर्राष्ट्रीय भाषा किसे कहते है? | International Language

अंतर्राष्ट्रीय भाषा : International Language अंतर्राष्ट्रीय भाषा जैसे कि नाम से पता चल रहा है अंतर राष्ट्र भाषा अर्थात जो भाषा राष्ट्र के अनन्तर अर्थात बाहर भी प्रयोग किया जाता हो उसे अंतर्राष्ट्रीय भाषा कहते हैं। अंतर्राष्ट्रीय भाषा को विश्व भाषा के नाम से भी जाना जाता है यह ऐसी भाषा है जो दो बड़े या छोटे देशों के मध्य नहीं बल्कि पूरे विश्व के मध्य सम्पर्क का माध्यम है। अंतर्राष्ट्रीय भाषा की अभी तक कोई उपर्युक्त परिभाषा प्राप्त नहीं हुई है इसलिए इसकी कोई परिभाषा नहीं है आप अपने आप से इसकी परिभाषा लिख सकते हैं। विश्व में अभी अंग्रेजी को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है और इसे ही ज्यादातर लोगों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में स्वीकार किया जाता है। लेकिन ऐसा नही है अभी तक उपर्युक्त रूप से इसके बारे में लिखा नहीं गया है। अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी हिंदी भारत में सबसे ज्यादा बोली और समझी जाने वाली भाषा में से एक है। साथ ही प्रवासी भारतीयों के द्वारा भी हिंदी भाषा को अपने मातृ भाषा के रूप में स्वीकार किया जाता और बोला जाता है। हिंदी भाषा बोलने में वे गौरवपूर्ण अहसास का अनु...

सम्पर्क भाषा किसे कहते हैं? | Sampark Bhasha

 सम्पर्क भाषा : Sampark Bhasha सम्पर्क भाषा ऐसी भाषा होती है जो जन समूह के बीच विचारों के आदान-प्रदान के लिए प्रयोग किया जाता है भले ही उनकी मूल भाषा या सांस्कृतिक भाषा अलग-अलग हो और वह अलग - अलग जगहों पर रहते हों यह भाषा उनके मध्य अपने विचारों के आदान प्रदान का माध्यम बनता है। जैसे उदाहरण के तौर पर बताऊं तो अभी वर्तमान समय में अंग्रेजी पूरे विश्व के लिए सम्पर्क भाषा के रूप में जाना जाता है। ऐसे ही अन्य छोटी-छोटी जगहों के लिए भी अलग-अलग सम्पर्क भाषाएँ हो सकती हैं। जैसे छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां के लोगों के लिए छत्तीसगढ़ी बोली सम्पर्क भाषा है। हालांकि यह पूरे भारत में नहीं समझी जाती है फिर भी यह छत्तीसगढ़ के बहुतायत लोगों के मध्य सम्पर्क भाषा का काम करता है। भारत में सम्पर्क भाषा हिंदी  यदि हम हिंदी की बात करें तो भारत में लगभग हर जगह हिंदी भाषा बोली और समझी जाती है हिंदी भाषा का प्रयोग पूरे भारत में होता है इसलिए हिंदी भाषा को भारत की सम्पर्क भाषा कहें तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। हिंदी भाषा में बहुत सारे ग्रन्थ और साहित्य लिखे जा चुके हैं जिसे लोगों के द्वारा खूब सराहना ...

विभिन्न प्रतिष्ठित विद्वानों द्वारा साहित्य के इतिहास पर काल विभाजन एवं नामकरण के औचित्य की दृष्टि से प्रकाश डालिये।

एम. ए. हिंदी  (प्रथम सेमेस्टर) आदिकाल एवं पूर्व मध्यकाल  (प्रथम प्रश्न-पत्र)  इकाई-1. आदिकाल-इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास दीर्घ उत्तरीय प्रश्न प्रश्न 7. विभिन्न प्रतिष्ठित विद्वानों द्वारा साहित्य के इतिहास पर काल विभाजन एवं नामकरण के औचित्य की दृष्टि से प्रकाश डालिये। उत्तर- डॉ. नगेन्द्र ने 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' में काल-विभाजन और नामकरण के निम्नलिखित आधार प्रस्तुत किये हैं- (1) ऐतिहासिक काल-क्रम के अनुसार - आदि-काल, मध्य काल, संक्रान्ति काल, आधुनिक काल आदि ।  (2) शासक और उनके शासन काल के अनुसार  - एलिजाबेथ युग, विक्टोरिया युग, मराठा-काल आदि ।  (3) लोकनायक और उनके प्रभाव के अनुसार  - चैतन्य काल (बांग्ला), गाँधी युग (गुजरात) आदि । (4) साहित्य, नेता एवं उनकी प्रभाव परिधि के आधार पर  - रवीन्द्र युग, भारतेन्दु युग आदि ।  (5) राष्ट्रीय, सामाजिक अथवा सांस्कृतिक घटना या आन्दोलन के आधार पर  - भक्ति काल, पुनर्जागरण काल, सुधार काल, युद्धोत्तर काल (प्रथम विश्व युद्ध के बाद का काल-खण्ड) स्वातन्त्र्योत्तर काल आदि ।  (6) साहित्यिक प्रवृत्त...

हिन्दी साहित्य के इतिहास की काल विभाजन सम्बन्धी समस्याओं पर विचार कीजिए।

एम. ए. हिंदी  (प्रथम सेमेस्टर) आदिकाल एवं पूर्व मध्यकाल  (प्रथम प्रश्न-पत्र)  इकाई-1. आदिकाल-इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास दीर्घ उत्तरीय प्रश्न प्रश्न 6. हिन्दी साहित्य के इतिहास की काल विभाजन सम्बन्धी समस्याओं पर विचार कीजिए। अथवा हिन्दी साहित्य के इतिहास के काल-विभाजनगत विभिन्न समस्याओं पर विद्वानों का मत स्पष्ट कीजिए।  उत्तर -  आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का इतिहास हिन्दी के समस्त इतिहासों का आधार है। अतः सबसे पहले उनके द्वारा किये गये काल विभाजन का परिचय पाना आवश्यक है, ताकि विकास और बदलाव की प्रक्रिया को समझा जा सके- 1. आदिकाल - वीरगाथाकाल संवत् 1050 से 1375 विक्रमी, (क) अपभ्रंश रचनाएँ, (ख) देश-भाषा काव्य (वीर गाथाएँ), (ग) फुटकल काव्य । 2. मध्यकाल      (क) पूर्व मध्यकाल - भक्तिकाल संवत् 1375 से 1700 विक्रमी, इसको दो भागों में बाटा गया है - 1. निर्गुण काल - इस काल को फिर से दो भागों में बांटा गया है - ज्ञानाश्रयी शाखा और प्रेमाश्रयी शाखा।  2. सगुण धारा - सगुण धारा को भी दो भागो में बांटा गया है - रामभक्ति शाखा और कृष्णभक्ति शाखा।   ...